The Author Shweta Misra फॉलो Current Read Adhure Khwab By Shweta Misra हिंदी लघुकथा Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books Muhabbat Ek Sabaq - 6 “शिफ़ा बीबी, आपको छोटे साहब ने बुलाया है। वह कह रहे हैं आप क... Oyy Mr. Vampire - 2 स्नोसिटी बिलकुल अपने नाम की तरह ही था। यहाँ अक्सर बर्फबारी ह... 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बार फिर अपनी बात दुहराई''आर यु इंडियन ''??? तब गुहू ने सिर हिलाकर कर जबाब दिया ..हाँ .. क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ ??गुहू ने कहा मैं ...अनमोल ... अनमोल पारिख मुझे पेरिस आये कुछ ही दिन हुए हैं कम्पनी की ओर से हम दस लोगों की टीम आई है लेकिन आप यहाँ कैसे ???मैं यहाँ अपनी माँ के साथ रहती हूँ l आप कविता बहुत अच्छी लिखती हैंआपको कैसे मालूम ??गुहू ने हैरानी से अनमोल से पूछा आपकी डायरी ने बताया ....देखिये आप भी इतना सुनते ही गुहू जोर से हसने लगी ओह ...ये तो बस ऐसे ही ...दरअसल लिखना मेरा शौक है ..और मुझे जब भी वक़्त मिलता है मैं लिखने बैठ जाती हूँ बस .. गुहू ने अनमोल से बताया और अपनी डायरी बंद कर एक तरफ रख दिया lकाफी दिलकश अंदाज है आपके लिखने का.... अनमोल ने गुहू से कहा इतना सुनकर गुहू के होठों पर हंसी तैर गयी और फिर देर तक दोनों के बीच बातों का सिलसिला चल पड़ा lअक्सर शाम को या वीकेंड दोनों की मुलाकातें पार्क में होती रहती lलेकिन आज की शाम अनमोल थोडा उदास था l गुहू ने अनमोल से उदासी का कारण पूछा तो अनमोल ने बताया की बुधवार की सुबह उसकी फ्लाइट है और उसे वापस जाना है l यह सुनकर गुहू का भी खिला खिला चेहरा मुरझा गया lअनमोल ने गुहू से कहा कि तुम अपनी ई मेल का पता दे देना मैं तुमको रोज मेल किया करूँगा इस तरह हम रोज मिल लिया करेंगे lगुहू ने मुस्कुराकर कहा रोज मेल .. अगर तुम भूले किसी दिन तो ....तो तुम्हे दो मेल करने पड़ेंगे सोच लो ..और अगर मैं भूली तो मैं तुमको दो मेल करुँगी lधीरे धीरे वक़्त ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली और तीन साल गुजर गए ....ईमेल भी अनमोल कम ही करने लगा l अनमोल को वापस लौटते ही कम्पनी में प्रमोशन जो मिल गया था और वह उसमे व्यस्त रहने लगा l कभी कभी वह गुहू के ई-मेल का जबाब दे देता l इधर गुहू को भी एक जर्मनी की कम्पनी में जाब मिल गयी थी l वह जब ऑफिस से लौटती अपनी पेपर और पेन के साथ हो जाती l ‘बेटा जो तूने ये पन्ने भर रखें हैं न इसे बाइंड करवा लेती तो ये किताबें बन जाती तू कहे तो मैं एक पब्लिशर से बात करूँ’ गुहू की माँ ने गुहू से कहा lमाँ ये तो मेरी दिली ख्वाईश है तू आज ही बात करना प्लीज माँ, मेरी अच्छी माँ मेरी प्यारी माँ आई लव यू माँ lबस बस ...लेकिन बेटा मेरी भी तो तू बात मान ले पहले तू अपना ख्याल रखेगी देख तो कितनी दुबली होती जा रही है चल एक दिन मैं तेरा चेक-उप करवाना चाहती हूँ क्यूँ तेरे चेहरे की रंगत उडती जा रही है क्या बात है तुझको ऐसे देख मेरा दिल बैठता जा रहा है ...ठीक है माँ मैं तेरे साथ चलूंगी मुस्कुराती गुहू माँ के सीने से लग गयी और माँ ने खूब लाड प्यार भी किया l आज आफिस से आते ही गुहू बिस्तर पर जा लेटी l माँ जब ऑफिस से लौटी तो देखा गुहू बिस्तर पर सो रही थी पास जाकर उसके सर पर हाथ रखा तो बदन तप रहा था माँ ने डॉक्टर को फोन किया डॉक्टर ने दवाएं दी और कहा ये कुछ टेस्ट है जो दो दिन बाद करवा लीजियेगा lइधर रिपोर्ट में कैंसर आया l डाक्टर ने कहा आखिरी स्टेज है और वक़्त सिर्फ महीने भर का ...माँ के आँखों के सामने अँधेरा छा गया और वह पागल सी हो गयी समझ नही पा रही थी की करे तो क्या करे फिर उसने खुद को संभाला और घर की ओर चल पड़ी ...अब गुहू बिस्तर पर ही लेटे-लेटे कवितायेँ और कहानियां लिखती l आज माँ ने उससे कहा की बहुत जल्द ही उसकी किताब छप जाएगी गुहू बहुत खुश हुयी l इतना लिखती है तू आज मुझे भी दिखा न कि लिखा क्या है .....गुहू ने डायरी माँ के सामने रख दी .....लफ़्ज़ों में पिरोया है तुम्हे लम्हों में बसाया है तुम्हे गवाह हैं ये कोरे पन्ने किस तरह तुम्हे चाहा है मैंने’माँ की आँखें भर आयी l माँ ने गुहू से कहा क्या तू मुझे अनमोल के ईमेल का पता देगी l गुहू ने अनमोल की ईमेल अपनी माँ को दे दी l दो हफ्ते बीत गए गुहू की तबियत बिगडती जा रही थी उसे हॉस्पिटल में एडमिट करवाना पड़ा l जहाँ डाक्टरों की कड़ी निगरानी थी फिर भी कोई सुधार नही उसकी तबियत में l ईधर कई दिनों से गुहू का कोई मेल न पाकर अनमोल परेशान हो रहा था उसने गुहू को कई ईमेल किये यह सोच कर की गुहू नाराज हो गयी है l पर कोई जबाब नही मिला l अनमोल ऑफिस आते ही सबसे पहले मेल चेक करता ये क्या ये तो गुहू की माँ का मेल ..आश्चर्य से भर उठा और झट से चेक करने के लिए मेल खोलने लगा l पूरा मेल उसने कई कई बार पढ़ा ..और ऑफिस से छुट्टी लेकर घर आ गया l उसने तय किया की वो गुहू के पास जायेगा lगुहू काफी कमजोर हो गयी थी और दवाओं के असर से उसे नींद सी रहती l ढलती शाम अलविदा कहने को बेचैन थी l ये शाम गुहू को न जाने कितनी यादों को पन्नों पर लिखने को मजबूर किया करती थी l आज शाम जब गुहू ने बोझिल पलकें उठाई तो सामने अनमोल खड़ा था, अनमोल....अनमोल तुम ......ये कोई खवाब देख रही हूँ क्या मैं ...या हकीकत है ...मैं समझ नही पा रही हूँ .... अनमोल एक टक उसे देखे जा रहा था ...तभी माँ ने कहा ...गुहू अनमोल तुमसे मिलने आया है ये कोई सपना नही ....इसे मैंने ईमेल किया था lअनमोल आओ बैठो यहाँ ....चेयर आगे बढ़ाते हुए माँ ने कहा l आज मैं बेहद खुश हूँ l ज़िन्दगी में जिसकी सारी ख्वईशें पूरी हो जाएँ ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं l अनमोल मैं तुम्हे मरने से पहले एक बार देखना चाहती थी और तुम्हे देख भी लिया l अब मुझे चैन की नींद आ जाएगी l मैंने अपनी सारी बेचैनीयों को पन्नो की पर्त में दबा तो दिया था पर न जाने ऐसा क्या था जो मुझे सहज नही होने दे रहा था l तुम्हे देखते ही वो सहजता खुद ब खुद ही आ गयी l मैं निश्चित ही बहुत ही भाग्यशाली हूँ lसच कह रही हो गुहू तुम ...अभाग्यशाली तो मैं हूँ जो तुम मुझे अकेला छोड़ के जा रही हो l मेरी आदत थी तुम, मेरी खुशियाँ मेरा गम थी तुम मैं खुद को कैसे समभालुंगा ये भी नही सोचा तुमने l अनमोल ऐसा न कहो ..सच पूछो तो मैंने सिर्फ तुम्हे ही सोचा है l मेरी एक-एक शब्द में सिर्फ तुम हो ..मैं मरना नही चाहती थी और न ही मैं मरूंगी कभी यूँ कहो मैं मर ही नही सकती l मैं खुद को किताबों में समेट कर जा रही हूँ तुम जब भी मेरी किताब का कोई भी पन्ना पलटोगे कोई भी नज़्म पढोगे मैं तुम्हे उसमे मिलूंगी मैं तुमसे जुदा हो ही नही सकती l मेरी लिखावट एक किताब नही है मेरी ज़िन्दगी है जिसमे मैं साँस लेती रही ,जिसमे मैं टूट कर बिखरती रही , जिसमे मैं गुलमोहर की तरह खिलती रही ,जिसमे मैंने कभी धूप तो कभी पीपल की ठंडी छावं महसूस की ,चांदनी की नूर भर लायी lमैं तुम्हे अपनी ज़िन्दगी सौप के जा रही हूँ lगुहू ने मुस्कुराते हुए अनमोल से कहा ,' मैं तुम्हारी आदत थी न तो आदत तो बदली जा सकती है l अनमोल की आँखें भर आयी lअनमोल ने गुहू से कहा ,''गुहू इतनी बड़ी सजा दोगी तुम मुझे l नही गुहू ऐसा न करो l तुमने मेरा हर पल साथ दिया भले ही मैं तुमसे मीलों दूर था पर तुमने मुझे कभी दूरी का एहसास नही होने दिया lमेरे हर दर्द में तुम साथ थी भले ही मैं तुम्हारे दर्द को समझ नही पाया l आज तुम यहाँ हो l मैं खुद को माफ़ नही कर पा हूँ l तुम मुझसे मिलने आना चाहती थी लेकिन मैंने क्या किया .. मैंने अपनी मजबूरियों और हालात का पत्थर रख दिया तुम्हारे रास्ते में l तुमने एक बार नही कई बार कोशिश की मुझ तक पहुचने की ..पर तकदीर मेरी मुझे तुमसे मिलने नही दी l अनमोल बिफर कर रो पड़ा गुहू ने अनमोल को सँभालते हुए कहा ,'अरे तकदीर भी तो कोई चीज़ होती है न जिसके आगे किसी का बस नही चलता lअनमोल तुम्हे देखने के बाद मेरे जीने की तमन्ना फिर जाग उठी है मैं फिर से हँसना चाहती हूँ उड़ना चाहती हूँ अपनी उमंगों के साथ,लिखना चाहती हूँ मैं वो सब करना चाहती हूँ जो पहले करती थी लेकिन वक़्त ...ये वक़्त ही तो नही है मेरे पास lमेरी एक तमन्ना पूरी कर दो lफिर मुझे उसी जगह ले चलो जहाँ हम पहली बार मिले थे थोड़ी देर के लिए ही सही मैं जीना चाहती हूँ l हाँ ..हाँ.. गुहू हम जरुर चलेंगे l कल शाम को चलते हैं l अब तुम आराम करो रात काफी हो गयी है l गुहू ने दवा ली और सो गयी lसुबह जब सब गुहू के कमरे में पहुचे तो गुहू सो रही थी l आज जगाने पर भी नही जागी गहरी नींद में सो गयी थी और उसके चेहरे पर सुकून की झलक साफ़ दिख रही थी lअनमोल ने गुहू को जागते हुए कहा ,गुहू उठो हमें एल्फिन टॉवर चलना है l उठो न बहुत सो ली अभी तो हमें बहुत कुछ करना है l कुछ तो बोलो जब कभी मैं एक शब्द कहता था तुम्हारे जबाब में शब्दों की झड़ियाँ लग जाती थी मैं जब कुछ न बोलता तुम एकदम खामोश हो जाती थी l लेकिन गुहू आज मैं कितना बोल रहा हूँ तुम क्यूँ नही बोल रही ......गुहू उठो न .....अब तो गुहू हमेशा के लिए खामोश हो गयी थी अपने अधूरे ख्वाबों के साथ ......और अनमोल हाथ में उसकी किताब लिए !! 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