वो मासूम सी लड़की - 5 Vandna Sharma द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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वो मासूम सी लड़की - 5



एक दिन पीहू अपने परिवार के साथ हरिद्वार गई। तीनों एक घाट पर बैठे थे, नदी में पैर डाले, आसमान में डूबते सूरज को देख रहे थे। पानी सोने जैसा चमक रहा था, आरती की घंटियाँ बज रही थीं।

तभी पीहू ने अपने पति से कहा - "मेरा एक और सपना है।"

दोनों ने एक साथ आश्चर्य से पूछा - "क्या सपना है?"

पीहू हल्के से मुस्कुराई और कहा - "अब हमारा बेटा हमारे बिजनेस को अच्छी तरह संभाल रहा है, अब इसका विवाह कर देते हैं।"

आरव ने बीच में टोकते हुए कहा - "नहीं माँ, मुझे नहीं करनी शादी। मुझे आपके साथ रहना है।"

पीहू ने प्यार से उसके गाल पर हल्की सी चपत लगाई और कहा - "पहले सुनो तो पूरी बात। तुम और तुम्हारी संगिनी मिलकर हमारा व्यापार संभालो और हम दोनों एक ऐसा घर बनाएंगे जहाँ वृद्ध जनों को सहारा मिल सके, अपनापन मिल सके। आजकल अधिकतर घरों में बूढ़े माँ-बाप अकेले रह गए हैं, उनके बच्चे दूसरे शहरों में जाकर बस गए हैं। मैं उन सभी के लिए एक घर बनाना चाहती हूँ।"

उसके पति ने कहा - "पीहू मुझे तुम पर पूरा भरोसा है। तुम जो करोगी सही करोगी। मैं तुम्हारे हर फैसले में तुम्हारे साथ हूँ।"

पीहू ने उसी शहर में अच्छी सी जगह देखकर कुछ जमीन खरीद ली। उस जगह एक हॉस्टल बनाने का काम शुरू हो जाता है। एक साल बाद उसका सपना पूरा होता है। वह उस बड़े से घर का नाम रखती है - "महाकाल का आशीर्वाद"। उस घर में वह ऐसे वृद्धजनों को आसरा देती है जो अपने बुढ़ापे में अकेले रह गए।

पीहू का पति उसके इस सपने में पूरी सहायता करता है। अब फार्म हाउस की ताजी सब्जियाँ रोज़ आश्रम में जातीं, आरव वहाँ के बुजुर्गों की दवाइयों का हिसाब रखता। धीरे-धीरे वहाँ बीस-पच्चीस लोग हो गए। पीहू सुबह उनके लिए चाय बनाती, उनके साथ भजन गाती, उनके घुटनों में तेल लगाती। जो मासूम लड़की कभी तारों में शेर और हिरन खोजती थी, आज वह दूसरों के अंधेरे जीवन में रोशनी बन गई थी।

सब कुछ बढ़िया चल रहा था। समय पंख लगाकर उड़ रहा था। अब पीहू भी बूढ़ी हो चुकी थी। बालों में चाँदी उतर आई थी, पर आँखों में वही मासूम चमक अब भी थी।

अक्टूबर माह की एक ठंडी रात थी। पीहू छत पर झूले में बैठी चाँद को निहार रही थी। वही चाँद जो बचपन से उसका साथी था। तभी उसका पति उसके लिए एक कप कॉफी बनाकर लाता है। उसे कप पकड़ाते हुए उसके पास बैठ जाता है।

पीहू का हाथ अपने हाथ में लेकर वह हल्के से पूछता है - "क्या हुआ पीहू? क्या सोच रही हो?"

पीहू ने उसकी तरफ देखा, फिर चाँद को देखा और हल्के से कहा - "मेरा एक और सपना है।"

उसका पति आश्चर्य से देखता है, उसका मुँह खुला रह जाता है। वह कप नीचे रखकर बोला - "एक और सपना??"

पीहू ने कहा - "हाँ, एक और सपना। मेरे महादेव ने मेरे सारे सपने पूरे किए। मुझे कभी हारने नहीं दिया। अब मैं चाहती हूँ अपने महादेव का एक मंदिर बनाना, उसमें शिव परिवार को स्थापित करना और सुबह-शाम उनकी भक्ति में लीन रहना।"

उसके पति ने कहा - "देवी धन्य हो, इतने सुंदर विचार। जरूर पूरा होगा यह सपना।"

ऐसा कहकर दोनों हँसने लगते हैं। चाँद भी तारों के साथ आसमान में हँस रहा था।

समाप्त।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली