अब तक
आखिर तुम मान ही गई, आ गई अपनी औकात पर, तुम जैसी बाजारू लड़कियां अपना असली रंग जल्दी दिखा देती हो। शरीफ बनने का फिर चाहे कितना ही नाटक क्यों ना करती हो तुम।" उसे आदमी के लहजे में नफरत और कड़वाहट दोनों झलक रही थी। फ़ना ने फोन को कसकर पकड़ लिया और धीमी और रूंधी आवाज़ में बोली, " सर." आगे के शब्द नहीं बोल पा रही थी, फ़ना।
"सर सर. क्या हम मिल सकते हैं?" "हम्म. Okk i'm coming बार के सामने मेरा वेट करो."
अब आगे-
फ़ना अपनी चोल से बाहर जाने के लिए निकल रही थी। निशु ने उससे मुंह फेर लिया था, क्योंकि निशु जानती थी कि उसकी दोस्त दलदल में जा रही है। उसे बाद में उससे निकलना मुश्किल हो जाएगा। वह खुद की जिंदगी दांव पर लगा रही है। निशु रोक भी नहीं सकती थी, फ़ना को, क्योंकि उसने हर मुमकिन कोशिश कर ली थी। उसने फ़ना को उसके भाई की कसम भी दे दी थी, पर फ़ना फिर भी रुकने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि कहीं ना कहीं फ़ना जानती थी कि बस यही एक मौका है उसके पास, अपने भाई को बचाने का। जिसके लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी। उसने यह फैसला बिना सोचे समझे ले लिया था। हालांकि वह जानती थी कि उसे कितना डर लग रहा है, क्योंकि जिस शख्स के पास फ़ना खुद को सौपने जा रही थी। विक्रम भारद्वाज उससे कितनी नफरत करता है।
आज उसने अपने इज्जत दांव पर लगा दी थी। यही सब कुछ सोचते हुए फ़ना ने ऑटो लिया और ऑटो से वह उस बार के सामने आकर खड़ी हो गई। आते जाते लोग उसे देख रहे थे। फ़ना को ठंडी हवाएं छू रही थी। थोड़ी देर पहले बारिश हुई थी, जिस वजह से मौसम भी ठंडा था और फ़ना ने अपने वही फटे पुराने से कपड़े पहन रखे थे। जिस वजह से ठंडी हवाएं उसे अपनी जकड़ में ले रही थी।
फ़ना को वहां पर आए करीबन 30 मिनट हो गए थे और उसके दिल की धड़कन तेजी से धड़क रही थी।
एकदम से वहां फ़ना के सामने कार आकर रुकी। उसे ब्लैक कलर की कार को देखकर फ़ना ने दो कदम अपने पीछे ले लिए। उसके अंतरात्मा उससे कह रही थी कि फ़ना अभी भी वक्त है, भाग जा, अभी भी वक्त है, भाग।
तभी कार का डोर ओपन हुआ। कार से कोई शख्स बाहर नहीं आया। फ़ना अपने कदम उस कार की तरफ बढ़ाने लगी। जैसे ही वह उस कार के अंदर आई, किसी ने उसका हाथ पकड़ कर, उसे एकदम से खींच कर, लेदर सीट पर धकेल दिया। फ़ना इससे पहले की कुछ रिएक्ट कर पाती, उस शख्स ने फ़ना के होठों से अपने होंठ जैसे ही मिलाए। फना के मुंह में धुआं भर गया। फ़ना खांसने लगी। वह शख्स फ़ना के होठों पर किस करने लगा। उम्म. अम्म फ़ना के मुंह में धुआं भर गया था। वह फ़ना के ऊपर टूट पड़ा था और फ़ना के लिप्स को निचोड़ने में लग गया।
फ़ना को बहुत तेज दर्द हो रहा था। वह छटपटाने लगी, क्योंकि इस हमले से वह इतना घबरा गई थी कि वह उस शख्स को जोर-जोर से मारने लगी।
फ़ना खुद को छुड़ाने के लिए, उसे शख्स को नोचने लगी। उस शख्स ने फ़ना के कपड़ों को भी उसके शोल्डर से नीचे कर दिया था। वह उसकी गर्दन पर बाइट कर रहा था, जिससे फ़ना की आंखों में आंसू आ गए। वह इतना ज्यादा घबरा गई कि उसने धीरे से कहा, "स. सर.स
उसकी आवाज रोने वाली थी। विक्रम ने फ़ना के उस सफेद पड़ चुके चेहरे को देखा। मुर्दे की तरह लेटी हुई थी। स.स र.यह देखकर विक्रम को इतना तेज गुस्सा आया कि उसने चिल्लाते हुए गुस्से से कहा, "गेट आउट"
विक्रम के गुस्से भरी आवाज सुनकर फ़ना डर से सिकुड़ गई और उसकी आंखों से झर झर आंसू बहने लगे।
विक्रम सीधा होकर बैठ गया और गुस्से में सामने देखते हुए बोला, "मैंने कहा कि अभी के अभी दफा हो जाओ, वरना मैं तुम्हें कार से नीचे धक्का दे दूंगा।"
विक्रम इतने गुस्से में था कि वह इसी वक्त फ़ना की गर्दन दबोच लेना चाहता था। वही फ़ना भी डर की वजह से खुद को समेटे हुए कार के डोर की तरफ अपना हाथ बढ़ाती है और जैसे ही वह कार के डोर को अनलॉक कर अपना कदम बाहर रखती, उसी वक्त उसकी आंखों के सामने उसके भाई का चेहरा घूमने लगा। फ़ना ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया। वह नहीं जा सकती, अगर वह चली गई तो उसके बाद उसका आना नामुमकिन हो जाएगा और कल उसे पैसे देने थे हॉस्पिटल में, वरना.।
फ़ना ने अपने कदम पीछे ले लिए और उसने मुड़कर विक्रम की तरफ देखा।
फ़ना विक्रम के थोड़ा नजदीक आई और उसके बाद उसने अपने कांपते हुए हाथ विक्रम के हाथों पर रख दिए और दूसरा हाथ उसकी चेस्ट पर रखकर, वह उसके करीब आ गई। वह विक्रम की गोद में बैठ गई थी और उसके बाद उसने हिम्मत कर अपनी गर्दन उठाई और अपने कांपते हुए होंठ, वह विक्रम के होठों के करीब बढ़ाने लगी।
विक्रम फ़ना को अपनी पैनी आंखों से देख रहा था। ड्राइवर ने कार दोबारा स्टार्ट कर दी थी और उसने कार में पार्टीशन लगा दिया। फ़ना विक्रम के होठों को धीरे से चूम कर पीछे हो गई। उसके लिए यह करना इतना मुश्किल था कि उसकी सांसे भी रुक गई थी।
विक्रम ने फ़ना की कमर पकड़ ली और उसे अपने करीब करते हुए उसने फ़ना के होठों से अपने होंठ जोड़ दिए। उसके बाद वह उसे एग्रेसिव होकर किस करने लगा। उसने फ़ना के होठों को अपने मुंह में भर लिया था और उसके बाद वह उसे यूं किस कर रहा था। जैसे पूरा निगल जाएगा। वही फ़ना विक्रम को अब खुद से दूर नहीं कर रही थी। पर वह कांप पर रही थी। विक्रम ने फ़ना को लेदर सीट पर पटक दिया और उसके ऊपर हावी हो गया था। उसने फ़ना के कपड़े भी खींचना शुरू कर दिया था।
जिससे फ़ना को पेन होने लगा। फ़ना के कपड़े कई जगह से फटने लगे। लेकिन फिर भी वह विक्रम को खुद से दूर नहीं कर रही थी। विक्रम भी फ़ना की कंपन को महसूस कर रहा था। उसने जैसे ही फ़ना की शर्ट के चार बटन खोले, विक्रम की नजर फ़ना के उभरे हुए हिस्से पर गई, जहां पर लाल तिल था। जिस पर विक्रम ने उसे रात बाइट की थी और उसका निशान अभी तक बना हुआ था।
यह देखकर विक्रम मानो जैसे पागल सा हो गया। वह फ़ना पर टूट पड़ा। फ़ना दर्द से कराह रही थी। ड्राइवर ने जब फ़ना की दर्द से कराहने की आवाज सुनी, तो उसने अपने पैरों को टाइटली होल्ड कर लिया। वह मजबूर था, कार छोड़कर भी तो नहीं जा सकता था।
ड्राइवर ने कार की स्पीड बड़ाई और जल्दी ही वह लोग एक विला के सामने आकर रुक गए। कार के रुकते ही विक्रम ने फ़ना के होठों पर चुंबन किया और फिर वह कार से बाहर निकल कर चला गया। यह देखकर फ़ना हैरान हो गई।
फ़ना ने अपने कपड़े ठीक किए। विक्रम ने उसके कपड़े एक साइड से फाड़ दिए थे। फ़ना को बहुत एंब्रेस फील हो रहा था। वह धीरे से कार से बाहर आई। वह छोटी सी मासूम सी, न जाने कहां आ गई थी और अपनी जिंदगी को दांव पर लगा रही थी।
फ़ना धीरे-धीरे अपने कांपते हुए पैरों को आगे बढ़ाने लगी। फ़ना अंदर जा रही थी, तो एक शख्स उसके पास आया। उसने फ़ना को जेटली ग्रीट करते हुए कहा, "मैम, मिस्टर भारद्वाज ने आपको अंदर वेट करने के लिए कहा हैं।"
इस पर फ़ना धीरे से अपना सर हां में हिला देती है। वह उस आदमी के कदमों को फॉलो करते हुए अंदर जा रही थी। उसने अपनी शर्ट को कसकर पकड़ लिया था।
फ़ना के लिप्स सूज कर लटक गए। आंखो में नमी लिए, वह जब अंदर आई, तो उस डार्क थीम को देखकर एक पल के लिए तो उसके दिल की धड़कन ही रुक गई।
उस आदमी ने फ़ना को सोफे पर बैठने के लिए कहा, तो उसके सामने एक कांट्रेक्ट पेपर रखा हुआ था।
फ़ना ने सिर्फ 12th पास की थी। इस वजह से उसे थोड़ा बहुत ही समझ में आ रहा था।
फ़ना को वह कांट्रेक्ट पेपर दिया गया, उस आदमी के द्वारा, जिसे फ़ना पढ़ कर रही थी और उस पर एक एग्रीमेंट था, जो डेढ़ साल का था।
उस एग्रीमेंट पेपर में यह लिखा हुआ था कि फ़ना को डेढ़ साल तक विक्रम के साथ रहना होगा और इस बीच में वह किसी और मर्द के कांटेक्ट में नहीं आ सकती। इसके बदले में विक्रम उसे पैसे देगा। फ़ना किसी ओर के साथ कोई रिलेशन नहीं रख सकती, जब तक वह विक्रम के साथ है। फ़ना को हर फैसला विक्रम से पूछ कर करना होगा। फ़ना डेढ़ सालों में विक्रम की प्रॉपर्टी है, जिसे सिर्फ विक्रम छू सकता है।
विक्रम जब जब फ़ना को अपने पास बुलाएगा, फ़ना को उस वक्त विक्रम के सामने हाजिर होना होगा। वह किसी भी कीमत पर विक्रम को मना नहीं कर सकती। विक्रम, जो चाहे उसके साथ कर सकता है, क्योंकि फ़ना की बॉडी आज से और अभी से विक्रम की प्रॉपर्टी होगी। इस पर सिर्फ और सिर्फ विक्रम का हक होगा।
विक्रम का हर ऑर्डर फ़ना को मानना होगा, यह उसका कर्तव्य है। इन डेढ़ सालों में अगर फ़ना ने एक बार भी भागने की कोशिश की, तो विक्रम उसके साथ कुछ भी करने का हकदार है।
और बदले में फ़ना को 3 करोड रुपए विक्रम को कंपनसेशन के रूप में देना पड़ेगा। उसके साथ ही वह उसके घर की 5 साल तक नौकरानी बनकर रहेगी और विक्रम की पर्सनल प्रॉपर्टी बनकर उसे खुश करेगी।
फ़ना का कर्तव्य होगा कि जब विक्रम फ़ना को अपने साथ इंटरकोर्स के लिए बुलाएगा तो फ़ना को उस वक्त उसके सामने हाजिर होना होगा।
और अगर इस बीच में फ़ना किसी ओर के साथ पकड़ी गई, विक्रम को धोखा देते हुए, तो फ़ना के साथ कुछ भी करने का हक है विक्रम को। विक्रम के साथ रहते हुए फ़ना कोई बॉयफ्रेंड नहीं बना सकती। वह किसी भी मर्द के साथ रिलेशनशिप में नहीं आ सकती। फ़ना किसी को विक्रम के सिवा टच भी नहीं करने देगी खुद को।
उसमें ऐसी ऐसी कंडीशंस लिखी हुई थी, जिन्हें पढ़कर फ़ना की रूह कांप गई थी कि यह आदमी उसके साथ कॉन्ट्रैक्ट कर रहा है या फिर वह उसकी पूरी जिंदगी और सांसों तक पर भी सिर्फ अपना हक जता रहा है।
लेकिन फ़ना के पास कोई ओर चारा नहीं था। इसलिए फ़ना के आंसू उस कांट्रेक्ट पेपर पर गिरने लगे। आखिर खुद को खत्म जो कर रही थी, आज वह।
विक्रम फ़ना के सामने वाले सोफे पर आकर बैठ गया। विक्रम के हाथ में ड्रिंक का गिलास था, जिसे वह धीरे-धीरे मूव कर रहा था और उसकी नज़रें फ़ना के चेहरे पर थी। वह कांटेक्ट पेपर को अपने हाथों में थामे हुए कांप रही थी। जिन्हें देखकर विक्रम के होठों पर डेविल स्माइल थी।
फ़ना ने अपने कांपते हुए हाथों से उस कांटेक्ट पेपर पर साइन कर दिया। फ़ना के ढेर सारे आंसू उस कांटेक्ट पेपर पर गिर रहे थे।
फ़ना ने सिर उठाकर विक्रम को देखा। विक्रम के होठों पर शातिर मुस्कान थी। उसने फ़ना को देखते हुए कहा, "वेरी गुड डिसीजन. finally You are My Miss."
विक्रम ने फ़ना को रूम नंबर 9 में जाने के लिए कहा, "मेरा वेट करों. "
फ़ना धीरे से खड़ी हो गई और विक्रम की बात मानते हुए वह रूम नंबर 9 की तरफ जाने लगी।
एक नौकरानी फ़ना को रूम नंबर 9 के सामने छोड़कर चली गई। फ़ना ने अपने कदम उस कमरे के अंदर रखें।
फ़ना घबराहट की वजह से कांप रही थी। उसका दिल धक-धक कर रहा था।
उसके सामने एक बार, फिर वो रात घूम गई। उसके होंठ कांपने लगे।
"शायद यही है तेरी जिंदगी फ़ना "
फ़ना कड़वाहट से मुस्कुराई।
रूम का डोर ओपन हुआ और फ़ना ने मुट्ठियों को भीच लिया।
फ़ना खड़ी हुई, लेकिन उसने अपनी आंखें उठाकर सामने उस आदमी को नहीं देखा. । उस आदमी की भौहें सिकुड़ गई।
वो आदमी उसकी तरफ ना आकर बेड पर बैठ गया और बोला, "remove your cloth" उस आदमी ने बिना किसी भाव के कहा।
फ़ना ने अपना सर उठाकर उस आदमी की तरफ देखा.।
अपने कांपते हुए हाथों से अपनी शर्ट के बटन खोलने लगी। उसकी उगलियां कांप रही थी। उसके होंठ थरथरा रहे थे।
उसकी आंखें फिर भर गई। फ़ना का मन कर रहा था कि वो यहां से बहुत दूर भाग जाए।
फ़ना ने अपनी शर्ट उतार दी। "कम टू मी" उस आदमी ने फ़ना को अपनी तरफ बुलाया।
फ़ना धीरे-धीरे उसकी तरफ आने लगा। उस आदमी ने, जो सिगरेट अपने हाथ में पकड़ी हुई थी,. उसे फ़ना की कमर पर रख दिया।
फ़ना चिल्ला उठी। "आह्ह" फ़ना छटपटा उठी थी, वो जोर-जोर से रोने लगी।
उस आदमी ने उसे एक झटके से बैड धक्का दे दिया और उसके के ऊपर आ गया।
वह फ़ना को फिर से किस करने लगा। धीरे-धीरे फ़ना के सारे कपड़े बदन से अलग हो गए। आंखें आंसुओं से भर गई थी।
बेड के नीचे बिखर गए। फ़ना की आंखों से आंसू की बूंदे बह रही थी।
फ़ना ने अपनी आंखें कसकर मीच रखी थी। "मुझसे नहीं होगा, मुझसे नहीं होगा ये" फ़ना ने खुद से कहा।
उस आदमी ने उसकी नेवल पर किस किया, जहां सिगरेट का निशान बन गया था, वहां पर अपने होंठ रखें। "आहह." फ़ना सिसक उठी।
फ़ना की बॉडी पर जगह-जगह निशान उभर आए थे, वो आदमी जैसे ही उसके अंदर समाने के लिए तैयार था। फ़ना ने अपनी आंखें खोली और वो पीछे खिसक गई।
उसने कांपते हुए कहा, "सो सो सॉरी सर, ये मुझसे नहीं होगा, मुझे नहीं सौपना खुद को।" रीटा ने रोते हुए कहा। "
उस आदमी की गुस्से से आंखें लाल हो गई, उसके जबड़े कस गए।
उसने गुस्से से अपने दांत पीस लिए।
उस आदमी ने फ़ना को अपनी तरफ खींचा। "अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि तुमने मेरे साथ डील की है। तुम चाहो, ना चाहो, तुम्हें ये करना ही होगा।" उस आदमी ने गुस्से से कहा।
फ़ना ने उसकी पकड़ से आजाद़ होने की कोशिश करते हुए कहा, "प्लीज सर, मुझे नहीं करना कुछ ऐसा।" फ़ना ने रोते हुए कहा।
फ़ना खुद को छुड़ाने के लिए छटपटाने लगी।
"अपना ये रोने धोने का नाटक बंद करो" उस आदमी ने गुस्से से कहा।
फ़ना कांपने लगी। उसकी आंखों में खौफ फैल गया। उस आदमी ने फ़ना को दबोच लिया। फ़ना उससे छूटने के लिए नाकाम कोशिश कर रही थी. ।लेकिन उसकी हर कोशिश नाकामयाब हो रही थी।
वो आदमी बहुत स्ट्रांग था। उस आदमी ने गुस्से से फ़ना के जबड़े को पकड़ लिया। "तुमने मेरे साथ एग्रीमेंट साइन किया है। तुम चाहो, ना चाहो, एक साल के लिए तुम मेरी हो" उस आदमी ने सख्ती से कहा।
"फिर तुम्हें भी तो पैसे की जरूरत है, अपने भाई का ऑपरेशन नहीं करोगी तुम" रीटा हैरानी से उसे देखने लगी। "प्लीज - प्लीज सर, मुझे जाने दीजिए" फ़ना ने सुबकते हुए कहा।
वह आदमी फ़ना के होठों को रगड़ते हुए ऐविल स्माइल करने लगा।
फ़ना बस रोए जा रही थी। फ़ना न रोते हुए कहा, "प प्ली प्लीज सर"