Mafia’s possession chapter 10 Luna Rinn द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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Mafia’s possession chapter 10

अब तक

वो आदमी बहुत स्ट्रांग था। उस आदमी ने गुस्से से फ़ना के जबड़े को पकड़ लिया। "तुमने मेरे साथ एग्रीमेंट साइन किया है। तुम चाहो, ना चाहो, एक साल के लिए तुम मेरी हो" उस आदमी ने सख्ती से कहा। "फिर तुम्हें भी तो पैसे की जरूरत है, अपने भाई का ऑपरेशन नहीं करोगी तुम" रीटा हैरानी से उसे देखने लगी। "प्लीज - प्लीज सर, मुझे जाने दीजिए" फ़ना ने सुबकते हुए कहा। वह आदमी फ़ना के होठों को रगड़ते हुए ऐविल स्माइल करने लगा। फ़ना बस रोए जा रही थी। फ़ना न रोते हुए कहा, "प प्ली प्लीज सर"

अब आगे-

फ़ना को विक्रम को देखकर इतना ज्यादा डर लग रहा था और खौफ भर गया था। वह यहां पर एक पल भी रुकना नहीं चाहती थी।

फ़ना बस रोए जा रही थी। फ़ना ने रोते हुए कहा, "प प्ली प्लीज सर "

उस आदमी ने फ़ना के गुप्त अंग पर हाथ फेरा। फ़ना कांपने लगी। "प्यार से मान जाओ, वरना अपना फर्स्ट टाइम तुम भूली नहीं होगी" उस आदमी ने डरावने तरीके से कहा।

फ़ना ने रोते हुए कहा, "प प्ली प्लीज सर "

फ़ना पीछे की तरफ खिसकने लगी। उस आदमी ने गुस्से से उसे बेड पर दबोच लिया और उसे रूडली किस करने लगा था।

रीटा उसे धकेलने लगी। उस आदमी ने उसके हाथों को ब्लॉक कर दिया."प प्ली प्लीज सर" वो अपना सर ना में हिला रही थी।

"मैं ये agreement नहीं करना चाहती।"

कमरे में एक चीख गूंज गई। फ़ना की आंखें भर गई। उसने कस कर अपनी आंखें मीच ली। उसके आंसू पिलो पर गिरने लगे।

उस आदमी ने उसका मुंह बंद कर दिया। फ़ना की आवाजें उसके अंदर दब कर रह गई। उस आदमी ने उसकी एक नहीं सुनी।

फ़ना ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की। वह उस आदमी को धक्का देने लगी। पर उस आदमी ने उसे दबोच लिया।

 फ़ना ने ब्लैंकेट मुट्ठी में भर दिया। उसकी पकड़ वक्त के साथ ब्लैंकेट पर मजबूत होती आई।

 फ़ना का फेस दूसरी तरफ था। उसकी आंखों से बस आंसू गिर रहे थे। उसका चेहरा लाल हो गया था। उसने अपने मुंह पर हाथ रखा हुआ था। फ़ना के होंठ कांप रहे थे।

 अगली सुबह ,

फ़ना एक टक वॉल को देख रही थी। अब शायद उसके आंसू भी सूख चुके थे। उस आदमी ने अभी भी उसकी कलाइयों को मजबूती से पकड़ रखा था।

वो आदमी उसके ऊपर ही सो रहा था। दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था।

धीरे-धीरे उस आदमी की आंखें खुल गई। उसने अपना सर उठाकर फ़ना के चेहरे की तरफ देखा। जिस पर आंसुओं की बूंद के निशान थे। उसकी आंखें रोने की वजह से सूज गई थी। उसके होठों पर कट के निशान थे। उसकी कलाइयों पर नीले निशान थे।

वो आदमी उसके ऊपर से उठ गया।

उसकी पलकें गीली हो गई थी। फ़ना धीरे से उठकर बैठने लगी।

उस आदमी ने उसकी बेक की तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।

जैसे उसे फ़ना के दर्द से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसने तुरंत अपने मुंह पर हाथ रख लिया।

उसे डर था कि वो फिर कहीं रोने ना लगे। उसने अपना सर ऊपर उठाया और अपने आंसुओं को रोक लिया।

उसे अपने पेट पर एक मजबूत हाथ महसूस हुआ। फ़ना कांप गई।

"प्लीज सर, अब नहीं" फ़ना ने भरे हुए गले के साथ कहा। उसके होंठ कांप रह थे।

ये सब कहते हुए वो वक्त कांप रही थी। फ़ना को उस आदमी से डर लग रहा था।

फ़ना की पीठ से एक मजबूत सीना लगा हुआ था। उस आदमी की चिन फ़ना के कंधे पर थी। "मैं रूड था।"

"हम्म" फ़ना ने सिर हिला दिया।

"कितने साल की हो तुम" उस आदमी ने पूछा।

"19" फ़ना ने धीरे से जवाब दिया। उस आदमी की आंखें छोटी छोटी हो गई।

उस आदमी ने उसके पेट को सहलाते हुए कहा, "आदत हो जाएगी तुम्हें।" फ़ना की पलकें भीग गई।

"बहुत पतली हो तुम, अपनी इस बॉडी का ख्याल रखो, क्योंकि अब ये तुम्हारी नहीं मेरी है।" "हम्मम" फ़ना ने सिर हिला दिया।

"स सर आपका नेम क्या" फ़ना रुक गई।उसे डर लग रहा था कि कहीं उसने कुछ गलत तो नहीं पूछ लिया।

"विक्रम रॉय" उस आदमी ने फ़ना के कान में कहा। फ़ना के शरीर में सनसनी मच गई।

तभी उस आदमी का फोन साइड टेबल पर, जो रखा हुआ था, वो रिंग करने लगा।

उस आदमी ने अपना फोन उठाया। फ़ना को पकड़े हुए ही अपना फोन पिक किया। "यस बॉस" विक्रम ने कहा।

Vikram खड़ा हुआ। उसने फ़ना को अपने एक हाथ से उठा रखा था। फ़ना भी शांत थी। उसने ये एक्सेप्ट कर लिया था।

विक्रम फोन पर कुछ कह रहा था। फ़ना को उसने अपने एक हाथ से उठा रखा था। दूसरे हाथ से वो फोन पर कुछ type कर रहा था।

विक्रम उसे लेकर बाथरूम में चला गया। फ़ना को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि विक्रम क्या बातें कर रहा था।

विक्रम ने उसके गले में अपना हाथ डाला और उसका सर अपने सीने पर रखा। फ़ना को नींद आने लगी। वो सो भी नहीं सकती थी। उसे काम पर भी तो जाना था।

रात भर ना सोने की वजह से उसकी आंखें भारी हो रही थी। फ़ना को वीकनेस फील हो रही थी।

"स सर मुझे जाना है" फ़ना ने धीरे से हकलाते हुए कहा।

विक्रम ने कुछ नहीं कहा।

विक्रम उसे वापस रूम में ले आया। फ़ना ने अपने जमीन पर पड़े कपड़े उठाएं और उन्हें पहनने लगी।

विक्रम भी रेडी हो रहा था। फ़ना रेडी थी।

विक्रम भी रेडी हो चुका था। विक्रम ने नोटों की गड्डी फ़ना के हाथ पर रखी। "Tonight i want you again" विक्रम ने उसके होठों को रगड़ते हुए कहा।

फ़ना की उंगलियां कांप गई। उसकी पकड़ नोटों की गड्डी पर मजबूत हो गई। "जी सर" फ़ना ने धीरे से कहा।

विक्रम रूम से बाहर चला गया। फ़ना भी रूम से बाहर आ गई।

फ़ना वहां से सीधा अपने काम के लिए चली गई। फ़ना को आज काफी कमजोरी महसूस कर रही थी।

जैसे तैसे पूरा दिन निकल गया। फ़ना हॉस्पिटल भी जा चुकी थी। उसने पैसे भी संबिट कर दिए थे।

फ़ना बार मे ड्रिंक शव कर रही थी। फ़ना के चेहरे पर एक मुस्कान थी, वो मुस्कान, वो हमेश खुद के चेहरे पर सजा कर रखती थी।

फ़ना अभी drink सर्व ही कर रही थी कि उसे अपनी कमर पर किसी का हाथ महसूस हुआ। फ़ना घबरा गई।

उसने तुरंत घूम कर देखा। "र रम रमन तुम" फ़ना ने हकलाते हुए कहा।

वो उस बार का daily कस्टमर था।

फ़ना ने उसका हाथ अपनी कमर से हटाते हुए कहा, "रमन, क्या चाहिए तुम्हें" रीटा ने धीरे से पूछा।

रमन ने फ़ना को उपर से नीचे तक देखते हुए फ़ना को और कस कर पकड़ लिया। फ़ना डर गई।

"य ये क्या कर रहे हो रमन" फ़ना ने घबराते हुए पूछा।

"इतनी भोली भी नहीं हो तुम, जितना बनने का नाटक कर रही हो" रमन ने फ़ना के बदन पर हाथ फेरते हुए कहा।

रमन की नजर फ़ना की नेक के पास गई। उस पर लाल निशान पर थे। फ़ना के होठों पर भी कई कट के निशान थे।

"चाहते क्या हो तुम" फ़ना ने घबराते हुए पूछा।

"वही जो तुम सबको देती हो, रमन ने फ़ना के होठों के करीब बढ़ते हुए कहा।

फ़ना ने रमन का दूर धक्का दे दिया। रमन गुस्से से बौखला गया। "तुम दूसरों को वो सब दे सकती हो, मुझे नहीं, तुम्हें क्या प्रॉब्लम क्या है" रमन ने गुस्से से कहा।

फ़ना कांप रही थी। रमन उसके करीब बढ़ रहा था। फ़ना अपना एक एक कदम पिछे लेने लगी।

वो कब जाकर वॉल से लग गई, उसे पता ही नहीं चला।

रमन शैतानी मुस्कान लिए फ़ना के करीब बढ रहा था।

वो फ़ना के होठों की तरफ झुकने लगा। घबराहट की वजह से फ़ना ने अपनी आंखें बंद कर ली। उसकी आंखों से फिर आंसू गिरने लगे। डर की वजह से वो फिर रोने लगी। "नही नही रमन"

इससे पहले कि रमन उसे किस करता।

रमन की आंखें बड़ी बड़ी हो गई। रमन की आंखें लाल हो गई। रमन को अपनी गर्दन पर तेज दर्द हुआ।

किसी ने गुस्से से उसकी गर्दन को कसकर दबा रखा था। रमन के हाथ कांपने लगे. उसका दम घुटने लगा।

 फ़ना आंखें बंद कर कांप रही थी। उसके होंठ कांप रहे थे।

रमन का दम घुट रहा था। वो छटपटाने लगा। उसकी आंखें लगभग बाहर आने वाली थी।

वो उस आदमी को नहीं देख पा रहा था, जिसने उसकी गर्दन को कसकर दबोच रखा था। रमन की सांस उखड़ने लगी।

किसी ने उसेे फ़ना से दूर खींचा और दूसरी तरफ फेंक दिया। वहां मौजूद सभी डर गए थे।

वहां मौजूद हर एक शख्स विक्रम को जानता था। विक्रम बहुत खतरनाक इंसान था।

रमन का सर सीधा वॉल से जा लगा। इसी के साथ वो बेहोश हो गया। उसके सर से खून निकल रहा था।

विक्रम गुस्से से फ़ना की तरफ बढ़ने लगा। फ़ना ने धीरे से अपनी आंखें खोली।

विक्रम का गुस्से से भरा चेहरा देख, वो और ज्यादा डर गई।

उसकी आंखों में देख वो कांपने लगी थी।

विक्रम ने गुस्से से फ़ना का जबड़ा पकड़ लिया। वह अपनी दहकती हुई आंखों के साथ उसे देखने लगा। "तुम यहां दूसरे मर्द को Seduce कर रही हो" विक्रम ने गुस्से से दहाङते हुए कहा।

फ़ना अपनी गर्दन ना में हिला रही थी। "ना नहीं."

विक्रम की पकड़ उसके फेस पर ओर मजबूत हो गई। विक्रम गुस्से में बहुत भयानक लग रहा था।

विक्रम ने गुस्से से फ़ना का हाथ पकड़ लिया। फिर उसका हाथ लगभग मरोड़ते हुए कहा, "तुम मुझे बेवकूफ समझती हो या फिर मैं तुम्हें बेवकूफ लगता हूं।" विक्रम चिल्लाया।

फ़ना रोने लगी। "स सर, मैंने किसी को Seduce नहीं किया" फ़ना ने कांपते हुए कहा।

उसके हाथ में दर्द हो रहा था। फ़ना को लगा, जैसे उसका हाथ टूट ही जाएगा। फ़ना के होंठ थरथराने लगे।

विक्रम गुस्से से उसे खींचता हुआ वहां से ले गया। "प्ली प्लीज सर, मैंने कुछ नहीं किया।"

लेकिन विक्रम उसकी एक नहीं सुन रहा था। विक्रम उसे अपने विला ले आया।

उसने उसे गुस्से से कार से बाहर निकाला और लगभग घसीटता हुआ, उसे विला के अंदर ले जाने लगा।

फ़ना अपने पैर भी महसूस नहीं कर रही थी। वो बस रोए जा रही थी।

विक्रम उसे सीधा रूम में ले गया और बाथरूम में ले जाकर उसे बाथटब में फेंक दिया।

फ़ना जोर जोर से रोने लगी। "प प्लीज सर, मैंने कुछ नहीं किया।"

वो बाथटब से निकलने के लिए के लिए छटपटाने लगी। विक्रम ने उसे कसकर दबोच लिया था। विक्रम के भी कपड़े गीले हो गए थे।

हाथापाई में विक्रम भी पूरा गीला हो गया था।

फ़ना विक्रम को दूर के धकेलने लगी। उसने अपना पूरा जोर लगा कर विक्रम को धक्का दिया।

फ़ना बाथरूम से बाहर की तरफ भागी। वो रूम से बाहर निकलती, उससे पहले ही किसी ने उसे खींचकर फर्श पर फैक दिया।

फ़ना सुन्न हो गई। "प्ली प्लीज सर, मैंने उसे seduce नहीं किया।"

विक्रम ने अपनी बेल्ट निकाली और उसकी तरफ बढ़ने लगा।

फ़ना डर की वजह से अपनी गर्दन ना में हिला रही थी।

"प्लीज प्लीज सर" वो पीछे की तरफ से सकती जा रही थी।

वो कांप रही थी।

"ये जानते हुए भी कि तुम्हारी बॉडी पर मेरा हक है, तुम दूसरे मर्दों को Seduce कर रही थी। उन्हें किस कर रही थी।" विक्रम गुस्से से चिल्लाया।

विक्रम ने फ़ना को मारना शुरू कर दिया। "आहह. " फ़ना की चीख वहां गूंज गई। वाह छटपटाने लगी। "प्लीज प्लीज स सर" फ़ना जोर जोर से रो रही थी।

"तुम्हें याद रहेगा कि तुम मेरी हो, तुम्हारी हर चीज पर मेरा हक है" विक्रम ने उसे मारते हुए कहा।

विक्रम इस वक्त बहुत भयानक लग रहा था। विक्रम ने बेल्ट दूसरी तरफ फेंक दी। फ़ना की पीठ पर नीले काले निशान छप गए थे।

फ़ना लगभग अधमरी सी हो गई थी।

फ़ना अभी भी अपनी गर्दन ना में हिला रही थी। विक्रम ने जबरदस्ती उसका फेस अपनी तरफ करते हुए, गुस्से से दबाते हुए कहा, "एक साल तक तुम्हारे आसपास एक भी दूसरा मर्द नहीं भटकना चाहिए" विक्रम ने गुस्से से चिल्लाते हुए कहा।

फ़ना ने कांपते हुए अपनी गर्दन हां मे हिला दी।

विक्रम ने उसके सारे गिले कपड़े उसके बदन से हटा दिए।

विक्रम उसके पूरे बदन पर किस करने लगा। "ये सब मेरा है" विक्रम ने उसके होंठों को चूमते हुए कहा।

विक्रम उसके बदन के एक-एक अंग को किस कर रहा था। "ये ये ये सब कुछ मेरा है" विक्रम जैसे पागल सा हो गया था।

विक्रम ने अपने गीले कपड़े दूर फेंक दिए।

विक्रम फ़ना के साथ वही फर्श पर हमबिस्तर होने लगा। फ़ना की आंखों से आंसू गिर रहे थे। विक्रम के ऊपर जुनूनियत सवार थी।

विक्रम उसके पूरे बदन किस करने लगा। उसकी बॉडी के हर पार्ट को किस करने लगा। "ये सब मेरा है" विक्रम ने उसके होंठों को चूमते हुए कहा।

विक्रम उसके बदन के एक-एक अंग को किस कर रहा था। "ये ये ये सब कुछ मेरा है" विक्रम जैसे पागल सा हो गया था।

सिडड्म उसके बदन के एक-एक अंग को किस कर रहा था। "ये ये ये सब कुछ मेरा है"

 विक्रम जैसे पागल सा हो गया था। विक्रम के ऊपर जुनूनियत सवार थी। "आहह. " फ़ना विक्रम को धक्का देने लगी। विक्रम मानो जैसे पागल हो गया था।

 विक्रम की आंखें आग उगल रही थी। फ़ना को विक्रम से डर लग रहा था।

 फ़ना ने विक्रम को अपने ऊपर से धक्का देने की नाकाम कोशिश की।

 उसने अपने अंदर बची कुची ताकत के साथ विक्रम को पूरी ताकत से धक्का दिया। विक्रम को ये रास नहीं आया। उसका गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया।

 "दूसरे मर्द को तुम Seduce कर सकती हो और मुझे धक्का देना. " विक्रम गुस्से से चिल्लाया।

 " न नह नहीं सर, मैंने किसी को seduce नहीं किया" फ़ना ने सुबकते हुए कहा।

 विक्रम ने उसके हाथों को पकड़ लिया। फ़ना ने अपना हाथ पीछे ले लिया।

 विक्रम ने गुस्से से उसका फेस अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया और वापस से फ़ना के साथ हमबिस्तर होने लगा।

 फ़ना विक्रम के सीने पर मारे जा रही थी। लेकिन विक्रम पर इसका कोई असर नहीं था।

 कमरे में सिर्फ फ़ना की सिसकने की आवाज आ रही थी।

 फ़ना बेजान सी पड़ी थी और vikram अपना सारा गुस्सा उस पर उतार रहा था।

 वो अब कोई हरकत नहीं कर रही थी। जैसे उसने खुद को छोड़ दिया हो, उसकी आंखों में कुछ नहीं था।

 उनकी उंगलियां आपस में उलझ हुई थी।

 बस फ़ना के होठ कांप रही थे। उसकी आंखों के कोने बह रहे थे।

 विक्रम उसके साथ अभी भी वहीं सब कर रहा था।

 फ़ना की आंखें धीरे-धीरे बंद हो गई। उसकी पलकें अभी भी गीली हो रही थी।

 विक्रम ने उसके फेस की तरफ देखा।

 विक्रम को देखने से लग रहा था, जैसे उसे फ़ना के दर्द से कोई लेना-देना नहीं था।

 विक्रम अभी भी बेहद गुस्से में था। विक्रम ने फ़ना को आजाद किया।

 फ़ना की नेक में अपना मुंह छुपा लिया और उसे कसकर जकड़ लिया था।

 फ़ना सब महसूस कर रही थी, लेकिन उसके अंदर अपनी आंखें खोलने की हिम्मत नहीं थी।

 शायद वो अपनी सारी उम्मीद खो चुकी थी। विक्रम फ़ना के कान में कुछ कुछ फुुसफुसाया।

 लेकिन फ़ना को कुछ समझ नहीं आ रहा था। शायद वो सोचने समझने की शक्ति खो चुकी थी। फ़ना की पलकें गीली हो रही थी। विक्रम अभी भी गुस्से से उसे चूम रहा था।

 अगली सुबह

 फ़ना ने धीरे से अपनी आंखें खोली।

 उसके चेहरे पर उसके बाल बिखरे हुए थे। उसके होंठ पर दांतों के निशान थे। उसकी बॉडी पर कई नीले निशान उभर आए थे।

 विक्रम उसके साइड में बैठा सिगरेट के कश ले रहा था और उसे ही देख रहा था।

 फ़ना डर गई। तभी उसे विक्रम का गुस्सा याद आ गया।

 विक्रम का वो भयानक रूप उसके अंदर बस चुका था। विक्रम की आंखें उसे ही घूर रही थी।

 फ़ना ने हिलने की हिम्मत नहीं की। फ़ना की आंखों में फिर आंसू आ गए।

 फ़ना बिना आवाज किए रो रही थी। फ़ना घूम गई।

 फ़ना ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया। वो सुबक सुबक कर रो रही थी।

 विक्रम ने फ़ना को सीधा किया। "तुम्हारी इतनी हिम्मत" विक्रम ने दांत पीसते हुए कहा।

 फ़ना ओर ज्यादा कांप गई। विक्रम ने उसे घुमाया.।

 फ़ना की आंखों से आंसूू गिर रहे थे। "स सर प्लीज" फ़ना धीरे-धीरे विक्रम से दूर खिसकने लगी।

 विक्रम उसे घूर रहा था। विक्रम ने उसे उठा लिया और बाथरूम में लेकर चला गया।

 फ़ना बस कांप रही थी।

विक्रम भी ये बखूबी महसूस कर रहा था। उसकी कंपन, जो विक्रम के हाथों में झनझनाहट महसूस करा रही थी।

 विक्रम ने फ़ना को बाथटब में लिटा दिया। फ़ना विक्रम से डर रही थी।

 वो बाथटब में भी सिकुड़ गई। विक्रम ने फ़ना को अपनी तरफ खींच लिया और उसके बाल पकड़ते हुए उसे अपनी तरफ देखने के लिए मजबूर करने लगा। फ़ना के होंठ कांपने लगे।

 फ़ना ने उसकी तरफ देखा। लेकिन कुछ नहीं बोल रही थी। विक्रम उसे देख तिरछा मुस्कुरा दिया।

 विक्रम ने फ़ना का सिर अपने सीने पर रखा। फ़ना अभी भी कांप रही थी।

विक्रम ने फ़ना को अपनी गोद में बैठाते हुए, उसके बिखरे बालों को ठीक करते हुए कहा, "मुझे अपनी चीजें किसी के साथ शेयर करना बिल्कुल पसंद नहीं। मुझे ये बिल्कुल मंजूर नहीं कि मेरी चीजें किसी ओर को खुद को छूने दे।" विक्रम ने उसके होठों पर अपना अंगूठा फेरते हुए कहा।