अब तक
फ़ना नींद में ही अपने मॉम डैड को बुला रही थी और उसका शरीर अभी भी कांप रहा था। उसने फ़ना के चेहरे को देखा, जिस पर उंगलियों के काले निशान छपे हुए थे।
फ़ना का बुखार पूरी तरीके से उतर गया था। निशा अभी तक सदमे में थी। उसने देखा कि फ़ना सो गई। इसलिए वह जल्दी से फ़ना के लिए कुछ कुक करने लगी। अचानक से ही फ़ना नींद में जोर-जोर से चिल्लाने लगी। "मुझे छोड़ दो, मुझे जाने दो, आई एम सॉरी, मैं कभी आपको अपनी शक्ल नहीं दिखाऊंगी, प्लीज, छोड़ दीजिए मुझे, हर्ट हो रहा है, दुख रहा है, आह्ह. मम्मा!"
अब आगे-
फ़ना नींद में ही जोर-जोर से चिल्लाते हुए खुद को छोड़ने की भीख मांग रही थी, किसी से। वह इतनी जोर जोर से अपना सर इधर-उधर पटक रही थी, मानो जैसे वह स्ट्रगल कर रही हो, किसी से खुद को छुड़ाने के लिए। प्लीज, बहुत हर्ट हो रहा है, छोड़ दो मुझे।
फ़ना को ऐसे नींद में चिल्लाते हुए देखकर निशा उसके पास भाग कर आई। और फ़ना को जगाते हुए बोली, "फ़ना,फ़ना, फ़ना।"
निशा ने फ़ना को देखा। फ़ना की सांस भारी हो गई थी। वह कोई बहुत बुरा सपना देख रही थी। उसे सपने की वजह से उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे और शरीर उसका वापस से लाल पड़ने लगा।
निशा इतना घबरा गई थी कि उसकी आंखों में भी आंसू आ गए। उसने जल्दी से फ़ना को जोर से हक कर लिया और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली, "फ़ना, रिलैक्स, मैं हूं तेरे साथ, तेरे साथ कोई कुछ भी नहीं करेगा। प्लीज, अपनी आंखें खोल, फ़ना।" फ़ना की हालत देखकर निशा भी कुछ नहीं कर पा रहे थी।
फ़ना झटके से होश में आई और उसने अपनी आंखें खोली। जब उसने देखा कि वह निशा के साथ है। तब उसने गहरी सांस ली। उसने निशा को कसकर पकड़ लिया और जोर-जोर से रोते हुए बोली, "यह मेरे साथ क्या हो गया निशा, मैंने क्या किसी का बिगड़ा था। मैंने कभी किसी को हर्ट नहीं किया, लेकिन यह दर्द सिर्फ मुझे ही क्यों मिल रहा है। लेकिन मुझे ही कीमत क्यों चुकानी पड़ी।
मुझे ही यह तकलीफ का जरिया क्यों बनाया गया। मैंने कुछ भी नहीं किया। निशु, मुझसे बस गलती से वाइन की बोतल गिर गई थी। हमने कुछ भी नहीं किया था और उसकी इतनी भारी कीमत, मुझे चुकानी पड़ी। बहुत दर्द हो रहा है, निशु मुझे और नहीं बर्दाश्त हो रहा।" रोते हुए इमोशनल होकर वह बोल रही थी, यह सब और निशु भी चाह कर कुछ नहीं कर पा रही थी। अपनी दोस्त के लिए मजबूर थी। हकीकत तो यह थी कि वह दोनों ही गरीब थी और गरीबों की कोई नहीं सुनता।
गरीबी से हार चुकी थी निशु और फ़ना दोनों, आज उन्हें पता चल रहा था कि अगर अमीर लोग चाहे, तो एक गरीब को खिलौना बना सकते हैं। उनकी नजरों में उनकी कोई इज्जत नहीं होती। इस वजह से तो फ़ना का शिकार किया, उन्होंने।
फ़ना आंखों में आंसू लिए उस भयानक पल को भूलना चाहती थी। लेकिन चाहकर भी नहीं भुला पा रही थी। काश! वह अपनी जिंदगी का यह दर्दनाक पल मिटा सकती, लेकिन उसके पेट में इतना तेज दर्द हो रहा था कि रह रहकर फ़ना की सांस रुक रही थी।
फ़ना कभी-कभी तड़प जाती। उसे उल्टी आने लगी। निशु इतना घबरा गई थी कि उसने कहा, "फ़ना प्लीज़, हॉस्पिटल चलो, वरना तुम्हें कुछ हो जाएगा।"
फ़ना ने रोते हुए कहा, "मैं हॉस्पिटल नहीं जा सकती, हॉस्पिटल जाने के लिए पैसे नहीं है मेरे पास, वह लोग मुझे भगा देंगे। कोई नहीं सुनेगा हमारी, मुझे इस दर्द में ही जीना है।"
निशु फ़ना के पास उसका हाथ पकड़ कर बैठी हुई थी। वह अपनी दोस्त को इस बुरे हालात में अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी।
उसने फ़ना का सर अपनी गोद में रख लिया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए बोली, "तुम सो जाओ, फ़ना, मैं तुम्हारे साथ हूं, कोई कुछ नहीं करेगा।"
फ़ना यह नहीं बोल पा रही थी कि वहां मौजूद एक भी शख्स ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की। उसकी चीखें किसी को सुनाई नहीं दे रही थी। वह गिड़गिड़ा रही थी, भीख मांग रही थी, रो रही थी, भाग रही थी, लेकिन वहां खड़ा हर शख्स तमाशा देख रहा था।
फ़ना को बहुत बड़ा सदमा लगा था और वह भूल नहीं पा रही थी, इस ट्रॉमा को।
फ़ना की ऐसी हालत देखकर निशु उसके लिए खाना लेकर आई। निशा ने फ़ना को अपने हाथों से खिलाना चाहा, लेकिन फ़ना ने मना कर दिया कि उसे भूख नहीं है। निशा ने फ़ना को समझाते हुए कहा, "फ़ना, तुम्हें थोड़ा बहुत खाना होगा, वरना जैसी तुम्हारी हालत है, मुझे डर लग रहा है।"
"मुझे मरना है निशु, प्लीज कुछ करो।" निशा ने फ़ना को समझाते हुए कहा, "फ़ना, तुम क्या बोल रही हो, तुम्हारा भाई हॉस्पिटल में एडमिट है और उसे तुम्हारी जरूरत है।"
फ़ना को एकदम से याद आ जाता है। फिर उसने निशु के हाथ से खाना खाया और दो बाइट ही उसने ली थी कि उसे उल्टी हो गई और उसके पेट में दोबारा से तेज दर्द होने लगा। वह उठ भी नहीं पा रही थी। उसके पैर हाथ सब सूज गए थे।
उसका गाल भी सूज कर लाल हो गया था और उस पर मौजूद वह नीले निशान भयानक दिख रहे थे।
फ़ना को उल्टी करते हुए देखकर निशु ने अपना फोन उठाया और बोली, "फ़ना, मैं नहीं रुक सकती, वरना तुम्हें कुछ हो जाएगा।"
फ़ना ने निशु का हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया और उसके बाद वह जबरदस्ती अपने हाथों से ही खाना खाने लगी, जबरदस्ती। फ़ना अपने मुंह में खाना ठूंस रही थी, क्योंकि उसे ठीक होना था। अगर वह बीमार पड़ गई तो प्रॉब्लम हो जाएगी। उसे अपने भाई को बचाना था, जिसके लिए उसे पैसों की बहुत जरूरत थी। उसे काम करना होगा। उसे फिर कल काम पर जाना है। उसके पास कोई और ऑप्शन नहीं था।
फ़ना को ऐसे जबरदस्ती खाते हुए देखकर निशु दंग रह गई।
फ़ना के पेट में इतना तेज दर्द हो रहा था कि उसे लगा कि अभी उसकी जान निकल जाएगी।
"ओर मिलेगा निशु, मुझे बहुत भूख लगी है।"
नीशू ने अपने आंसू पोंछे और फ़ना को ओर खाना दिया। फ़ना ने वह भी जबरदस्ती अपने मुंह में ठूंस लिया।
फ़ना ने पेन किलर ली और बेड पर लेट गई। उसने अपने पेट पर हाथ रखा हुआ था, आंखों से आंसू बह रहे थे। लेकिन जिंदगी में कुछ हादसे भूलने के लिए ही होते हैं।
अगली सुबह
फ़ना ने धीरे से अपनी आंखें खोली और उठकर बैठ गई। अब उसके बदन में, जो दर्द हो रहा था, वह कम हो गया था। लेकिन पेट में अभी भी हल्का-हल्का दर्द हो रहा था। उसकी लोअर बॉडी में सूजन आ गई थी। फ़ना हिम्मत करके उठी और उसके बाद वह फ्रेश होने गई। वहां पर उसने शावर लिया और जल्दी से रेडी होने लगी। क्योंकि फ़ना होटल में भी वेट्रेस का काम करती थी, डे शिफ्ट में।
फ़ना जल्दी से रेडी हुई और उसके बाद वह ऑटो लेकर होटल के लिए निकल गई। वहां पर उसने अपने कपड़े बदले और अपने काम में लग गई। फ़ना ने सुबह से कुछ खाया नहीं था, जिस वजह से उसे चक्कर आ रहे थे। उसके साथ इतना कुछ हो गया था। उसके बावजूद भी उसे काम करना पड़ रहा था। फ़ना ठीक से चल नहीं पा रही थी और बीच-बीच में, जब वह बैठ जाती तो उसे बहुत डांट पड़ती मैनेजर से। फ़ना डर की वजह से काम कर रही थी। क्योंकि उसे पैसों की जरूरत थी। अगर मैनेजर ने गुस्से में आकर उसे फायर कर दिया, तो फिर फ़ना कहां जाएगी।
फ़ना कभी-कभी वॉशरूम में जाकर उल्टियां करके आई और फिर वापस से बिना किसी को कुछ बोले, अपने काम में लग जाती।
उसे 1 मिनट का भी रेस्ट नहीं दिया जाता था। धीरे-धीरे शाम हो गई और फ़ना की शिफ्ट खत्म हो गई थी। फ़ना इतना थक गई थी कि उससे अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था।
उसके पेट में धीरे-धीरे दर्द तेज होने लगा था। वह ऑटो लेती है और उसके बाद वह यहां से Bar के लिए निकल गई।
फ़ना बार क्लब पहुंची, तो वह अपने लंगड़ाते हुए कदमों के साथ अंदर जा रही थी। मैनेजर ने जैसे ही फ़ना को देखा। वह हैरान हो गया कि यह लड़की जिंदा कैसे बच गई।
वहां पर मौजूद ओर भी लड़कियां, आज फ़ना को देखकर थोड़ा हैरान थी कि यह लड़की आज फिर आ गई। कल उन सब ने सुना था कि इसके साथ क्या हुआ है, इसको कैसे एक डेविल सा इंसान घसीट कर ले जा रहा था। यह जिंदा कैसे बच गई, क्योंकि उन्होंने सुना था कि वह आदमी किसी को नहीं छोड़ता, वह इतना डेंजरस था।
फ़ना चुपचाप से उस चेंजिंग रूम में गई। वहां पर उसके नाम की ड्रेस रखी हुई थी। फ़ना ने उसे ड्रेस को पहना . और खुद को मिरर में देखने लगी।
मैनेजर फ़ना के पास आया और उसने फ़ना को देखते हुए कहा, "तुम आज वापस आ गई।"
मैनेजर को देखकर फ़ना ने कुछ भी नहीं कहा और उसने सिर्फ अपना सर हां में हिला दिया। वह बहुत मुश्किल से अपने आंसू रोक रही थी। वह यहां पर नहीं आना चाहती थी। लेकिन मजबूरी ने उसे बांध रखा था। फ़ना की हालत देखकर कोई भी कह सकता था कि उसके साथ क्या हुआ है। लेकिन इस बारे में कोई भी बात नहीं कर रहा था।
सबने फ़ना को देखा था और वह सब जानते थे कि उसके साथ रेप हुआ है। लेकिन इस बारे में बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी। उस मैनेजर ने फ़ना के गाल को देखा, जो सूजा हुआ था और उसकी चाल में लडखडाहट थी।
फ़ना के हाथ में ट्रे थी और वह सब को ड्रिंक सर्व कर रही थी। फिर मुड़ कर उसने किसी की तरफ नहीं देखा। डर की वजह से या वह शर्मिंदा थी, वहां पर कुछ और घिनौनी नजरे उसे घूर घूर कर देख रही थी।
वही वह बदतमीज आदमी भी फ़ना को देख रहा था। फ़ना को जिंदा देखकर उसे हैरानी हुई और उसके होठों पर भी एक क्रीपी स्माइल आ गई।
वह सबको ड्रिंक सर्व कर रही थी। उसने किसी की तरफ नहीं देखा। लेकिन जब वह लास्ट में पहुंची और उस टेबल पर जब वह ड्रिंक रख रही थी, तभी अचानक से उसके दिल की धड़कन बढ़ गई और उसकी उंगलियां कांपने लगी। उसने उस 6 फुट 3 इंच के आदमी को देखा, जो लास्ट टेबल पर बैठा हुआ था और उसे देखते ही एक पल के लिए फ़ना की जान हलक में आ गई। उसने सिर नीचे किया और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। फ़ना थर-थर कांपने लगी।
फ़ना ने डरते हुए वाइन की बोतल उस टेबल पर रखी। इस बार उसने संभाल कर रखी थी कि गलती से भी गिर ना जाए।
फ़ना के कांपते हुए हाथों को वह 6 फुट 3 इंच का आदमी देख रहा था। फ़ना वहां से भाग जाना चाहती थी। फ़ना के हाथ इतने कांप रहे थे कि वाइन की बोतल आखिरकार उससे गिर ही गई और उसी पल में फ़ना की सांस रुक गई।
फ़ना ने रोते हुए कहा, "सर, आई एम सॉरी सर, मैंने यह जानबूझकर नहीं किया। मुझसे गलती से हो गया।" फ़ना खुद में ही रोने लगी और वह जल्दी से बोली, "सर, मैं इसे साफ कर देती हूं। प्लीज सर, कुछ मत करिएगा।"
वही उस आदमी ने फ़ना को रोते हुए देखा और वह घबराहट में उस टेबल को साफ करने लगी थी। तभी उस आदमी ने उस का हाथ पकड़ लिया। उसने इतनी मजबूती से फ़ना का हाथ पकड़ा था कि फ़ना दर्द की वजह से कराह उठी।
उस 6 फुट 3 इंच के आदमी की पकड़ से ही वह समझ गई थी कि वह कितने गुस्से में है। फ़ना की आंखों से ओर तेजी से आंसू बहने लगे। उसके होंठ थर-थर कांप रहे थे। उस 6 फुट 3 इंच के आदमी ने फ़ना को एकदम से खींचा और उसे अपनी लेप पर बिठा लिया।
फ़ना का शरीर इतना कांप रहा था कि उस आदमी ने भी फील कर लिया। उसने उस का सफेद पड़ चुका चेहरा देखा और फिर उसकी चीन पकड़ कर, उसका फेस ऊपर किया। फ़ना की पलकें झुकी हुई थी।
फ़ना ने रोते हुए कहा, "सर, मुझे माफ कर दीजिए, यह गलती से हुआ है, मैं इसे अभी साफ कर दूंगी।"
लेकिन वह 6 फुट 3 इंच का आदमी, एक तरफ फ़ना के उस मासूम से चेहरे को देख रहा था। फ़ना ने अपने हाथ जोड़ लिए थे।
उस आदमी ने उस के गाल पर अपना हाथ रखा और धीरे से प्रेस करते हुए बोला, " हम्म. I Don't like tears."
फ़ना रोते हुए बोली, "सर, प्लीज कुछ मत करिएगा। बहुत दर्द होता है" वह आदमी फ़ना की कमर को रब रहा था। "आह्ह. सर Please"
उस आदमी ने फ़ना की शर्ट के अंदर एक हाथ डालते हुए, उसके होठों के खिलाफ अपनी सर्द आवाज में बोला, "तुम्हें जब जरूरत हो तो मुझे कांटेक्ट करना. मैनें कल Enjoy किया।"
"सर, मैं वैसी लड़की नहीं हूं, आप मुझे गलत समझ रहे हैं।" फना अपनी घबराई आवाज में बोली, "मैं वह काम नहीं करती हूं, सर।"
उस 6 फुट के आदमी ने गुस्से से फ़ना का चेहरा प्रेस करते हुए अपनी तीखी आवाज में कहा, "मैंने तुमसे पूछा नहीं है, जितना कहा है, सिर्फ इतना सुन लो। तुम्हें जल्दी ही मेरी जरूरत पड़ेगी और अगर तुम अपनी बॉडी सेल नहीं करती, तो इस बार में क्या कर रही हो। तुम मेरे सामने भोली बनने का नाटक करना बंद करो।"
फ़ना ने रोते हुए कहा, "सर, मैं यहां पर एक वेट्रेस हूं।" उस 6 फुट के आदमी ने गुस्से से फ़ना को अपनी लेप से उठाकर झटके से दूर कर दिया। जिससे फ़ना नीचे गिर गई। फ़ना की चीख निकल गई और वहां मौजूद हर किसी का अटेंशन फ़ना पर चला गया। फ़ना जल्दी से खड़ी हुई और बिना सोचे समझे वहां से वह भाग गई।
वही वह 6 फुट का आदमी फ़ना को भागते हुए देखा और अपने वाइन के गिलास का एक सिप में पीकर, वह भी उठकर वहां से चला गया।
मैनेजर ने यह नजारा देखा, तो यही सोच रहा था कि क्या मिस्टर भारद्वाज को इस लड़की में इंटरेस्ट है?
"क्या वह इस लड़की को खरीदना चाहते हैं।" मैनेजर के दिमाग में कुछ ओर ही खुराफाती चल रही थी। आखिर यह लड़की जिंदा कैसे बच गई। कहीं ऐसा तो नहीं की मिस्टर भारद्वाज को इसने अपनी बॉडी सेल कर दी, जिस वजह से यह लड़की आज जिंदा है।
वही फ़ना एक कोने में बैठकर अपना मुंह दबाकर जोर-जोर से रो रही थी। उसका शरीर अभी भी डर की वजह से थर-थर कांप रही थी।
फ़ना उस बार क्लब से भाग जाती है। जब वह घर पहुंची तो बेड पर गिरते ही, वह जोर-जोर से रोते हुए बस यही बोल रही थी कि मम्मा पापा आप कहां चले गए मुझे छोड़कर, मुझे भी अपने साथ ले चलते.।
उसके पेट में इतना तेज दर्द होने लगा था गिरने की वजह से कि वह सांस नहीं ले पा रही थी।
फ़ना नहीं जानती थी कि आने वाली जिंदगी उसकी ओर दर्दनाक होने वाली है।