Mafia’s possession chapter 4 Luna Rinn द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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Mafia’s possession chapter 4

अब तक

वही फ़ना एक कोने में बैठकर अपना मुंह दबाकर जोर-जोर से रो रही थी। उसका शरीर अभी भी डर की वजह से थर-थर कांप रही थी। फ़ना उस बार क्लब से भाग जाती है। जब वह घर पहुंची तो बेड पर गिरते ही, वह जोर-जोर से रोते हुए बस यही बोल रही थी कि मम्मा पापा आप कहां चले गए मुझे छोड़कर, मुझे भी अपने साथ ले चलते.।

उसके पेट में इतना तेज दर्द होने लगा था गिरने की वजह से कि वह सांस नहीं ले पा रही थी।

फ़ना नहीं जानती थी कि आने वाली जिंदगी उसकी ओर दर्दनाक होने वाली है।

अब आगे-

नींद में ही फ़ना रोते हुए बड़बड़ा रही थी। वह इस स्ट्रोम से नहीं निकल पा रही थी। लेकिन उसे खुद को संभालना था।

निशा जब घर आई, तब उसने देखा कि फ़ना को बहुत तेज बुखार था। उसने उसे उठाने की कोशिश की और रात भर वह फ़ना के सर पर गीली पट्टियां रख रही थी। ताकि फ़ना का बुखार उतर जाए। वह हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। मनी प्रॉब्लम की वजह से कुछ डर भी रही थी और उसके साथ, जो हादसा हुआ था, उसने उसके कॉन्फिडेंस को ओर लॉ कर दिया था। वह दुनिया से अब छुप कर रहना चाहती थी।

ऐसे ही सुबह हो गई। निशा भी फ़ना के बगल में ही सो रही थी। आफ्टर ऑल वह भी पूरा दिन काम करती थी। रात में कब उसकी आंख लग जाती है, उसे भी पता नहीं चलता। इन दिनों निशा भी फ़ना के लिए बहुत परेशान हो रही थी।

अगली सुबह निशा ने फ़ना को काम पर जाने के लिए मना कर दिया। लेकिन फ़ना ने पेन किलर लेते हुए कड़वाहट से कहा, "मुझे काम करना होगा निशु, अदर वाइज सरवाइव करना मुश्किल हो जाएगा। तुम कब तक संभालेगी, मैंने रेंट भी नहीं दिया है और हमारा राशन भी खत्म होने वाला है।"

निशु भी चाह कर नहीं रोक पाती फ़ना को। फ़ना किसी तरह खुद को संभालती है और फिर वह चोल से बाहर निकल गई।

फ़ना ने ऑटो लिया। उसके पास अब थोड़े ही पैसे बचे थे। फ़ना ऑटो वाले को पैसे देती है और फिर वह होटल के अंदर चली गई। कपड़े बदलकर वो रेगुलर day की तरह अपना काम कर रही थी।

 धीरे-धीरे देखते ही देखते रात हो गई। फ़ना को आज बार क्लब जाने में डर लग रहा था कि कहीं दोबारा से उसकी मुलाकात उसे 6 फुट 3 इंच के आदमी से हो गई तो।

फ़ना अभी डरती हुई यह सब कुछ सोच ही रही थी। आज चाह कर भी वह अपने कदम नहीं बढ़ा पा रही थी। तभी उसका फोन रिंग करने लगा। फ़ना ने जब फोन पर हो रहे फ्लैश में उस नाम को देखा, तो उसने डरते हुए अपना हाथ बढ़ाकर उस फोन को उठा लिया। उसके दिल की धड़कनें बढ़ गई थी।

"हेलो, आप फ़ना बोल रही हूं।" यह हॉस्पिटल के डॉक्टर का कॉल था, जो उसके भाई का ट्रीटमेंट कर रहे थे । फ़ना ने धीरे से कहा, "यस डॉक्टर, बोलिए।"

 "आप अर्जेंटली हॉस्पिटल आ जाइए। हमें आपसे बहुत इंपॉर्टेंट बात करनी है।"

यह सुनकर फ़ना घबराते हुए बोली, "डॉक्टर, मेरा भाई ठीक तो है ना।"

"देखिए हम अभी कुछ कह नहीं सकते हैं, आपको हॉस्पिटल आना होगा। उसके बाद ही हम आपसे बात करेंगे।"

उस डॉक्टर ने इतना कहा और फ़ना के मुंह पर ही कॉल कट कर दिया।

फ़ना डिसएप्वाइंट होकर ऑटो से अस्पताल पहुंच जाती है। जब वह हॉस्पिटल पहुंचती है तो वह डॉक्टर की केबिन में बैठी हुई थी। डॉक्टर उससे यह बोल रहे थे कि आपको जल्द से जल्द पैसों का इंतजाम करना होगा, वरना आपके भाई का ऑपरेशन नहीं हो पाएगा।

हमने इसे कुछ दिनों के लिए होल्ड कर दिया था, सिर्फ आपके कहने पर, अगर हमने ज्यादा देर की, तो आपका भाई बच नहीं पाएगा। हम इस बात की कोई गारंटी नहीं लेंगे। देखिए हम जानते हैं कि आपके लिए पैसों का इंतजाम करना इतना इजी नहीं है, इस वजह से हमने आपको टाइम दिया था।

फ़ना ने रोते हुए कहा, "डॉक्टर, लेकिन मैं ट्राई कर रही हूं, जैसे ही पैसे का इंतजाम हो जाता है, मैं आपको जल्द से जल्द पैसे दे दूंगी। लेकिन प्लीज, आप मेरे भाई का ऑपरेशन करने से मना मत करिए।

उसके सिवा मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है। मैं कहीं से भी पैसे लेकर आऊंगी, लेकिन प्लीज आप ऑपरेशन करने से मना मत करिएगा।"

उस डॉक्टर ने फ़ना को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, "देखे, मुझे नहीं लगता कि आप पैसे का इंतजाम कर पाएंगी क्योंकि ऑपरेशन करने के लिए हमें 15 लाख से 17 लाख तक चाहिए।"

यह सुनकर फ़ना अपने आंखों से आंसू बहने से नहीं रोक पाई। वह इतनी मुश्किल से अपने भाई की दवाइयां का इंतजाम कर रही थी और अचानक से 15 -20 लाख रुपए भरना, उसके लिए इंपॉसिबल था। उसका खुद का खाने का गुजारा बहुत मुश्किल से हो रहा था। एक वक्त का तो खाना भी नहीं खाती थी, वह।

डॉक्टर की बात सुनकर फ़ना निराश होकर अस्पताल से बाहर आ गई। वह बेसुध सी सड़कों पर चल रही थी। उसके पास कोई ऑप्शन नहीं था। बार क्लब जाने के सिवा। एक वही रास्ता था, जिससे वह कुछ पैसे इकट्ठे कर कर डॉक्टर को दे सकती है।

फ़ना अपना मुंह छुपा कर वहीं सड़क पर बैठकर रो रही थी। बारिश तेज होने लगी थी। अपनी जिंदगी से निराश थी। अब उसे इतना भी कॉन्फिडेंस नहीं था कि कि वह अपने भाई को बचा पाएगी। फ़ना अपने आंसू पूछते हुए बार क्लब गई। वहां पर जाकर उसने रेगुलर की तरह रिवीलिंग ड्रेस पहनी। जिसे पहनने के बाद वह वहां पर मौजूद लोगों को ड्रिंक सर्वे कर रही थी। लेकिन फ़ना यह नहीं जानती थी कि एक और शख्स है, जो उसे ऊपर से नीचे तक अपनी लस्ट बड़ी नजरों से देख रहा है। यह वही बदतमीज आदमी था, जो स्टार्टिंग से ही फ़ना की बॉडी को चाहता था। वह फ़ना के साथ कुछ करना चाहता था, क्योंकि फ़ना का कोमल सा बदन मिला था, जिसे वह चाहता था।

 उस बदतमीज आदमी ने फ़ना को देखते हुए उसे अपनी तरफ बुलाया। फ़ना ना चाहते हुए भी उसके पास गई और वह उसे बोली, "जी सर, आपको ड्रिंक चाहिए।"

फ़ना जानती थी कि वह आदमी उसे गंदी निगाहों से देख रहा है। लेकिन कहते हैं ना कि कभी-कभी सब जानते हुए भी हमें अवॉइड करना पड़ता है और न जानने का नाटक करना पड़ता हैं।

उस बदतमीज आदमी ने फ़ना का हाथ पकड़ लिया और उसे अजीब तरीके से सहलाने लगा और बोला, "तुम मुझसे दूर क्यों भाग रही हो, इधर आओ, कुछ बातें करो हमारे साथ बैठकर।"

फ़ना ने अपना हाथ पीछे लेने की कोशिश करते हुए धीरे से कहा, "लेकिन सर, मुझे और भी लोगों को ड्रिंक सर्व करना है, मैं एक वेट्रेस हूं।"

"तुम मुझे मना कर रही हो।" उस बदतमीज आदमी ने थोड़ा सा चीढ़ते हुए कहा। इस पर फ़ना डर गई कि अगर कस्टमर गुस्सा हो गया, तो मैनेजर उसके काम के पैसे उसे नहीं देगा। इसलिए फ़ना उस बदतमीज आदमी के बगल में मजबूरन बैठ गई।

उस बदतमीज आदमी का नाम रमन था। रमन ने फ़ना की कमर पर अपना हाथ रखा और उसे सेंशुअल वे में सहलाने लगा। 19 साल की फ़ना डर से कांप गई और उसकी आंखों में आंसू आ गए। रमन ने फ़ना के शरीर पर मौजूद, उन काले निशानों को देखते हुए कहा, "दूसरों को तुम खुश रख सकती हो, मुझे खुश रखने में तुम्हें क्या प्रॉब्लम है मैं तुम्हें तुम्हारी एक रात की कीमत दूंगा, चुपचाप मेरे साथ कमरे में चलो और वह सब करो, जो मुझे खुश करें।"

रमन के शब्दों को सुनकर कंपकंपी मच जाती है, फ़ना के अंदर कि हर कोई क्यों उसकी बॉडी को खरीदना चाहता है। क्या वह सबको एक चीज दिखाई दे रही है, जैसे खिलौना।

एक खिलौने की तरह क्यों ट्रीट कर रहे है सब उसे। वह एक इंसान है, जिंदा इंसान, जिसके दिल में फिलिंग्स है। जिसे बुरा लगता है, जिसे दर्द महसूस होता है। लेकिन कोई भी उसे समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रहा। उसके सामने दुनिया का वह खिलौना रूप सामने था। उसे मासूम को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे करना क्या है।

रमन ने फ़ना के उभारों पर अपना हाथ रखा। वैसे ही फ़ना ने उसका हाथ दूर झटक दिया और कांपते हुए खड़ी होकर वहां से भाग गई। रमन को इतना तेज गुस्सा आया कि उसने वाइन की बोतल को जोर से टेबल पर पटक दिया और मैनेजर को जोर से चिल्ला कर बुलाया। मैनेजर रमन के पास भाग कर आया। रमन उसका रेगुलर कस्टमर था। जिस वजह से उसे नाराज करना अफोर्ड नहीं कर सकता था। मैनेजर ने रमन से कहा, "येस सर, आपको कोई प्रॉब्लम हुई।"

"तुम्हारे यहां की वेटर के भाव बढ़ गए हैं। मुझे लगता है कि तुम्हें अपना बार बंद करवाना है। वह मुझे भाव दिखा कर, मुझे मना कर चली गई। ऐसी भी क्या कीमत है उसकी, जो मैं नहीं चुका सकता।"

अब मैनेजर रमन को क्या बताता कि मिस्टर विक्रम भारद्वाज की नजर है, फ़ना पर। कुछ तो बात होगी इस लड़की के अंदर, लेकिन मैनेजर रमन को यह जवाब देकर गुस्सा नहीं दिलाना चाहता था। इसलिए उसने फ़ना का साइड लेते हुए कहा, "मिस्टर रमन, प्लीज समझने की कोशिश करिए, उसे आए हुए सिर्फ दो दिन हुए है। वह अभी इस माहौल में ढलने की कोशिश कर रही है और आप फिकर मत करें, कुछ दिनों के बाद, वह खुद आकर आपकी बाहों में आकर समा जाएगी और उसके बाद, आप जो चाहे, उसके साथ कर सकते हैं।"

मैनेजर कुछ इस अंदाज से बोलता है कि उसकी बात सुनकर रमन के होठों पर तिरछी स्माइल आ गई। उसे मैनेजर की बात पसंद आई थी। उसने मैनेजर से कहा, "तो फिर आज के लिए किसी को मेरे पास भेज दो।"

इस पर मैनेजर ने अपना सिर हिला दिया और उसके बाद उसने चंपा खली को रमन को हैंडल करने के लिए कह दिया और चंपा कली अपनी अदाएं दिखाते हुए रमन को अपने जाल में फंसा कर कमरे में ले गई और उसके बाद, वहां पर उनका वही सिलसिला शुरू हो गया, जो हर रात को होता था।

इधर फ़ना अपने मुंह पर हाथ रखकर खुद को शांत कर रही थी। मैनेजर उसके पास आया और उसने फ़ना को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, "तुम मेरे कस्टमर को गुस्सा क्यों दिलाती हो, तुम जानती भी हो कि अगर एक ने भी गुस्सा किया, तो उसके बाद तुम्हें मैं भी नहीं बचा पाऊंगा और तुम्हारे पैसे तो तुम भूल ही जाना।"

इस पर फ़ना ने रोते हुए कहा, "सर, मैं उनको गुस्सा नहीं दिलाना चाहती थी। लेकिन वह मेरे साथ क्या करना चाहते थे। आप जानते हैं, मैं वह वैसी लड़की नहीं हूं।" मैनेजर ने फ़ना को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, "तुम कैसी लड़की हो, इससे फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर कस्टमर नाराज होकर चला गया, तो तुम्हारे पैसे तुम्हें नहीं मिलेंगे। तुम्हें उन्हें खुश करने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ना और तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारी डिमांड है। मिस्टर भारद्वाज भी तुम्हारे करीब आना चाहते हैं। तुम इसका एडवांटेज उठाकर अपने भाई के ऑपरेशन के लिए पैसे इकट्ठा कर सकती हो। तुम जानती भी नहीं हो कि मिस्टर भारद्वाज कितने पावरफुल है। उनके सामने किसी की जुबान नहीं खुलती, तुम उनसे जितने पैसे मांगोगी, वह तुम्हें उतने पैसे दे देंगे।"

 मैनेजर ने जो सजेस्ट किया था फ़ना को। फ़ना ने रोते हुए कहा, "मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगी।"

इतना बोलकर फ़ना ने मैनेजर को धक्का देकर वहां से चली गई। मैनेजर ने फ़ना को जाते हुए देखा और वह खुद से बोला, "एक न एक दिन तुम्हें इस दलदल के अंदर अपने कदम रखने होंगे।"

फ़ना वापस से ड्रिंक सर्व करने आ गई तो वहां पर उसने विक्रम भारद्वाज को देखा।

विक्रम भारद्वाज वहां पर बैठा हुआ था। उसे देखते ही एक बार फिर फ़ना के पैर कंपाने लगे थे कि वह आगे बढ़ ही नहीं रही थी। लेकिन उसके कान में डॉक्टर की आवाज सुनाई दे रही थी।

"अगर अपने पैसों का इंतजाम नहीं किया तो आपका भाई नहीं बच पाएगा।"

फ़ना जब मिस्टर भारद्वाज की टेबल के पास पहुंची और उन्होंने उनके ड्रिंक के अंदर जैसे ही वाइन सर्व की, श्री भारद्वाज ने फ़ना का हाथ पकड़ लिया।

फ़ना हड़बड़ा गई और उसने अपनी डरती हुई निगाहों से विक्रम की तरफ देखा। विक्रम उसे अपनी तीखी आंखों से देख रहा था। विक्रम ने एकदम से उस को पकड़ कर अपने पास खींच लिया और फिर उसकी कमर पर अपना हाथ रखकर उससे देखते हुए उसके गाल पर किस कर दिया।

फ़ना की आंखों में आंसू आ गए। विक्रम ने उस को अपनी लैप पर बैठा लिया और फिर बिना कुछ बोले वह ड्रिंक करने लगा।

उसका एक हाथ फ़ना की कमर पर था और वह चुपचाप उसकी गोद में बैठी हुई थी। आसपास के लोग यह देख रहे थे और मैनेजर तो यह देखकर सबसे ज्यादा हैरान था। अचानक से उसके दिमाग में एक खतरनाक आइडिया आ गया कि फ़ना के द्वारा वह मिस्टर भारद्वाज से काफी सारे पैसे ऐंठ सकता है। फ़ना उनके बार क्लब में एक ऐसी लड़की थी, जिसके अंदर पहली बार मिस्टर भारद्वाज ने इंटरेस्ट दिखाया था। शायद वह उसकी कम उम्र के ऊपर लट्टू हो गए थे।

अब मिस्टर भारद्वाज की गोंद में जो लड़की बैठी हुई थी। अब उसे देखने की हिम्मत किसी के अंदर नहीं थी।

वही रमन ने चोर निगाहों से फ़ना को जब मिस्टर भारद्वाज की गोद में देखा।

रमन ने गुस्से से अपने दांत पीस लिए। वही फ़ना तो चुपचाप बैठी हुई थी और हिल डुल भी नहीं रही थी। वह मुश्किल से धीरे-धीरे सांस ले रही थी। अगर उसने थोड़ी सी भी गड़बड़ कर दी और मिस्टर भारद्वाज को गुस्सा दिला दिया तो मिस्टर भारद्वाज कहीं दोबारा उसके साथ वही सब ना करने लगे।

विक्रम ने सिर्फ घुरकर फ़ना की तरफ देखा और फिर उसके चेहरे को अपने करीब करते हुए, उसने जो ड्रिंक का गिलास पकड़ा हुआ था, उसे उस के मुंह से लगा दिया।

मिस्टर विक्रम जबरदस्ती फ़ना को वाइन पिला दिए। जिससे फ़ना का गला जलने लगा और कड़वाहट के कारण उसे खांसी आने लगी।

विक्रम भारद्वाज फ़ना के साथ बिल्कुल भी नरम नहीं थे। वह डर से कांप रही थी, उनकी गोद में बैठी बैठी।

मिस्टर भारद्वाज ने एक बार फिर से फ़ना के गाल पर अपने होंठ रख दिए।

उसके बाद उन्होंने फ़ना की गर्दन पर जैसे ही अपनी उंगलियां फैरी, फ़ना ने धीरे से कहा, " सर"