CRAVE - Part - 11 Aarika Shadow द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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CRAVE - Part - 11

अगला दृश्य...

अस्पताल का कमरा...

धीरे-धीरे युई की आँखें खुलने लगीं।

उसने उठने की कोशिश की, लेकिन अचानक उसके मुँह से एक हल्की सी सिसकी निकल गई।

"आह..." 😟

उसकी आवाज सुनकर पास बैठे समर की आँख खुल गई।

वह तुरंत उठकर उसके पास आया।

"आप ठीक हैं भाभी जी?"

युई ने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।

उसकी आँखों में हल्के आँसू थे...

लाल आँखें, अधूरी नींद और बिखरे हुए बाल।

ऐसा लग रहा था जैसे उसने खुद से ज्यादा किसी और की चिंता की हो।

युई ने धीमी आवाज में कहा—

"मैं ठीक हूँ..."

समर परेशान होकर बोला—

"कहीं दर्द तो नहीं हो रहा?"

"या कोई अजीब सा महसूस हो रहा है?"

"मैं डॉक्टर को बुलाता हूँ।"

युई तुरंत बोली—

"नहीं नहीं..."

"ऐसा कुछ नहीं है समर जी।"

"बस थोड़ी कमजोरी है।"

समर ने थोड़ी सख्त आवाज में कहा—

"कमजोरी?"

"लेकिन डॉक्टर ने कहा था कि आपको अपना ध्यान रखना है।"

युई ने उसकी चिंता देखकर बात बदल दी।

"नहीं..."

"वो बस बेहोशी की वजह से ऐसा हुआ।"

"मैं ठीक हूँ।"

समर कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर शांत होकर बोला—

"अगर आप कह रही हैं तो ठीक है।"

युई ने इधर-उधर देखा।

फिर पूछा—

"वैसे सिम्मी कहाँ है?"

"क्या वो घर चली गई?"

यह सुनकर समर को अचानक याद आया कि उसने तो सिम्मी को वहीं छोड़ दिया था।

युई ने आवाज दी—

"समर जी?"

समर थोड़ा संभलते हुए बोला—

"भाभी..."

"वो घर चली गई।"

युई को थोड़ा अजीब लगा।

लेकिन उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

"ठीक है।"

फिर धीरे से बोली—

"लेकिन मेरी वजह से आपको बहुत परेशानी हुई।"

समर ने सिर हिलाया।

"नहीं।"

"ये तो मेरा फर्ज था।"

युई ने गौर से उसे देखा।

"वैसे..."

"आप रात में सोए नहीं थे क्या?"

"आपकी आँखें लाल हैं।"

समर थोड़ा घबरा गया।

"नहीं नहीं..."

"बस थोड़ी जलन हो रही है।"

उसने झूठ बोल दिया।

युई हल्का सा मुस्कुराई।

"आप भी अपना ध्यान रखिए।"

"अब मुझे होश आ गया है।"

"आप थोड़ा आराम कर लीजिए।"

समर उसे मना नहीं कर पाया।

वह उठते हुए बोला—

"मैं चलता हूँ।"

"फिर फीमेल डॉक्टर को भेज देता हूँ।"

"आप आराम कीजिए।"

युई ने सिर हिला दिया।

"जी।"

---

कुछ देर बाद...

युई को सुबह ही अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

समर और युई फीमेल डॉक्टर के केबिन में थे।

डॉक्टर ने रिपोर्ट देखते हुए कहा—

"कुछ टेस्ट किए गए हैं।"

"बाकी सब सामान्य है।"

"लेकिन आपको अपना ध्यान रखना होगा।"

"क्योंकि आप प्रेग्नेंट हैं।"

"आपको आराम और अच्छी देखभाल की जरूरत है।"

युई ने सिर हिलाया।

"जी डॉक्टर, समझ गई।"

"बाकी रिपोर्ट कल तक आ जाएगी।"

"ठीक है।"

समर बोला—

"धन्यवाद डॉक्टर।"

---

कुछ देर बाद...

घर के बाहर कार रुकी।

युई धीरे से उतरकर अंदर चली गई।

उसके पीछे समर भी आया।

तभी समर बोला—

"भाभी जी..."

"मुझे एक कॉल करना है।"

"आप अंदर चलिए, मैं आता हूँ।"

युई ने सिर हिलाया।

"ठीक है।"

और अंदर चली गई।

उसके जाते ही समर ने फोन निकाला।

और एक नंबर मिलाया।

---

दिल्ली...

होटल का कमरा।

जुशेंग बिस्तर पर बैठा था।

फोन बजा।

उसने कॉल उठाया।

"हैलो..."

समर की आवाज आई—

"यार, कब आ रहा है तू?"

"तुझे पता है आज क्या हुआ?"

जुशेंग थोड़ा गंभीर हो गया।

"क्या हुआ?"

समर बोला—

"भाभी कल बेहोश हो गई थीं।"

"मैं उन्हें अस्पताल लेकर गया था।"

यह सुनते ही जुशेंग चुप हो गया।

उसका चेहरा बदल गया।

दिल में अचानक एक दर्द सा उठा।

उसने घबराकर पूछा—

"वाइफ कैसी है?"

समर बोला—

"अभी ठीक हैं।"

"लेकिन एक अच्छी खबर भी है।"

जुशेंग ने आँखें बंद कर लीं।

कुछ पल खामोश रहा।

फिर बिना कुछ कहे कॉल काट दिया।

समर फोन देखकर हैरान रह गया।

"अजीब है..."

"पूरी बात तो सुन लेता।"

फिर वह अंदर चला गया।

---

दिल्ली...

कमरे में...

जुशेंग अकेला बैठा था।

उसने अपना सिर पकड़ लिया।

उसकी आँखें नम हो गईं।

"मैं अब ये दूरी और बर्दाश्त नहीं कर सकता, वाइफ..." 😔

"मुझे तुम्हें देखना है..."

"तुम्हारा हाल पूछना है..."

"जानना है कि तुम कैसी हो।"

वह खिड़की के पास गया।

"और मुझे पता है..."

"कहीं ना कहीं इस दूरी की वजह मैं ही हूँ।"

"लेकिन मैं क्या करूँ?"

"यहाँ मेरी जिम्मेदारियाँ हैं..."

"मैं उनसे भाग नहीं सकता।"

उसकी आँखों के कोने भीग गए।

वह आसमान की तरफ देखने लगा।

"मैं तुम्हें बहुत याद कर रहा हूँ, वाइफ..."

"सुन रही हो ना?"

"मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है..."

"जो तुम्हें सुनना चाहिए।" 💔

---

दूसरी तरफ...

युई अपने और जुशेंग के कमरे में आई।

वह सीधा बालकनी में चली गई।

आसमान को देखते हुए उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

"हसबैंड..."

"आई रियली मिस यू..." 😢

"आप कहाँ हैं?"

"क्या आप हमारे बच्चे से नाराज़ हैं?"

"लेकिन हसबैंड..."

"ये तो हमारा बच्चा है ना..."

"जिसके लिए..."

वह आगे कुछ बोल नहीं पाई।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

---

दिल्ली...

जुशेंग भी बालकनी में खड़ा था।

धीरे से बोला—

"मुझे पता है..."

"तुम रो रही होगी।"

"तुम सोच रही होगी कि मैं हमारे बच्चे से नाराज़ हूँ..."

"लेकिन ऐसा नहीं है।"

"मैं बहुत खुश हूँ..."

"कि अब हमारी भी एक फैमिली होगी।" ❤️

"बस थोड़ा समय और..."

"मैं जल्दी वापस आऊंगा।"

"और तुम्हें मना लूंगा।"

---

फिर दोनों तरफ...

दो अलग-अलग जगहों पर खड़े होकर...

एक ही आसमान को देखने लगे।

युई ने आँसू पोंछते हुए कहा—

"मुझे पता है..."

"आप बस व्यस्त हैं।"

"वरना आप मुझसे नाराज़ होकर कभी दूर नहीं जा सकते।"

वह शांत होकर आसमान देखने लगी।

और दिल्ली में जुशेंग भी उसी आसमान को देखता रहा...

दोनों के बीच दूरी थी...

लेकिन प्यार अभी भी वहीं था। ❤️

अगला दृश्य...

दिल्ली...

जुशेंग कुछ देर तक बालकनी में खड़ा सोचता रहा।

फिर अचानक उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई।

"वाइफ..."

"तुमसे बात तो अभी भी कर सकता हूँ।"

"फोन से ही सही।"

यह कहते हुए उसने अपना फोन उठाया और युई को कॉल लगाया।

फिर फोन कान से लगाकर बालकनी में आ गया।

---

उधर...

युई अब भी बालकनी में खामोश खड़ी थी।

तभी अचानक अंदर से फोन की घंटी बजने लगी। 📱

वह तुरंत मुड़ी और अंदर गई।

फोन की स्क्रीन पर जुशेंग का नाम देखकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई।

"मुझे पता था..."

"आप मुझसे बात करना चाहते होंगे..." ❤️

वह खुशी से फोन उठाने ही वाली थी कि—

---

"सॉरी बॉस..."

"बहुत जरूरी था, इसलिए आना पड़ा।"

जुशेंग ने पीछे मुड़कर देखा।

वही लड़का खड़ा था।

उसके चेहरे पर जल्दी और चिंता साफ दिखाई दे रही थी।

"क्या हुआ?"

लड़का बोला—

"उस इलाके में हमला हुआ है।"

"हमें तुरंत चलना होगा।"

जुशेंग का चेहरा तुरंत बदल गया।

उसने फोन की तरफ देखा...

फिर कॉल काट दी।

फोन जेब में रखते हुए बोला—

"चलो।"

"सबको अलर्ट करो।"

लड़का—

"जी बॉस।"

---

कुछ देर बाद...

दिल्ली की सड़क पर।

जुशेंग कार में बैठा था।

सामने का माहौल तनाव भरा था।

चारों तरफ अफरा-तफरी थी।

जुशेंग शांत चेहरे के साथ सब देख रहा था।

उसकी आँखों में गुस्सा था।

"मालिक..."

उसने धीरे से कहा।

"ये तुम्हारा काम है।"

"मुझे पता है।"

तभी उसका फोन फिर बजा।

एक बार...

दो बार...

तीन बार...

चार बार...

लेकिन हर बार कॉल कट हो गई।

---

उधर...

युई फोन हाथ में लिए खड़ी थी।

कुछ पल तक स्क्रीन देखती रही।

फिर धीरे-धीरे उसके चेहरे की मुस्कान कम हो गई।

उसकी आँखों में हल्की उदासी आ गई।

"कोई बात नहीं..."

"शायद बिजी होंगे।"

उसने खुद को समझाने की कोशिश की।

"मुझे पता है..."

"वो जानबूझकर ऐसा नहीं कर सकते।"

लेकिन फिर भी...

दिल के किसी कोने में एक खालीपन सा महसूस हो रहा था।

उसे अच्छा नहीं लग रहा था।

क्योंकि वह सिर्फ एक फोन कॉल नहीं थी...

वह अपने हसबैंड की आवाज सुनना चाहती थी। 💔

✍️A.Shadow 🖤
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