दृश्य वहीं से शुरू होता है—
काली चमचमाती कार धीरे-धीरे विरेला विला के मुख्य द्वार के भीतर प्रवेश कर रही थी। 🚗🖤
"विरेला हेल..."
मुख्य गेट पर सुनहरे अक्षरों में यही लिखा था।
नाम थोड़ा अजीब ज़रूर था, लेकिन यह जगह भी किसी साधारण महल जैसी नहीं थी।
पूरा विला काले और सुनहरे रंग के अनोखे मेल से बना हुआ था। दूर से देखने पर वह किसी परीकथा और अंधेरे रहस्य का मिश्रण लगता था। 🌙✨
बगीचे के एक हिस्से में तरह-तरह के फूल खिले हुए थे, जबकि बाकी जगह शांत और व्यवस्थित थी।
कार अंदर आकर रुकी।
दरवाज़ा खुला।
एक लंबा, आकर्षक युवक बाहर निकला।
उसके हाथों में आसमानी रंग के गुलाबों का एक खूबसूरत गुलदस्ता था। 💙🌹
आसमानी गुलाब क्यों?
उसका जवाब अभी बाकी था।
युवक धीमे कदमों से विला के अंदर चला गया।
इतना बड़ा विला होने के बावजूद वहाँ अजीब-सी शांति थी।
न कोई शोर।
न कोई भाग-दौड़।
बस खामोशी...
शायद यही खामोशी इस जगह को और भी खास बना रही थी। 🖤
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उधर...
बालकनी में खड़ी युई का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। 💓
"हे भगवान..."
"जब मैं उन्हें अपना सरप्राइज़ दिखाऊँगी, तब क्या होगा?" 😳
यह सोचकर ही उसके गाल फिर से लाल हो गए।
कुछ देर बाद वह मुस्कुराई और कमरे की ओर लौट गई।
कमरा हल्के अंधेरे में डूबा हुआ था।
तभी...
उसे कदमों की आहट सुनाई दी।
टक...
टक...
टक...
आवाज़ धीरे-धीरे पास आती जा रही थी।
युई का दिल भी उसी रफ्तार से धड़कने लगा।
वह अपनी साड़ी का पल्लू सँभालते हुए दरवाज़े की ओर बढ़ी।
अचानक—
दरवाज़ा खुला। ✨
बाहर से आती रोशनी कमरे में फैल गई।
रोशनी के बीच एक परिचित चेहरा खड़ा था।
जुशेंग।
उसकी सुनहरी आँखें सीधे युई पर टिक गईं।
कुछ क्षणों के लिए दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।
जैसे समय थम गया हो। 🌙
युई घबरा गई।
'अरे! पहले सरप्राइज़ तो दिखाना था...'
वह मन ही मन बुदबुदाई।
दूसरी ओर, जुशेंग की नज़रें युई से हट ही नहीं रही थीं।
कमरे को काले और आसमानी गुलाबों से सजाया गया था। 🖤💙
हर तरफ मोमबत्तियों की हल्की रोशनी थी।
दीवारों पर उनकी यादों की तस्वीरें लगी थीं।
और कमरे के बीचों-बीच उनकी शादी की बड़ी तस्वीर मुस्कुरा रही थी।
लेकिन इन सबके बावजूद...
जुशेंग की नज़र सिर्फ एक इंसान पर थी।
युई पर। ❤️
वह धीरे-धीरे उसके पास आया।
"बेबी..." उसने धीमे स्वर में कहा।
युई ने सिर उठाकर उसकी ओर देखा।
"ये सब क्या है?" उसने आश्चर्य से पूछा।
युई ने घबराकर जवाब दिया—
"सरप्राइज़..." 🎁✨
जुशेंग ने एक बार फिर पूरे कमरे को देखा।
फिर मुस्कुराया।
"बहुत खूबसूरत है।"
उसकी आवाज़ में सच्ची खुशी थी।
युई की आँखें चमक उठीं। ✨
"सच?"
"हम्म..."
"बहुत।"
कुछ पल दोनों खामोश रहे।
फिर युई अचानक बोली—
"लेकिन अभी असली सरप्राइज़ बाकी है।"
जुशेंग ने भौंह उठाई।
"ओह?"
"हाँ!"
युई तुरंत एक छोटा-सा गिफ्ट बॉक्स लेकर वापस आई। 🎁
"पहले आँखें बंद कीजिए।"
"क्यों?" जुशेंग ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
"क्योंकि मैंने कहा है।"
"ठीक है, बेबी।"
आखिरकार उसने आँखें बंद कर लीं।
युई ने सावधानी से गिफ्ट उसके हाथों में रख दिया।
"अब खोलिए..." ✨
जुशेंग ने धीरे-धीरे बॉक्स खोला।
अगले ही पल...
उसकी मुस्कान गायब हो गई।
उसकी आँखों का रंग बदलने लगा।
चेहरा सख्त हो गया।
कमरे का माहौल अचानक भारी हो गया।
युई का दिल धक से रह गया। 💔
"हु... हबी?"
उसने घबराकर पूछा।
लेकिन जुशेंग की नज़रें अब सिर्फ उस गिफ्ट पर टिकी थीं...
और उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था—
उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया था। 🖤
युई जैसे ही जुशेंग के चेहरे की ओर देखने लगी, उसका दिल अचानक काँप उठा। 💔
न जाने क्यों...
उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई पुरानी और दर्दनाक याद उसके सामने लौट आई हो।
उसके हाथ ठंडे पड़ने लगे।
साँसें भारी हो गईं।
और वह अनजाने में एक कदम पीछे हट गई।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
उसकी आँखों में साफ डर दिखाई दे रहा था। 😰
'ये... ये क्या हो रहा है...?'
युई खुद भी नहीं समझ पा रही थी कि वह अचानक इतनी घबराई हुई क्यों महसूस कर रही है।
"ह... हबी..." उसकी आवाज़ काँप गई।
"हु... हबी..."
जुशेंग ने धीरे-धीरे सिर उठाया।
उसकी नज़रें सीधे युई पर आकर रुकीं।
कुछ क्षणों तक कमरे में खामोशी छाई रही।
फिर उसने अपने हाथ में पकड़े गिफ्ट बॉक्स की ओर देखा।
उसका चेहरा सख्त होता जा रहा था।
"ये क्या है, बेबी...?" ❄️
उसकी आवाज़ असामान्य रूप से शांत थी।
और वही शांति युई को और डरा रही थी।
"मैं... मैं बस आपको सरप्राइज़ देना चाहती थी..." 🥺
युई ने धीरे से कहा।
अचानक—
जुशेंग ने बॉक्स को दूर फेंक दिया। 🎁
बॉक्स फर्श पर गिरकर एक तरफ लुढ़क गया।
युई चौंक उठी।
उसकी आँखें फैल गईं।
"हबी...?" 😨
जुशेंग ने गहरी साँस ली।
उसकी मुट्ठियाँ कस चुकी थीं।
उसकी आँखों में गुस्से, दर्द और अविश्वास का अजीब मिश्रण दिखाई दे रहा था।
"क्या तुम्हें सच में लगा कि मुझे ये पसंद आएगा?" ❄️
कमरे का माहौल अचानक भारी हो गया।
कुछ पल पहले जहाँ खुशी थी...
अब वहाँ बेचैनी थी।
युई की धड़कनें तेज़ हो गईं। 💓
उसे लग रहा था जैसे कुछ बहुत गलत होने वाला है।
और सबसे डरावनी बात यह थी—
उसे खुद नहीं पता था कि आखिर गलती हुई कहाँ थी... 🖤
युई अब सचमुच डर गई थी। 😢
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर उसने ऐसी कौन-सी गलती कर दी थी।
वह तो बस जुशेंग को खुश करना चाहती थी...
बस इतना ही। 💔
सिसकते हुए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी और फर्श पर गिरे हुए गिफ्ट बॉक्स को उठाने के लिए झुक गई।
तभी—
"बेबी..." ❄️
जुशेंग की आवाज़ फिर गूँजी।
युई का हाथ वहीं रुक गया।
उसने धीरे से सिर उठाया।
उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं।
लेकिन वह कुछ नहीं बोली।
कुछ भी नहीं।
और यही बात जुशेंग को सबसे ज़्यादा परेशान कर रही थी।
"मैंने कहा था ना..." उसकी आवाज़ भारी हो गई।
"कि ये चीज़ मुझे पसंद नहीं है।"
युई ने काँपते हुए होंठ खोले।
"प... पता है..." 🥺
"फिर भी..."
उसकी आवाज़ टूट गई।
कमरे में फिर खामोशी छा गई।
"बेबी, प्लीज़..." जुशेंग ने गहरी साँस लेते हुए कहा।
लेकिन युई अब कुछ कहने की हालत में नहीं थी।
उसकी सारी हिम्मत जैसे खत्म हो चुकी थी।
"आप जानते हैं ना कि ये..." 😭
वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई।
"मुझे कुछ नहीं सुनना।" ❄️
जुशेंग ने बीच में ही रोक दिया।
युई की आँखें और भी भर आईं।
उसकी आवाज़ जैसे गले में ही अटक गई थी।
वह अब सिर्फ अपने हाथों में पकड़े उस गिफ्ट बॉक्स को देख रही थी।
उसी बॉक्स को...
जिसे उसने पूरे प्यार और उत्साह से तैयार किया था। 🎁💔
कुछ मिनट पहले तक वही गिफ्ट उसकी खुशी की वजह था।
लेकिन अब...
उसी गिफ्ट को देखकर उसके दिल में दर्द हो रहा था।
कमरे में सन्नाटा फैल गया।
एक ऐसा सन्नाटा...
जो किसी भी चीख से ज़्यादा दर्दनाक था। 🖤
जुशेंग कुछ क्षणों तक वहीं खड़ा रहा।
उसकी मुट्ठियाँ इतनी कस चुकी थीं कि उँगलियों की गाँठें सफेद पड़ गई थीं। ❄️
वह युई की तरफ देखने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
अचानक वह मुड़ा और तेज़ कदमों से बालकनी की ओर चला गया।
रात की ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई।
लेकिन उसके भीतर उठ रहा तूफ़ान शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। 🌙
उसने दोनों हाथ रेलिंग पर रख दिए।
धीरे-धीरे उसकी पकड़ मजबूत होती गई।
इतनी मजबूत कि ऐसा लग रहा था जैसे वह खुद को ही रोक रहा हो।
खुद को टूटने से...
या शायद खुद को बिखरने से।
उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं।
तभी...
एक पुरानी आवाज़ उसके कानों में गूँज उठी।
"मिस्टर वेलरा... आपको समझना होगा..."
"यह कभी संभव नहीं होगा..."
"और अगर हुआ भी..."
आवाज़ अचानक अधूरी रह गई।
"बस!" ❄️
जुशेंग ने झटके से आँखें खोल दीं।
उसका सीना तेजी से उठने-गिरने लगा।
जैसे कोई पुराना ज़ख्म फिर से ताज़ा हो गया हो।
कुछ पल तक वह बस अंधेरे आसमान को देखता रहा।
फिर उसके होंठ काँपे।
"बेबी..." 💔
उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि शायद हवा भी उसे ठीक से सुन न पाए।
"आई लव यू..."
"मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ..."
उसने आँखें बंद कर लीं।
"बहुत ज़्यादा..."
"शायद जितना तुम्हें कभी समझ भी न आए..."
उसकी आवाज़ भर्रा गई।
एक आँसू उसकी आँखों से निकलकर गाल पर लुढ़क गया। 🥀
"तुम नहीं जानती..."
"तुम मेरे लिए क्या हो..."
"तुम वो हो जिसके बिना..."
वह कुछ क्षणों के लिए रुक गया।
"...जिसके बिना मैं भी मैं नहीं हूँ।"
उसने सिर झुका लिया।
रात की खामोशी और भी गहरी लगने लगी।
"तुम समझती क्यों नहीं हो...?" 💔
उसकी आवाज़ टूट गई।
"कृपया..."
"समझने की कोशिश करो..."
बालकनी में खड़ा वह आदमी बाहर से जितना मजबूत दिखाई देता था...
अंदर से उतना ही डरा हुआ था। 🖤
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