अगला दृश्य...
रेहान दूर से उस तरफ देखता रहा।
फिर उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई।
बिना कुछ कहे...
वह मुड़कर वहाँ से चला गया। 🚶♂️
उधर...
युई को अब भी वही अजीब सी फीलिंग हो रही थी।
जैसे कोई अनजाना रिश्ता उसके आसपास मौजूद हो।
लेकिन वह खुद भी नहीं समझ पा रही थी कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा है।
फिर भी उसने किसी से कुछ नहीं कहा।
वह इस खूबसूरत पल का मज़ा खराब नहीं करना चाहती थी।
तभी समर की आवाज़ आई—
"भाभी जी, आप ठीक हैं ना?" 🤔
सिम्मी भी तुरंत बोली—
"हाँ जान, क्या हुआ?"
"तू कहीं खोई-खोई सी लग रही है।"
युई ने हल्की मुस्कान दी।
"नहीं..."
"बस ऐसा लग रहा है जैसे कोई करीबी रिश्ता..."
"या कोई अपना..."
"मेरे आसपास हो।"
सिम्मी तुरंत हँस पड़ी।
"जान, तू भी ना!" 😂
"मुझे लगता है तुझे जीजू की याद आ रही है।"
"इसलिए ऐसा महसूस हो रहा है।"
यह सुनकर समर कुछ नहीं बोला।
वह बस चुपचाप दोनों को देखता रहा।
उसका चेहरा धीरे-धीरे भावहीन हो गया।
कुछ पल बाद उसने बात बदलते हुए कहा—
"भाभी जी..."
"मुझे लगता है हमें कुछ खाने चलना चाहिए।"
"आपको भूख भी लगी होगी।"
युई कुछ कहने ही वाली थी कि—
सिम्मी बीच में कूद पड़ी।
"हम्म..."
"सिर्फ युई को नहीं..."
"मुझे भी भूख लगी है।" 😌
समर ने तुरंत कहा—
"तुम अपना देखो।"
सिम्मी ने मुँह बना लिया।
"जान, देख ना!"
"तेरा देवर कितना कंजूस है।" 😤
युई हँस पड़ी।
"ऐसा नहीं है यार।"
"वो मज़ाक कर रहे हैं।"
फिर उसने समर की तरफ देखा।
"है ना?"
समर ने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
"हाँ... हाँ..." 😅
"बिल्कुल।"
सिम्मी ने शक भरी नज़रों से उसे देखा।
फिर बोली—
"ठीक है।"
"चलो फिर।"
तीनों उठकर आगे बढ़ने लगे।
तभी समर बोला—
"भाभी जी, आप दोनों उधर से आइए।"
"मैं कार लेकर आता हूँ।"
युई ने सिर हिलाया।
"हम्म।"
और समर दूसरी तरफ चला गया।
---
कुछ देर बाद...
मंदिर की सीढ़ियों के पास।
युई और सिम्मी साथ-साथ चल रही थीं।
तभी सिम्मी अचानक बोली—
"जान, मुझे तुझसे कुछ पूछना था।"
"हम्म, पूछ।"
"तू फोन पर मुझे कोई गुड न्यूज़ बताने वाली थी ना?"
"अब बता भी दे।" 👀
युई थोड़ी शर्माई।
फिर मुस्कुराते हुए बोली—
"हाँ..."
"बताने वाली तो थी।"
दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखने लगीं।
सिम्मी ने इशारे से पूछा—
"क्या...?" 😯
युई ने शर्माते हुए धीरे से सिर हिलाया।
"हम्म..." 😊
एक पल की खामोशी...
और फिर—
"आआआआ!!!" 🎉
सिम्मी ज़ोर से चिल्ला उठी।
"मैं मौसी बन गई!!!"
"मौसी बन गई!!!" 💃😂🎉
वह खुशी से गोल-गोल घूमने लगी।
युई घबरा गई।
"सिम्मू!"
"बस कर यार!"
"सब लोग देख रहे हैं।" 😳
लेकिन सिम्मी कहाँ सुनने वाली थी।
"देखने दे!"
"आज तो खुशी मनाना बनता है!" 😆
युई बस मुस्कुराकर सिर हिलाती रह गई।
---
कुछ देर बाद...
सीढ़ियों के नीचे।
समर कार के पास खड़ा था।
"भाभी जी!" 🚗
"जल्दी आइए!"
"आपको भूख लगी होगी।"
"दोपहर के बारह बजने वाले हैं।"
सिम्मी धीरे से युई के कान में फुसफुसाई—
"ये हमें बुला रहा है या खुद को?" 😏
युई हँस पड़ी।
"यार, ऐसे नहीं बोलते।"
"तू भी ना..."
"चल अब।"
"ठीक है, चल।"
दोनों कार की तरफ बढ़ गईं।
---
दूसरी तरफ...
दिल्ली...
एक आलीशान होटल का कमरा।
जुशेंग अभी-अभी नहाकर बाहर आया था।
कमरे में सन्नाटा फैला हुआ था।
उसकी आँखें हल्की लाल दिख रही थीं।
मानो कई घंटों से ठीक से सोया न हो।
थकान साफ दिखाई दे रही थी।
लेकिन उसके चेहरे पर वही गंभीरता थी।
वह कुछ पल चुप खड़ा रहा।
फिर बिस्तर पर रखा फोन उठाया।
एक नंबर डायल किया।
📞
रिंग...
रिंग...
रिंग...
लेकिन किसी ने कॉल नहीं उठाया।
उसने दोबारा कोशिश की।
फिर भी कोई जवाब नहीं।
धीरे-धीरे उसकी उंगलियाँ फोन पर कसने लगीं।
जबड़े की नसें उभर आईं।
और अगले ही पल—
धड़ाम! 💥
फोन कमरे के दूसरी तरफ जा गिरा।
"आआआह!" 😠
जुशेंग गुस्से में चिल्ला उठा।
उसकी आवाज़ पूरे कमरे में गूंज गई।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
और आँखों में खतरनाक बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी...
अगला दृश्य...
कार के पास पहुँचते ही...
समर तुरंत आगे बढ़ा और युई के लिए पीछे वाला दरवाज़ा खोल दिया। 🚗
"आइए भाभी जी।"
लेकिन युई कुछ करती उससे पहले ही—
फटाक! 😌
सिम्मी जाकर उसी सीट पर बैठ गई।
बैठते ही उसने समर की तरफ एक चिढ़ाने वाली नज़र डाली।
फिर बोली—
"जान, तुम यहाँ नहीं बैठ सकती।"
"तुम प्रेग्नेंट हो।"
"तुम्हें आराम से बैठना चाहिए।"
"पीछे वाली सीट ज्यादा आरामदायक है।"
युई ने भी सिर हिलाया।
"हाँ समर जी।"
"आते समय भी थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा था।"
समर कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने सिम्मी को ऐसी नज़र से देखा मानो उसे वहीं उतार दे। 😑
सिम्मी ने जवाब में मासूम सा चेहरा बना लिया।
"क्या?" 😇
समर ने गहरी साँस ली।
फिर जबरदस्ती मुस्कुराया।
"जी भाभी जी।"
"आप पीछे बैठिए।"
यह कहते हुए उसने दूसरी तरफ का दरवाज़ा खोल दिया।
युई धीरे से मुस्कुराई।
"थैंक यू।" 😊
और सावधानी से पीछे बैठ गई।
समर दरवाज़ा बंद करके आगे आया।
फिर गुस्से में जाकर सिम्मी के बगल वाली सीट पर बैठ गया।
सिम्मी खिड़की से बाहर देखने लगी।
लेकिन उसके होंठों पर छुपी हुई मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। 😏
समर ने दाँत भींच लिए।
"एक दिन..." 😑
वह मन ही मन बुदबुदाया।
सिम्मी ने तुरंत सुन लिया।
"क्या कहा?" 👀
"कुछ नहीं।"
"अच्छा है।"
"क्योंकि तुम बोलते कम और परेशान ज्यादा करते हो।"
समर: "..." 😶
युई पीछे बैठी दोनों को देखकर मुस्कुरा रही थी।
उसे पता नहीं क्यों...
इन दोनों की लड़ाई बहुत मजेदार लगने लगी थी। 😂
---
दूसरी तरफ...
दिल्ली...
होटल का कमरा।
फर्श पर पड़ा टूटा हुआ फोन अब भी शांत था।
कमरे में सिर्फ एसी की धीमी आवाज़ गूंज रही थी।
जुशेंग धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
फिर झुककर टूटे हुए फोन को उठा लिया।
उसकी नज़रें स्क्रीन पर टिकी थीं।
लेकिन उसकी आँखों में कुछ अजीब था।
कुछ ऐसा...
जो सामान्य नहीं था। 👀
वह कुछ सेकंड तक फोन को देखता रहा।
फिर उसके होंठों पर एक धीमी मुस्कान उभरी।
एक ऐसी मुस्कान...
जिसे देखकर किसी को भी बेचैनी महसूस हो जाए।
"गलती..." ❄️
उसने धीमे से कहा।
फिर फोन को थोड़ा कसकर पकड़ लिया।
"गलती..."
उसकी मुस्कान और गहरी हो गई।
"गलती..." 😈
जैसे वह किसी एक शब्द को बार-बार दोहरा रहा हो।
या किसी पुराने हिसाब को याद कर रहा हो।
कमरे की खामोशी अचानक और भारी लगने लगी।
और जुशेंग की आँखो उभरती ठंडक बता रही थी—
कि उसके दिमाग में कुछ बहुत खतरनाक चल रहा है...
◇◇◇
Countue.......
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