फिरौती S Sinha द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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फिरौती

                                                                             फिरौती 

कपिल  को अस्पताल से लौटनेमें थोड़ी देर हो गयी थी .रात के आठ बज चुके थे.उसने अपनी पत्नी  को आवाज दी " सरला ,सरला .कहााँ हो ?" 

उनका नौकर रामू बोला " कपिल बाबा , बेबी तो अभी तक ऑफिस से नहीं लौटी हैं ."

रामू कपिल का पुराना नौकर था जो उसके फिता के ज़माने से ही काम कर रहा था .बेबी सरला के  पुकार का नाम था . 

कपिल बोला " सरला ने कोई फोन  किया था ? आज तो दोपहर के बाद से मुझसे भी फोन पर  कोई बात नहीं की है उसने." 

रामू" नहीं,बाबा .बेबी ने कोई फोन  नहीं किया है . आज तो वे जल्दी भी चली गई थीं .टिफिन भी नहीं ले गयी हैं ." 

खैर  ,कपिल ने जल्दी चाय पी  ,वह भी आधी ही  . फिर वह अपनी  क्लिनिक में गया .वहां  कुछ मरीज उसका इींतजार कर रहे थे.कुछ जरुरी केसेज निपटा कर बाकी से उसने माफ़ी माींग कर अगले दिन  आने को कहा था . 

कपिल  काफी चिंतित हो  था . सरला लंच  के पहले ही  ऑफिस से निकली थी तब तो उसने फोन किया था , फिर  उसके बाद से सरला की कोई खबर नहीं मिली थी .वह नहीं चाहता था कि  सरला नौकरी करे.वह पटना का मशहूर  डॉक्टर था . वह चार प्राइवेटअस्पताल  में विजिटिंग फिजिशियन था .उसके अलावा  घर पर  भी अच्छी प्रैक्टिस थी .पिता की दी हुई जमीन पर बड़ा सा बगला था जिसके एक हिस्से में उसका निजी क्लिनिक था .पर सरला नही मानी थी और बोली " इतना पढ़ लिख  कर घर में बैठना नही चाहती हूँ  .बात सिर्फ पैसों की ही नही है  .मैं समय का समुचित  उपयोग भी करुाँगी.और अगर कुछ कमाई भी हो जाये तो इसमें क्या बुरा है ?" 

कपिल  किसी अनहोनी घटना की आशंका से पहले से ही डरा हुआ था .उसके पड़ोस के प्लाट पर एक नेता जी रहते थे.वे काम तो कुछ नही करते थे, पर किसी सत्ताधारी पार्टी के सीनीयर कार्यकर्ता थे , ऐसा लोगों को बताते फिरते थे. हालांकि अभी तक उन्हें चुनाव में टिकट नही मिल  सका था ,फिर भी सुना जाता था कि  उनकी पहुँच  किसी मंत्री तक थी .उनकी नज़र कपिल  के प्लाट पर थी कपिल  के फिता के समय से ही नेताजी उस प्लाट को लेना चाहते थे. कपिल  का प्लाट  कार्नर प्लाट था .दो तरफ  से मेन रोड थे और काफी   खुली जगह थी .पर इसके लिए न तो कपिल के पिता ही तैयार हुए थे न ही  अब तक कपिल।  . उसके पिता तो अब नहीं रहे थे. 

इधर कुछ  दिनों  से नेताजी कपिल  को  प्लाट बेचने के लिए दबाव दे रहे थे.कीमत पूरी तो नहीं पर बाजार मूल्य का चौथाई तक देने को तैयार थे पर कपिल नहीं मान रहा था . इसे लेकर इधर कुछ दिनों से उसे कुछ धमकी मिल रही  थी . 

अभी कुछ दिनों पहले ही नेताजी का एक चेला मरीज बन कर आया था और धमका  कर गया था .वह बोल गया था " नेताजी को टेढी ऊँगली से घी निकालना खूब आता है  . जैसा वे कह रहे हैं, मान जाओ वरना पछताओगे.हाथ मलते रह जाओगे और कुछ हासिल  नहीं होगा . नेताजी तुम्हें दूसरा प्लाट हाउफसींग बोर्ड से कह कर दिलवा देंगे.और पुलिस उलीस उनका कुछ न बिगाड़ पायेगी उलटे दो चार केस तुम पर ठोकवा देंगे. नाउ बॉल इज इन योर कोर्ट " 

क्लिनिक  से आकर वह घर में कुर्सी पर बैठा ही था फोन  की घंटी बजी . 

कपिल ने हेल्लो कहा तो उधर से आवाज आई " तुम इसी समय फ्री मिलते हो तो ,इसलिए जानबूझकर अभी फोन किया है डॉक्टर .तुमलोगोीं को सालों से समझाया जा रहा था पर सही बात तुम्हारे दिमाग में नहीं जा रही थी  तुमने .पड़ोसी को तंग  कर रखा है  हमको इसीलए यह कदमउठाना पड़ा है .तुम्हारी बीबी हमारे कब्जे में है  .तुम्हें अगर बीबी जिन्दा चाहिए  तो हमारी बातें मान लो कपिल  . " इसी में तुम्हारी भलाई है ? " 


“ तुम लोग हमसे क्या चाहते हो ? “

“ फिलहाल यह नहीं बता सकते हैं.पर कल तुम्हें लोटस होटल आना होगा  अपहरणकर्ता बोला 


 कपिल बोला " कब ? " 

वह बोला " तुम्हारी मर्जी .चाहो तो अभी आधे घंटे में आ जाओ .वरना रात सोना जरूरी हो तो सुबह आना . जब चाहो आना , मगर अकेले आना और ज्यादा होशियार बनने की कोशिश  नहीं करना वरना  बीबी की लाश  तक नहीं मिलेगी ." 

कपिल बोला " नहीं, नहीं.वैसा  कुछ नहीं होगा ." मैं अभी आ रहा हूँ . " 

फ़ोन कट गया था .लोटस होटल शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित  था . रात के दस बजेथे,  उसने रामू से गराज  खोलने को कहा .रामू ने उसे भी साथ जाने को कहा पर कपिल ने मना किया  और कहा " नहीं , ऐसे में हमें खतरा है  .  वक़्त नही.है मुझे देर होगी काका .तुम खा लेना ."  


उसने गराज से अपनी  कार निकाली  वह और चल पड़ा  ..थोड़ी देर में वह लोटस होटल पहुंच गया .होटल के गेट पर  ही एक आदमी खड़ा था .उसने कपिल से कार की चाभी माींगी और कहा " आपको पिछले  दरवाजे से निकलना है . आपकी  गाड़ी उसी गली में मिल  जाएगी .आप अंदर जा सकतेहैं. सीधे जाकर कोने में फैमिली केबिन में दो आदमी आपका इंतजार कर रहे हैं."  

कपिल होटल के अंदर गया और कोने वाले केबिन  के अंदर घुसा ही था कि  उसने दो नकाबपोश व्यक्तियों को देखा .एक ने कहा " आओ डॉक्टर , स्वागत है . क्या लोगे? ठंडा , गरम या बीयर  ." कपिल ने  कुछ नहीं कहा  .  वह बोला " नहीं. नहीं  ऐसा कैसे चलेगा ? मेहमान का स्वागत तो करना ही होगा " 

उसनेदूसरेआदमी को दो कॉफ़ी लानेको कहा. तुरंत  कॉफ़ी भी आ गयी थी .उसके बाद उसे दरवाजे पर  नज़र रखने को कहा.फिर कॉफ़ी पीते हुए एक नकाबपोश  बोला " डॉक्टर , अब हम मुद्दे पर  आ जाएाँ.तुम्हारी पत्नी हमलोगोीं के पास  सही सलामत है . उसकी रिहाई  के बदले तुम्हें हमारी दो शर्तें माननी होगीं  ." 

कपिल बोला "पहले मैं अपनी बीबी को देखना चाहूंगा ." 


वह आदमी बोला " शर्तें  मेरी होगीं . मानना नहीं मानना तुम जानो  .बिना शर्तें माने तुम अपनी बीबी से नहीं मिल सकते हो  . इतना बोल कर उसने किसी से  से कहा " अरे सुन . इसे अपनी बीबी को वीडियो लगा कर दिखा दे  , डॉक्टर बेचैन है बीबी को देखने के लिए  ." 

फिर कपिल ने उसके मोबाइल पर  सरला का वीडियो देखा और पूछा  " सरला  तुम ठीक तो हो ? 

सरला बोली " मैं बिल्कुल ठीक हूँ आप कैसे   …..." 

वह आदमी  बोला " अब इस से ज्यादा प्यार की बातें हमारी शर्तें पूरी करने के बाद ही संभव है  

." कपिल बोला " ठीक है  , बोलो .तुमलोग क्या चाहते हो ? " 

वह बोला " बस .मामूली सी दो शर्तें हैं. पहली अपनी जमीन और घर  नेता जी को दे दो .और दूसरी हमारी मेहनत की कमाई के पांच लाख .हमने तुम्हारी बीबी को अगवा कर सही सलामत रखा है , इसके लिए  ."  

कपिल  बोला " पांच  लाख तो तुम्हें मिल जायेंगे. पर अपनी  ज़मीन और घर नेताजी को दे दूँ तो  हम कहााँ रहने जायेंगे?"

वह बोला " मैं कुछ नहीं जानता हूँ , मैं तो बस नेताजी का सेवक हूँ. बाकी तुम्हारी और नेताजी की मर्जी जाने  ." 

कपिल  बोला " इतनी जल्दी मैं कहााँ और कैसे घर ले सकता हूँ या बना सकता हूँ ?" 

उस नकाबपोश ने फिर नेताजी से बात की और  कहा " नेताजी से बात हो चुकी है  .उन्होंने घर और ज़मीन के ट्रांसफर के सभी पेपर भी रेडी कर रखें हैं. तुम उन पर दस्तखत कर दो .बाकी सब काम उनकी चुटकियों का खेल है .जितनी देर करोगे, तुम्हारी बीबी उतनी देर हमारे कब्जे में रहेगी और हमारा मेहनताना भी बढ़ता जायेगा  फैसला जल्दी कर लो ." 

कपिल  कुछ देर सोचता रहा ,फिर बोला " ठीक है . मुझे तुम्हारी शर्तें मंजूर हैं  . अब मुझे आगे क्या करना होगा  ? " 

नकाबपोश बोला " पिछले दरवाजे पर  तुम्हारी गाड़ी में एक आदमी होगा .आगे का काम वही  बताएगा ." 

कपिल की आाँखों पर  पट्टी बांधकर उसी की कार में  उसे बैठाया गया .उसे एक घर के अंदर लेजा कर कुसी पर बैठने को कहा गया .फिर उसकी आँखों की पट्टी खोली गयी .उसने अपने को एक  टूटे साधारण घर के अंदर पाया  .एक दूसरे आदमी  ने जो गमछे से अपना मुंह ढंके हुए था उसके पास  आकर उसे कुछ स्टाम्प पेपर पर साइन करने को कहा .कपिल ने उन्हें देखा और पढ़ा फिर बिना देर किये उन पर अपने दस्तखत कर दिए  . फिर उन्हें उसे लौटते हुए कहा "  तुम्हारी  शर्तें मैंने मान ली अब तो मेरी पत्नी को छोड़ दो ." 

वह बोला "  पेपर तो नेताजी के काम आएंगे. हमारा मेहनताना पांच लाख देकर बीबी को ले जाना .  फिलहाल  तुमको पत्नी का दर्शन  करा देता हूँ  . .इतना  तो हम कर ही सकते हैं." वह आदमी  कपिल को एक बंद कमरे के पास ले गया और  खिड़की से सरला को देखने के लिए कहा . सरला एक कुर्सी  पर बैठी  थी , उसके मुंह और हाथ बंधे  थे. सामने स्टूल पर  एक थाली और गिलास रखा हुआ था .सरला ने खाना छुआ तक नहीीं था .दोनोीं ने एक दूसरे को नम  आाँखोीं से देखा .सरला ने जब खिड़की के नज़दीक आना चाहा तो उसआदमी ने खिड़की  बंद  कर दी और कहा " अब कल सुबह रूपये देकर बीबी को लेजाना . अभी के लिए इतना ही काफी था  ." 

इतना कह कर उसने पचास के नोट के दो टुकड़े कर एक टुकड़ा कपिल  को देते हुए कहा " कल सुबह  तुम्हें फोन पर बता दिया जायेगा कि तुम्हें रूपये लेकर कहाँ आना होगा  . .वहाीं एक आदमी मिलेगा जिसके पास   इस नोट का दूसरा टुकड़ा होगा . तुम रुपये उसे देकर अपनी  बीबी को  ले जाना .” 

कपिल बोला “ मुझे इस जगह का पता तो बता दो , मैं खुद रुपयों के साथ यहाँ हाज़िर हो जाऊँगा  . “

वह आदमी बोला " इसकी चिंता तुम्हें नहीं करनी होगी . हम रोज अपना  ठिकाना बदलते रहते हैं.हम धंधा  करते हैं तो ईमानदारी से. तुमसे मात्र पांच  लाख मांगे  हैं सिर्फ  अपनी  मेहनत के .वो तो नेताजी ने कहा था कि  इस से ज्यादा नहीं मांगने  को .वरना हम कहीं ज्यादा भी मांग सकते थे. और जब तक हमारे पैसे मिल  नहीं जाते हमारे आदमी तुम पर सख्त नज़र रखेंगे ताकि  तुम कोई ऐसी वैसी  हरकत या चालाकी न करो ." 

दूसरे दिन कपिल  ने ग्यारह बजे तक रुपये जुटा लिए थे  . वह घर पर  ही था , तभी कॉल बेल बजी . दरवाजा खोला तो एक पर्ची मिली .उसमें एक रोड का नाम लिखा  था  .उस में एक लैंडमार्क  बिल्डिंग के पास आने को लिखा था .वहां पहुंचने पर  उसकी गाड़ी साइड में पार्क कर दी गयी .एक दूसरी कार में उसे पीछे की सीट पर बैठा कर उसकी आाँखों  पर  पट्टी बाींध कर रंगीन  चश्मा पहनाया गया . फिर कार से किसी अन्य घर के अंदर ले जा कर उसकी आंखें खोल दी गयीं . 


एक दूसरे नकाबपोश  ने कपिल से फटे रुपये का टुकड़ा माँगा  . कफिल ने  फटे हुए नोट का टुकड़ा दिया .उसे दिया  . नकाबपोश ने दोनों नोट के दोनों टुकडों को मिलाया फिर कहा  “ बरोबर है , लाओ रुपये मुझे दे दो और अपनी बीबी को ले जाओ  . “ 

पल भर में एक दूसरे नकाबपोश .सरला को को ले कर आया  . उसकी आँखों पर भी पट्टी बंधी थी और काला चश्मा था  . कुछ पल के लिए दोनों की आँखों  की पट्टियां ढीली कर एक दूसरे को देखने का मौका दिया गया  . उसके बाद उन्हें पट्टी और काले चश्में के साथ दूसरी कार से ले गए जहाँ कपिल की कार खड़ी थी  .  कपिल की गाड़ी तब  एक वीरान और अनजान गली में थी  .  वहां कपिल और सरला दोनों को उनकी कार में बैठा कर किसी अन्य आदमी ने दोनों को शहर से दूर हाईवे पर छोड़ा और कहा “    अपनी गाडी में बैठो  . कुछ पल बार तुम्हें फोन करेंगे तब अपनी पट्टियां खोलना  और  बिना देर किये और बिना उलट कर देखे  यहाँ  से निकल भागो  . इसके बाद भी हर पल तुमलोग हमारी निगरानी में रहोगे।   " 


इतना बोल कर वह आदमी किसी बाइक पर बैठा  . कपिल ने  बाइक स्टार्ट होने की आवाज सुनी जिसके कुछ सेकंड बाद ही उसे फोन आया - अब तुम आज़ाद हो 


कपिल और सरला दोनों अपने  घर आये. कपिल ने पत्नी को सारी कहानी सुनाई .सरला ने कहा " तुमने मेरी खातिर यह सब क्यों किया  ?" 

कफिल " और दूसरा कोई तो मेरी जिंदगी में नहीं है .अब यह घर हमें छोड़ना होगा .मैंने दिल्ली  और 

गोवा  दोनोीं जगहों पर  बात कर ली है  .वहां  अच्छे अस्पतालों के ऑफर  हैं. कहााँ जाना चाहोगी ?" 

सरला ने कहा " यहाँ  तो एक नेता से पाला पड़ा  था , दिल्ली  में तो सारे देश  के नेता रहते हैं. मुझे तो गोवा बेहतर लगता है  . सुना है बहुत अच्छी जगह है . “ 


“ फिर देर किस बात की ? मुझे तो गोवा ही अच्छा लगा था और  पता था कि तुम्हें भी गोवा पसंद होगा  .  वहीँ चलते हैं. " 

तभी नेताजी भी अचानक आ पहुंचे . उन्होंने कहा " डॉक्टर , अगर तुम्हारे फिताजी अगर यह ज़मीन पहले ही दे देते तो सस्ते में निपट लेते.अब तो ज़मीन के साथ मकान भी जा रहा है  .खैर , तुम चाहो तो हाउफसींग बोर्ड  से एक प्लाट या एम .आई. जी .फ्लैट तुम्हें  अलॉट करवा दूंगा ." 

कपिल बोला " नहीं जी  .धन्यवाद .हम दोनों में इतनी योग्यता तो है  ही कि अपनी  मेहनत के बल पर दूसरा घर बना लेंगे. आपको आपका धंधा मुबारक हो  ." 

नेताजी ' जैसी  तुम्हारी मर्जी ' बोल कर चले गए . 

शाम  तक मूवर के तीन ट्रक पर  कपिल के  घर के सामान लोड हो गए . कपिल  और सरला भी अपनी  कार में बैठ  गए . 

सरला ने आवाज दी " रामू काका .जल्दी करो .तुम भी अपना सामान लेकर ट्क में बैठ जाओ .अब हमारा नया आशियाना गोवा में बनेगा .ट्रक  वाले को कहाँ पहुँचना है  , मालूम है  .हमलोग तुमसे पहले ही गोवा जायेंगे." 

कपिल और सरला अब गोवा  में सैटल हैं और दोनों ने वहां अपनी अच्छी पहचान  बना ली है 

                                                    समाप्त 

नोट - यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है .