Mafia King - 12 Sah Ankita द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mafia King - 12

अपने केबिन में पहुँचकर अंकिता बुरी तरह काँप रही थी। उसके मन में सिर्फ एक ही ख्याल था—इस कंपनी को छोड़ना ही एकमात्र रास्ता है। उसने काँपते हाथों से अपना रिजाइन लेटर टाइप किया और उसे हेड ऑफिस में जाकर सौंप दिया। लेकिन जैसे ही रणविजय को इस रिजाइन के बारे में पता चला, उसकी हँसी पूरे ऑफिस में गूँज गई। वह एक खूंखार शेर की तरह अट्टहास कर रहा था, जैसे उसे पता था कि कोई भी उसके जाल से नहीं बच सकता।
इधर अंकिता किसी तरह घर पहुँची और अपने कमरे में जाकर फूट-फूटकर रोने लगी। रोते-रोते उसे नींद आ गई, लेकिन जब वह सोकर उठी, तो उसके फोन पर एक मेल आया था। मेल खोलते ही उसके होश उड़ गए। उसमें साफ-साफ लिखा था, "अगर आप नौकरी छोड़ती हैं, तो आपको बतौर हर्ज़ाना ₹1 करोड़ देने होंगे।" यह पढ़कर अंकिता का सिर चकरा गया। उसे लगा कि वह किसी ऐसे भंवर में फंस गई है जिससे निकलना नामुमकिन है।
तभी उसकी मम्मी कमरे में आईं और उसे रोता देख घबरा गईं। अंकिता ने हिचकिचाते हुए सारी बात बता दी—उस आदमी के बारे में, उसकी कंपनी के बारे में और उस ₹1 करोड़ की धमकी के बारे में। अंकिता की माँ भी डर गईं, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और अंकिता का हाथ थामकर बोलीं, "बेटी, डर मत! अगर तू डरती रही, तो वह तुझे और डराएगा। अब वक्त आ गया है कि तू उसके सामने हिम्मत से खड़ी हो। तू उसी की कंपनी में काम कर, लेकिन उससे डरना छोड़ दे। सच को एक दिन सामने आना ही होगा और उसे अपनी उस गलती की कीमत जरूर चुकानी पड़ेगी।"
माँ की इन बातों से अंकिता को एक नया हौसला मिला। अगले दिन अंकिता वापस ऑफिस गई। ऑफिस पहुँचते ही उसे रणविजय के केबिन से बुलावा आया। जब वह अंदर गई, तो उसकी नजरें झुक गईं। वह डर के मारे रणविजय को देख तक नहीं पा रही थी। रणविजय उसे देखते ही ठहाका मारकर हंस पड़ा और बोला, "अब कहाँ जाओगी मुझसे बचकर? तुमने मुझे 4 साल तक तड़पाया है, अंकिता। अब उन 4 सालों का हर एक पल, मैं तुमसे चुन-चुनकर बदला लूँगा! मैं तुम्हें इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाला।"
रणविजय अपनी कुर्सी से उठा और अंकिता की ओर बढ़ते हुए कड़क आवाज़ में आदेश दिया, "अभी के अभी अपने केबिन में जाओ और काम पर लगो। और याद रखना, आज से तुम मेरी पर्सनल असिस्टेंट हो! समझीं?"
अंकिता झिझकते हुए बाहर आई। रणविजय उसे अंदर ले गया और एक बहुत ही सुंदर, गहरा लाल रंग की रेशमी साड़ी (Silk Saree) पसंद की। "इसे पहनो," उसने ठंडे लहजे में कहा। अंकिता ने साड़ी पहनी, तो वह किसी अप्सरा जैसी लग रही थी। उसका रूप निखर कर आया था, और लाल साड़ी में वह बेहद आकर्षक दिख रही थी। रणविजय उसे कुछ देर तक बस घूरता ही रह गया, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
जब वे डिनर के लिए रेस्टोरेंट पहुँचे, तो हर किसी की निगाहें अंकिता पर टिकी थीं। लेकिन रणविजय का मकसद कुछ और ही था। उसने अंकिता को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ा।
जैसे ही वे टेबल पर बैठे, रणविजय ने वेटर को बुलाकर बहुत ही रूखे अंदाज़ में कहा, "मेरे असिस्टेंट के लिए कुछ भी ऑर्डर मत करना, इसे बस पानी की जरूरत है।"
अंकिता को बहुत बुरा लगा। उसने धीरे से कहा, "सर, मुझे भूख नहीं है, पर..."