Mafia King - 6 Sah Ankita द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mafia King - 6

जगह कोई आम ठिकाना नहीं, बल्कि 'रॉयल फिटनेस होटल' था। बाहर से देखने में ये एक आलीशान होटल लगता था, पर अंदर रणविजय का काला साम्राज्य चलता था। वहाँ उसके खतरनाक बॉडीगार्ड्स 24 घंटे तैनात रहते थे, जिनकी एक गलती मतलब सीधे मौत।
अंकिता को वहाँ कैद हुए काफी दिन हो गए थे। उसे पता था कि अगर वह पकड़ी गई, तो रणविजय उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा। लेकिन कहते हैं न कि हर शैतान से कोई न कोई गलती जरूर होती है।
एक दिन रणविजय किसी बहुत बड़े काम में फंसा हुआ था। होटल में कोई वीआईपी मेहमान आने वाले थे, जिसकी वजह से पूरे स्टाफ में अफरा-तफरी मची थी। बॉडीगार्ड्स का ध्यान भी उस इवेंट की सिक्योरिटी में लगा हुआ था। अंकिता जिस कमरे में थी, वहां का दरवाजा एक नए गार्ड को लॉक करने के लिए कहा गया था, लेकिन वो जल्दबाजी में ताला ठीक से लगाना भूल गया।
अंकिता ने जैसे ही दरवाजा हल्का सा धकेला, वो बिना आवाज किए खुल गया। गलियारे (corridor) में सन्नाटा था। उसने देखा कि सामने वाली लिफ्ट खुली है और उसमें कुछ सर्विस स्टाफ अंदर जा रहा है।
उसने बिना एक पल सोचे, अपनी घबराहट को काबू में किया और किसी तरह उन लोगों के बीच छिपकर लिफ्ट के अंदर घुस गई। उसका दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे अभी बाहर आ जाएगा। उसने बस अपना सिर झुका लिया ताकि कोई उसे देख न ले। जैसे ही लिफ्ट नीचे बेसमेंट (parking) में रुकी, उसे बाहर निकलने का वो चांस मिल गया जिसका उसे हफ्तों से इंतजार था।
अंकिता अब होटल से बाहर निकल चुकी है। अब कहानी में असली रोमांच आएगा क्योंकि शहर की भीड़ में खुद को बचाना और अपनी माँ तक पहुँचना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
अंकिता जैसे ही उस होटल की पार्किंग से बाहर सड़क पर आई, ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई। हफ्तों की कैद के बाद आज उसे खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला था। उसकी सांसें फूली हुई थीं, और पैर कांप रहे थे, लेकिन उसने रुकने की हिम्मत नहीं की।
वह सड़क की एक तरफ वाली अंधेरी गली में तेजी से मुड़ गई। उसे डर था कि कहीं कोई उसे पहचान न ले। होटल से निकलते ही उसने अपना दुपट्टा सिर पर लपेट लिया ताकि उसका चेहरा न दिखे। उसे पता था कि रणविजय के आदमी अब उसे हर जगह ढूंढेंगे।
वह इधर-उधर भाग रही थी, और तभी उसे पास के एक फोन बूथ पर एक आदमी दिखाई दिया जो अपने फोन पर बात कर रहा था। अंकिता के पास एक ही रास्ता था—किसी तरह शालिनी (उसकी माँ) को खबर देना। लेकिन वह अपना फोन इस्तेमाल नहीं कर सकती थी, क्योंकि रणविजय के लोग उसकी लोकेशन ट्रैक कर सकते थे।
तभी उसे याद आया कि उसके पास अपनी एक छोटी सी डायरी का पन्ना था, जिस पर उसने अपनी माँ का नंबर लिख रखा था। वह भागते-भागते एक परचून की दुकान के पास रुकी और दुकानदार से बहुत ही गिड़गिड़ाकर एक कॉल करने की विनती की।
दुकानदार पहले तो हिचकिचाया, लेकिन अंकिता की आंखों का डर देखकर उसने उसे फोन दे दिया। अंकिता ने कांपते हाथों से अपनी माँ का नंबर डायल किया। पहली घंटी बजी, दूसरी... और तीसरी घंटी पर शालिनी की आवाज आई।
"हेलो?" शालिनी की आवाज़ सुन अंकिता की आँखों में आँसू आ गए।
अंकिता किसी तरह छुपते-छुपाते घर पहुंची। घर का दरवाजा खुलते ही जब शालिनी ने अपनी बेटी को देखा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंकिता के फटे हुए कपड़े, उसके चेहरे पर लगे निशान और उसकी सूजी हुई आंखें सब बयां कर रही थीं कि उसने किन हालातों का सामना किया है।
शालिनी ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। अंकिता का भाई भी वहीं था, और उसे अपनी बहन की यह हालत देखकर गुस्सा और दुख दोनों हो रहे थे। कमरे में सन्नाटा था, बस तीनों की सिसकियां गूंज रही थीं। अंकिता ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी माँ के कंधे पर सिर रखकर फूट-फूटकर रोने लगी। जो जख्म उसे मिले थे, वे तो समय के साथ भर सकते थे, लेकिन जो डर उसके अंदर बैठ गया था, वो इतनी आसानी से जाने वाला नहीं था।
अंकिता जानती थी कि रणविजय जैसा माफिया उसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा। उसके आदमी पूरे शहर में उसे ढूंढ रहे थे। उसे यह भी पता था कि अगर वह इस शहर में रुकी, तो न सिर्फ उसकी, बल्कि उसकी माँ और भाई की जान भी खतरे में पड़ जाएगी।
मजबूरी में, अंकिता को वो घर छोड़ना पड़ा जिसे वह सबसे सुरक्षित समझती थी। वह रातों-रात एक अनजान बस में बैठकर दूसरे शहर के लिए निकल गई। जाते वक्त उसने पीछे मुड़कर देखा—उसका घर अब उससे बहुत दूर हो रहा था। उसे नहीं पता था कि वह कहां जा रही है, बस इतना पता था कि उसे रणविजय की पहुंच से कोसों दूर जाना है।
अंकिता के भाग जाने के बाद रणविजय पागल सा हो गया था। वो पूरे शहर में आग की तरह फैल गया था, हर जगह उसके आदमी अंकिता को ढूंढ रहे थे। उसे इस कदर गुस्सा था कि उसने होटल के उस गार्ड को भी जान से मार दिया जिसकी गलती से अंकिता भागने में कामयाब हुई थी। उसे कोई परवाह नहीं थी कि वो कानून की नजर में क्या कर रहा है, उसकी सनक और बढ़ गई थी।
उसे अंकिता की ऐसी लत लग चुकी थी कि वो अब खुद को संभाल नहीं पा रहा था। उस 'रॉयल फिटनेस होटल' के जिस कमरे में अंकिता को कैद रखा गया था, वहाँ रणविजय ने पहले ही एक सीक्रेट कैमरा लगवा रखा था।
अंकिता के जाने के बाद, रणविजय की रातें उस कमरे में ही गुजरने लगीं। वो हर रात उस कमरे में जाकर बैठता, शराब पीता और उस कैमरे की रिकॉर्डिंग चलाकर देखता। वो उन वीडियो को नशे में धुत होकर घंटों देखता रहता—कैसे अंकिता डर में सहमी हुई थी, कैसे वो रोती थी, और कैसे उसने उस लड़की के साथ अपनी मर्जी से जबरदस्ती की थी। उस फुटेज को देखकर उसे एक अजीब सी, बीमार खुशी मिलती थी।
उसे अंकिता से प्यार नहीं था, बल्कि वो उस डर और लाचारी का गुलाम हो गया था जो उसने अंकिता की आंखों में देखी थी। वो बार-बार वही वीडियो प्ले करता और अंकिता की कमी उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। उसे अब बस एक ही सनक थी—किसी भी कीमत पर अंकिता को वापस ढूंढकर लाना, चाहे इसके लिए उसे पूरे शहर को तबाह क्यों न करना पड़े।
अब रणविजय की सनक और बढ़ गई है। क्या अंकिता को भनक लगेगी कि वह अभी भी उसके पीछे है,
अंकिता ने ट्रेन से उतरकर बनारस के पास के एक छोटे से गाँव को अपना ठिकाना बनाया। वह इतनी बुरी तरह डरी हुई थी कि घर की दहलीज लांघने से भी कांपती थी। रणविजय का खौफ उसके दिलो-दिमाग पर इस कदर छाया था कि उसे लगता था कि हर आने-जाने वाला शख्स उसी का आदमी है।
घर की जिम्मेदारी माँ के कंधों पर आ गई थी। शालिनी ने हार नहीं मानी; उसने पास के ही एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने के बजाय, वहीं के एक छोटे से कोने में सिलाई का काम शुरू किया। मेहनत रंग लाई, उसे हर महीने 15,000 रुपये मिलने लगे। घर का चूल्हा जलने लगा और अंकिता व उसके भाई की जरूरतें पूरी होने लगीं। दो महीने बीत गए। रणविजय का कोई अता-पता नहीं था; ऐसा लग रहा था कि शायद उनकी जिंदगी से वह काला साया हट गया है।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
एक दिन अचानक अंकिता की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे जोरों से चक्कर आने लगे और उल्टियों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा था। शालिनी बुरी तरह घबरा गई। उसे लगा शायद कमजोरी है, लेकिन जब वे उसे पास के अस्पताल ले गए और डॉक्टर ने कुछ जरूरी टेस्ट किए, तो जो सच सामने आया, उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी।
डॉक्टर ने गंभीर चेहरे के साथ शालिनी को बताया कि अंकिता दो महीने की गर्भवती है।

यह सुनकर सन्नाटा छा गया। शालिनी की आँखों के सामने अंधेरा छा गया—उसने सोचा था कि उसकी बेटी उस नर्क से तो बच निकली, लेकिन वो अपने पीछे उस माफिया की सबसे बड़ी निशानी ले आई थी। अंकिता की हालत तो और भी खराब थी; वह सदमे में थी। जिस खौफ से वह भाग रही थी, अब वो खौफ जिंदगी भर के लिए उसके साथ जुड़ गया था।
यह स्थिति अंकिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। वह अब इस सच्चाई का सामना कैसे करेगी? क्या वह इस बच्चे को अपना पाएगी या यह बच्चा उसे रणविजय की याद दिलाता रहेगा? और अगर रणविजय को कभी पता चला, तो वह क्या करेगा?
आगे क्या होना चाहिए,