अधूरापन - 27 Falguni Dost द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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अधूरापन - 27

अध्याय-२७

रमेशभाई ने तुरंत अमृता की बात का जवाब देते हुए कहा, "हाँ बेटा! मेरे ध्यान में कुछ युवक हैं। उनमें से प्रिंस, रॉकी और राज—ये तीनों मेरी नज़र में आ गए हैं। बहुत ही हेल्पफुल (मददगार), संस्कारी और साथ ही अच्छी नौकरी भी करते हैं। प्रिंस इंजीनियर है, रॉकी डॉक्टर है और राज ने होटल मैनेजमेंट किया है। सभी के परिवार भी बहुत प्रतिष्ठित हैं। हमारी बेटियाँ अगर उन घरों में जाएँगी, तो सचमुच बहुत सुखी रहेंगी। अमेरिका जैसे देश में ऐसे लड़के कम ही मिलते हैं। सचमुच! हमारे जैसा परिवार मिलना मुश्किल है, फिर भी कुदरत ने कुछ तो उनके भाग्य में भी लिखा होगा न! नहीं तो इस संस्था के अलावा उनका परिचय हम तक होना असंभव ही था।"

राजेश तुरंत बोला, "तो पापा सोचने की क्या बात है? हमें आपकी बात पर पूरा भरोसा है ही।" इतना कहकर दोनों बेटियों की तरफ देखते हुए राजेश ने उनकी राय माँगते हुए कहा, "तुम दोनों क्या कहती हो बेटा? तुम्हें हमारी पसंद पसंद आएगी न बेटियाँ?"

भव्या और हनी ने सिर्फ़ एक मुस्कान दी और मूक सहमति जता दी। वैसे उनके चेहरों पर तैरती हल्की गुलाबी रंगत से साफ़ अंदाज़ा हो रहा था कि वे दोनों कितनी खुश हैं।

अमृता ने कहा कि सोनाली को कल शाम को बुलाते हैं। उससे भी रूबरू (सामने से) पूछ लेते हैं ताकि उसकी मर्जी भी हमें पता चल सके।

रमेशभाई ने तुरंत मानस कुमार को अभी तक की सारी बात विस्तार से बताई और आगे की बात आमने-सामने करेंगे—यह कहते हुए कल शाम को घर आने का निमंत्रण भी दे दिया। और बाकी की सारी बात सोनाली के सामने ही करेंगे—यह कहकर फोन रख दिया।

पूरा परिवार खुश दिख रहा था। लेकिन हनी और भव्या इस सोच में थीं कि किसके लिए किसकी बात चलेगी? यह अभी दादाजी ने साफ़ नहीं किया था। 'समय आने पर पता चल ही जाएगा!'—यह सोचकर दोनों बेटियाँ अपने कमरे में चली गईं।

अमृता ने जैसे ही दोनों बेटियों को कमरे में जाते देखा, तुरंत पापा से कहा, "पापा! हमें हनी के चाचा-चाची, विनय और नीला से भी इस बारे में पूछना चाहिए न!"

रमेशभाई ने तुरंत कहा, "हाँ बेटा! उन्हें भी कल शाम को बुला लेते हैं, ताकि उनकी राय भी मिल जाए।" फिर बोले, "तू कितनी समझदार है! तुरंत तुझे सब बातें ध्यान में आ जाती हैं। मैं तो यह पूछना भूल ही गया था। तेरा यह बारीकियों पर ध्यान दिलाना मेरे मन में तेरे प्रति बहुत आदर जगाता है। कभी-कभी सचमुच ऐसा लगता है कि तू न होती तो यह घर मंदिर समान कभी न बन पाता!" इतना बोलते-बोलते रमेशभाई एकदम भावुक हो गए। अमृता बोली, "अरे पापा! ऐसा मत कहिए.. चलिए दवा पी लीजिए और आराम कीजिए।"

सोनाली, हनी और भव्या एक-दूसरे से मिलकर बहुत खुश हुईं। साथ ही, अपने चाचा के बेटे से मिलकर हनी भी बहुत प्रसन्न हो गई। इधर सब खाना खाकर मुख्य चर्चा पर आए।

रमेशभाई ने पूरे परिवार के सामने सारी बात विस्तार से रखी और सभी को इस बारे में अपनी-अपनी राय देने को कहा।

पूरा परिवार घर के बुजुर्ग की बात से पूरी तरह सहमत था। सबने खुशी-खुशी रमेशभाई की बात को स्वीकार कर लिया।

राजेश ने यह बात साफ़ की कि उन लोगों को कब बुलाना है और किसके लिए किसकी बात चलानी है, इसका खुलासा अभी ही कर लेना मुझे सही लगता है। ऐसा कहकर उसने पापा की तरफ देखा।

रमेशभाई ने कहा, "अक्षय तृतीया (अखात्रीज) के दिन यानी दो दिन बाद हमारी संस्था की पूजा रखी है, तब औपचारिक बात बताकर उन्हें घर पर ही बुलाते हैं। मुझे भव्या के लिए प्रिंस सही लगा क्योंकि दोनों इंजीनियर हैं। हनी के लिए रॉकी और सोनाली के लिए राज, क्योंकि उसने होटल मैनेजमेंट किया है तो सोनाली चाहे तो दोनों मिलकर भविष्य में अपना मोटेल शुरू कर सकते हैं। ऐसा मैंने सोचा है। फिर भी इसमें आपकी कोई राय हो तो बेझिझक बताइएगा।" फिर दादाजी ने दोस्त बनकर सभी बेटियों से भी पूछ ही लिया, "बच्चो!! कुछ कहना हो तो कहना, हिचकिचाना मत बिलकुल..!" सभी बेटियों ने मुस्कान के साथ थम्ब्स-अप दिखाकर "ओके" कह दिया।

विनय ने अपनी राय दी, "अंकल, आपने दूर का भविष्य सोचकर जो रिश्ते की बात सोची है, वह मुझे बिल्कुल सही लगती है।" राजेश और अपूर्व ने भी तुरंत कहा, "हम भी सहमत हैं।" और रही बात बहुओं और बेटियों की—तो उनके आनंदित चेहरों से बात की स्वीकृति झलक रही थी, जो दादाजी की अनुभवी नज़रें उम्र के इस पड़ाव पर भांप चुकी थीं कि सब खुश हैं ही।

परिवार की उत्सुकता आज लंबे इंतज़ार के बाद पूरी होने वाली थी। भव्या, हनी और सोनाली को तो ये दो दिन बहुत लंबे लग रहे थे। तीनों एक-दूसरे से पूछ रही थीं, "दिखने में कैसे होंगे? बाकी सब तो दादू ने कहा वैसे ओके ही है, लेकिन लुक्स अच्छे तो होंगे न!"

उन तीनों के अनगिनत सवालों का अंततः आज अंत हो गया। सभी मेहमान आ चुके थे। पूजा शुरू होने से पहले रमेशभाई ने अमृता को बुलाकर सबका संक्षिप्त परिचय दिया था। आँखों के इशारे से अमृता ने सभी की जानकारी एक-दूसरे को दे दी थी और पूरे परिवार को सारी सूचना मिल चुकी थी।

सचमुच! प्रिंस, रॉकी और राज भी बहुत हैंडसम थे। एक ही नज़र में सबका दिल जीत लें, ऐसे थे। पूजा समाप्त होने के बाद आज प्रसाद का वितरण भव्या, हनी और सोनाली के हाथों करवाया गया था। आज तीनों बेटियाँ भी साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। सब कुछ बहुत अच्छे से तय हो गया था। पूजा का कार्यक्रम समाप्त हुआ तो रमेशभाई ने युवकों के बड़ों के कान में बात पहुँचा दी और बेटियों से भी रूबरू मुलाकात वहीं करवा दी; साथ ही कहा कि अगर आपको सही लगे तो घर जाकर चर्चा करके मुझे अपना जवाब बताइएगा।