बारिशवाला प्यार - 3 Radha द्वारा क्लासिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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बारिशवाला प्यार - 3

बरसात रिमझिम और बादल को भीगा रही थी। बारिश ने जोरो शोरो से बरसना शुरू कर दिया था। रिमझिम बादल को उसके पापा समझकर उसका हाथ पकड़कर खींच रही थी। बादल भी रिमझिम के पीछे खींचा चला जा रहा था।
   
          " लेट्स डांस पापा " कहकर उसने बादल का हाथ खींचा। अब बादल उसके करीब आ गया था। रिमझिम ने देखा की बिल्कुल उसके पापा की हाइट का दिखने वाला ये व्यक्ति कोई और है। उसे झटका लगा, अपनी गलती पता चली, उसने बादल का हाथ छोड़ दिया, ओर थोडी पीछे चली गई। 
         " सॉरी, मुझे माफ करना वो मुझे लगा मेरे पापा है।" उसने थोड़ी शर्म से पलके झुकाकर अपनी मीठी आवाज़ में कहा।" 
  
        बादल भी नर्वस हो गया था, उसने कहा, "इट्स ओके, वो में, ओर बारिश में भीग ने की आदत न होने के कारण उसे जोर की छींक आई।
          
           वो मैं,,,,,, हा छू, हा छू, हा छू🤧🤧 उसे जोर जोर से छींकने लगा। रिमझिम को हसी आ गई। वो हंसने लगी। बादल भी उसका हंसता हुआ प्यारा चहेरा देखने लगा। ओर तभी सॉन्ग बजने लगा।
          
          किसी शायर का दिल बनके
              बरसाती हैं बूँदें तुमपे
       किसी शायर का दिल बनके
             बरसाती हैं बूँदें तुमपे 
नज़ारा उफ़ क्या होता है गुज़रती हैं जब जुल्फों से दूर कहीं अब जाओ ना तुम 
        सुन सुन बरसात की धुन सुन 
       सुन सुन बरसात की धुन सुन। 

      रिमझिम को अहसास हुआ की स्पीकर का वॉल्यूम बोहोत तेज है। उसने जल्दी से जाकर सॉन्ग बंद कर दिए। बादल अभी भी छींक रहा था। तभी अंदर से रिमझिम की मां जया जी बहार आई। वो बादल को जानती थी। उसने बादल को देखकर कहा। 
      "अरे बादल बेटा तुम कब आए? कुछ चाहिए था क्या?  बेटा बहार भीगने से तुम्हें ठंडी जुकाम हो जायेगा अंदर आ जाओ। ओर रिमझिम बोहोत बारिश इंजॉय की अब तुम भी अंदर आ जाओ।" 
        " आपका शुक्रिया आंटी में यहां पर स्पीकर की तेज आवाज़ से मेरी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही थी। तो वॉल्यूम कम रखने के लिए कहने आया था।

            "वो बेटा माफ करना,  रिमझिम के कारण तुम्हें तकलीफ हुई। पर तुम अंदर आओ, चा पीकर जाओ।"
          
           "It's ok aunty 😊 आपके घर फिर कभी, फिलहाल चलता हु।" बादल ने कहा ओर रिमझिम की ओर देखकर हल्का सा मुस्कुराया और चल दिया।" 
            
             रिमझिम ने अपनी मां की ओर देखा, उसे लगा की अब जल्दी से घर में जाकर कपड़े नही बदले और थोडी ज्यादा देर यहां रुकी तो मां खरी खोटी सुनाएगी, ओर मेरी सालो की गलती गिनवाएगी। वह जल्दी से घर के अंदर चली गई। 
            
            बरसात अपने बादलों में से रिमझिम बरस कर चली गई थी। वातावरण साफ सुथरा हो गया था। जाते जाते बरसात ने दो लोगो को प्यार के रंग में भिगोया था।

            उसने कपड़े बदले और आयने के सामने खड़ी होकर टॉवेल लेकर अपने गिले बाल सुखाने लगी। वह बादल के बारे में सोचने लगी। उसे मन ही मन अपने आपसे कहा कोन है ये लड़का, पहले कभी नही देखा भला, ओर मां उसे जानती है। 
      
            तभी, अंदर चिंटू आया, उसे लगा की ये शैतान को सब पता होगा। उसने चिंटू से बादल के बारे में पूछा। चिंटू बोला "में क्यू बताऊं भला। आप वादा करो की चॉकलेट देगी तभी बताऊंगा। रिमझिम ने मुंह फुलाया पर उसे बादल के बारे में जानना भी था। इसलिए उसने चिंटू से वादा किया की हा आपको चॉकलेट खिलाऊंगी, ठीक है अब चल बता।
         
          " दीदी वो बादल भैया है। मुन्नी के बड़े भैया, सीमा मौसी के बेटे। पिछले हप्ते   ही हॉस्टल से आए है। मेने भी दो चार बार ही उन्हें देखा है। पढ़ने में बोहोत होशियार है वह पूरे दिन पढ़ाई पढ़ाई ही करते रहते है।ओर दीदी आपको पता है,  वह इल्हाबाद के बड़े कॉलेज में पढ़ते हैं कॉलेज में! " चिंटू ने कोलेज शब्द को दोहराया इसलिए रिमझिम हस पड़ी। 
            
            उसने कहा तो क्या हुआ, वो तो इलहाबाद में ही पढ़ते है न, कई लोग दिल्ली, मुंबई ओर विदेश में अमेरिका, लंदन की कोलेज में भी पढ़ने जाते है उसमे कौनसी बड़ी बात है भला। पर मुहल्ले में कोई कोलेज में नही जाता था और वो भी इलाहाबाद जैसे बड़े शहर में। इसलिए उसके लिए तो ये बड़ी बात थी। पर वह रिमझिम को जानता था कोई उसके सामने किसी की तारीफ उसे पसंद नहीं थी। पर  अगर उसे लगता कि कोई वाकई  तारीफें काबिल  है तो उसके गुणगान भी करती। लडको के मामलो में  उसकी राय थी की ज्यादातर लड़के लड़कियों के पीछे लट्टू बने फिरते है और कामकाज नहीं करते। कॉलेज में पढ़ने वाले ज्यादातर लड़के लड़कियों के पीछे घूम कर अपना वक्त बर्बाद करते थे और और माता पिता का नाम ऊंचा करने की बजाय डुबोते थे। पर बादल की बात कुछ और थी, जब कभी किसी काम से सीमा मौसी के घर जाती तो सीमा मौसी अपने बेटे को हीरा बताती। तब उसे लगता कि क्या कोई लड़का ऐसा भी हो सकता है? वैसे देखा जाए तो सीमा मौसी बिल्कुल सच कहती थी। आज जब वो बादल से मिली तो उसकी आंखो में भोलापन, निर्दोषता ओर नजर आई। दूसरे के प्रति आदर का व्यवहार में रिमझिम को उसका आदर्श व्यक्तित्व दिखाई पड़ा। उसे बादल किसी उपन्यास के नायक जैसा लगा।
              
           धत पगली, मैंने आज उसे मिलते ही गलती कर दी, न जाने वह मेरे बारे में क्या सोचेगा। जो भी हो कल उसके घर जाकर उससे ठीक से माफी मांग लूंगी। फिर वह शाम का भोजन और बाकी के काम निपटाने में लग गई। 
            
            दूसरी ओर बादल भी अपनी मां से अपने पड़ोसीओ के बारे में पुछताज करने लगा। खास तो उसे रिमझिम के बारे में जानना चाहता था। मां को अचरज हुआ उसने पुछा तुम भला कब से दूसरो के बारे में पूछने लगे। वो तो मां मैंने बस ऐसे ही पुछा। 
              
          मां ने सच कहा, बादल को नहीं पता था उसके आसपास कोन रहता था और न कभी उसने पुछा था। मां और बहन दोनो पिछले दो साल से इस मुहल्ले में रहते थे। बादल हॉस्टल में ही ज्यादा समय रहता। त्योहारों में भी एक दो दिन या फिर सुबह आता ओर शाम को चला जाता। पर वह घर से बाहर नहीं निकलता था इसलिए कम ही लोगों ने उसे देखा होगा। इस बार हॉस्टल बंध होने के कारण उसे घर आएं एक हप्ता हुआ था फिर भी उनके पड़ोसी को वह नही जानता था। इसलिए मां से उसने पुछा। 
   
           मां ने जयाजी, उनके पति किशोरजी और चिंटू के बारे में बताया, ओर कहा उनकी एक बेटी रिमझिम भी है, मुहल्ले में काफी औरतों को अच्छी नहीं लगती। पर वो अच्छी नहीं है बेटा। 
         
           आखिर बादल की मां ने ऐसा क्यों कहा होगा। क्या रिमझिम सच में बुरी लड़की है।