Sirf Tumhara - 2 InkImagination द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Sirf Tumhara - 2

Part 2

कॉलेज का गेट पार करते ही अंश को हमेशा वाली खुशी महसूस हुई। दिल्ली का ये प्राइवेट यूनिवर्सिटी कैंपस काफी बड़ा और खूबसूरत था — हरे-भरे लॉन, आधुनिक बिल्डिंग्स और हर तरफ स्टूडेंट्स की भीड़। विहान ने कार पार्क करते हुए कहा, "आज तेरे जीजू का मूड कैसा लग रहा था? पूरा जलन पैक था या थोड़ा-बहुत?"
अंश हँसा, "हमेशा वाला। अबीर के साथ कैंटीन में हँसते देख लिया था कल।"
"अबीर? वो सॉफ्टवेयर वाला लड़का?" विहान ने आँखें तरेरीं। "तेरा जीजू तो सच में पागल है। फ्रेंड से भी जलता है।"
"वो पागल नहीं, बस... बहुत प्यार करता है," अंश ने धीरे से कहा। उसके गालों पर हल्की लाली छा गई।
दोनों लॉन की तरफ बढ़े। वहाँ उनका फ्रेंड ग्रुप पहले से ही जमा था।
कबीर सबसे पहले दिखा — लंबा, एथलेटिक बॉडी, हमेशा स्मार्ट शर्ट्स पहनने वाला। रुद्र का बेस्ट फ्रेंड और ग्रुप का सबसे ज़्यादा मस्त लड़का। उसके बगल में अयान खड़ा था — शांत, स्माइलिंग, ग्रीन फ्लैग टाइप। अयान के कंधे पर रेयांश का हाथ था, जो कुछ फुसफुसा रहा था। रेयांश हमेशा की तरह अयान से चिपका रहता था।
"अरे वाह! प्रिंस आ गए!" कबीर ने ज़ोर से आवाज़ लगाई।
अंश ने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया। "सुबह-सुबह चिल्ला मत यार।"
विहान ने तुरंत कबीर को गले लगा लिया, "क्या हाल है दुश्मन?"
"दुश्मन तू है, जो रोज़ मेरी गाड़ी में पैर रखता है," कबीर ने विहान को धक्का दिया लेकिन हँस रहा था।
ये दोनों शुरू से ही एक-दूसरे से नफरत करते थे। या यूं कहें कि नफरत का वो रूप जो धीरे-धीरे कुछ और बनने वाला था।
अयान ने आगे बढ़कर अंश को हग किया, "कैसा है? रुद्र भैया का फोन आया क्या आज?"
"सुबह 6:15 बजे," अंश ने शर्माते हुए बताया।
रेयांश हँसा, "भाई, तुम्हारा आदमी तो रिकॉर्ड तोड़ रहा है। मुझे तो अयान सुबह 8 बजे भी 'उठ गए?' पूछता है।"
अयान ने रेयांश की कमर पर हल्का थपकी दी, "चुप कर। सबके अपने स्टाइल होते हैं।"
ग्रुप में हँसी की लहर दौड़ गई।
तभी दूर से एक ब्लैक लक्ज़री SUV आती दिखी। सबकी नज़र उधर गई। गाड़ी रुकते ही रुद्र उतरा — ब्लैक शर्ट, डार्क जींस, बाल थोड़े स्टाइलिश बिखरे हुए। उसकी हैट वाली वॉच चमक रही थी। पूरा लुक ऐसा कि आसपास की लड़कियाँ-लड़के एक पल को रुक गए।
रुद्र की नज़र सीधे अंश पर पड़ी। उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन आँखों में वही पॉसेसिव चमक थी।
वो सीधा अंश के पास आया, बिना किसी को कुछ कहे। एक हाथ से अंश की कमर पकड़ी और पास खींच लिया।
"गुड मॉर्निंग फिर से," रुद्र ने धीमी आवाज़ में कहा, सिर्फ अंश के लिए।
अंश ने चारों तरफ देखा, "रुद्र... सब देख रहे हैं।"
"देखने दो।" रुद्र ने उसकी टेम्पल पर हल्का किस किया। "मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
कबीर सीटी बजाने लगा, "अरे वाह! पब्लिक डिस्प्ले ऑफ अफेक्शन! आजकल ट्रेंडिंग है क्या?"
विहान ने मुँह बनाया, "जीजू, थोड़ी तो शर्म कर लो।"
रुद्र ने विहान की तरफ घूरा, "तुम चुप रहो।"
"जी बॉस!" विहान ने सैल्यूट मारा और फिर हँस पड़ा।
रुद्र ने अंश को अपनी तरफ मोड़ा, "कैंटीन चलो। ब्रेकफास्ट किया है?"
"नहीं अभी।"
"चलो।" रुद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया और बिना किसी की परवाह किए आगे बढ़ गया।
कैंटीन में बैठकर रुद्र ने खुद अंश के लिए ऑर्डर किया — उसके पसंदीदा चॉकलेट पैनकेक और कॉफी। अंश उसे देखकर मुस्कुरा रहा था।
"कल अबीर के साथ क्या प्रोजेक्ट था?" रुद्र ने पूछा, आवाज़ में हल्की जलन अभी भी बाकी थी।
अंश ने साँस ली, "रुद्र, वो सिर्फ फ्रेंड है। तुम्हें हर किसी से जलन क्यों होती है?"
"क्योंकि तुम बहुत क्यूट हो," रुद्र ने सीधे उसकी आँखों में देखा। "और मैं नहीं चाहता कि कोई भी तुम्हारी स्माइल मेरी तरफ से छीन ले।"
अंश का दिल पिघल गया। उसने टेबल के नीचे रुद्र का हाथ पकड़ लिया।
"मैं सिर्फ तुम्हारा हूँ। हमेशा।"
रुद्र की आँखें नरम पड़ गईं। "पता है। लेकिन फिर भी... मैं कंट्रोल नहीं कर पाता।"
उसी वक्त कबीर, विहान, अयान और रेयांश भी आ गए। पूरा ग्रुप एक टेबल पर जमा हो गया।
कबीर ने विहान को कोहनी मारी, "तुम आज क्लास बंक करोगे क्या?"
"तुम बंक कर रहे हो तो मैं क्यों नहीं?" विहान ने जवाब दिया, लेकिन उसकी नज़र कबीर से हट नहीं रही थी।
अयान और रेयांश चुपचाप एक-दूसरे को देख रहे थे। उनकी कहानी सबसे शांत और प्यारी थी। कोई ड्रामा नहीं, बस गहरी समझ और सपोर्ट।
रुद्र अंश के बालों में हाथ फेर रहा था जब अचानक उसका फोन बजा। उसने स्क्रीन देखी और भवें सिकोड़ लीं।
"क्या हुआ?" अंश ने पूछा।
"पापा का फोन है।" रुद्र ने कुछ सोचते हुए कहा। "शाम को घर आना पड़ेगा। फैमिली बिजनेस की मीटिंग।"
अंश ने सिर हिलाया। वो जानता था रुद्र के परिवार की दबाव वाली दुनिया कितनी जटिल है।
दिन भर क्लासेस चलीं। बीच-बीच में रुद्र अंश को मैसेज करता रहा — "क्या कर रहे हो?", "किसके पास बैठे हो?", "मिस यू"।
शाम को कॉलेज खत्म होने के बाद रुद्र ने अंश को अपनी गाड़ी में बिठाया। विहान ने पीछे से चिल्लाया, "जीजू, सावधानी से ले जाना!"
रुद्र ने मुस्कुराते हुए गाड़ी स्टार्ट की।
कार में जाते वक्त अंश ने पूछा, "आज क्या प्लान है?"
रुद्र ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया, "तुम्हारे लिए सरप्राइज है।"
अंश की आँखें चमक उठीं। लेकिन उसी पल उसे अहसास हुआ कि कुछ दूर खड़े दो लड़के उनकी तरफ घूर रहे थे। एक का चेहरा जाना-पहचाना सा लगा।
रुद्र ने भी देख लिया। उसकी पकड़ अंश के हाथ पर थोड़ी और मजबूत हो गई।
"कौन हैं ये?" रुद्र की आवाज़ में खतरा झलक रहा था।
अंश ने कंधे उचकाए, "पता नहीं। शायद नए स्टूडेंट्स।"
लेकिन दोनों को नहीं पता था कि ये "नए स्टूडेंट्स" उनकी जिंदगी में आने वाले बड़े तूफान की शुरुआत थे।

To Be Continued...

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