इधर... वेदांश फोन पर बात करता हुआ आगे बढ़ रहा था वह इस वक़्त मंदिर के दूसरे कॉरिडोर में खड़ा था। यहां काफी शांति थी ज्यादातर लोग पूजा के लिए मंदिर के मेन एरिया में जा चुके थे।
बस कुछ लड़कियां जो डांस प्रैक्टिस कर रही थी। उन्हें आज शाम एक प्रोग्राम अटेंड करना था इसलिए.. फिलहाल अभी पूजा शुरू होने की अनाउसमेंट नहीं हुई थी... ठंडी ठंडी हवाएं चल रही थी।
इस बीच वेदांश बहुत सीरियस होकर बात कर रहा था। उसने बिल्कुल ध्यान ही नहीं दिया.. की आगे कोई है भी.. अचानक वह किसी से टकरा जाता..."आह"... एक लड़की की करहाते हुए आवाज से वेदांश अपने होश में आता है वह जल्दी अपने एक हाथ से उस लड़की को कमर से पकड़ता है.. ।
अभी भी उसके हाथ में फोन था जिसे उसने कान से लगा रखा था.. उस पर कॉल चल रही थी। वह सिर उठाकर उस लड़की को देखता है . मगर वह उसका चेहरा नहीं देख पाता क्योंकि उसके कुछ बाल हवा और गिरने से चेहरे पर आ गए...
न जाने आज क्यों उसे इस लड़की का चेहरा देखने की क्यूरोसिटी हो रही थी। अचानक ही उसे अपने दिल की हार्टबीट बढ़ती हुई महसूस होती है।" क्या हो रहा है आज मुझे... " वह मन ही मन खुद से बोलता है..
"मैं कैसे किसी लड़की को छू सकता हूं.." सोचता हुआ वह उस लड़की की कमर से अपना हाथ हटाना तो चाहता था।मगर हटा भी नहीं पा रहा था। ये उसके साथ आज पहली बार हो रहा था।
वह बहुत ही ध्यान से उस लड़की का चेहरा देखने की कोशिश कर रहा था आस पास कुछ लड़कियां उनके चारों ओर घूम रही थी.. तो कुछ मुस्कुराती हुई उन्हें ही देख रही थी।
पाया मैंने पाया तुम्हें रब ने मिलाया तुम्हें
होंठों पे सजाया तुम्हें नगमें सा गाया तुम्हें
पाया मैंने पाया तुम्हें सबसे छुपाया तुम्हें
सपना बनाया तुम्हें नींदों में बुलाया तुम्हें(आ आ आ आ
वह बिल्कुल भी इस मोमेंट को डिस्टर्व नहीं करना चाहती थी। ठंडी ठंडी हवाओं के साथ पास में खड़े लाल प्लूमेरिया (लाल चंपा) के फूलों के पेड़ हिल रहे थे।
ज़िन्दगी बेवफा है ये माना मगर
छोड़कर राह में जाओगे तुम अगर
छीन लाऊँगा मैं आसमां से तुम्हें
सूना होगा ना ये दो दिलों का नगर
अचानक एक हवा का झोंका आता है.. और साथ उड़ा लाता है फूलों की बौछार जो उन दोनों पर होने लग गई। उसी के साथ श्री के चेहरे पर थमे वो सारे बाल भी हट जाते है मगर... मगर... एक फूल उसके होंठों के पास आ ठहरा... वेदांश का दिल जो अभी तक बेचैन था.. श्री का चेहरा देखते ही.. शांत हो गया ..
रौनके हैं दिल के दर पे
रौनके हैं दिल के दर पे
धड़कने हैं सुरमई
मेरी किस्मत भी तुम्हारे साथ बन गई
हो तुम जो आए ज़िन्दगी में बात बन गई
इश्क मज़हब इश्क मेरी ज़ात बन गई
हल्के पीले रंग की उस सारी में... वो बेहद सुंदर लग रही थी। उसका प्लू हवा में लहराता हुआ जमीन को छू रहा था वेदांश उसके ऊपर झुका हुआ... इत्मीनान के साथ उसके चेहरे को देख रहा था।
सपने तेरी चाहतों के
सपने तेरी चाहतों के
देखती हूँ अब कई
दिन है सोना और चांदी रात बन गई
हो तुम जो आए ज़िन्दगी में बात बन गई
उसकी बंद कज़रारी आंखे उड़ते बाल उसके वो मिरर वाले राजस्थानी झुमके और.. और उसके वो गुलाबी होंठ... जिन पर उस फूल की चंद मात्र पत्तियां ही उन्हें छू पा रही थी... मगर छू रही थी। और बस यही उसे पसंद नहीं आया... उसके चेहरे के भाव कुछ बिगड़े ही थे कि... उसके कानों में एक प्यारी सी आवाज गूंजी..
"उम्ह... क्या अभी तक हमे चोट नहीं लगी.. हम गिरे क्यों नहीं.. ?" कहते हुए श्री अपनी आंखे खोलती है एक पल को तो वो पूरी तरह घबरा जाती है किसी का चेहरा अपने इतने पास देख . लेकिन जल्दी ही खुद को संभाल अपने सामने उस शख्स को ध्यान से देखने लगती है जो उसे ही बड़ी शिद्दत से निहार रहा था।
श्री की आंखे उन आंखों से मिल जाती है जो उसे बहुत ही गहराई से अंदर तक झांक रही थी। श्री ने दोनों हाथों उसकी शर्ट पर हल्की पकड़ रखी हुई थी।
"श्री... श्री कहां है तू... चल पूजा शुरू होने वाली है.." कहते हुए कनु जब सामने का नज़ारा देखती है तो एक पल को जम ही जाती है... जब उसने श्री को प्रैक्टिस करवाते हुए देखा तो वह अपनी एक दोस्त से मिलने चली गई थी।
वेदांश ओर श्री जैसे ही इस आवाज को सुनते है.. वह अपने होश में आते है श्री घबराते हुए हटने लगती... जल्दी के चक्कर में वह नीचे गिरती उससे पहले ही वेदांश उसे सीधा खड़ा करता है ।श्री की भी पकड़ वेदांश की शर्ट पर जरा कस जाती है वह डरकर उसके सीने में छिप जाती है
"रिलैक्स श्रू" वेदांश उसे डरता देख उसकी कमर को सहलाते हुए धीरे से उसके कान के पास कहता है ।
वह कुछ शांत होती है.." मैने कहा था न मेरे सामने दोबारा मत आना वरना ..." वह वैसे ही अपनी धीमी आवाज में उसके बालों को सहलाते हुए कहता है..
श्री उससे दूर हट उसे घबराते हुए देखती है... डर से वह अपने कदम पीछे लेने लगती है। वेदांश ने भी उसे छोड़ दिया था। वह बिना कुछ कहे कनु का हाथ पकड़ वहां से निकल जाती है।
अब वहां से सभी जा चुके थे। वेदांश जाती हुई श्री को देख रहा था। वह एक पिलर के सहारे अपने हाथ बांधे खड़ा था। इस समय उसके होंठों पर मंद मुस्कुराहट थी।
कोई कह सकता था उसे ऐसे देखकर ये वो वेदांश राठौर जो लोगों का खून बहाने से पहले एक बार भी नहीं सोचता... वह पीछे पलटता है जहां उसे कुछ दूरी पर अनव उसे ही देख रहा था ।
उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कुराहट थी। उसे ऐसे देख वेदांश अपनी एक आइब्रो उठता है
अनव चलता हुआ उसके पास आता है.. उसने वैसे ही मुस्कुराते हुए कहा... "कोई ऐसा भी है जो वेदांश राठौर के सीधा दिल में ही उतर गया.. इंट्रेस्टिंग.. वेरी इंट्रेस्टिंग"
वेदांश के भाव शर्द हो जाते है वह अपनी भारी आवाज में बिना किसी एक्सप्रेशन के उससे कहता है... "ऐसा कोई नहीं... जो वेदांश राठौर के सीधा दिल में उतर सके.."
कहते हुए वो आगे बढ़ जाता है। अनव भी उसके पीछे आते हुए कहता है .. "ओ सिरियसली "
इधर.. श्री मंदिर के मैंन एरिया में आ चुकी थी। यहां पर सभी बस वेदांश का ही इंतजार कर रहे थे। कनु उसका हाथ पकड़ धीरे से उसके कान में बोलती है
"श्री क्या तू पहले से ही Mr राठौर को जानती है?" श्री उसे देखती है फिर वो भी धीरे से बोलती है में तुझे सब बाद में बताऊंगी... कनु उसे अपनी आंखे बड़ी कर देखती है " प्लीज़.." वह उससे रिक्वेस्ट करते हुए कहती है
अब कनु भी कुछ नहीं कहती क्योंकि कोई सुन लिया तो खामखां बखेड़ा हो जाता है।
"श्री बेटा इधर आओ.." तभी उसे महापंडित जी की आवाज सुनाई देती है। वह चौंककर उन्हें देखती। पंडित जी उसे हल्की मुस्कुराहट के साथ देख रहे थे।
सभी का ध्यान श्री पर जाता है एक पल को तो.. विधि जी भी उसे देखती रह जाती है। वह सादगी में भी बहुत खूबसूरत लग रही थी। उससे ज्यादा कहर ढा रही थी उसके प्यारे से मुखड़े पर वो मासूमियत... जिसकी शायद एक पल को अक्षिता भी दीवानी हो गई थी।
वह जल्दी से नजर हटा खुद से बोलती है..."सुंदर तो है लो स्टैंडर्ड .. " वह खुद का ब्रांडेड लहंगा संभालने लगती है।
" Wow व्हाट अ ब्यूटी 😍" जीवन और शायना दोनों उसे देखते हुए एक साथ बोलते है। मिहिर और अजीत शायना को अजीब नजर से देखने लगते है.." जीवन ने बोला तो समझ आया लेकिन ये.." अजीत अपने बाल खुजलाते हुए बोलता है
शायना... खुद पर उन तीनों की नजर फील कर.. अपना गला साफ करते हुए बोलती है... "अरे यार.. अब कोई है इतना प्यारा तो क्या करें.."
मगर अपनी आदत से मजबूर वो तीनों उसे ऐसे ही घूरते रहते है... शायना थोड़ा चिढ़ जाती है .. लेकिन वह अपनी चिढ़ को छिपाते हुए जल्दी से बोलती है
"वैसे अगर ये हमारी भाभी बन जाए तो कैसा रहेगा" उसका चेहरा बिलकुल 440 की बोल्ट के चमक जैसे खिला हुआ था। वो तीनों कुछ पल उसे कंफ्यूजन भाव से देखते है मगर जैसे ही उन्हें समझ आता है... वो खुशी से चिल्ला ही नहीं पाते क्योंकि...
पंडित जी श्री से कहते है ... "आओ श्री आज की पूजा की सामग्री को तुम एक बार खुद देख लो... " श्री थोड़ा नर्वस होकर उन्हें देखती है फिर कुछ सोचकर वहां जाकर सब देखने लगती है
विधि जी ... और सिखा जी श्री को बस मुस्कुराते हुए देख रही थी। न चाहते हुए भी अक्षिता को उससे कुछ जलन होने लगती है.. " हाउ कंजर्वेटिव गर्ल " वह बुदबुदाते हुए कहती है
इधर वेदांश सीढ़ियां चढ़कर आता है अब सभी का ध्यान उस पर चला जाता है क्योंकि श्री की पीठ उसकी तरफ थी ... वेदांश जैसे ही वहां आकर बैठता है ...
हेलो दोस्तो 🤗 कैसे है आप सभी?... उम्मीद करती हूं.. अच्छे ही होंगे ? Plz बताएगा आज आपको चैप्टर कैसा लगा...
“Next part jaldi aayega… follow aur rating zaroor dein 💞”
Yarr aap log kitne sare reders ho jo chapter read karte ho... Or mujhe is baal ki bhout khushi but follow or chapter ko Raiting bhi to do... Phele to aap raiting bhi dete the or aab to vo bhi nhi.... Plz meri request hai meri aap se ... Aap chapter ko Raiting dein...
And aap sabhi ka BHOUT SARA THANK YOU💞 aapki wjeh se meri is story ne 50k views croos kiye...