Mafia's Obsessed Love - 10 Priyanka Saini द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mafia's Obsessed Love - 10

सोफे के बीचों बीच एक खूबसूरत लड़की बैठी है । जिसने रेड कलर वन पीस स्ट्रीप ड्रेस  जो केबल घुटनों तक आ रही थी पहनी हुई है । उसके बॉल खुले हुए है जो कंधों तक आ रहे । हैवी  न्यूड मेकअप के साथ न्यूड रेड लिपस्टिक उसकी निगाहें उसके फोन पर टिकी है ।

      जैसे  ही केबिन का दरवाजा खुलता है ... वह लड़की अपनी निगाहें उठा के उस तरफ देखती है । सामने से आ रहे शख्स को देखकर अपनी जगह से मुस्कुराते हुए उठती है  और बोलती है ... "कैसे हो वेदांश ? " 
     मगर वेदांश कुछ नहीं कहता खामोशी से जाकर अपनी किंग साइज चेयर पर बैठ जाता है । वह हमेशा की तरह हैंडसम लग रहा था आज उसने डार्क नेवी ब्ल्यू थ्री पीस सूट पहना था उसके निखरते फेयर कलर पर वो सूट ओर भी ज्यादा कयामत लग रहा था । उसकी सर्द निगाहें उसके लैपटॉप पर ही टिकी थी । 

आगे......
कहीं दूर..... "अरे ! बच्चा तुम्हे ध्यान से रोड पर आना चाहिए था । अब देखो तुम्हे लग गई न ... और मम्मा कहां है आपकी" ..... एक लड़की जो एक छोटे से बच्चे के कपड़े  झाड़ते हुए कह रही थी । वो बच्चा रो रहा था उसकी आंखों से मोटे मोटे आशु निकल रहे थे । पर फिर भी बहुत cute 🥰 लग रहा था .... बस रोते हुए आपने सामने बैठी लड़की को देख रहा था जो उसे प्यार से समझा रही थी ।

हल्के आसमानी कलर की कुर्ती के साथ सफेद ट्राउजर पर सफेद दुपट्टा डाले... छोटा सा गोल चेहरे और तीखी नाक गुलाबी होठों के साथ वो बेहद प्यारी लग रही थी ।

"अच्छा... चलो अब रोना बंद करो ... कितने प्यारे हो तुम ओर आपने अंशु बहा रहे हो" ... उस लड़की ने प्यार से उस क्यूट से बच्चे के चेहरे को आपने हाथों में भर कहा...

" नहीं दीदी मेली आइसक्लीम भी गिल गई ... ओल मम्मा मुझे नहीं दिलवाएगी दूसली ..." उस बच्चे ने अपनी प्यारी और क्यूट सी आवाज में कहा तो वो हसने लगी ... वो हंसते हुए किसी राजकुमारी से कम नहीं लग रही थी । उसके वो छोटे छोटे गुलाब की पंखुड़ियां जैसे बिल्कुल हार्ट शेप में होंठ और भी प्यारी लग रहे थे... इस बात से अनजान एक जोड़ी आंखे उसे रोड के दूसरी तरफ से बस एक टक बड़े गौर से देख रहा थी । इसी के साथ वह झट से अपनी आंखें खोलता है। एक लड़का जो एक कमरे में बैठा हुआ दारू पी रहा था उसके आसपास से भी दारू की महक आ रही थी। वह अपने हाथ में दारू के गिलास को घूर रहा था। वह अपनी कमर को पीछे टिकाते  हुए सोफे पर लीन होकर बैठता है...
   कहां हो तुम जाना..... अब रहा नहीं जाता। बस.... बस एक बार मेरी... बाहों में आ जाओ... तुम्हें... खुद से कभी दूर जाने नहीं दूंगा... बहुत तड़पा लिया तुमने अब..."अपनी आंखों को बंद करते हुए कहता है इस वक्त उसके होठों पर बेहद प्यारी मुस्कुराहट थी।

मुंबई रेलवे स्टेशन....
श्री जो अभी–अभी  ट्रेन से बाहर ही निकली थी कि उसके पीछे से एक औरत की चिल्लाते हुए आवाज आती है ... "पकड़ो उसे उधर देखो वो रही लड़की..." श्री जैसे ही आवाज सुनती है पीछे पलट कर देखती है। उसके पीछे कुछ आदमी भागते हुए आ रहे थे वही ट्रेन वाली औरत उन आदमियों से चिल्ला कर कह रही थी। 

श्री के हाथ पर अब ठंडे पड़ चुके थे। उसे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करें? उसके दिमाग ने काम करना जैसे बंद ही कर दिया था। पहले से ही वह  डरी हुई थी और ऊपर से अब ये सब... वो खुद को जल्दी से संभालते हुए अपने बैग को ढंग से पकड़ कर स्टेशन से बाहर की ओर भाग जाती है । उसके पीछे वे सारे आदमी भी स्टेशन के बाहर चले जाते है । स्टेशन से बाहर निकालने के बाद श्री बेस्ड होकर भाग रही थी कि तभी वो सामने से आ रहे इंसान से टकरा जाती है और दोनों ही नीचे गिर जाते है ।
    
" Sorry.... sorry... हमें माफ कर दीजिए हमने जानबूझकर आपको नहीं गिराया। वह गलती से हो गया। बस हम थोड़ी जल्दी में थे तो आगे ध्यान नहीं दिया।...." 
श्री जल्दी-जल्दी जो उसके मुंह में आया बोल देती है... वहीं उसके सामने खड़ी वह लड़की उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए उसकी सारी बातें सुन रही थी। हालांकि उसे बहुत गुस्सा भी आ रहा था। मगर वह श्री के चेहरे पर डर साफ-साफ देख पा रही थी। 
     
   "अरे.... Relax पहले गहरी सांस लो और धीरे बोलो। बताओ तुम इतनी जल्दी में क्यों थी ? कि तुम आगे देख भी नहीं पाई और आकर मुझसे टकरा गई।" वह लड़की अपनी शांत आवाज में श्री से बोलती है.... कुछ पल उस लड़की को देखने के बाद श्री उससे  कहती है...
" प्लीज हमें बचा लो हमारे पीछे कुछ लोग पड़े हैं वह हमें ढूंढ रहे है... पता नहीं हमारे साथ क्या करेंगे प्लीज मेरी हेल्प करो।"        श्री की बात सुनने के बाद उस लड़की के चेहरे के एक्सप्रेशन कुछ बिगड़ जाते हैं मगर तभी उसे पीछे से कुछ आवाज आती है... 
  
"अरे... ढूंढो कहां गई होगी अभी तक यहीं कहीं होगी साली....." एक आदमी जो लगातार चिल्ला रहा था और उसके आगे पीछे कुछ गुंडे थे। जैसे श्री इस आवाज को सुनती है वह डर से कांप जाती है। उसका चेहरा डर से पीला पड़ जाता है। वह लड़की श्री के चेहरे के एक्सप्रेशन को ही नोटिस कर रही थी। जल्दी से खड़ी होती है श्री का हाथ पकड़ते हुए अपने साथ खींच कर ले जाती है। श्री बोलती है... "अरे यह आप क्या कर रही हैं मुझे कहां लेकर जा रही है? " वह बोलती है..." ज्यादा कुछ नहीं उन के पास लेकर जा रही हूं जो तुम्हें ढूंढ रहे हैं... देखो कैसे तुम्हें ढूंढते हुए वह पागल हो रहे हैं... " यह सुनने के बाद तो श्री अपनी जगह पर ही जम जाती  है ।

उसके कदम आगे बढ़ ही नहीं रहे थे। "अरे ... अब चलो भी तुम्हें क्या उन दरिंदों के हाथों मरना है.. " वह लड़की श्री का हाथ पकड़ कर खींचते हुए उससे कहती है... "क्या तुम मुझे उन लोगों के पास नहीं लेकर  जा रही" श्री ने यह बात बहुत ही मासूमियत से कही थी... वहीं वो  लड़की एक नजर श्री को देखती हैं और सोचती है... "क्या कोई इतना मासूम भी हो सकता है.."। 

जल्दी से वो खुद की सोच से बाहर आते हुए कहती है... "क्यों तुम्हें जाना है क्या अगर जाना है तो जाओ नहीं जाना है तो मेरे साथ आओ..." श्री हड़बड़ाकर "नहीं-नहीं मुझे उनके पास नहीं जाना... " तो ठीक है चलो आओ मेरे साथ".. उसने कहा... "मगर कहां ?"श्री ने पूछा ... "अभी  फिलहाल के लिए तो हमें यहां से निकलना है".. श्री अब ज्यादा सवाल न पूछते हुए उसके पीछे चली जाती है... वो लड़की पार्किंग से अपनी स्कूटी निकलती है और  श्री को अपनी स्कूटी पर बिठाकर वहां से निकल जाती है। वहीं स्टेशन पर अभी भी वो सारे गुंडे श्री को ढूंढ रहे थे मगर श्री तो उन्हें मिल ही नहीं रही थी अब मिले भी कहां से उन्हें क्या पता श्री तो यहां से कब की जा चुकी है.... 

चलो अब बताओ वह तुम्हारे पीछे क्यों पड़े थे? और तुम कहां से आई हो तुम्हें कहां जाना है ?तुम जहां जाओगी मैं तुम्हें वहीं छोड़ दूंगी... उस लड़की ने अपनी स्कूटी को हाईवे पर एक तरफ रोकते हुए श्री से पूछा...  "मुझे नहीं पता... मैं कहां जाऊंगी... थैंक्यू हमें उनसे बचने के लिए।"
श्री ने स्कूटी से उतर कर खड़े होते हुए अपनी पलकों को झुका कर कहा...   "व्हाट!... क्या तुम्हें नहीं पता तुम्हें कहां जाना है... तुम यहां किसके साथ आई हो?" उस लड़की ने चौंकते हुए श्री को देखकर कहा... दूसरी की आंखों से झर झर आंसू बहने लगे .... यह देखकर उस लड़की ने गहरी सांस ली और कहा... "पहले शांत हो और मेरे साथ मेरे फ्लैट पर चलो..."।     इतना कह कर वह लड़की अपनी स्कूटी पर बैठ जाती है श्री भी उसी के साथ बैठ जाती है ... अब दोनों वहां से निकल जाते हैं।
  
    वहीं दूसरी तरफ... 
वेदांश का केबिन... 
"वेद मैं तुमसे मिलने आई हूं और तुम हो कि अपने काम में बिजी हो... कम से कम एक बार मेरी तरफ देखा तो लो।" अक्षिता ने  चिढ़कर अपने सामने बैठे वेदांश से कहा...

  "मेरे पास इतना फालतू का वक्त नहीं... जो बेफिजूल लोगों पर खर्च करूं... गंभीर होकर वेदांश ने बिना अक्षिता को देखे कहा । तो अक्षिता अपने  दोनों हाथों की मुट्ठी को कसकर भींच लिया। आख़िरकार वह अपनी बेइज्जती कैसे बर्दाश्त कर सकती थी मगर फिर भी उसने खुद को शांत किया और कहा... "देखो वेद अब हमारी शादी होने वाली है ।मुझे लगता है तुम्हें मुझे थोड़ा सा अपना टाइम देना चाहिए। " 
        "किसने कहा मैं तुमसे शादी करूंगा... मुझे फालतू लोगों पर अपना टाइम वेस्ट करने की आदत नहीं... वेदांश ने यह बात काफी गंभीर लहजे अक्षिता को अपनी पैनी नजरों से देखते हुए कही ... 
           जिस पर कुछ पल अक्षिता वेदांश को देखते ही रह गई... वह वेदांश की बातों का मतलब निकाल रही थी जो अभी-अभी वेदांश ने उससे कही कि वह शादी नहीं करेगा। "क्या मतलब था उसका? वह मेरे से शादी नहीं करेगा। " अक्षिता अभी-अभी अपने मन में चल रही बातों को खुद से कह रही थी.. वेदांश केविन के बाहर जा चुका था। 
     जैसे ही अक्षिता को वेदांश की बातों का मतलब समझ आता है वह दांत पीसते हुए गुस्से से कहती है....   "ऐसा कभी नहीं होगा और मैं तुम्हारी शादी किसी और के साथ कभी नहीं होने दूंगी अब तुम देखते जाओ... वेदांश राठौर। मैं क्या करूंगी? ... " इतना कहकर वो गुस्से में पर पटकते हुए केबिन से बाहर चली जाती है। 
     
                                             By Hell Girl...

तो आगे क्या करने वाली अक्षिता? क्या वह लड़की श्री को समझ पाएगी ? अब क्या करेगी श्री इस मुंबई में रहकर? आगे जाने के लिए पढ़ते रहिए... "Mafia's Obessed Love" 💕 😘 

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