Mafia's Obsessed Love - 6 Priyanka Saini द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mafia's Obsessed Love - 6

अभी तक अपने  पड़ा...
उसने इतना कहा ही था कि एक थप्पड़ आकर उसके गाल पर पड़ता है साथ ही एक गुस्से से भरी आवाज आती है... "मनहूस कहीं की तेरे मां बाप तो मर गए और तुझे बोझ को हमारे ऊपर छोड़ गए ।"
        अब आगे ....
            श्री के आंसु आ जाते है... अपने और अपने मम्मी पापा के बारे में ऐसा सुनकर श्री अपना चेहरे को ऊपर उठा कर देखती है। 
               ये थप्पड़ उसकी चाची ने  ही उसे मारा था , जो अभी भी उसे गुस्से से घूर रही थी। ये देखकर पूरा परिवार श्री को ही देखने लगता है। नियम को गुस्सा आ जाता है और वो खड़े होते हुए कुछ बोलने को होता है , पर उससे पहले ही कमल जी बोल पड़ते है...
    
 " श्री अब तुम इतनी बड़ी हो गई हो कि हमारे फैसलों पर जवाब दोगी । अरे तुम्हे तो खुश होना चाहिए। प्रधान के बेटे का रिश्ता आया है , तुम्हारे लिए , और वैसे भी तुम तो जानती हो न हम पर पहले से ही कितना उधार है । ऐसे में हम तुम्हारी शादी करना चाहते है । आगे हमारे भी तो बच्चे है उनकी भी तो शादी करनी है। अब हम कब तक तुम्हारा बोझ उठाते रहेंगे ।"
     
अपने चाचा के मुंह से  ये सब सुनने के बाद श्री की आंखों से झर झर आंसु बहने लगते है ।
     अब नियम को गुस्सा आ जाता है और वो बोलता है.. "पापा आप उस आदमी से दीदी की शादी कैसे करा सकते है? जिसकी पत्नी पहले ही मर चुकी है, और उसके बच्चे भी काफी बड़े–बड़े है । " 
      
इस पर उसकी मां बोलती है... "तो क्या हुआ ? इतने भी बड़े नहीं है बस 10 – 11  साल के ही तो है । अब क्या वो अपनी पहली पत्नी के चक्कर में अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर ले। वैसे भी वो हमसे दहेज नहीं ले रहे। जाओ जाकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो , फालतू की बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है , तुम्हे। 

बचपन से लेकर अब तक हम पर बोझ ही तो बनी हुई है। इसका अब तक का खर्चा क्या इसका बाप देगा।" 
     
इतना बोलकर वो श्री की तरफ मुड़ती है, ओर बोलती है... "बोल कलमुंही  तेरा कौन सा यार है, जो तू ये शादी करने के लिए मना कर रही है। " 
     
 इतना सब सुनने के बाद तो श्री अंदर से टूट ही जाती है, आखिरकार वो औरत उसके कैरेक्टर पर सवाल उठा रही हैं ? कैसे वो बर्दाश कर ले । अब नियम का गुस्सा बढ़ने लगता है ,बो कुछ बोल पाता उससे पहले ही श्री बोल पड़ती है... "हम शादी करने के लिए तैयार है चाची जी " इतना कहकर श्री अपने कमरे में चली जाती है ।
          इधर मुंबई में शाम के वक्त सभी लोग अपने अपने ऑफिस से घर आ चुके थे। लिविंग  एरिया में बीचों –बीच  बेहद लग्जरी couch पड़े थे। और इन्हीं के साथ बीच में एक टेबल थी , जिस पर लग्जरी फ्लावरपोट रखे हुए थे। शिखा जी अपने फोन में कुछ देख रही थी, ओर विधि जी जो कुछ कुकीज और काफी की ट्रे लेकर टेबल पर रखती है और सभी से काफी के लिए बोलती है। 
        
Couch पर मनीष जी ओर अजय जी  बैठे हुए थे जो किसी टॉपिक पर जरूरी बात कर रहे थे । 
     
तभी कोई सीडीओ से भागते हुए कोई नीचे आता  और साथ ही चिल्ला भी रहा था.. " चुड़ैल मेरा पीछा छोड़ दे, मैने कुछ गलत नहीं कहा... तू सच में चुड़ैल जैसी दिखती है, तो मैं में इसमें क्या कर सकता हूं ।"
    
  उसके पीछे भागते हुए कोई चिल्ला रहा था... "तू रुक जरा चूहे कहीं के तेरी भी सकल किसी बंदर से कम नहीं है।" 
     
सब अपना सिर उठाकर सीढ़ियों  की तरफ देखते हैं, मिहिर जो आगे–आगे भाग रहा था साथ ही चिल्ला रहा था और उसके पीछे शायना थी जो उस पर चिल्ला रही थी।
       सोफे पर बैठे मनीष जी बोलते है... अरे आराम से चोट लग जाएगी। इस तरह लड़ो मत।
    
शायना चिल्लाते हुए बोलती है... नहीं BP आज में इसको छोडूंगी नहीं , इसकी हिम्मत कैसे हुई मुझे चुड़ैल कहने की ?  अजित जो अभी–अभी  अपने रूम से आया था , वो बोलता है... 
  
" अब चुड़ैल को चुड़ैल नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?" 
       ये सुनने के बाद तो शायना को ओर भी ज्यादा गुस्सा आ जाता है , वह गुस्से में बोलती है ... "तू.. गुरिल्ले सी सकल के तुझे अभी बताती हूं।"
     
  उनकी ये लड़ाई देखने के बाद सब अपना सिर न में हिला देते है। ये सब उनके लिए कोई नया नहीं है ये तो रोज का था , इन तीनों का... पूरे विला में तीनों के चिल्लाने की आवाज गूंज रही थी, बाहर खड़े बॉडीगार्ड भी एक नजर विला को देखते है , अब ये उनके लिए भी नया नहीं था जाहिर सी बात है।
    
 शिखा जी थोड़े गुस्से में शायना को डांटते हुए बोलती है.. बस करो शाय..  वो अभी इतना बोल ही पाई थी कि शायना उनकी बात काटते हुए बोलती है... "नो मोम आज तो मैं इन दोनों का मुंह तोड़ कर ही रहूंगी।" 
   
शायना के इतना बोलते ही वहां किसी की सख्त आवाज गूंजती है। "क्या चल रहा है? ये सब।" 
सब उस आवाज की तरफ देखते है जो एंट्रेंस गेट के पास से आ रही थी। वहां वेदांश खड़ा था जो अभी–अभी अपने ऑफिस से आया था। जिसके एक हाथ में उसका कोट था तो दूसरा हाथ पेंट की पॉकेट में था। वह घूर कर उन तीनों को ही देख रहा था। 
     
वेदांश अपने भारी कदमों से अंदर आता है और तीनों को अपनी शरद नजरों से घूरते हुए , उन तीनों को अपने पास आने का इशारा करता है। उसका इशारा देखकर तीनों जल्दी–जल्दी न में सिर हिला देते है । 
        ये देखकर वेदांश उन तीनों को घूरते हुए अपनी भारी आवाज में कहता है... "इधर आओ वरना में आ गया तो .."
    
अभी वेदांश इतना बोल ही पाया था कि शायना जल्दी से वेदांश के पास जाकर खड़ी हो जाती है और बोलती है .. "भाई ये दोनों मुझे चुड़ैल बोल रहे थे। " 
   
ये सुनने के बाद वेदांश मिहिर और अजित दोनों को घूरता है और बोलता है .. "क्या तुम्हे ये चुड़ैल दिखती है ?" इस पर अजित, मिहिर  दोनों जल्दी से हां में सिर हिला देते है । उनकी हां सुनने के बाद सब अपना–अपना  मुंह दबाकर हसने लगते है और शायना उन्हें घूर कर देखती है

वेदांश दोनों को घूरते हुए बोलता है... "इधर आओ तुम  दोनों..." दोनों अपना सलाइवा गटक कर उनके पास जाने लगते है , कि तभी उन्हें एक आवाज सुनाई देती है "अरे ! बस भी करो बच्चे है। तुम भी न वेद।" ये सुनने के बाद सब एंट्रेंस गेट की तरफ देखते है जहां से एक मिडिल ऐज का आदमी अंदर आ रहा था ।
उन्हें देखकर मनीष जी अपनी जगह से खड़े होते है , ओर बोलते है.. "अरे ! विकास तुम यहां अचानक कोई कम था किया ? " 
    
  इस पर वह आदमी जिसका नाम विकास सावंत था। वह बोलता है... " तो अब क्या हम बिना किसी काम के इस घर पर आ भी नहीं सकते ? 
     
उनकी बात सुनकर विधि जी बोलती है... " ऐसी बात नहीं है भाईसाहब आए बैठिए " विकास जी एक सिंगल शीटर सोफे पर बैठ जाते है। सर्वेंट उनके लिए काफी लेकर आते है । विकास जी काफी का शिप लेते हुए बोलते है .. 
         "दरअसल मैं चाहता हूं कि .. क्यों न हम अक्षिता और वेदांश की इंगेजमेंट की डेट फिक्स कर दें। " तो विधि जी मुस्कराकर बोलती है... " अरे! ये भी कोई पूछने वाली बात है भाईसाहब? 
   
विधि जी की बात सुनने के बाद सब अपना सिर हां में हिला देते है, वहीं शायना मिहिर और अजित इन तीनों की तो अलग ही खिचड़ी पक रही थी । ऊपर से ये सब सुनने का बाद तो तीनों का मुंह ही बन जाता है क्योंकि तीनों को ही अक्षिता पसंद नहीं थी। 
    
 अब सभी की निगाहें वेदांश पर टिक जाती है जो वहीं खड़ा , पेंट की पॉकेट में दोनों हाथ डाले अपने एक्सप्रेसनलेस चेहरे के साथ उन्हें ही देख रहा था।
  
  क्या होगा वेदांश का जबाव ? क्या सच में श्री कर लेगी शादी?  आखिरकार क्यों अक्षिता नहीं पसंद उन तीनों को ? क्या वेद करता है अक्षिता से प्यार ? जानने के लिए पढ़िए  " Mafia's Obessed Love" । दोस्तो plz बताओ kya आपको ये स्टोरी पसंद आ रही है? या नहीं । कुछ तो बताओ । आपने ओपनियन शेयर करो।