बर्दाश्त की हद कमल चोपड़ा द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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बर्दाश्त की हद

 बर्दाश्त की हद 

कमल चोपड़ा

​वह अक्सर चोटें खाकर डॉ. मदान के क्लीनिक पर आती। चोटें लगने का कारण भी हर बार एक ही होता। फिर भी पूछने पर रोते-सिसकते हुए यह बताती कि उसके तो भाग ही फूटे हुए हैं। उसका पति शराबी और जुआरी है। कैसे-कैसे मेहनत कर-करके वह पाई-पाई जोड़ती है और वह छीन ले जाता है। जुए में हार जाता है और सारी खीझ उस पर निकाल देता है। जिंदगी नरक बना रखी है। कभी-कभी किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया तो वो उसका पति है इसलिए बर्दाश्त करने के सिवाय वह कर क्या सकती है?​पांच-दस दिन भी नहीं बीतते कि वह अपने पति से पिटकर अपने जख्मों का इलाज करवाने चली आती। एक जख्म ठीक होता तो दूसरा शुरू हो जाता। बर्दाश्त की भी हद होती है लेकिन...उसकी लगातार बर्दाश्त करते जाने की क्षमता की कोई हद न देखकर डॉक्टर भी हैरान रह जाते।​लेकिन आज खुद नहीं बल्कि अपने पति को जख्मी हालत में लेकर आई थी। डॉक्टर ने सोचा, कहीं किसी से झगड़ा किया होगा या शराब पीकर गिर पड़ा होगा। वह काफी घबराई हुई-सी थी, "डॉक्टर साब, इन्हें कैसे भी बचा लीजिए। चाहे जितना भी खर्च हो जाए...मैं आपके हाथ जोड़ती हूं..."​उसके खतरे से बाहर होने की तसल्ली मिलते ही उसकी जैसे जान में जान आई। डॉक्टर ने थोड़ी देर बाद कहा, "काफी बुरी तरह मारा है किसी ने इन्हें। पुलिस में रिपोर्ट कर दो...तुम उनसे कम-से-कम इलाज का खर्चा तो ले ही सकती हो जिन्होंने इन्हें पीटा है..."​"खर्चा किससे लेना है...? मैंने खुद ही तो पीटा है इसे...!"​हैरान थे डॉक्टर। आज इसकी बर्दाश्त की ताकत कहां गई? पूछा तो उसने बताया, "हां, हद कर दी आज इसने तो...मेरी बेटी जो बारह-तेरह साल की है एक घर में बर्तन मांजने जाती है। ये मालिक के घर में जाता था और उसकी तनख्वाह ले आता था और उड़ा देता था। अब आप ही बताओ, मेरी कमाई शराब-कबाब में उड़ा दे तो फिर भी चलो कोई बात नहीं...बेटी की कमाई की शराब-वराब पिएगा तो आप ही बताओ क्या सीधा नरक में नहीं जाएगा?"      ​हैरान थे डॉक्टर-इसे इधर के अपने नरक की नहीं बल्कि मरने के बाद भी पति के नरक की चिंता है। डॉक्टर ने पूछा, "तुमने अपने पति को इस बात के लिए पीटा?"​कुछ क्षण खामोश रहने के बाद वह बोली, "नहीं...दरअसल कुछ दिन पहले जहां मेरी लड़की काम करती थी मौका पाकर उसके मालिक ने लड़की के साथ गलत हरकत कर दी। बिटिया ने हमें बताया तो मैं तो जूती लेकर गई और मालिक की धुनाई कर दी। फिर पुलिस में रिपोर्ट लिखवा दी। यह कहता रहा कि बदनामी हो जाएगी, चुप्पी लगा जाओ। केस चल रहा है। शिकायत वापस लेने के लिए मालिक दबाव बना रहा है, पर मैं उस भेड़िए को सजा दिलाकर रहूंगी। ये कमीण आज जा के उस बेटी की इज्जत की कीमत वसूल कर लाया है। पच्चीस हजार ले के शिकायत वापस ले लेने का वादा कर आया है। ये बेटी का बेगैरत बाप बलात्कारी के साथ मिल गया है। ये कहता है, जो हो गया सो हो गया...कुछ नहीं बिगड़ा! पैसे तो मैं उस भेड़िए के घर फेंक आई हूं। उस भेड़िए को तो मैं छोडूंगी नहीं! जिस मां की बेटी के साथ ऐसा हो वो कैसे बर्दाश्त करके रह सकती है?"​पास ही पट्टियां करवा रहा उसका पति दर्द से कराहते हुए बोला, "बर्दाश्त करने के सिवाय क्या चारा है। उन्हें सजा हो भी गई तो हमें क्या मिलेगा?... बदनामी? डॉक्टर साहब, ये औरत पागल हो गई है। कोई औरत अपने पति को इस तरह पीटती है क्या?"​डॉक्टर साहब मुस्कुराए और बोले, "पागल तो ये पहले थी उलटा अब तो इसे अक्ल आ गई है...!"