इधर दूसरी तरफ वेदांश घर आता है काफी रात हो चुकी थी सब सो गए थे । राठौर विला में चारों तरफ सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे ।वह अपनी कार से उतरकर सीधा लिविंग एरिया में आता है। सामने मनीष जी बैठे हुए अपने फोन में कुछ कर रहे थे।
वह सिर उठाकर देखते हैं, सामने ही कुछ दूरी पर वेदांश खड़ा होता है। वह बोलते है ... “खाना खाया?” हां...
वेदांश सिर हिलाकर जवाब देता है। और “आपने, मॉम ने खा लिया क्या?”
" हां खा लिया उन्हें दवाई की वजह से नींद आ रही थी तो सो गईं । " अब तुम्हे भी सो जाना चाहिए "
इतना कहकर वे अपने रूम में चले जाते हैं। और वेदांश सीढ़ियां चढ़ते हुए अपने रूम में ... ।
अब आगे ......
अगली सुबह,,,,,,,,,,,
किसी आवाज से श्री की आँख खुलती है। वह हड़बड़ाकर उठ जाती है—कोई ज़ोर-ज़ोर से दरवाज़ा पीट रहा था। श्री उठकर अपने बालों को समेट दरवाजा खोलती है... सामने कनु को देख बोली .... “Sorry… मैं लेट हो गई।”
“Sorry बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है। अभी तो 7:30 ही बजे हैं।” पर मुझे ऑफिस जाना है 8: 10 पर इसलिए तुम्हे अर्ली मॉर्निंग उठा दिया ... "
कहते हुए कनु अंदर आती है और सामने बेड पर बैठ जाती है।
"मैने नाश्ता रेडी कर लिया है फिलहाल तुम फ्रेश होकर आओ उसके बाद साथ बैठ कर ब्रेकफास्ट करते है "
श्री कनु को देख हां में सिर हिलाकर वाशरूम चली जाती है करीब आधे घंटे बाद श्री और कनु डायनिंग एरिया में थे जहां पर लकड़ी की एक छोटी टेबल के चारों ओर तीन चेयर लगी थी उस टेबल पर फ्रूट्स सलाद, चपाती विद सब्ज़ी थी।
मुँह में सेब का एक टुकड़ा डालते हुए कनु बोली,
“श्री, मैं शाम तक ऑफिस से लौट आऊँगी। तब तक अपना ध्यान रखना।” किसी भी चीज की जरूरत हो मुझे फोन कर लेना। वैसे सारी चीजें है घर पर जरूरत की।"
श्री कुछ देर कनु को देखती है फिर हिचकिचाते हुए बोलती है... “हम… हमें भी कुछ काम करना है। प्लीज़, अगर कोई जॉब हो तो हमारे लिए भी…” श्री अपनी बात बीच में छोड़ कनु को देखने लगती है।
कनु जो बहुत ध्यान से श्री की बात सुन रही थी उसकी तरफ देखते हुए कहती है... "तुम ज्यादा टेंशन न लो में कोशिश करूंगी तुम्हे जल्दी ही कोई अच्छी जॉब मिल जाए वैसे तुम्हे किस टाइप की जॉब चाहिए मेरा मतलब तुमने कभी पहले कोई जॉब की है "
" नहीं हमने पहले कभी कोई जॉब नहीं की। बस बच्चों को ट्यूशन ही पढ़ाते थे।" श्री न में गर्दन हिलाते हुए बोलती है
" Ok फिर में कोशिश करूंगी तुम्हे कोई ट्यूटर या home ट्यूटर की जॉब मिल जाए। ठीक है फिर में चलती हूं . ऑफिस का टाइम हो गया शाम को मिलते हैं खाना टाइम से खा लेना और अपना ध्यान रखना ... " कहते हुए कनु सेब की एक स्लाइड मुंह में रख बाहर निकल जाती है
उसकी इस हरकत पर न चाहते हुए भी श्री के होठों पर एक छोटी सी स्माइल आ जाती है
इधर दूसरी तरफ " VR ENTERPRISE"
आज सुबह से ही ऑफिस का माहौल कुछ गर्म था और होता भी क्यों नहीं सबकी वाट जो लगी हुई थी।आज सभी सीनियर एम्प्लॉइज़ की वेदांश के साथ मीटिंग थी।
“समझ नहीं आता, बॉस इतना गुस्सा लाते कहाँ से हैं?” एक लड़का अपनी उंगलियों को कीबोर्ड पर तेजी से चलाते हुए बोलता है उसकी आंखों पर एक पतले फ्रेम का नजर का चश्मा लगा था
हल्की आसमानी शर्ट काली पेंट पहने हुए वो बेहद ही एलिगेंट लग रहा था चेहरे पर शांति के भाव मगर मन में एक तूफान उमड़ रहा था
"विरासत में..... बॉस को जरूर ये गुस्सा विरासत में ही मिला होगा वैसे भी मैने सुना है जो आपके पास ज्यादा हो वो आपको आपके परिवार से ही मिलता है" उसके पास वाला लड़का अपने दांत दिखाते हुए उससे बोलता है ...
"ओ ऐसा है क्या ... फिर तो ये काम के टाइम पर न चलने वाला दिमाग भी तुम्हे विरासत में ही मिला होगा ..।" पहला लड़का उस लड़के को तिरछी स्माइल पास करते हुए बोला ..
" तू कहना क्या चाहता है मेरे पास दिमाग नहीं है"
"मैने ऐसा कब कहा "
"तेरे कहने का मतलब तो यही है "
"क्या सच में तू बिना दिमाग के पैदा हुआ था "
"कहां खो गया" पहला लड़का दूसरे लड़के को हिलाते हुए कहता है अपने विचारों से बाहर आते है दूसरा लड़का बोलता है ... भाई संजय मैं सोच रहा हूं.. बॉस की जिस लड़की से शादी होगी वो कैसे झेलेगी बॉस को "
अभी वो दोनों बात कर ही रहे थे कि सामने से किसी की तेज आवाज आती है " बीवियों के आगे किसी की भी नहीं चलती फिर चाहे महादेव ही क्यों न हो .. ।"
"मेरे खयाल से अब तुम्हे उस बारे में सोचना चाहिए जो बॉस ने काम दिया है" दोनों लड़के हड़बड़ाकर सामने देखते है जहां कोई और नहीं उनके डिपार्मेंट का हेड खड़ा
था ।
वहां बैठे सारे एम्प्लॉय का ध्यान जब अपने हेड पर जाता है सब उन्हें ग्रीट करते है ध्यान से उनकी बातें सुनने लगते है क्योंकि वो जानते थे आज उनके हेड की हालत खस्ता है सारा गुस्सा कब किस पर उतर जाए किसी को नहीं पता
" बॉस ने कल वाले प्रोजेक्ट की प्रेज़ेंटेशन रिजेक्ट कर दी और एक दिन के अंदर नई मांगी है वरना .. ।"
कहते हुए वो अपनी बात अधूरी छोड़ देता है सभी समझ चुके थे अगर कल presentation रेडी नहीं हुई तो इसमें कोई शक नहीं सभी फायर भी हो सकते है ।
कोई कुछ नहीं बोलता सभी अपने काम में जुट जाते है मगर अंदर से उन्हें खुद पर तरस आ रहा था पर अब वो कर भी क्या सकते है काम तो उन्हें करना ही पड़ेगा ।
इधर मीटिंग रूम से आने के बाद वेदांश अपने केबिन में, ग्लास वॉल के पास खड़ा सिगरेट के कश ले रहा था।उसकी नज़रे बाहर रोड पर चल रही गाड़ियों पर थी कितनी बीजी है ये जिंदगी शायद कभी किसी के लिए नहीं रुकती
वो सिगरेट को डस्टबिन में फेंक एक गहरी सांस लेता है और वापस अपने लैपटॉप में जुट जाता है
ऐसे ही कुछ दिन बीत गए थे वेदांश की एंगेजमेंट का समय भी नजदीक आ रहा था। श्री को अब तक कोई जॉब नहीं मिली मगर पास के मंदिर में उसने कुछ लड़कियों को डांस सीखना स्टार्ट कर दिया था
कोई प्रोग्राम था शायद उन लड़कियों को डांस टीचर की जरूरत थी श्री को क्लासिकल डांस आता था इसलिए जबतक प्रोग्राम नहीं होता तब तक उनकी डांस प्रैक्टिस श्री ही करा रही थी इससे उसे कुछ अर्निंग भी हो रही थी।
मगर एक शाम ....
Hey Guys ... Chapter kaisa lga comments mei jrur batayega... And plz raiting and follow bhi kar lo na..
Thank you 💞 Jaldi milte hai
And vaishnavi ji apka bhout sukriya ...❤️