50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 15 Priya Chaudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 15

(एक ठंडी, अंधेरी रात। हवेली के मलबे के पास रखे आयशा के पुराने सामान के बक्से को खोलने की आवाज़—लकड़ी की चरचराहट। हवा की फुसफुसाहट जो आर्यन के नाम को पुकार रही है।)
आर्यन के हाथ कांप रहे थे। सामने वह दराज थी जिसे उसने कभी नहीं खोला था, यह सोचकर कि यह उसकी बेटी की निजता (privacy) है। लेकिन आज, उसी दराज के अंदर एक लिफाफा रखा था जिस पर लिखा था: "आर्यन मल्होत्रा के लिए—जब सब कुछ राख हो जाए।"
सीन 1: लिफाफे का राज़
आर्यन ने धीरे से लिफाफा खोला। अंदर एक पुरानी, पीली पड़ चुकी DNA रिपोर्ट थी। उसकी नज़रें नाम पर टिकीं—'आर्यन मल्होत्रा' और 'आयशा'। नीचे नतीजे में लिखा था—'Biological Father: Match'।
आर्यन की हथेलियाँ पसीने से भीग गईं। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसे डर था कि वह अभी फट जाएगा। आयशा... रंजना की गोद ली हुई बेटी नहीं थी? वह आर्यन की अपनी बेटी थी? लेकिन कैसे? उसे तो याद था कि माया कभी माँ नहीं बन सकती थी।
तभी उसे याद आया—उसकी पहली शादी, जो माया से पहले हुई थी। वह महिला, जिसे उसके पिता ने आर्यन से दूर कर दिया था क्योंकि वह एक साधारण परिवार से थी। आर्यन को बताया गया था कि वह और उसका बच्चा सड़क हादसे में मारे गए हैं।
सीन 2: 37वां दिन—जमीन का खिसकना
उसकी पहली पत्नी का नाम था 'मीरा'। आर्यन ने अपनी यादों के गलियारों में झाँका। क्या मीरा मरी नहीं थी? क्या रंजना ने ही उस दुर्घटना का नाटक रचा था ताकि आर्यन का पूरा ध्यान माया और उसके साम्राज्य पर रहे?
"हे भगवान! मैंने क्या किया..." आर्यन चिल्लाया। वह जिसे वह 'गोद ली हुई बेटी' समझकर नफरत और प्यार के बीच झूला झुलाता रहा, वह उसकी अपनी बेटी थी जिसे रंजना ने बचपन में चुरा लिया था ताकि वह आर्यन को मीरा की मौत का दोषी मानकर घुटती रहे।
समीर, जो उसके पास ही खड़ा था, रिपोर्ट देखकर स्तब्ध रह गया। "आर्यन, इसका मतलब है कि आयशा को रंजना ने सिर्फ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। रंजना ने उसे बताया था कि उसके पिता 'आर्यन' ने ही उसकी माँ को मारा है।"
सीन 3: आयशा का सामना
तभी, कोठरी के बाहर के गलियारे में आहट हुई। आयशा वहां खड़ी थी। उसकी आँखों में आंसू नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी थी। उसने सब सुन लिया था।
"तो यह सच है," आयशा ने धीमी आवाज़ में कहा। "आप मेरे पिता हैं। और मेरी माँ मीरा थी, जिसे आपने कभी नहीं ढूंढा क्योंकि आप माया के लालच में अंधे थे।"
आर्यन आयशा के पैरों पर गिर गया। "आयशा, मुझे नहीं पता था! रंजना ने मुझे बताया था कि मीरा और बच्चा मर चुके हैं! मुझे माफ कर दो!"
आयशा ने अपना हाथ पीछे खींच लिया। "माफी? क्या माफी से वो बीस साल वापस आएंगे जो मैंने एक अनाथालय में बिताए? क्या माफी से वो दर्द कम होगा जब मुझे पता चला कि मेरे पिता ही मेरी माँ के कातिल हैं?"
सीन 4: 37वां दिन—तनाव की पराकाष्ठा
आर्यन को एहसास हुआ कि रंजना का असली खेल तो आयशा को आर्यन के खिलाफ खड़ा करना था। उसने आर्यन को अपनी ही बेटी का 'दुश्मन' बना दिया था।
"आयशा, रंजना ने हमें नचाया है। मैं उसे सज़ा दिला चुका हूँ, लेकिन मेरे गुनाहों का बोझ..."
आयशा ने बीच में ही टोक दिया। "आपका असली गुनाह मीरा को न ढूँढना था, आर्यन। आपका असली गुनाह आपका वह अहंकार था जिसने किसी और की बात सुनने तक का मौका नहीं दिया।"
आर्यन उठ खड़ा हुआ। उसके अंदर का वह 'पछतावा' अब एक संकल्प बन चुका था। उसने समीर की ओर देखा। "हमें आयशा को यह बताना होगा कि उसका असली वारिस हक़ क्या है। हम इस हवेली की बची-खुची प्रॉपर्टी को उसके नाम करेंगे।"
सीन 5: एक आखिरी चेतावनी
तभी, कोठरी की लाइटें झपकने लगीं। आयशा अचानक गायब हो गई। वहां सिर्फ एक छोटा सा नोट रह गया जिस पर लिखा था—"आयशा का असली वारिस हक़ ये प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि तुम्हारा सच है, आर्यन। तुम्हारे पास 12 दिन और हैं।"
आर्यन को समझ आया कि वह अभी भी किसी खेल में है। उसे लगा था कि रंजना को पकड़ने के बाद सब खत्म हो गया, लेकिन वह तो सिर्फ एक प्यादा थी। असली मास्टरमाइंड अभी भी उसे देख रहा है।
"कौन है वो?" आर्यन चिल्लाया।
तभी जेल की पूरी इमारत में सन्नाटा छा गया। उसे सुनाई दिया—माया की हँसी। माया मरी नहीं थी? या माया का भूत उसे सता रहा था? आर्यन को अब समझ आया कि 50 दिन का यह सन्नाटा सिर्फ उसके प्रायश्चित के लिए नहीं, बल्कि किसी के अंतिम प्रतिशोध के लिए था।
सीन 6: 37 दिन पूरे
आर्यन ने अपनी नोटबुक में 37वां पन्ना लिखा: "मैं अपनी बेटी का कातिल नहीं, लेकिन उसका गुनहगार ज़रूर हूँ। यह 50 दिन का सन्नाटा मुझे मेरी सबसे बड़ी कमजोरी—मेरी औलाद—तक ले आया है। अगले 13 दिन... क्या मैं अपनी बेटी का विश्वास जीत पाऊंगा?"
वह कोठरी के फर्श पर बैठ गया। उसने देखा कि फर्श के नीचे से एक पुरानी डायरी निकल रही है। वह डायरी मीरा की थी।
नैरेटर: 37 दिन शेष हैं। आयशा का सच सामने है, लेकिन आर्यन का अतीत अभी भी उससे लड़ रहा है। क्या यह डायरी उसे मीरा के अंतिम पलों तक ले जाएगी? या यह भी कोई जाल है?
(सस्पेंस पॉइंट: डायरी का आखिरी पन्ना आर्यन ने खोला। उस पर लिखा था—"आर्यन, जिस दिन तुम यह पढ़ोगे, उस दिन मैं तुम्हारे सामने रहूँगी। लेकिन याद रखना, एक मौत का बदला सिर्फ खून नहीं, बल्कि एक और मौत है।" क्या अगली बारी आर्यन की है?)
लेखक: प्रिया
आर्यन अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर है। मीरा की डायरी क्या खोलेगी? क्या आयशा और आर्यन कभी एक हो पाएंगे? सस्पेंस की आग और तेज़ होगी...