50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 16 Priya Chaudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 16

(जेल की कोठरी में सन्नाटा इतना गहरा है कि केवल पन्नों के पलटने की आवाज़ सुनाई दे रही है। बाहर कहीं दूर सायरन की हल्की आवाज़ है, जो आर्यन की एकाग्रता को बार-बार भंग कर रही है।)
आर्यन ने मीरा की डायरी का वह पन्ना खोला जिसे उसने अभी-अभी देखा था। डायरी के पन्ने पुराने हो चुके थे और स्याही कहीं-कहीं धुंधली पड़ गई थी, लेकिन अक्षरों का दर्द अभी भी ताज़ा था। यह केवल एक डायरी नहीं, बल्कि मीरा के उन बीस सालों के एकांत का दस्तावेज़ था, जो उसने आर्यन से दूर, एक नर्क जैसी ज़िंदगी में बिताए थे।
सीन 1: डायरी का पहला पन्ना—सच्चाई का एक नया सिरा
आर्यन ने पढ़ना शुरू किया: "15 मार्च, 2006। आज मैंने उसे पहली बार दूर से देखा। वह अब 'आर्यन मल्होत्रा' बन चुका है, वही आर्यन जिसे मैंने कभी प्यार किया था। लेकिन उसके साथ वह महिला है, माया। वह नहीं जानती कि वह किस आदमी के साथ है। मैंने अपना नाम बदल लिया है, ताकि आर्यन कभी मुझे न ढूँढ सके। मैंने रंजना को भी पैसा दिया था ताकि वह मेरी और मेरी बच्ची की मौत की खबर आर्यन तक पहुँचा दे। क्योंकि मुझे पता था—अगर वह मुझे ढूँढेगा, तो उसका पिता मुझे मार डालेगा।"
आर्यन का दम घुटने लगा। उसने जिस मीरा को मरा हुआ समझा, वह उसे बचाने के लिए खुद को मरा घोषित कर चुकी थी। वह आर्यन से नहीं, आर्यन के पिता से भाग रही थी।
सीन 2: 36वां दिन—पछतावे की दूसरी लहर
डायरी में आगे लिखा था: "10 अगस्त, 2010। आयशा अब बड़ी हो रही है। वह बिल्कुल अपने पिता जैसी दिखती है। रंजना ने आज मुझसे फोन पर बात की। उसने मुझे धमकी दी कि अगर मैं वापस आई, तो वह आर्यन को बर्बाद कर देगी। रंजना ने आर्यन के साम्राज्य का लालच दिखाया है। वह चाहती है कि मैं गायब रहूँ ताकि वह आर्यन के करीब रह सके। मैं एक माँ हूँ, मैं अपनी बेटी को बचाने के लिए कुछ भी करूँगी।"
आर्यन की आँखों के सामने पूरा सच स्पष्ट हो गया। रंजना ने न केवल माया को मारा, बल्कि मीरा को भी ब्लैकमेल करके दूर रखा था। वह रंजना ही थी जिसने एक साम्राज्य को अपने इशारों पर नचाया था।
सीन 3: जेल की कोठरी का रहस्यमय दस्तक
अचानक, कोठरी के बाहर किसी ने दस्तक दी। खट... खट... खट...
यह कोई गार्ड नहीं था। कोठरी का दरवाज़ा अपने आप खुल गया। सामने समीर खड़ा था, लेकिन उसके हाथ में एक फाइल थी।
"आर्यन, रंजना ने जेल से एक संदेश भेजा है। वह मिलना चाहती है।"
आर्यन चौंक गया। "क्यों?"
"वह कहती है कि उसके पास कुछ ऐसा है जो इस '50 दिन के सन्नाटे' का अंत करेगा। वह कहती है कि उसने माया को नहीं मारा था।"
आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। "क्या? रंजना ने कबूल किया था कि उसने माया को धक्का दिया!"
समीर ने सिर हिलाया। "वह झूठ था, आर्यन। वह खुद को कातिल कह रही थी ताकि वह तुम्हें हमेशा के लिए डर के साए में रखे। माया की मौत का कातिल कोई और है।"
सीन 4: रंजना से आमना-सामना
आर्यन को पुलिस वैन में रंजना से मिलने के लिए ले जाया गया। रंजना अब एक कैदी की वर्दी में थी, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी।
"तो, तुम आ गए," रंजना ने मुस्कुराते हुए कहा।
"माया को किसने मारा, रंजना?" आर्यन ने दहाड़ते हुए पूछा।
रंजना जोर-जोर से हंसने लगी। "तुम बहुत भोले हो। तुम्हें क्या लगा कि रंजना सिर्फ एक सेक्रेटरी थी? माया को उस दिन मैंने नहीं, बल्कि तुम्हारे अपने 'पिताजी' ने धक्का दिया था! क्योंकि माया उनके खिलाफ गवाही देने वाली थी। मैंने तो सिर्फ उस मौत का फायदा उठाया और तुम्हें अपने जाल में फँसाया।"
आर्यन की दुनिया एक झटके में उजड़ गई। जिस पिता को वह सिर्फ एक लालची आदमी समझता था, वह एक सीरियल किलर था। रंजना ने आगे कहा, "और सुनिए आर्यन, आपके पिताजी अभी ज़िंदा हैं। वह शहर के एक प्राइवेट मेंटल हॉस्पिटल के सबसे सुरक्षित वार्ड में हैं। और वह ही है जो इस 50 दिन के खेल को नियंत्रित कर रहा है।"
सीन 5: 36वां दिन—पिता का साया
आर्यन को समझ आया कि क्यों उसे हर जगह 'सन्नाटा' सुनाई देता था। वह कोई मानसिक बीमारी नहीं थी, वह उसके पिता की पुरानी हवेली में लगे 'ध्वनि-तरंगों' (Sonic waves) का एक यंत्र था, जिसे वह अब भी कंट्रोल कर रहे थे।
"वो मुझे पागल बना रहे हैं!" आर्यन ने महसूस किया।
समीर ने उसकी बात सुनी। "अगर पिताजी ज़िंदा हैं, तो हमें वहां जाना होगा।"
आर्यन ने अपनी नोटबुक निकाली। 36 दिन पूरे हो चुके थे। 14 दिन बाकी थे। उसने 36वां पन्ना पलटा और लिखा: "अपराधी मैं नहीं, मेरा अतीत है। कातिल मैं नहीं, मेरा रक्त है। अब पिता के पास जाने का समय है।"
सीन 6: मेंटल हॉस्पिटल की ओर
रात के अंधेरे में, समीर और आर्यन ने जेल से निकलने की एक योजना बनाई। लेकिन उन्हें पता था कि यह रास्ता आसान नहीं है। वे जब उस मेंटल हॉस्पिटल पहुँचे, तो वहां की सुरक्षा चाक-चौबंद थी।
हॉस्पिटल के सबसे ऊंचे टावर पर एक लाइट जल रही थी। आर्यन ने दूरबीन से देखा—वहाँ एक बूढ़ा आदमी बैठा था, जो बिल्कुल उसके पिता जैसा दिखता था। वह एक टेप रिकॉर्डर पर कुछ सुन रहा था। वह रिकॉर्डिंग आर्यन की अपनी आवाज़ थी, जो वह अपनी हवेली में अकेले में किया करता था।
सीन 7: अंतिम प्रतिशोध का आगाज़
आर्यन ने महसूस किया कि यह 50 दिन का सन्नाटा असल में उसके पिता का बनाया हुआ एक 'साइकोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट' था, ताकि वे यह देख सकें कि आर्यन कब तक अपनी ही यादों में घुटकर मरता है।
"पिताजी!" आर्यन चिल्लाया, हालाँकि वह इतनी दूर था कि कोई नहीं सुन सकता था।
तभी, अस्पताल के कैंपस में लगे स्पीकर पर एक आवाज़ गूँजी—यह आर्यन के पिता की आवाज़ थी। "आर्यन, बेटा, अगर तुम यहाँ तक पहुँच गए हो, तो समझो कि तुम खेल के अंतिम स्तर पर हो। अगर तुम मुझे मार दोगे, तो तुम कातिल बन जाओगे। अगर तुम मुझे छोड़ दोगे, तो तुम हमेशा के लिए मेरे गुलाम रहोगे। क्या चुनोगे तुम?"
नैरेटर: 36 दिन शेष हैं। आर्यन का सच अब उसके पिता के हाथों में है। क्या वह अपने पिता का अंत करके एक नई शुरुआत करेगा, या अपने ही बनाए हुए जाल में हमेशा के लिए दफन हो जाएगा?
(सस्पेंस पॉइंट: आर्यन ने अपने पिता के केबिन में प्रवेश किया। वहां कुर्सी खाली थी, लेकिन मेज पर एक बंदूक रखी थी और बगल में एक तस्वीर थी—आयशा की। तस्वीर के नीचे लिखा था: "तुम्हारी बेटी, मेरी आखिरी मोहरा।" क्या उसके पिता ने आयशा को भी अगवा कर लिया है?)
लेखक: प्रिया
आर्यन के सामने अब सबसे बड़ा इम्तिहान है। क्या वह अपनी बेटी को बचा पाएगा, या उसे अपनी सत्ता का आखिरी बलिदान देना होगा? अगला एपिसोड...