50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 2 Priya Chaudhary द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 2

(साउंड इफेक्ट: बाथरूम के अंदर से पानी के गिरने की धीमी आवाज। एक ठंडी हवा का झोंका खिड़की से अंदर आता है। आर्यन के सांस लेने की तेज आवाज।)
आर्यन के पैर जैसे जमीन में जम गए थे। उसके सामने उसके बेडरूम का बाथरूम था। दरवाजा हल्का सा खुला था, और अंदर से नल के गिरने की वह धीमी, लयबद्ध आवाज—'टिप... टिप... टिप'—उस सन्नाटे को और भयावह बना रही थी।
"कौन है वहां?" आर्यन चिल्लाया। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा कंपन था, जो उसने छुपाने की बहुत कोशिश की थी। कोई जवाब नहीं आया। बस वह पानी के गिरने की आवाज जारी रही।
आर्यन ने धीरे-धीरे कदम बढ़ाए। उसकी हथेली पसीने से भीग रही थी। उसने बाथरूम का दरवाजा पूरी तरह से धक्का देकर खोला। अंदर की रोशनी जल रही थी, लेकिन वहां कोई नहीं था। आईने पर भाप जमी थी, जिस पर किसी ने उंगली से कुछ लिखा था— "अभी तो सिर्फ शुरुआत है।"
आर्यन की सांसें फूलने लगीं। उसने आईने पर हाथ रखा, वह कांच बिल्कुल ठंडा था, जैसे उसे अभी-अभी किसी ने बर्फ से छुआ हो। तभी, बाहर से उसे एक लड़की के हंसने की बहुत ही धीमी आवाज आई। वह आयशा की हँसी थी—वही खिलखिलाती हुई आवाज़, जो उसे हर सुबह सुनने की आदत थी।
"आयशा!" आर्यन चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागा।
सीन 1: हवेली का गलियारा
हवेली का गलियारा बहुत लंबा और अंधेरे से भरा था। आज की रात, उसे ये दीवारें अपनी तरफ सिमटती हुई महसूस हो रही थीं। वह गलियारे के अंत तक पहुँचा जहाँ आयशा का कमरा था। दरवाजा खुला था। आर्यन अंदर दाखिल हुआ—कमरा बिल्कुल वैसे ही था जैसे आयशा उसे छोड़कर गई थी, लेकिन मेज पर रखे उसके 'संगीत के बॉक्स' से एक अजीब सी धुन बज रही थी—वही धुन, जो माया अपनी आखिरी रात में गुनगुनाया करती थी।
तभी, कमरे की अलमारी अपने आप धीरे-धीरे खुलने लगी। आर्यन ने उसे बंद करने की कोशिश की, लेकिन अलमारी के अंदर से कुछ गिरकर फर्श पर बिखरा। वह पुरानी तस्वीरें थीं, जो उसने सालों पहले जला दी थीं। तस्वीरों में माया, आर्यन और एक छोटा सा लॉकेट था।
"ये मुमकिन नहीं है," आर्यन बुदबुदाया, "मैंने इसे... मैंने इसे जला दिया था।"
अचानक, अलमारी के अंधेरे कोने से एक साया निकला। आर्यन पीछे हटा, लेकिन उसका पैर किसी चीज से टकराया। उसने नीचे देखा—वही 'खून से सना स्कार्फ' जो उसे बेड के नीचे मिला था, अब वहां मौजूद नहीं था। उसकी जगह एक पुरानी कालकोठरी की चाबी पड़ी थी।
सीन 2: इंस्पेक्टर कबीर का दखल
आर्यन अभी उस चाबी को देख ही रहा था कि उसके पीछे से एक भारी आवाज आई।
"चाबी मिल गई, आर्यन?" यह इंस्पेक्टर कबीर था। वह दरवाजे पर खड़ा होकर सिगरेट का कश ले रहा था। उसके चेहरे पर वही पुरानी, खूंखार मुस्कान थी।
"तुम यहाँ क्या कर रहे हो, कबीर? मेरी हवेली से बाहर निकलो!" आर्यन दहाड़ा।
कबीर ने ठंडे स्वभाव से जवाब दिया, "अदालत ने मुझे इस केस की जांच सौंपी है, आर्यन। और सच कहूँ तो, तुम्हारी हवेली की ये दीवारों में जो राज़ दबे हैं, उन्हें बाहर लाने के लिए मुझे किसी वॉरंट की जरूरत नहीं है। मुझे पता है कि 20 साल पहले माया के साथ क्या हुआ था। उस एक्सीडेंट में... क्या वो वाकई एक एक्सीडेंट था?"
आर्यन का चेहरा पीला पड़ गया। उसने कबीर को करीब आते हुए देखा। "तुम कुछ नहीं जानते। वह सब खत्म हो चुका है।"
"खत्म?" कबीर आर्यन के बिल्कुल पास आकर बोला। "शायद खत्म हो गया होता, अगर वो लॉकेट वापस न आता। वो लॉकेट सिर्फ एक गहना नहीं है, आर्यन। वह एक सबूत है। और जिस कालकोठरी की ये चाबी है... क्या तुम्हें याद है कि उस रात उस कालकोठरी के अंदर से आखिरी आवाज़ किसकी आई थी?"
आर्यन ने चाबी को मुट्ठी में कस लिया। उसे याद आया—वह अंधेरा, वह चीखें, और वह 'सन्नाटा' जिसे उसने सालों पहले दबाया था।
सीन 3: सस्पेंस का गहरा मोड़
आर्यन बिना एक शब्द कहे वहां से बाहर भागा। उसने अपनी कार की चाबी उठाई और हवेली के पिछले हिस्से की तरफ दौड़ पड़ा, जहाँ पुराने बगीचे के नीचे वह 'कालकोठरी' थी, जिसके बारे में शहर में सिर्फ अफवाहें थीं।
बारिश तेज हो गई थी। आर्यन ने कालकोठरी का भारी लोहे का दरवाजा चाबी से खोलने की कोशिश की। दरवाजा चरमराते हुए खुला। अंदर की हवा में सीलन और पुरानी यादों की गंध थी। उसने टॉर्च जलाई।
कालकोठरी की दीवारों पर किसी ने बहुत सारे 'निशान' बनाए थे—गिनती के निशान—1 से लेकर 50 तक। 20 पर एक बड़ा लाल निशान था।
आर्यन टॉर्च की रोशनी धीरे-धीरे आगे ले गया। कालकोठरी के सबसे अंत में एक कुर्सी रखी थी। कुर्सी पर आयशा का ब्राइडल घूंघट पड़ा था। और उसके पास एक टेप रिकॉर्डर रखा था। आर्यन ने उसे चालू किया।
(साउंड इफेक्ट: रिकॉर्डर से माया की आवाज)
"आर्यन... तुम यहाँ आ गए। मुझे पता था कि तुम आओगे। तुम सोचते हो कि तुमने मुझे मिटा दिया है, लेकिन सच तो ये है कि तुमने मुझे अपने अंदर ही कैद कर लिया है। अब सन्नाटा नहीं गूँजेगा, अब आर्यन मल्होत्रा का राज़ गूँजेगा। आयशा मेरी बेटी है... और उसका अंत वहीं से शुरू होता है, जहाँ से मेरा हुआ था।"
तभी, रिकॉर्डर से एक और आवाज़ आई—एक छोटे बच्चे के रोने की आवाज।
आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने टॉर्च की रोशनी उस अंधेरे कोने की तरफ मोड़ी, जहाँ से आवाज आ रही थी। वहां कोई नहीं था, लेकिन जमीन पर उसे 'आयशा' के बचपन का खिलौना मिला, जिस पर ताजी मिट्टी लगी थी, जैसे उसे अभी-अभी जमीन से खोदकर निकाला गया हो।
तभी कालकोठरी का लोहे का दरवाजा अपने आप जोर से बंद हुआ। बाहर से किसी ने ताला लगा दिया।
"नहीं! इसे खोलो!" आर्यन दरवाजे पर हाथ पटकने लगा। उसे अंदर अंधेरे में किसी की आहट सुनाई दी। किसी के चलने की आवाज। वह कोई और नहीं, बल्कि वह साया था जिसे उसने हवेली में देखा था।
नैरेटर: 49 दिन बचे हैं। आर्यन अब उसी कालकोठरी में बंद है, जहाँ उसके गुनाहों का अंत शुरू हुआ था। क्या कबीर उसे बचाएगा, या कबीर ही इस खेल का असली मास्टरमाइंड है?
(सस्पेंस पॉइंट: अंधेरे में एक माचिस जली। माचिस की रोशनी में आर्यन को दीवार पर अपने और माया के साथ एक और चेहरा दिखा—वह चेहरा कबीर का था। क्या कबीर और माया का कोई गहरा संबंध है?)
लेखक: प्रिया
क्या आर्यन उस कालकोठरी से बाहर निकल पाएगा? और कबीर की तस्वीर वहां क्या कर रही है?