Part 2
March 2025
उस रात मैं बिल्कुल सो नहीं पाई। बार बार वही डायरी मेरे दिमाग में घूम रही थी। हर पन्ने में जैसे कोई राज छुपा था… और सबसे ज़्यादा मेरे दिल को जो नाम छू रहा था, वह था — अभिनव।
पता नहीं क्यों, पर उसका नाम पढ़ते ही दिल में एक अजीब सी फीलिंग होने लगती थी। जैसे मैं उसे पहले से जानती हूँ। जैसे उसकी कहानी कहीं न कहीं मेरी ज़िंदगी से जुड़ी हुई हो।
अगली सुबह मैंने सबसे पहले वही डायरी उठाई। कमरे में बिल्कुल शांति थी। बाहर हल्की हल्की हवा चल रही थी और मेरे हाथ थोड़े काँप रहे थे। शायद एक्साइटमेंट थी… या डर।
मैंने डायरी खोली।
इस बार उसके पन्ने और भी ज़्यादा निजी लग रहे थे।
“अभिनव बाहर से जितना मजबूत दिखता है, अंदर से उतना ही अकेला है…”
यह लाइन पढ़ते ही पता नहीं क्यों मेरे दिल में अजीब सा दर्द हुआ। जैसे किसी ने उसकी भावनाएँ सिर्फ लिखी नहीं थीं… महसूस भी करवाई थीं।
डायरी में लिखा था कि अभिनव ज़्यादा किसी से करीब नहीं होता था। वह अपनी परेशानियाँ कभी किसी को नहीं बताता था। सबके सामने हँसता रहता था, सामान्य रहता था, पर अंदर ही अंदर बहुत कुछ छुपाकर रखता था।
राधा रानी को उसकी यही बात सबसे अलग लगती थी।
डायरी में उन दोनों की छोटी छोटी बातें लिखी हुई थीं। कैसे एक सामान्य सी बातचीत धीरे धीरे आदत बन गई। कैसे बिना किसी वजह के एक दूसरे का इंतज़ार होने लगा।
एक जगह लिखा था —
“पता ही नहीं चला कब उसकी बातें मेरी आदत बन गईं…”
यह लाइन पढ़कर मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
पता नहीं क्यों, पर मुझे लग रहा था जैसे यह डायरी मुझे कुछ बताना चाहती है। जैसे इसका कोई संबंध मेरे साथ हो।
मैं हर पन्ना और ध्यान से पढ़ने लगी।
एक पन्ने पर लिखा था —
“उसने सिर्फ एक बार मेरा नाम लिया था… पर उस दिन के बाद मुझे अपना नाम पहले से ज़्यादा अच्छा लगने लगा।”
मुझे नहीं पता क्यों, पर यह लाइन सीधे मेरे दिल को छू गई।
पर अगला पन्ना देखते ही मेरी मुस्कान धीरे धीरे गायब हो गई।
पन्ने के कोने पर हल्का सा पानी गिरा हुआ था… जैसे लिखते समय किसी ने आँसू पोंछे हों।
उस पर लिखा था —
“हर रिश्ता आसान नहीं होता… कुछ रिश्ते बस दिल में ही रह जाते हैं।”
मेरा दिल अचानक बहुत भारी सा लगने लगा। आखिर ऐसा क्या हुआ था उन दोनों के बीच?
डायरी के कुछ पन्ने आधे लिखे हुए थे। कुछ जगह शब्द काटे गए थे। जैसे कोई बहुत कुछ कहना चाहता था… पर कह नहीं पाया।
मैं और आगे पढ़ने ही वाली थी कि अचानक डायरी के अंदर से एक पुरानी फोटो नीचे गिर गई।
मैंने फोटो उठाई…
और उसे देखते ही मेरी साँसें रुक गईं।
फोटो में जो लड़का खड़ा था… वह बिल्कुल वैसा ही था जैसा मैंने कुछ दिन पहले अपने सपने में देखा था।
मेरी उंगलियाँ काँपने लगीं।
यह सिर्फ एक संयोग था… या फिर सच में मेरा इस डायरी से कोई संबंध था?
उस फोटो के पीछे कुछ लिखा हुआ था।
मैंने धीरे से फोटो पलटी…
और अगले ही पल मेरे चेहरे का रंग उड़ गया।
क्योंकि उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी —
“जिस दिन तुम्हें यह डायरी मिलेगी… उस दिन सब कुछ बदल चुका होगा।”
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़कने लगा। मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि यह सब हो क्या रहा है। एक पल के लिए लगा जैसे कमरे की हवा भी रुक गई हो।
मैंने दोबारा फोटो को ध्यान से देखा। अभिनव की आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। ऐसी उदासी जो शायद सिर्फ वही समझ सकता था जो अंदर से टूट चुका हो।
डायरी के आखिर में एक मुड़ा हुआ कागज़ भी रखा था। मेरे हाथ काँप रहे थे, फिर भी मैंने उसे धीरे से खोला।
उसमें सिर्फ इतना लिखा था —
“अगर तुम यह सब पढ़ रही हो… तो इसका मतलब मेरी कहानी अब सिर्फ मेरी नहीं रही।”
यह लाइन पढ़ते ही मेरी आँखों में आँसू आ गए। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इतनी भावुक क्यों हो रही हूँ। जैसे अभिनव का दर्द धीरे धीरे मेरे अंदर उतरता जा रहा था।
उस समय मुझे सिर्फ एक ही बात समझ आ रही थी…
यह डायरी सिर्फ एक डायरी नहीं थी।
यह किसी की अधूरी मोहब्बत, अधूरे सपनों और छुपे हुए दर्द की कहानी थी।
और शायद… मेरी ज़िंदगी अब उस कहानी का हिस्सा बनने वाली थी।