Second Hand Love manu gupta द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Second Hand Love

साहनी बिला   आलीशान महलघर में 20-25 नौकर। पर घर मे एक दम सन्नाटा।

महल के एक बेडरूम मैं देवांश लैपटॉप पर कुछ व्यस्त था।

देवांश.....

हाँ उसने बहुत संक्षिप्त सा उत्तर दिया।

तुम सच में बिजी हो या बिजी दिखने की कोशिश कर रहे हो। जो तुम्हे समझना है समझो बह बहुत रूखे पन से बोला। बह लैपटॉप बंद करते हुए बोला।

क्या तुम सच में नहीं जानते मैं क्या पूछना चाहती हूं।

नहीं।

देवांश अब तुम मुझे पहले की तरह प्यार नहीं करते।  जबकि तुम भी जानते हो मुझे इस समय तुम्हारे प्यार की बहुत ज्यादा जरूरत है मुझे।

अब मुझे लग रहा है मैं तुम्हारा सेकंड हैंड लव हूँ। 

**देवांश एक जिम्मेदार पति चेहरे से ही किसी अमीर घर का लग रहा था। 37 साल की उम्र में भी 25 साल जैसा हैंडसम लड़का लग रहा था। चेहरे पर शालीनता। मासूम चेहरा सुडौल शरीर। देखकर कोई नहीं कह सकता था कि बह दो बच्चों का पिता है। **

जिन्हें फर्स्ट हैंड लव रास नहीं आता उनको सेकंड हैंड लव ही मिलता है श्रेया बहुत प्यार किया था तुमको पर तुमको ये पसंद ही नहीं आया।कुछ समय के लिए बाहर क्या गया तुम तो उसकी बाहों में झूल गई। बह भी सिर्फ चंद दिनों के दूर रहने में। तुमने तो सात जन्म का बादा किया था पर कुछ हो दिन में टूट गया। अब तुमको मिलेगा तो सिर्फ।                                    सेकंड हैंड लव

बह तब भी अपने जज्बातो पर काबू रखकर बोला

श्रेया सेकंड हैंड सामान होता है लव नहीं।

**श्रेया देवांश की पत्नी। जो बहुत ही कमजोर दिखाई दे रही है शायद बह बीमार है।  लेकिन बीमारी के बाद भी उसका चेहरे पर एक आकर्षण है। उसे देखकर महसूस हो रहा है कि बह बीमारी से पहले बहुत ही सुंदर और खूबसूरत रही होगी।  उसके चेहरे पर अब भी मासूमियत थी।** 

पर अब तुम्हारा प्यार सेकंड हैंड ही है देवांश। क्योंकि तुम अब भी जितनी केयर कर रहे हो बह प्यार करने वाला ही कर सकता है पर तुम्हारी आँखों के अब वो प्यार नहीं दिखता बह तड़प नहीं दिखता।

श्रेया अब मुझ पर घर की जिम्मेदारी है तुम्हारी जिम्मेदारी है और घर सिर्फ प्यार से नहीं चलता समझी।

और अब मेरा पूरा ध्यान बच्चों के कैरियर बनाने पर है।

श्रेया इस समय यह बात करने का नहीं है। मुझे लगता है इस समय तुम्हे अपनी बीमारी पर ध्यान देना चाहिए।

देवांश तुम मेरी बात टाल रहे हो।

श्रेया में ऑफिस जा रहा हूं तुम दवाई टाइम पर खा लेना। इतना कहकर देवांश ऑफिस के लिए निकल गया।

श्रेया पीछे से रोकना चाहती थी पर शरीर ने साथ नहीं दिया। बह फिर से सोफे पर गिर गई।

बह धीरे धीरे चल कर ड्रेसिंग टेबल के सामने गई। अब उसके चेहरे में वो बात नहीं थी। जिससे देवांश खींचा चला आता था 35 साल की उम्र में 50 जैसी दिख रही थी वो।

बच्चे दोनों स्कूल चले गए थे। 

उसने दवाई खाई। फिर बापस पलंग पर आकर लेट गई।  उसने अपना फोन उठाया फिर एक नंबर लगाया। पर हर बार की तरह बही हुआ एक घंटी गई फिर फोन कट गया।

उसके बाद उसके शरीर में पता नहीं कहा से जान आई उसने बेड पर गुस्से में फोन दे पटका।

बह उठी फिर हल्के हल्के चहलकदमी करने लगी। बह बहुत ही बेचैन लग रही थी।

अपने पति के व्यवहार के बदलने से बह बहुत टूट गई थी।

देवांश तुमने क्या क्या वादे किया थे मुझसे। पर मैं बीमार क्या हुई तुम इतना बदल गये। बह सोचते सोचते घूमते रही।

उधर देवांश सोचता हुआ निकल रहा था श्रेया अगर तुम नहीं बदली होती तो में भी नहीं बदलता और न ही बदलता मेरा प्यार। तुम बदली तो मैं भी बदल गया और मेरा प्यार भी बदल गया।

सच कहा था तुमने अब मेरा प्यार सेकंड हो गया। क्योंकि सेकंड हैंड औरत को प्यार भी सेकंड हैंड ही मिलता है।

*******.

दोस्तों ये कहानी इतनी सीधी नहीं है यह तो बस एक सारांश है। असली कहानी तो अब शुरू होगी।

दोस्तों में इंडियन बूस्टर फिर से आपके बीच मे। पहले की तरह ही प्यार दे। लव यू दोस्तो। *******

आज हवेली सजी थी। ये किसी राजा महाराजा की हवेली नहीं थी। शहर के एक सम्मानित  और सबसे अमीर   सुमित राज साहनी का इकलौता लड़का आ रहा था। भाग्यवान सुनो सभी तैयारी हो गई देव आता ही होगा। 

हद है आपसे भी आप तो ऐसे तैयारी कर रहे है जैसे वह पहली बार घर आ रहा है। बह हमारा ही बेटा है इसी घर में पला बढ़ा हुआ है विदेश गया था बस पढ़ने।

भाग्यवान तुम भी जानती हो यह पांच साल पचास साल के समान निकले है। बह तो बेटे के भविष्य का सवाल था नहीं तो कौन कम्भख्त अपने जिगर के टुकड़े को बाहर भेजना चाहेगा।

आप इतनी फिक्र क्यों करते हो अब देव बड़ा हो गया है।  अब तो बह हमेशा बिज़नेस के सिलसिले में बाहर ही रहा करेगा।  बच्चों और मां बाप का साथ तब तक ही होता है जब तक बह पालने में होते है और जब चलने लगते है तो पता नहीं किधर चले जाये। कितनी आगे निकल जाए तुम्हे छोड़कर

अरे पगली हमारा देव ऐसा नहीं है तू पता नहीं क्या क्या सोचती रहती है।

मैं सब सही सोचती हूं याद करो आज से पच्चीस साल पहले। ऐसे ही सब कुछ हो रहा था।  बस तुम्हारी जगह माँ और बाबू जी थे।

यही घर था यही हवेली थी। सब कुछ यही था बस समय अलग था।

याद है न सब कुछ।

सब याद है भाग्यवान पर अब कुछ ऐसा नहीं होने वाला।

याद है न मां बापू का श्राप।

मुझे तो उनका श्राप याद कर कर के बहुत डर लग रहा है।

ऐसा कुछ नहीं होगा।  उन्होंने उस समय गुस्से में बोल दिया था।  ऐसा कुछ नहीं होने वाला।

बह गुस्से में नहीं बोला था बह दिल से निकली हुई चीख थी।

उस पल को याद करके तो बह भी इधर उधर चहल पहल करने लगा।  कुछ समय को तो मानो बह भूल गया कि 5 साल के बाद उसका बेटा आने वाला था।

क्या श्राप था श्रेया को क्यों लगता था के उसे बह सच्चा प्यार नहीं करता था। क्या उसके पीछे कुछ घटना है या यह सिर्फ देवांश का बहन है जानने के लिए अगला भाग पड़े। और समीक्षा देना न भूले और प्यार देना भी

क्या सेकंड हैंड लव हो सकता है प्लीज कमेंट करके बताएं।