स्वाभिमान
कमल चोपड़ा
स्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।''क्यों?' माँ ने पूछा।'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है। वह बहुत बड़ी पार्टी दे रहा है। मुझे भी बुलाया है। बड़े-बड़े लोग आएँगे पार्टी में। मैं क्या गन्दे कपड़े पहनकर जाऊँगा। अच्छे कपड़े हैं कहां मेरे पास? मुझे तो आज ही नए कपड़े चाहिए।'माँ ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की— 'नए कपड़ों के लिए पैसे कहाँ से आएँगे? तुझे तो पता है। मैं लोगों के घर बरतन माँज-माँजकर जैसे-तैसे घर चला रही हूँ। तुझे पढ़ा रही हूँ। इन अमीरों से हमारी क्या बराबरी!'विशू ने जिद पकड़ ली थी— 'मैं कुछ नहीं जानता, मुझे तो नए कपड़े चाहिए ही....'माँ ने विशू को जिद पर अड़ा हुआ देखकर कहा— 'अच्छा तुझे कल शाम को ही कपड़े पहनकर जाना है ना? मैं कल शाम तक तुझे अच्छे सुन्दर कपड़े लाकर दे दूँगी।' नए कपड़े खरीदकर देना तो माँ के बस में नहीं था। माँ ने मन ही मन सोचा कि गुप्ता जी जिनके यहाँ वह बरतन माँजने का काम करती है, उनके यहाँ से एक दिन पहनने के लिए उनके लड़के के कपड़े माँगकर ला दूँगी।गुप्ता जी का लड़का शुभम भी विशू की उम्र का ही है। उसके कपड़े विशू को अवश्य ही पूरे आ जाएँगे।बहुत अच्छे स्कूल में पढ़ता था विशू। उसकी क्लास में ज्यादातर अमीरों के ही बच्चे थे। विशू पढ़ने में बहुत होशियार था इसलिए निखिल जैसे लड़के विशू की बहुत इज्जत करते थे।यह संयोग ही था, विशू की माँ जिन गुप्ता जी के घर का काम करती थीं, उनका लड़का शुभम भी विशू की ही क्लास में पढ़ता था। विशू को पढ़ाई और खेल दोनों हमेशा बाजी मारते देखकर शुभम हमेशा उससे जलता और हमेशा उसे नीचा दिखाने का मौका ढूँढ़ता।अगले दिन निखिल की बर्थडे पार्टी में रिश्तेदारों के अतिरिक्त उसके कई सहपाठी भी शामिल हुए। शुभम भी ठीक वक्त पर आ गया था। लेकिन विशू अभी तक नहीं आया था। केक अभी तक नहीं काटा गया था। निखिल शायद विशू की ही प्रतीक्षा कर रहा था।निखिल ने पूछा भी, 'विशू अभी तक नहीं आया?' शुभम ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा— 'वो बड़ा आदमी है। खास सज-धज और तैयारी के साथ आएगा ना।' निखिल कुछ नहीं बोला। लोग आ रहे थे। बड़ी-बड़ी गिफ्ट ला रहे थे।शुभम को पता था कि विशू की माँ आज उनके घर से उसके कपड़े माँग कर ले गई है। वह सोच रहा था—विशू आज मेरे माँगे हुए कपड़े पहनकर आएगा। आज मैं सब लड़कों के बीच उसके कपड़ों की बहुत तारीफ करूँगा। वो शर्म से पानी-पानी हो जाएगा। फिर वो कहेगा कि कपड़े तो यार तेरे ही हैं तो मैं कहूँगा— उतार मेरे कपड़े— देखता हूँ तब वह क्या कहता है? सबके बीच उसकी झूठी शान धरी की धरी रह जाएगी। पढ़ाई में होशियार है तो हम क्या करें? है तो दो टके का गरीब आदमी। और चला है हमसे बराबरी करने।उसने अपने कुछ दोस्तों को कह भी दिया कि आज विशू को देखना, कौआ हंस के उधार माँगे हुए पंख लगाकर आएगा। आज उसे उसकी औकात का पता चल जाएगा।तभी सबने देखा कि विशू आया और बड़े आत्मविश्वास के साथ निखिल की ओर बढ़ने लगा। शुभम और उसके दोस्त हैरान रह गए। विशू ने शुभम के उधार माँगे हुए कपड़े नहीं पहने हुए थे, अपने ही पुराने लेकिन साफ-सुथरे कपड़े पहने हुए थे।ज्यों ही वह शुभम के पास से गुजरा, शुभम ने उसके कपड़ों की तरफ देखते हुए इशारे से पूछा, 'यह क्या?'विशू ने तपाक से कहा, 'क्यों? पार्टी में सिर्फ नए कपड़े ही पहनकर आ सकते हैं? माँगे हुए कपड़े पहनकर मैं अपने स्वाभिमान को क्यों गिराऊँ? तुम्हारे कपड़े मैं तुम्हारे घर वापस दे आया हूँ।'यह कहकर विशू निखिल की ओर बढ़ गया। शुभम तिलमिलाकर रह गया था। दोस्तों के बीच खी-खी करके वह खिसियाने लगा था। अब और तो उसका कुछ वश चल नहीं रहा था। एकाएक अपने दोस्तों से बोला— 'देखते हैं अब ये स्वाभिमानी निखिल के लिए कौन सी भेंट लेकर आया है?' फिर खुद ही बोला— 'गन्दे नाले के किनारे उगा हुआ कोई फूल तोड़ लाया होगा–ही-ही-ही......!'शुभम के दोस्त उसकी बात पर हँस पड़े।उधर विशू ने लिफाफे से निकालकर सुन्दर सी पुस्तक निखिल को भेंट में दी तो रंग-बिरंगी पुस्तक देखकर निखिल खिल उठा। निखिल ने विशू को गले लगाकर धन्यवाद दिया।निखिल ने केक काटा और तालियाँ बजीं। सबने मिलकर हैप्पी बर्थ डे गाया। फिर निखिल विशू को अपने हाथों से केक का टुकड़ा खिलाने लगा। यह देखकर शुभम खिसियाकर रह गया। उसके दोस्त अब उसी पर हँस रहे थे।