राधा का संगम - प्रकरण 18 Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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राधा का संगम - प्रकरण 18

               

                राधा का संगम - प्रकरण 18

          दादू की अर्थी कभी भी उठ सकती थी. यह जानते हुए भी सुकू उन से शादी करने को तैयार हो गई थी और अपने मा बाप को भी छोड़ दिया.

            क्या यह ऊस की बेवकूफी थी? नादानी थी?

            कुछ समज नहीं आ रहा था.

            वह हर बार एक ही बात दोहराती थी. " यह मेरी रूह का फेंसला हैं. "

            एक 23 वर्षीय लड़की जो मानस शास्त्र की अभ्यासी थी वह कितने विश्वास से रूह की बातें करती थी..

            ऊस ने दादू से शादी कर ली थी. दोनों साथ में विरार के भाड़े के घर में रहते थे.. दादू ने उसे पूछा था :

            " मेरी सुकू! मेरी राधा!! मुझे कभी छोड़ तो नहीं दोंगी? "

              तब वह दादू को बड़े गर्व और विश्वास से कहती थी.

              " कभी नहीं! मैं आप को एक दजन बच्चों का उपहार दूंगी. उन के पालन पोषण और परवरिश के पीछे लग जायेगे की हमारे पास ऎसा सोचने का भी समय नहीं बचेगा. "

               सुकू की बातों में सच्चाई झलक रही थी.. यह देखकर दादू अत्यंत भावुक हो गये थे. उन्होंने अपनी बीवी को अपनी आगोश में लेकर ऊस के मुंह को चुम्बन ले लिया था.

               और दोनों एक दुसरो को लिपटकर चादर ओढ़कर घोड़े बेचकर सो गये थे.

                होटल मैनेजर ने चाय नास्ते के लिये उन का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन की नींद नहीं उडी थी.

                ऊस वक़्त खुली खिड़की से मंद मंद समंदर की हवा उन के बदन को छू रही थी.

                नींद में दादू ने कोई सपना देखा था.

                उन की बीवी गिर गई हैं. उन को चोट लगी थी.

                ऊस सपने ने दादू की नींद उड़ा दी थी.

                दादू की बीवी को पार्किंन्सन की बीमारी थी. जो कभी अच्छी नहीं हो सकती थी.. जिये तक उसे सारी दवाईया लेनी थी.

               वह कमजोर हो गई थी, बोल नहीं सकती थी, कुछ सुन नहीं सकती थी, समज भी नहीं सकती थी.

               ऊस की स्थिति का पता चलते ही ऊस ने खुद दादू को डबल रोल निभाने की सलाह दी थी, और वह समजोता हो गया था.. दिन भर वह सुकू के साथ रहेंगे और रात को अपनी बीवी के साथ..

               दादू चारो और से पीड़ित थे. ऊन के नसीब में कोई सुख नहीं था. बीवी बीमार थी, वह पागल जैसा व्यवहार करती थी दूसरी और लड़का भी ऐसा था. वह देख नहीं सकता था. लेकिन मानो सब कुछ दिखता हो ऎसा दिखावा करता था और अपनी मा की हर कोई हरकत की चौकी करता था..

                 ऊस की जुबान टी वी चैनल की तरह  24 घंटे नोन स्टोप चलती रहती थी. हर घर के हर एक मुआमले में दखल अंदाजी कर के मानसिक तंगदिली खड़ी करता था. अपने आप को सब से ऊपर समजता था. किसी की नहीं सुनता था. खुद हर चीज में सच होने का दावा करता था, केवल तर्कों पर चलता था.

                दादू कमजोर थे, हाइपर टेंशन के शिकार थे, यह जानते हुए भी मा बेटे हर एक चीज में उन की गलती निकालते थे और उन्हें गुस्सा दिलाने के लिये उकसाते थे.

                 दादू को पैरों का फ्रैक्चर हुआ था. 25 दिन उन्हें अस्पताल में रहना पडा था. फिर से नोर्मल चलना उन के लिये नामुमकिन हो गया था. डोक्टर ने भी उन्हें मना कर दिया था.

                 फिर भी घर में काम करने वाला कोई नहीं था.. इस लिये दादू को ही सब काम करने पड़ते थे.

                 ऊस में कई बार वह रास्ते में गिर गये थे.. फिर भी मजबूत होकर अपनी जिम्मेदारी निभाते थे, फिर भी घर में उन की कोई कद्र नहीं थी.

              ऊन्हो ने कभी यह ख्याल अपने मन में नहीं आने दिया था, की वह कुछ नहीं कर सकते. उन की इसी हकारात्मक सोच ने उन्हें संभाला था.

              हा लेकिन वह गाड़ी में यात्रा नहीं कर सकते थे. स्टेशन के ओवर हेड ब्रिज चढ़ नहीं सकते थे.

              लेकिन सुकू के आने से बहुत कुछ बदल गया था. वह हर जगह दादू की ऊँगली पकड़ कर ले जाती थी.. दादू गाड़ी में यात्रा करने लगे थे. ओवर हेड ब्रिज भी चढ़ जाते थे.

              दादू ने अपने दोनों परिवार को बड़े जतन से संभाला था.. कभी किसी को तकलीफ नहीं दी थी. घर चलाने के लिये, जीवन निर्वाह के लिये सेक्रेटरी का जोब स्वीकारा था.

              दो बच्चों के साथ घर की अन्य जिम्मेदारी निभाते हुए जोब करती थी और दादू को कोई भी काम करने से रोकती थी हो उन्हें गवारा नहीं था.

            वह दूसरा काम तो नहीं करते थे लेकिन लेखन प्रवृत्ति के जरिये कुछ कमाया था.. और अपनी बीवी और लडके के ताने का जड़बातोड़ जवाब दिया था.

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             दादू को फिर भी सुकू के शरारती और जिद्दी स्वभाव से बहुत घृणा होती थी. वह अपनी हरकत से बाज नहीं आती थी. शादी के बाद ऊस की यह आदत छूट गई थी.. फिर भी दादू ऊस की शरारते भूल नहीं पाये थे.

              ऊस ने अपने पुलिस अफसर के नाम एक फ़ोन नंबर सेव किया था और ऊस नंबर से अपनी सहेली को फोन किया था.

              स्क्रीन पर पुलिस अफसर का नाम देखकर वह गभरा दिया था. वह कांप रही थी. यह जानकर सुकू को आनंद प्राप्त हुआ था.

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             दूसरी बार ऊस ने एक लड़की की बैग में अलार्म सेट कर दिया था. जो चालू पीरियड में जोर से बजने लगा था. टीचर ने सब को खड़ा किया था, तब सुकू मासूम चेहरा बनाकर क्लास में ख़डी थी.

               उतना ही नहीं ऊस ने चाबियों का गुच्छा आपस में बदल दिया था. टीचर अपनी अलमारियों को खोल नहीं पाये थे. और पूरा दिन परेशान रहे थे.

              एक बार ऊस ने अपने ही भाई के जूते में महेंदी डाल दी थी. ज़ब ऊस ने जूते पहने और बाहर निकला तो ऊस के पुरे पैर लाल हो गये थे.

              वह बेचारा यह सोचकर डर गया था की उसे कोई बीमारी हो गई है

              ऊस ने दादू को यह किस्सा सुनाया था.. अपने ही भाई के साथ ऎसा करने के लिये ऊस ने सुकू को बहुत डांटा था. और ऊस ने ऊस के लिये अपने कान पकडकर माफ़ी मांगी थी.


                       00000000000  ( क्रमशः)