. राधा का संगम - प्रकरण 3
राधा सुनकर अवाक हो गई.
बोस मुझे खाने के लिए होटल ले जाने को तैयार हो गये थे. मैं कुछ कह नहीं पाई.
खाने की बात तो ठीक थी. वह चाहते तो बाहर से भी खाना मंगवा सकते थे. लेकिन वह तो मुझे होटल लेने जाने को तैयार हो गये थे.
रात को नौ बज गये थे और उसे घर जाकर अपने पति के लिये खाना पकाना हैं. कहकर राधा ने उसे टाल दिया था. तो ऊस ने मेंरे लिये खाने का पार्सल ले लेंगे ऎसा कहां लेकिन राधा ने उसे मना कर दिया तो ऊस ने पगार बढ़ाने की लालच दी और रोज ऊस के साथ होटल जाने के वादे में बांधने की कोशिश की.
सामने ऊस ने शर्त रखी थी.. अपने रिश्ते के बारे में किसी को नहीं बताना. यहाँ उसे ऊस की नियत को लेकर दहशत हुई थी. और ऊस ने मना कर दिया था.
राधा को शक था. मना करने पर वह उसे जोब से बर्खास्त करने की कोशिश करेंगा.
उस दिन से राधा ने ओफिस टाइम के बाद काम करने को मना कर दिया.
ऊस के बाद बोस ने नई लड़की को ओफिस में भर्ती किया. वह कहने को तो एक स्टेनो टाइपिस्ट थी जिसे वह राधा को रिप्लेस करने के इरादे से लाया था.
मेरा ज्यादा आउट डोर काम था. इस लिये मुझे इस बात का पता नहीं चला था, मैं महिने में 20 दिन से ज़्यादा बाहर रहता था.
ज़ब मुझे पता चला तो बहुत गुस्सा आया था, हम दोनों ने एक साथ जोब छोड़ दिया था.
उन दिनों मुझे एक निर्माता मिक गये थे. जीन की एक फिल्म में मैंने एक्स्ट्रा कलाकार के तौर पे काम किया था. राधा को थोड़ा AI कम्पनियन का भी अनुभव था, वह जैसा चाहे वैसा रोल कर सकती थी.
मैंने अपनी फ़िल्म वाली बात राधा को बताई थी, और ऊस के भीतर छिपी अबिनय की इच्छा बाहर आ गई थी.
फ़िल्म में काम करना ऊस का दूसरा सपना था. वह भी फ़िल्म में अभिनय कर के मीना कुमारी, नरगिस और कई बडी अभिनेत्री की तरह काम करना चाहती थी.
ऊस ने तुरंत मुझे बताया था:! " मुझे फ़िल्म में काम करना हैं. तुम निर्माता से मिलो ना, मेंरे लिये बात करो ना. "
ऊस के कहने पर मैं ऊस निर्माता को मिलने गया था. ऊस समय उन की बडी फ़िल्म हिरोइन की बीमारी की वजह रुक गई थी. पैसे की कमी हुई थी. इस स्थिति में कलाकारों को पैसा नहीं दे पाये थे. जिस की वजह से वह लोह काम करने को तैयार नहीं था. इस संकट में उन्होंने कर्ज लेकर केवल 25 दिनों में एक गुजराती नाटक पर आधारित ' हादसा' फ़िल्म बनाई थी, जो सुपर हिट साबित हुई थी. उन्होंने ने कलाकारों को वेतन भी दिया था. ईश्वर कृपा से हिरोइन ठीक हो गई थी.
हादसा में राधा को फ़िल्म में काम करने को मिला था. फ़िल्म की कहानी केवल एक रात की थी.
फ़िल्म का हिरो होनी बीवी की हत्या कर के एक बंगले पनाह लेता हैं, जहाँ भी किसी लड़की की हत्या होती हैं. हिरो को इस बात से ताजुब होता हैं.
रात गुजर जाती हैं और घर में हाजिर लडके लड़की को गिरफ्तार करवाने के लिए हिरो पुलिस बुलवाता हैं. दोनों की गिरफ्तारी के साथ पुलिस उसे भी गिरफ्तार करती हैं.
इस फ़िल्म में राधा ने मुश्किल से 10-15 मिनिट काम किया था, लेकिन राधा ने ऊस में जान डाल दी थी.
राधा ने मृर नारी की भूमिका में जान डाल दी थी. इस लिये उसे क्रिटिक अवार्ड मिला था.
फ़िल्म का निर्माता ऊस के अभिनय से बेहद खुश थे, उन्होंने ने अपनी तीन फिल्मो में साइन किया था. इतना ही ऊस के छोटे भाई ने भी राधा को साइन किया था और ऊस का सितारा चमकने लगा था..
ऊस के बाद उसी निर्माता की एक रोमांटिक फ़िल्म में राधा ने काम किया था. ऊस में बलात्कार का दृश्य था, जिसे खलनायक के वास्तविक बना दिया था. ऊस ने सचमुच में राधा पर बलात्कार किया था. जिस की वजह से उसे गर्भ रहा था.
मुझे कर की ऐसी नाजायज हरकत से मुझे बहुत गुस्सा आया था और गुस्से की आगे में ऊस का अंग काट दिया था, जिस की वजह से मुझे सजा हुई थी. बलात्कार की वजह से वह मा बनने वाली थी. इस बात से उसे घिन आई थी और ऊस ने गर्भपात कर के बच्चे को मिटा दिया था.
इस हादसे के कारण वह छह महिने घर से बाहर नहीं निकल नहीं पाई थी. फिर भी दो साल ऊस ने बडी हिम्मत दिखाकर बिता दिये थे.
बाद में वह घर से बाहर आई थी. ऊस के साथ जो हुआ था, ऊस वजह से उसे काफ़ी नुकसान हुआ था, काफ़ी निर्माता, अभिनेता, अभिनेत्री ने उसे छोड़ दिया था तब बी आर विश्वनाथ ने उसे संभाला था. उसी की फ़िल्म के जरिये यह हादसा हुआ था. ऊस का उन्हें बेहद रंज हुआ था, राधा को लाइफ टाइम अपनी फ़िल्म में काम देने का वादा किया था.
ऊस के बाद भी उन के भाई और बेटे ने राधा को अपनी फिल्मो में अहम भूमिका प्रदान की थी.
मैं भी कर की काबिलियत और प्रतिभा देखकर अपने आप को नसीबदार माना था. कभी ऊस के साथ ऊँचे आवाज में बात की थी ना तो कोई लड़ाई, झघड़ा किया था.
ऊस ने भी कभी मेरे साथ ऊँचे आवाज से बात नहीं की थी. कभी कोई चीज की डिमांड की थी.
जिस का अच्छा बदला हने मिला था. राधा गर्भवती बनी थी, और ऊस ने अपने जैसे सुंदर बच्चे को जन्म दिया था.
भगवान ने हमें बहुत बड़ा उपहार दिया था.
हम लोग उसे पाकर धन्य हो गये थे.
राधा तो उसी दिन से अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य के लिये सपने बुनने लग गई थी.
00000000000 ( क्रमशः )