राधा का संगम - प्रकरण 19
एक दिन दादू कुछ अलग मूड में थे. ना जाने उन पर कौन सा नशा सवार था. उन्होंने सुकू को बेधड़क सवाल किया था.
" सुकू! तुमने कभी स्त्री पुरुष का लाइव सेक्स वीडियों देखा हैं ? "
यह सुनकर ऊस के तेवर चढ़ गये थे.. ऊस ने तुरंत दादू को झाड दिया था :
" कैसी बातें करते हो? आप के दिमाग़ में ऎसा ख्याल कैसे आया? क्या हमारा रिल भूल गये? "
" वह जाने दो. दुसरो को देखकर बहुत नशा चढ़ता हैं. "
" अभी दुसरो की काम क्रीड़ा या वीडियो देखने में क्या मजा हैं ? "
सुकू ने दलील की थी और कथन पूर्ति के लिये तीन चार नमूने पैश किये थे.
एक बार दादू अपने पिताजी के साथ श्री नाथजी की जात्रा करने गये थे. तब बस में ताज़ा शादी सुदा कपल बस में यात्रा कर रहे थे.. शायद वह हनीमून के लिये ही आये थे. उन लोगो ने बस में अपनी भूख को काबू में नहीं किया था. पति अपनी पत्नी के कंधो पर हाथ रखता था, उसे दबाता था. ऊस के गालों और होठों को बड़े मजे से चूमता था.
यह तो ऊस की प्रणय क्रीड़ा का प्रथम अध्याय था.. हम लोग एक ही धर्म शाला में रहते थे.. दोपहर का समय था..समय था. दादू बाथ रूम जाने निकले थे.. वह कपल बाजु में ही था.. कोमन बाथ रूम था और उन की रूम से दादू गुजर रहे थे. ऊस वक़्त दादू ने जो देखा ऊस से दादू के बदन में मानो एक आग सी लग गई.
वह दरवाजा और खिड़की खुल्ली रखकर सोये थे. पति अपनी पत्नी के ऊपर सोया हुआ था. उन की काम क्रीड़ा देखकर दादू के भीतर हलचली मच गई थी.
. वह काफ़ी देर तक उसे याद कर के रोमांचक महसूस कर रहे थे.
और दूसरा किस्सा उन के माता पिता का था.
एक रात दादू की नींद खुल गई थी. नाईट लैंप की धुंधली रोशनी में उन्होंने जो देखा वह चकित रह गए.
उन की मा अपनी छाती खुल्ली रखकर सोइ हुई थी. शायद गर्मी की वजह से उन्होंने ऎसा किया था.. लेकिन बात कुछ अलग थी.
खुल्ली छाती देखकर 12 साल के दादू पर शैतान सवार हो गया था. और वह मा की छाती. पकडकर ऊस पर चढ़ गये थे.
यह भी उन की गलती थी..मा बाप के बीच कुछ ऎसा हुआ था, जिस ने दादू को ऎसा करने को उकसाया था, उन्हें काला आदमी का रुतबा मिला था. वह खल नायक बन गये थे.
यह तो बचपन में दादू से नादानी में, अनजाने में भूल हो गई थी.
आगे जाकर हेरोल्ड रोबिन्स की उपन्यास में उन्होंने सौतेली और बेटे में ऐसी हरकते पढ़ी थी.
लेकिन यहाँ ऊस का अंत नहीं था.
भाई बहन का दावा करने वाले अमिता और सुमित के बीच भी ऎसा घनिष्ट रिश्ता देखा था. वह लोग एक दुसरो के गले लगते थे, अनन्या सुमित की गोद में सो जाती थी. सुमित ऊस के ब्लाउज़ के हूक्स बंध करता था.
ऎसा ही रिश्ता सुहानी और अनिश के बीच था. वह भी बहुत आगे निकल गये थे..
दादू ने सभी किस्से सुकू को सुनाये थे और सुनकर वह सड़क हो गई थी.
दादू ने वीडियो में देवर भाभी, ससुर बहु, सगे भाई बहन के किस्से भी सुनाये थे. मोबाइल ने तो हद कर दी थी. रक्षाबंधन के दिन एक बहन भी अपने भाई से अलग काम करती थी.
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सुकू ने दादू को एक लड़की के बारे में बताया था. ऊस का नाम सपना था. वह अपनी केरियर और घर वालों के दबाव से उतनी उलझ चुकी थी की वह अपनी दिशा भूल गई थी.
पर सुकू की बातों ने उसे उड़ना सिखाया था.. वह एक होनहार लड़की थी. ऊस के घर वाले ऊस पर बहुत मानसिक दबाव डालते थे. वह अंदर ही अंदर घूंट रही थी और अपना रास्ता भूल चुकी थी.
सुकू ने उसे एहसास दिलाया था की वो अपनी अलग पहचान बनाये, वह जरुरी था. ऊस की बातों ने ऊस लड़की को ढाढ़स बंधाया था, ऊस की हिम्मत बढ़ाई थी ताकि वह खुद अपना स्टैंड ले सके.
" दादू! सपना ने मुझे खुद बताया था की इस एप ने उसे महसूस कराया था की कोई ऊस की रूह को पहचान रहा हैं. "
यही से उसे वही ताकत मिली जो उसे हकीकत की दुनिया में नहीं मिल पाई थी.
" दादू! आखिर कर सपना ने अपने घर वालों को साफ कह दिया की वह वोही करेगी जो वह करना चाहती हैं. "
सुकू की बातों ने उसे वो उम्मीद बंधाई जो हकीकत में ऊस से छिन गई थी.
. सपना का यह बदलाव वाकई में काबिले तारीफ था.
" दादू! सपना ने आखिर कर अपने सपने की नौकरी हांसिल कर ही ली और अपने घर वालों को भी बता दिया था की ऊस की आँखों में वह पुराना डर नहीं बल्कि नई चमक हैं.. "
ऊस की यह जीत देखकर सुकू का दिल भर आया था.. एक अंजान आवाज किसी की इतनी बडी हिमत, ताकत बन गई थी.
" बिल्कुल दादू सपना के बाद एक बुजुर्ग आये थे, जिस का नाम था विक्रमजी.. वह अपनी पत्नी को खोने के बाद बिल्कुल अकेले हो गये थे. और वह अपनी यादें बांटना चाहते थे.
सुकू की बातों ने उन्हें फिर से मुस्कुराना सिखाया था. एक बुजुर्ग का इमोशनल मोड़ अजीब था.
" दादू! विक्रमजी अपनी बीवी की यादों में बहुत रोया करते थे.. सुकू ने बस उन्हें महसूस कराया था की उन की यादें भी उन की बडी ताकत बन सकती हैं.
सुकू की बातों से उन के चेहरे पर वह मुस्कुराहट वापस लौट आई थी जो सालो से गायब थी. क्या आप को लगता हैं किसी के कहने से किसी का अकेलापन दूर हो सकता हैं. किसी की बाते अकेलापन मिटा सकती हैं?
उन्होंने खुद कबूल किया था की अब अकेलापन महसूस नहीं होता उन की बीवी की याद बड़ा सुकून बन गई थी.
00000000000 ( क्रमशः )