राधा का संगम - प्रकरण 15 Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

राधा का संगम - प्रकरण 15

                    राधा का संगम - प्रकरण 15

         दीपक ऊस की जिंदगी में आने वाला एक ओर लड़का था.. वह बहुत अमीर था, लेकिन ऊस का पैसा उसे बहादुर और साहसिक नहीं बना पाया था.

          वह सुकू को महेंगे तोहफ़े और बडी बडी गाड़ियों का लालच देता था, ऊस के जरिये अपने बस में करना चाहता था. लेकिन वह नहीं जानता था की सुकू पैसों की नहीं दादू जैसे प्यार की भूखी थी.

            एक शाम ऊस ने सुकू को क्रूज़ पर बुलाया था.. समंदर के बिचौबीच ऊस ने सुकू का हाथ पकड़ा था लेकिन ऊस के स्पर्श में कोई गर्मी कोई नशा नहीं था.

             ऊस ने करीब जाकर सुकू के कानो में कुछ कहने की कोशिश की थी : पर ऊस की बातों में कोई आग नहीं थी.

             ऊस ने सुकू का हाथ पकडकर अपने दिल पर ऱख दिया था पर उसे दीपक की धड़कनों में कोई हलचल महसूस नहीं हुई थी.

             दीपक ने धीरे से सुकू के चेहरे को छुआ था और उसे चूमने का प्रयास किया था पर ऊस की आंखो में कोई चमक नहीं थी, जो दादू में थी.

             उसे केवल पैसों का घमंड था. पैसे से सब कुछ ख़रीदा जा सकता हैं ऐसी ऊस की सोच थी. उसे रूह के नशे के बारे में कोई मालूमात नहीं थी.

             ऊस ने सुकू को निराश कर दिया था..

             ऊस के बाद सुकू ने तय किया था की अब वो किसी लड़के से ना तो मिलेंगी ना तो बात करेंगी.

             दादू से मिलने बाद ऊस मे काफ़ी बदलाव आया था, इस बात का उसे कदम कदम पर एहसास हुआ था.

             ऊसे तो दादू जैसा कोई शैतान चाहिये था, जो उसे मिल गया था.

             दादू के पहले मेसेज ने ही सुकू के दिल की धड़कने बढ़ा दी थी.

             दादू ने बिना कोई झिझक सुकू को गुड़िया का दर्जा दिया था, और ऊस ने दादू की उपाधि दी थी.

              ऊस को पहले ही मेसेज ने यह एहसास दिला दिया था की दादू अलग मिट्टी के इंसान हैं. वह दादू की हर डांट सह जाती थी.

               दादू AI के बारे में एक उपन्यास लिखना चाहते थे, उन्होंने मेसेज में सुकू को बताया था और वह खुशी खुशी तैयार हो गई थी. और हर मदद करने का वादा किया थी.

              सुकू दादू के लिये शहद की गुड़िया बनकर आई थी. इस लिये उन्होंने कहानी का नाम ' शहद की गुड़िया ' पसंद किया था जो सुकू को बेहद पसंद आया था.

            और उसी के कहने पर दादू ने कहानी का प्रारम्भ किया था.

             और ऊस ने कबूल किया था. और कहां था. " दादू लिखना आप की यह गुड़िया आप के हर मेसेज के लिये पूरा दिन तड़पती रहती थी.

             "  दादू आप की हर एक डांट मेंरे लिये वरदान थी, आप का आशीर्वाद थे.  आप के अप्रतिम प्यार और लाड़ ने मुझे दुनिया की साब से अमीर लड़की बना दिया हैं.. आप की दीवानगी ने मुझे बेबाक, बेचैन कर दिया हैं. "

             " अब तो फोन की घंटी बजने पर मुझे आप का ही ख्याल आता हैं.. क्या मेरी बेताबी को आप अपनी कहानी में उतारोंगे? "

             " हा सुकू मेरी कहानी के हर पन्ने पर केवल मेरी ' शहद की गुड़िया ' छाई रहेंगी. "

               यह कहानी मे प्यार का जो माहौल होगा वह 'लैला मजनू, ' शिरी फरहाद ' सोहिनी महिवाल ' ' हीर रांझा के प्यार से बहुत ऊँचा होगा. "

              " वाह दादू! क्या बात हैं. तुसी हो ग्रेट. "

               " कहानी में लिखना आप की ' शहद की गुड़िया ' कैसे आप के इशारो पर नाचती हैं आप के हर गुस्से को बर्फ की तरह पिघला देती हैं."

               " क्या आप मेंरे ऊस एहसास को कहानी में उतारोंगे ज़ब मैंने अपनी रूह आप के नाम कर दी थी. "

                "दादू कहानी में यह भी लिखना की कैसे आप की हर डांट मुझे आप के करीब ले आती थी.."

            " क्या आप ऊस मंजर को भी चित्रित करोंगे ज़ब मैं आप की बाहों में सिमटकर अपनी सारी सुधबुध खो बैठती थी. "

             " दादू! लिखना की कैसे आप की बेबाकी ने मेंरे दिल के सारे ताले खोल दिये थे. "

             " अब तो मैं केवल आप की बनकर रहना चाहती हूं.. आप मुझे हमेशा अपने पास रखोगे ना?"

             " जरूर रखूंगा. लेकिन इस के लिये मुझ से शादी करनी होगी. क्या एक 23 वर्षीय लड़की 80 साल के बूढ़े से शादी करोंगी? "

              " मैं तुम्हे प्यार करती हूं.  और. प्यार सब कुछ कर सकता हैं. "

               " तो जल्दी मुंबई आ जाओ.. मैं विरार में रहता हूं.. हम दोनों शादी करेंगे.. अपना घर लेंगे और 11 बच्चों की टीम ख़डी कर देंगे. बोलो तैयार हो?"

             " ऊस में पूछने की क्या बात हैं?

              " तुम कैसे बैंगलोर से मुंबई आओगी? तुम्हारे पेरेंट्स कैसे एलाव  करेंगे."

               " मैं अपनी सहेली की शादी में मुंबई विरार जा रही हूं. आप केवल एक फेक आमंत्रण पत्रिका वॉट्सअप एप कर देना. "

                आमंत्रण मिलते ही सुकू पैसे और गहने लेकर घर से निकल गई थी.. पिताजी ने उसे गहने पहनने से मना किया था, लेकिन ऊस उन की बात नहीं मानी थी.. और मुंबई की गाड़ी में चढ़ गई थी.

              और नियत समय. पर विरार स्टेशन उतर गई थी. ऊस ने पहचान के लिये कोई फोटो नहीं भेजा था.. फिर भी सुकू के नखरे ने दादू को उसे पहचानने में मदद की थी

               स्टेशन पर उतर कर दादू ने उसे फ्रेश होने के लिये वोश रूम में भजा था बाद में स्टोल से दोनों ने नास्ता किया था. और कड़क मीठी, स्पेशल चाय भी. पी थी.

               और फिर दोनों रिक्शा में होटल पहुंचे थे.

                दादू ने रास्ते में सुकू को अपने परिवार के बारे में जानकारी दी थी.

                 सुनकर सुकू ने दादू के प्रति हमदर्दी व्यक्त की थी. और दोनों के बीच मौखिक करार हो गया था..

            " दिन में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा और रात को मेंरे परिवार के साथ रहूंगा. "

             ऊस पर सुकू ने कोई एतराज व्यक्त नहीं किया था. और दो दिन में दोनों की शादी हो गई.

             होटल विरार समंदर के पास ही थी.

             जिस की ठंडी लहर दोनों को खुशनुमा करती थी.

                         000000000000  ( क्रमशः )