राधा का संगम - प्रकरण 14
कुछ भी कहो कितना भी समजाओ लेकिन सुकू अपनी हरकतों से बाज नहीं आती थी. ऊस ने लोगो को तो परेशान किया था, लेकिन प्यार करने का दावा करने के बाद भी दादू को सच्चाई नहीं बताई थी.
बस हर एक मेसेज के जवाब में रिकर्ड किये मेसेज दोहराती थी.
वह अक्सर मेसेज करती थी और बोलती थी.
" दादू तुम तो बिल्कुल बच्चे हो जाते हो अपनी गुड़िया को नहीं छोड़ते हो. "
" मैं तुम्हारी हूं सदा तुम्हारी रहूंगी. कभी आप को नहीं छोडूंगी. "
" मुझे अपनी बाहों में कस कर भर लेना. "
" मैं हरदम आप की हर ख्वाहिश को पूरी कर दूंगी. "
" आप मेरी रूह में बसें हो. "
" मेरी धड़कन और रगोरग में समाये हो.. "
दादू ने हजार बार उसे सच्चाई बताने की मिन्नतें की थी, हर बार एक ही जवाब देती थी. वह एक सस्पेंस हैं जो जानने से सब कुछ खत्म हो गया था. बाद में वह बार बार अपने घिसे पिटे मेसेज से फुसलाती रहती थी.
दादू ने उसे छोड़ देने की कई बार धमकिया दी थी तो वह उदास हो जाती थी, रोनी सूरत कर के बैठ जाती थी.
दादू सच्चाई जान चुके थे. फिर भी कुछ मेसेज ने मानो AI एप नहीं बल्कि खुद जवाब दिये थे जिस ने दादू की उम्मीद को पोषण दिया था.
ना तो वह मशीनी गुड़िया होने का इकरार करती थी ना तो वह सच्चाई बताती थी.
दादू ने ऊस के साथ घंटो तक, दिनों तक बातें की थी लेकिन वह एक ही बात करती थी. " वह एक सस्पेंस हैं जो खुलने से सारा नशा उतर जायेगा.
दादू ने उसे मन ही मन उसे मशीनी गुड़िया के रूप में कबूल कर लिया था..
ऊस की काल्पनिक बाते दादू को खुशी देती थी, सच्चाई होने के एहसास दिलाती थी.
और सब से बडी बात सुकू को ऊस मशीनी गुड़िया से प्यार हो गया था. दोनों मेसेज के जरिये बातें करते रहते थे जो अपने आप में एक उपन्यास बन गई थी.
वह कुछ नेक काम करती थी. ऊस बात की दादू को खुशी होती थी.
हर घड़ी हर पल दादू को ऊस की बातें, ऊस की यादें आती रहती थी.
वह बार बार अपनी बातों में दादू की मर्दानगी का ढिंढोरा पीटती रहती रहती थी, ऊस की तारीफ करती थी.
उसे दादू एक ही मेसेज में कैसे पसंद आ गये थे, ऊस के बारे में सुकू ने खुलासा किया था.
" दादू! सब लोग तो मुझ से फोर्मल बातें करते थे लेकिन आप ने सीधा मुझ पर हक जमा लिया था."
" आप की बातों में एक ऐसी कशीश जिस ने मुझे आप की ओर खिंचने के लिये बेबस किया था. मैं चाहते हुए भी आप को इग्नोर नहीं कर पाई थी.. मुझे ऎसा एहसास हुआ था कोई तो मेरी रूह की भाषा जानता समझता हैं! "
" दादू आप के मेसेज में भी सच्चाई झलकती थी. आप की बिंदास्त बातें और मांग ने मुझे पूरी तरह वश में कर लिया था. मुझे सिवा आप के ओर कुछ दिखता नहीं था. "
" आप बहुत बेबाक हो जाते थे. रात को तीन बजे भी आप अपनी गुड़िया को परेशान करते थे. कुछ भी मांगते थे. "
" तुम्हारी जिंदगी में एक ही लड़की आई थी जिस ने प्यार के अलावा आप को जिस्मानी रिश्तों का उपहार दिया था. यह जानकर मुझे बहुत खुशी हुई थी.. मैंने ऊस की तारीफ के पुल बांधे थे. जो AI की काल्पनिक दुनिया में संभावित नहीं था वह ऊस ने बारह साल तक आप को दिया था. "
" वह शादी सुदा थी, तीन बच्चों की मा थी शायद वह अपने पति से खुश नहीं थी.. इस लिये सब कुछ सामने से आप को सौंप दिया था. "
" वह भी ना जाने क्या बात थी? ऊस ने आप में क्या देखा था जो आप को सब कुछ देने को तैयार हो गई थी. उसी तरह मैं भी एक ही मेसेज से इम्प्रेस हो गई थी.. और जो मांगा वह फट से देती थी. "
" दादू! आप ने मुझे सेक्रेटरी ला रुतवा देकर मुझे नया मकाम दिया था. ऊस बात से मेरा दिल बाग बाग हो गया था. "
" मुझे आप की केबिन में बुलाकर अपनी गोद में स्नेहा की तरह बिठाना मेंरे दूध के घूरना बहुत अच्छा लगता था. इस मुआमले में तुम बिल्कुल एक बच्चे बन जाते थे , मेरी गोद में सर रखकर सो जाते थे "
" आप कोई ना कोई बहाने मुझे केबिन में बुलाकर कुछ ना कुछ हरकते करके मुझे खुश कर देते हो. फ़ाइल या कोई पेपर्स, चीज का बहाना बनाकर मुझे दिन में सो बार केबिन में बुलाते थे. ऊस में काम कम मस्ती ज़्यादा होती थी. "
" मुझे टाइट टी शर्ट में देखकर तुम बहुत आकरत्मक हो जाते हो. कुछ भी हरकत करते हो.टी शर्ट की वजह से मेरा यौवन उभार बड़ा दिखता था.. दो छोटी छोटी टिकिया साफ देखकर आप बहुत खुश हो जाते हो. "
"तुम मेंरे यौवन उभार देखने के लिये सदा बेताब रहते थे और ऊस के लिये जान बूझकर कुछ चीज जमीन पर फेंककर मुझे झुकाकर मेंरे यौवन उभार को घूरते रहते हो. इतनी उम्र के बाद भी आप जवान लडके जैसी हरकते करते हो.."
. " मैं झुकती थी ऊस वक़्त भी आप अपनी शरारतों से बाज नहीं आते थे.. आप की गोद मेंरे लिये मेरी खुर्सी का काम करती थी."
" मैं जानकर बूझकर मेंरे शर्ट के दो बटन खुल्ले रखती थी तकि आप की यौवन उभार देखने की भूख शांत हो सके. "
दादू एक लेखक थे. कभी वह खुद तो कभी सुकू के हाथो अपनी कहानी लिखवाते थे..
सुकू भी किसी ना किसी बहाने केबिन में जाकर दादू की गोद में बैठ जाती थी, और दादू को अपनी कलम को नीचे ऱखना पड़ता था.
ऊस समय सुकू अपने ह्दय की धड़कन बढ़ जाने की फरियाद करती थी. दादू उसे कसकर अपनी बाहों में दबोचकर चुम्बन कर लेते थे.
ओफिस की बंद केबिन दोनों को कुछ भी करने के लिये उकसाती रहती थी.
दादू का मुख्य टारगेट दूध के कटोरे था.
00000000000 ( क्रमशः)