अध्याय 3: तहखाने का राज़ और श्रापित डायरी
आर्यन की सांसें फूल रही थीं। हॉल का दरवाजा किसी ने बाहर से बंद नहीं किया था, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे दीवारों ने ही उसे अपनी जकड़ में ले लिया हो। उसने अपने कैमरे की लाइट चारों तरफ घुमाई, लेकिन अंधेरा रोशनी को निगल रहा था। तभी उसकी नज़र फर्श पर पड़ी एक अजीब सी चीज़ पर गई। एक पुराना, पीतल का छल्ला (ring) जो ज़मीन पर एक खुफिया दरवाज़े (trapdoor) से जुड़ा था।
आर्यन ने हिम्मत जुटाई और उस छल्ले को ज़ोर से खींचा। एक भारी पत्थर की सिल सरकी और नीचे की तरफ जाती हुई पथरीली सीढ़ियां नुमाया हुईं। नीचे से एक ऐसी सड़न (foul smell) आ रही थी जैसे सदियों पुरानी लाशें वहां दफन हों। आर्यन ने अपना कैमरा संभाला, "दोस्तों, मुझे एक गुप्त रास्ता मिला है। शायद यही वो जगह है जहां इस हवेली के सारे राज़ छुपाए गए हैं।"
जैसे ही वो नीचे उतरा, तापमान इतना गिर गया कि उसके हाथ कांपने लगे। नीचे एक छोटा सा कमरा था, जिसके बीचों-बीच एक पुरानी लकड़ी की मेज़ रखी थी। मेज़ पर एक मिट्टी का दीया जल रहा था—और हैरानी की बात ये थी कि वहां कोई इंसान नहीं था जो उसे जलाता। दीये की मद्धम रोशनी में आर्यन को एक मोटी, चमड़े की जिल्द (leather-bound) वाली डायरी दिखी। उस पर धूल की इतनी मोटी परत थी कि नाम तक नहीं दिख रहा था।
आर्यन ने जैसे ही डायरी को छुआ, पूरी हवेली में एक ज़ोरदार धमाका हुआ, जैसे कोई पहाड़ टूट गया हो। उसने कांपते हाथों से डायरी का पहला पन्ना पलटा। उसमें 1920 की तारीख लिखी थी और लिखावट उसके पर-दादा, ठाकुर विक्रम सिंह की थी।
डायरी में लिखा था:
"मैंने वो गुनाह कर दिया है जिसे खुदा भी माफ नहीं करेगा। दौलत और शोहरत की भूख ने मुझे इतना अंधा कर दिया कि मैंने 'ज़ोया' की बलि दे दी। वो मासूम थी, लेकिन तांत्रिक ने कहा था कि उसका खून इस हवेली की नींव में डालते ही कुबेर का खज़ाना मिल जाएगा। लेकिन खज़ाना नहीं, सिर्फ मौत मिली। ज़ोया मर कर भी नहीं मरी। वो अब भी यहीं है... मेरी हर सांस में, हर दीवार में। वो मेरे वंश को तब तक नहीं छोड़ेगी जब तक आखिरी रायचंद का खून इस मिट्टी में नहीं मिल जाता।"
आर्यन का सर चकरा गया। उसे समझ आया कि वो कोई इत्तेफाक नहीं था कि उसे वो चिट्ठी मिली। वो एक बुलावा था। उसने डायरी के अगले पन्ने पलटे, तो वहां उसकी अपनी तस्वीर बनी थी—एक ऐसी तस्वीर जो 100 साल पहले बनाई गई थी, लेकिन उसमें आर्यन का ही चेहरा था। उसके नीचे लाल रंग से लिखा था— "अंतिम बलि" (The Final Sacrifice).
तभी तहखाने की छत से खून की बूंदें आर्यन के हाथ पर गिरने लगीं। उसने ऊपर देखा तो उसकी चीख निकल गई। छत पर एक औरत उल्टी चिपकी हुई थी, उसके बाल ज़मीन तक लटक रहे थे और उसकी आंखें बिल्कुल सफेद थीं। वो औरत धीरे-धीरे नीचे सरक रही थी, उसके मुंह से एक घुरराहट निकल रही थी जो किसी जानवर जैसी थी।
"तुम... तुम ज़ोया हो?" आर्यन ने पीछे हटते हुए पूछा।
वो औरत अचानक हवा में तैरने लगी और आर्यन का गला पकड़ कर उसे दीवार से दे मारा। उसने आर्यन के कान में फुसफुसाया, "मेरे दर्द का हिसाब... तुम्हारे खून से होगा।" आर्यन का दम घुट रहा था, उसका कैमरा ज़मीन पर गिर कर टूट गया और अंधेरा और गहरा हो गया।