डॉन क्विगजोट एक मज़ेदार उपन्यास राजनारायण बोहरे द्वारा पुस्तक समीक्षाएं में हिंदी पीडीएफ

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डॉन क्विगजोट एक मज़ेदार उपन्यास

पुस्तक समीक्षा : ‘डॉन क्विगजोट’
(लेखक — मिगुएल दे सर्वान्तेस |
हिंदी अनुवाद — छबिनाथ पाण्डेय |
प्रकाशक — साहित्य अकादमी, दिल्ली)

डॉन क्विगजोटउपन्यास विधा को साहित्य की सबसे आधुनिक, व्यापक और प्रभावशाली विधा माना जाता है। इस विधा के प्रारंभिक और आधारभूत ग्रंथों में स्पेनिश लेखक मिगुएल दे सर्वान्तेस का विश्वविख्यात उपन्यास ‘डॉन क्विगजोट’ विशेष स्थान रखता है। यह कृति न केवल अपने समय की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना का दर्पण है, बल्कि आधुनिक उपन्यास की रूप-रेखा भी निर्मित करती है।उपन्यास का केंद्रीय पात्र डॉन क्विगजोट एक ऐसा सनकी और आदर्शवादी व्यक्ति है, जिसने लोकप्रिय काल्पनिक वीर-गाथाओं को निरंतर पढ़ते-पढ़ते अपनी स्वाभाविक नींद, विवेक और सामान्य बुद्धि तक खो दी है। इन गाथाओं के पात्रों को यथार्थ मानकर वह स्वयं को मध्यकालीन वीर योद्धा समझने लगता है और वीर कर्मों की खोज में निकल पड़ता है। उसका जर्जर घोड़ा और उसका सेवक सान्चो पांज़ा (हिंदी अनुवाद में सेरो पांको) इस कथा को और अधिक हास्यपूर्ण बना देते हैं। सान्चो अपने स्वामी से कम सनकी नहीं है; वह इस भ्रम में जीता है कि मालिक के किसी काल्पनिक साम्राज्य को जीत लेने के बाद उसे भी कोई प्रांत या द्वीप मिल जाएगा।डॉन क्विगजोट की कल्पना और यथार्थ के बीच की दूरी उपन्यास का मुख्य हास्य और व्यंग्य स्रोत है। वह हर उड़ती धूल को शत्रु-सेना और साधारण जनसमूह को दुश्मन समझकर उन पर टूट पड़ता है। परिणामस्वरूप पिटाई, ज़ख्म, भूख और अपमान उसके जीवन का स्थायी हिस्सा बन जाते हैं। इन घटनाओं के बीच-बीच कविताएँ और भावुक प्रसंग कथा को केवल हास्य तक सीमित नहीं रहने देते, बल्कि उसे मानवीय संवेदना से भी जोड़ते हैं।कथा में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है, जब डॉन क्विगजोट के घर से अचानक गायब हो जाने पर उसकी भतीजी, कस्बे का डॉक्टर और पादरी चिंतित हो उठते हैं। वे उसके घर में रखी काल्पनिक कथा-पुस्तकों को देखकर बीमारी की जड़ पहचान लेते हैं और उसे वापस लाने निकल पड़ते हैं। बड़ी कठिनाई और धैर्य के साथ वे उसे बहला-फुसलाकर घर ले आते हैं। इस मुख्य कथा के साथ-साथ उपन्यास में अनेक उपकथाएँ भी आती हैं, जैसे—डोरोथिया–फर्डिनेंड,कार्डेनियो–लुसिण्डा,डॉन लुईस–डोना क्लारा,जोरेदा और गुलाम कप्तान की प्रेमकथा,तथा अनसेल्मो–कैमिला–लोथेरियो का प्रेम-त्रिकोण।ये उपकथाएँ उपन्यास को विस्तार, गहराई और बहुस्तरीय संरचना प्रदान करती हैं।उपन्यास में मध्यकालीन स्पेन का जनजीवन अत्यंत प्रामाणिक रूप में उभरता है—राजाशाही व्यवस्था, सरायों का वातावरण, पादरियों की सामाजिक महत्ता, मूर और ईसाई समुदायों के धार्मिक विवाद, समुद्री डाकुओं का आतंक तथा गड़रियों और भेड़पालकों का जीवन। ‘पवित्र-भ्रातृ-संघ’ नामक संगठन का चित्रण विशेष रूप से ध्यान खींचता है, जिसे एक शक्तिशाली स्वयंसेवी संगठन के रूप में दिखाया गया है, जो सरकारी तंत्र के समान प्रभाव रखता है।भाषिक दृष्टि से यह उपन्यास कहावतों और मुहावरों का खजाना है। अनेक स्पेनी कहावतें नई अनुभूति देती हैं, वहीं आश्चर्य यह है कि कई मुहावरे हिंदी में भी प्रचलित हैं—जैसे गोलमाल, हो-हल्ला मचाना, भुर्ता बनाना आदि। इससे भाषाओं की सांस्कृतिक समानताओं का भी संकेत मिलता है।हिंदी अनुवादक छबिनाथ पाण्डेय का श्रम, भाषिक प्रवाह और कथा-वाचन का सधा हुआ अंदाज़ इस अनुवाद को पठनीय और प्रभावशाली बनाता है। साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा किया गया इसका प्रकाशन इसे और अधिक विश्वसनीय तथा संग्रहणीय बनाता है। उपन्यास में दो पादरियों के बीच समाजोपयोगी, जनवादी और केवल मनोरंजनपरक साहित्य को लेकर हुई चर्चा (पृष्ठ 458) विशेष रूप से साहित्य-रसिकों के लिए विचारोत्तेजक है।निष्कर्षतः, ‘डॉन क्विगजोट’ विश्व साहित्य के आरंभिक उपन्यासों में होने के बावजूद आज भी प्रासंगिक है। इसकी शैली, विषय-वस्तु, शिल्प, कथ्य और दार्शनिक विमर्श आधुनिक उपन्यासों की तुलना का एक मजबूत मानदंड प्रस्तुत करते हैं। यह कृति परंपरा और आधुनिकता के सेतु के रूप में खड़ी दिखाई देती है और उपन्यास विधा की विकास-यात्रा को समझने के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ सिद्ध होती है।