अनोखी दुनिया - भाग 1 Ziya Bagde द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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अनोखी दुनिया - भाग 1

यमन लोक

प्रात: काल सभी यमन बाशियो के कानों मे एक मधुर भजन सुनाई देता है जिससे सभी लोग मंदिर में आकर उपस्थित हो जाते हैं ( जी हाँ ये ही है हमारी कहानी की मुख्य नायिका महारानी यकछीका ) एक लड़की स्वेत रंग के वस्त्रों में होती हैं जिसके लंबे घने सुनहरे रंग के केस होते है सिर मे बहुत ही सुंदर हीरो से बना ताज होता हैं जिसकी बड़ी लंबी घनी पलके गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ नीली समुद्र सी गहरी आँखे छोटा सुंदर चेहरा चेहरे मे इतनी मसुमियत की जो कोई भी देखे अपनी नजरे ही हटा ना पाये, शरीर की बनाबाट ऐसी की कोई किसी तरह से भी एक नुस्क ना निकाल पाये बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा भी फीकी पड़ जाये इनके सामने।


जैसे ही भजन खत्म होता है वो लड़की आरती की थाल लेके पीछे पलटती ही सभी लोग उन्हे प्रणाम महारानी यकछीका बोलकर संबोधित करते है सभी यमन वासी एक- एक करके आरती लेते और भगवान की मूर्ति को प्रणाम करके अपने अपने घर को निकल जाते है।

सभी के चले जाने के पश्चात वह पर 2 3 लड़की रुक जाती हैं जो बोलती हैं वा महारानी यकछीका ना जाने कितने ही बर्ष बीत गये है मगर यहाँ पर सब कुछ जैसा था बेसा ही है, कुछ भी नही बदला आपने अपने इस लोक को अपने प्यार और विश्वास से बनाया है। और आप एक महारानी होने के बाद भी हम सभी से इतना स्नेह और प्रेम करती हो बिल्कुल अपनी संतान की तरह सच कहे हम तो बहुत ही सौभाग्य साली है हम सभी जो आप हमारी महारानी है ।

महारानी - अरे वस - बस कोकिला ( कोकिला एक कोयल है) बहुत कर ली तुम ने हमारी बढ़ाई अब बस भी करो और हाँ आप बे वजह ही हमारी इतनी तारीफ कर रही हो, आप सब सिर्फ हमारी प्रजा ही नही अपितु हमारी संताने भी है और एक माता तो अपनी सभी संतानो से एक समान प्रेम करती हैं उसी प्रकार हम भी आप सभी से प्रेम करते हैं। तो आप सभी को हमे महान बताने की कोई आवश्कता नही है।

बेसे महारानी बात तो सही ही है ना अब बस भी करो हिरना अब आप भी शुरू मत होईये।

बेसे महारानी हम बोल रहे थे कितने दिन हो गये है हम कही भ्रमण करने नही गये ना ही नदियों में स्नान करने तो क्यों ना आज हम बही चले यदि आप कहे तो बरना कोई बात नही।

हन महारानी चलिए ना हिरना सत्य ही तो केह रही है आज कल तो आप हमारे साथ समय व्यतीत ही नही करती,

अच्छा ठीक है बाबा चलते हैं पर उससे पहले कुछ भोजन कर लिया जाये सच मे बहुत भुक लगी है फिर चलते हैं ठीक है महारानी पहले भोजन कर लेते है फिर चलते हैं।

भोजन के पश्चात सभी झरने के पास चले जाते हैं ये एक नीले पानी की बहुत ही सुंदर नदी होती हैं उपर झरने से गिरता हुआ पानी और नीचे नदी सभी नदी में उतर कर एक दूसरे के उपर जल फेकने लगती हैं और हँसी मजाक भी करती हैं तभी मयूरि बोलती हैं बेसे महारानी आपको याद है की कल हमारी हिरना का विवाह है हिरन्यास के साथ फिर हिरना के पास तो अपनी सखियों के लिए समय ही नही होंगा फिर तो हमे ये भूल ही जायेगी।

कोकिला- हम्म् महारानी यकछीका बेसे बात तो सही है हमारी जितनी भी सखियाँ थी उन सभी मे से आधी का तो विवाह हो गया है और अब तो उनके पास हमारे लिए समय ही नही है सभी अपनी प्रिय के साथ जो व्यस्त रहती हैं इतना बोल बे सभी हसने लगती हैं।।

हिरना - ऐसा कुछ नही है महारानी ये सभी हमारा मजाक बना रही हैं हम तो आप सभी को कभी नही भूलेंगे और हम कहा जा रहे है विवाह के बाद भी तो हम महारानी के साथ ही रहने वाले है तो आप सब हमपे हसना बन्द करो बेसे महारानी आपको नही लगता की आपका भी विवाह होना चाहिए आपके जीवन में भी कोई ऐसा आये जो आपको प्रेम करे। ह्म्म्म महारानी हिरना की बात बिल्कुल सही है

हमे नही चाहिए हमारे लिए कोई साथी हम ऐसे ही खुश है तो आप सभी इस विषय में वार्ता करना बन्द करे नही महारानी यकछीका हर किसी के जीवन में कोई ना कोई आता हैं तो कोई तो ऐसा बना ही होंगा ना जो आपके जीवन में आये आपको प्रेम करे जिससे आपको भी प्रेम हो जाए


महारानी यकछीका - अच्छा ठीक है मान लिए आप सबकी बाते सत्य है मगर इस लोक मे ऐसा कोई है ही नही जो हमे पसन्द आये और हमे जिससे प्रेम हो जाए।

इस लोक मे नही पर किसी और लोक में तो होंगा ही ना

अर्थात .......