लम्हें जिन्दगी के दिनेश कुमार कीर द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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लम्हें जिन्दगी के

1.
याद हम ज़्यादा और वो कम करते है
फिर भी वो कहते है कि
प्यार वो ज़्यादा और हम कम करते है

2.
लफ्जों का भी तापमान होता है
कभी सुकून देते हैं कभी जला देते हैं

3.
इजाज़त लेकर जो दिल में आए
उसे प्यार नहीं कहते
प्यार तो वो है
जो ना चाहते हुए भी दिल में बस जाए

4.
ये शाम और दीवाली

दीवाली के दीयों सी रौशन हो
हर शाम तो क्या बात हो,

ऐसे ही मिलते रहे हम यार
हर शाम तो क्या बात हो,

चेहरों पर खिली रहे मुस्कान
हर शाम तो क्या बात हो,

यूंही जगमगाता रहे हर गांव और शहर
हर शाम तो क्या बात हो

5.
कई शाम गुजर गई कई, राते गुजर गई
ना गुजरा तो सिर्फ एक लम्हा
वो तेरे इंतजार का

6.
मुझे अपनी दिल की गहराई ही समझो
क्योंकि गहराई से आवाज वापस नहीं आती

7.
कुछ रूठे हुए लम्हें कुछ टूटे हुए रिश्ते
हर कदम पर काँच बन कर जख्म देते है

8.
परेशान हम भी है जनाब बस मुस्कराने की आदत नही जाती

9.
ख्वाब झूठे ही सही मग़र
तुमसे मुलाकात तो करवाते हैं

10.
किडनी से काम चले तो बता देना
अब किसी को दिल देना अपने बस की बात नहीं

11.
अजीब नींद मेरे नसीब में लिखी है
पलकें बंद होती हैं तो दिल जाग जाता है

12.
तन्हा होकर भी सबका होना
बड़ा मुश्किल है आसमां का चांद होना

13.
वक्त से बड़ा मुसाफिर क्या होगा
सदियों से चल रहा है फिर भी इसे मंजिल नहीं मिलीं

14.
इश्क़ में कहां कोई उसूल होता है
यार चाहे जैसा भी हो क़ुबूल होता है

15.
क्या फर्क पड़ता है कि कोन तुम्हे पढ़ता है,
गहराइयों की खबर तो डूबने वाला ही रखता है

16.
मोहब्बत करने वाले ही अक्सर
"मोहब्बत ना करने" की "सलाह" देते हैं

17.
मौत के मारो को तो हजारों कंधे मिल जाते हैं
कौन चलता है यहां वक्त के मारो के साथ

18.
बड़ी बरकत है तेरे इश्क़ में
जब से हुआ है कोई दूसरा दर्द ही नही होता

19.
ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही
ख़्वाहिशों का है
ना तो किसी को गम चाहिए
और ना ही किसी को
कम चहिये

20.
उलटी चप्पलें, अब तो नहीं पहनती बाबा
अब भी, फिर क्यूँ लगती हैं ठोकरें

21.
कुछ कहानियां मुझ तक ही रहें तो बेहतर है
ज़माना उन्हें समझने के काबिल नहीं है अभी

22.
मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता

23.
मुझे मेरा अकेलापन ही कुछ ज्यादा भाता है
इन खोखले बनावटी रिश्तों के बीच अब दिल घबराता है

24.
अगर पंछी किसी और दाने के आदी हो जाएं
तो उन्हें आज़ाद कर देना चाहिए

25.
दिल में जज्बात और व्यवहार में इज्जत होनी चाहिये
मोहब्बत मोहब्बत चिल्लाने से मोहब्बत नहीं होती

26.
कोशिश तो ये है की मै मुस्कुराऊँ सदा
पर दर्द लिखने के लिए उदास होना जरुरी है

27.
इस क़दर मर चुकी हैं अंदर की मासूमियत
कोई कसम खाए या ज़हर फ़र्क नहीं पड़ता

28.
रहने दो मुझे यूँ ही तन्हाई में मशरूफ
मैं इश्क़ और जिंदगी दोनों से खफा हूँ

29.
गर "इश्क़" होता तो ठहरता
वो एक "लम्हा" था गुजर गया

30.
मम्मी पापा भी ना बड़े लापरवाह हो गए है
खुदा के घर जाके आने मे भला इतनी देर लगती हैं

31.
सम्भाल कर रखना अपनी पीठ को जनाब
शाबाशी और खंजर अक्सर इन्ही पर मिलते है

32.
कोई सुबूत नहीं होता मोहब्बत का
नाम लेने पर धड़कने बढ़ जाये तो
समझो मोहब्बत बेइंतेहा है

33.
किस्मत करवाती है कटपुतली का खेल जनाब
ज़िन्दगी के रंगमंच पर
कोई भी कलाकार कमज़ोर नहीं होता