ठग की कहानी दिनेश कुमार कीर द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

ठग की कहानी

# चना - का _ पेड़ #

रोचक _ कहानी ( होशियार रहिये )

दुर दराज़ गांवो में आज भी एक ठग चुटकला प्रचलित है | एक ठग था, गाँव के चौरये पर आकर कहने लगा की ,की कल रात में बाल बाल बचा| ग्रामीण ने उत्सुकता पुर्वक पुछा क्या हुआ तेरे साथ |
ठग कहने लगा, कल में आपके गांव आ रहा था, रस्ते में मुझे शेर मिल गया, मैनें दौड़ कर एक चने के पेड़ पर चढ़ गया, शेर भी पेड़ के निचे आ खड़ा हुआ, शेर को डराने के लिए मैनें अपनी बोतल से पानी गिराने लगा तो शेर भी पानी की धार को पकड़ कर उपर चढ़ने लगा | मैनें अचानक पानी गिराना बन्द कर दिया | अचानक आधी दुरी तक चढ़ा शेर धड़ाम से गिर गया |और प्राण पखेरू उड़ गये | मै पेड़ से उतर गया |
अगर आज चने का पेड़ नहीं होता तो में तुमारे सामने नहीं होता |
गांव वालों के सामने गिड़गिड़ाहट करने लगा की मुझे कुछ पैसा दो जिससे उस शेर को दफना सकुँ |
सभी ग्रामीणों को दया आ गई | रूपये पैसे देने लगे
लेकिन तभी बुजुर्ग ग्रामीण भीड़ देख कर तोड़ा रूका, की माझरा क्या है!
बुजुर्ग ने कहा की
जिन्दगी को घसीटते घसीटते सफेदी आ गई ....
चने का घौड़ (पौधा) सुना है, पेड़ आज पहली दफा सुन रहा हूँ !
झुठे कही के

ठग 9, 2,11 हो गया | केवल गांव वाले बगले देख रहे थे |

( जय हिंद जय भारत वन्देमातरम् )

रोचक व मजेदार कहानियों के लिए पढ़ते रहे मातृभाष डिजिटल प्लेट फार्म पर और अपनी जानकारी को और अधिक विस्तृत करे...

 

रोचक व मजेदार कहानियों के लिए पढ़ते रहे मातृभाष डिजिटल प्लेट फार्म पर और अपनी जानकारी को और अधिक विस्तृत करे...