Kaidi - 11 - Last part books and stories free download online pdf in Hindi

कैदी - 11 - आखिरी भाग

और जब एन जी ओ वाली दीदी ने कहा कि तुमने तुम ने मुझे ये तो पूछा ही नहीं की आज आदालत में क्या फैसला सुनाया तो सानव ने कहा दीदीदी इसमे पूछने बाली कौनस बाबा वोमुझे आपका चेहरा देखकर ही पता चल गया था कि इस बार भी मेरी रिहाई का फैसला मेरे हक में नहीं आया हैं और फिर एन जी ओ वाली दीदी ने कहा चांदनी का यो पहला बाला पति था वो ही उसकी बेटी का असली बाप हैं
और सानव नेने कुछ सोचते हुए कहा दीदी आप चांदनी को यहां बूला देती लेकिन इस बात का जबाव एन जी ओ वाली दीदी के पास नही था तो एन जी ओ वाली दीदी ने कहा सानवी मैं चाह कर भी अदालत में कह नही पायी की ये सार खून तुमने नही बल्कि चांदनी ने ने किये थे और सभी परिवार बालों के जहर तुमने नही बल्कि चांदनी ने दिया था इस बार एन जी ओ वाली दीदी के मन में रोष था स्पष्ट नजर आ रहा था क्योंकि अब इतने साल से सानवी से मिलत ररहने के कारण एन जी ओ वाली दीदी को सानव सेसे एक लगाव सा हो गया था और पिछले कुछ सालों में दोनों के बीच एक रिश्ता बन गया था जो दोनों के दिलों को जोडे कर रखा था इसलिए आज के फैसले से एन जी ओ वाली दीदी खुश नहीं थी उन्ह ललग था कि सानव कोको भले ही अपराधी की तरह जेल में हो लेकिन उसे इस से छुटकारा दिला ही देगी क्यों अपनी अपनी इज्जत मान और अपनी आबरू बचाने के लिए आदालत सानव कोको माफ करके रिहा कर देगी लेकिन एन जी ओ वाली दीदी की मेहनत पर पान फिर गया था और एन जी ओ वाली दीदी ने सानव केके जेल से बाहर निक की कोशिश बेकार गयी तो सानवी ने कहा दीदी आप चिंता मत करो मुझे बैसे भी यहीं उम्मीद थी और अब मैं जेल से बाहर आना भी नहीं चाहती क्योंकि अब मुझे यहीं अच्छा लगने लगा हां पहले-पहले जब मैं यहां जेल में आई थी तब मुझे बूरा लगता था लेकिन अब चार सालों से एक आदत सी हो गयी है इस जेल के कैदीओ के लिए खाना बनाना मुझे अच्छा लगने लगा है
तभी एन जी ओ वाली दीदी ने तुम्हे पता भी है तुम क्या कह रही हो आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है तुम्हे तो सानवी ने कहा ये तो बहुत अच्छा हुआ दीदी क्योंकि मैं बाहर नही आना चाहती क्योंकि बाहर फिर वही डर खौफ की जिंदगी जिने से तो अच्छा है यहां रह कर अपनी बची हुई जिंदगी गुजार दूं कैदीओ की सेवा करते हुए और दीद मेरे इस कुप्रथा जो देश के सामने उजागर किया है ये लौ ऐसे ही जलती रहनी चाहिए लेकिन दी दी जब तक ये सफेदपोश भेडिये बाहर सरेआम नकली चेहरे लिये घूमते हैं तब तक हमारे जैसीऔरतें कभी भी आगे नही बढ़ पायेगी और
मैं नही चाहती की ये लौ कभी बूझे क्योंकि आज जिस तरह से मैं जेल की चारदीवारी बंद कल कोई मेर तरह किसी मासूम को के ना आना पडे इसलिए मुझे जेल में ही रहने दे ताकी कोई
दीदी आप अभीमेरे लिए बहुत बहुत अदालत के धक्क खा लिये और अब आप कुछ नही करेगी
और एन जी ओ वाली दीदी सिर्फ सानवी के चेहरे पर आये भावों को पढ़ने की कोशिश कर रही थी और एन जी ओ वाली दीदी ने कहा मैंने अभी भी हार नही मानी हैं मैं एक बार बडी़ अदालत का दरवाजा खटखटायऊगी और एन जी ओ वाली दीदी आंखों में आंसू लिए जेल से बाहर निकल गयी थी और सानव अपनी जेल की चारदीवारी में बापस चली गई
समाप्त
कहान काका आखिरी भाग

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