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कैदी - 10

और सानवी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था और पुलिस ने सानव कोको हिरासत में लिया कर जेल भेज दिया और कोर्ट में भी सानवी अपनी परिवार की हत्या उसी ने की है और सानवी ने जज को सबकुछ सच सच बता दिया अपने माता-पिता भाईयों का सच और राजेश और मदिंर के पूजारी सब की पोलपट्टी खलने से ले कर सब को जहर देने की बात सब बता दिया और सानवी ने कहा अगर वो अपनी बहन चांदनी के साथ भाग भी तो भी उसके माता-पिता यां भाईयों मे कोई भी उन्हे कहीं से भी ढूंढ निकालते और चांदनी ने घर से भागने का प्रोग्राम
बना लिया था लेकिन चांदनी को ये बात पता नही थी की उसकी बहन सानवी के मन में क्य खिचड़ पक रही है और इसलिए सानवी की एक हां पर अब पिछले चार सालों से सानवी जेल में बंद थी और अपने अच्छ
चाचा चलन की बजह से सानवल ने जेल में सभी का दिल जीत लिया और एक (एन जी ओ) की दीदी की समाजवादी संगठन के तत्वावधान की बजह से सानव की पढ़ाई बापस शूरू हो गयी थी और जेल की सुपरिटेंडेंट एस के गुप्त भी सानवी की परस्थितियों से परिचित थी और उन्हे भी सानवी से लगाव हो गया था उन्ह की ने जेल में सानवी को जेल जो लोग खाना बनाते हैं उनके साथ कामपर रखवा दिया
और इधर सानवी अविचलित अपनी जीवन में आगे बढ़ रही थी
और इधर (एन जी ओ) बाली दीदी सानवी की रिहाई के लिए कोशिश कर रही थी और काफी मेहनत मशकत के बाद आज सानवी जीवन का फैसला आने वाला था
पछली बार सानव पपर आरोप तय हो गये थे पता नहीं (एन जी ओ) वाली दीदी किन किन लोगों से सम्पर्क करके सानव कीकी सजा कम करवाई थी और फैसले के दिन सानव जाजाना तो नही चाहती थी क्योंकि वो जाना ही नहीं चाहती
और इधर सानवी जेल की भोजनालय मे रोटीयां वेलने रही थी कि एक कॉन्स्टेबल ने आ कर सुचना दी की एन जी ओ वाली दीदी आ गयी है और सानवी चुपचाप उसक साथ चल पड़ी
और (एन जी ओ) बाली दीदी के चेहरे पर चिंता की लकीरें सानव ममहसूस कर सकती थी लेकिन सानवी ने कुछ नहीं चुप रही शायद सानव कोको कुछ कुछ अंदाजा हो चुका था लेकिन सानवी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो दीदी ने कहा मुझे चांदनी का पता लगा लिया है और वो अपनी बेटी को ले कर किसी चमनलाल नाम के आदमी के साथ भागी थी तो सानव ने कहा दीदी चमन लाल ही चांदनी की बेटी का पिता है चलो आपने मुझे एक अच्छ खबर सुनाई हैं तभी (एन जी ओ) बाली दीदी ने कहा तुम कोर्ट के फैसले के बारे में नही पुछोंगी
तो सानव ने कहा कक्या पुछना है दीदी
आप चांदनी को क्यों नहीं बूला देती वो तो आने,,
और सानवी ने दीदी का हाथ पकड़ लिया
तो दीदी ने कहा मैं चाह कर भी ये नही कह पाई की उस रात जहर सानवी ने नही बल्कि चांदनी अपने परिवार,,
क्रमशः

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