आरक्षण Er.Vishal Dhusiya द्वारा मानवीय विज्ञान में हिंदी पीडीएफ

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आरक्षण

प्रस्तावना
यह बात किसी के भावना को ठेस पहुंचाने की नहीं हैं बल्कि उनको आईना दिखाने का प्रयास है जिन्होंने 3000 साल तक sc st obc पर तरह तरह के अत्याचार किए sc st obc का 100 में 100 प्रतिशत आरक्षण खाते रहे। और जब 70 साल से sc st obc को सिर्फ 50 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है और उसके बदौलत sc st obc समाज आगे आ रहा है और उनकी बराबरी कर रहा है तो उनको तकलीफ हो रही है । कृपया आपसे अनुरोध है कि इस बात का बुरा ना माने बल्कि दिल और दिमाग से सोचें कि किसी को मारना डराना धमकाना और उनका हक अधिकार लूटना ये कहाँ तक सही है। क्या यही मानवता है। रही बात जातिवाद की तो जो स्वर्ण लोग आरक्षण का विरोध में लगे हैं। वहीं लोग जातिवाद का बढ़ावा दे रहे हैं आज भी sc St और obc समाज पर तरह तरह के अत्याचार हो रहे हैं। घोड़ी चढ़ने पर, मूछ रखने पर, मटका से पानी पीने पर हत्या की जा रही हैं तो वहां से भला जातिवाद कहाँ से खत्म होगा और जब जातिवाद खत्म नहीं होगा तो आरक्षण कैसे खत्म होगा। आरक्षण आर्थिक स्थिति पर नहीं बल्कि जाति स्थिति पर दी गई । ताकि इसका उपयोग कर sc st obc समाज ऊपर उठेगा और उनको भी मौका मिलेगा।

- लेखक की कलम से
विशाल कुमार धुसिया
जो लोग आरक्षण का विरोध कर रहे हैं जरा वे बतायेंगे की जातिवाद कब खत्म हो रही है। कब सभी भारतवासी एक थाली में खा रहे हैं कब अन्तर्जातीय विवाह कर रहे हैं तथा कब भाइचारे की हांथ बढ़ा रहे हैं। जब मनुस्मृति के अनुसार sc st obc पर तरह तरह के अत्याचार हो रहे थे। उनको वेद पढ़ने पर जिव्हा काट दी जाती थी, वेद सुनने पर कान कान में शीशा या लोहा पिघला कर डाला जाता था, वेद को देखने पर आंख फोड़ दिया जाता था और sc st obc को सभागार तालाब से पानी पीने पर हत्या कर दिया जाता था। तब आप और आपके पूर्वजों ने इसे रोका क्यों नहीं। sc st obc के साथ जानवरों जैसा सुलूक किया जाता था । आरक्षण का मतलब होता है छुट या मौका। आरक्षण हमें इसलिए दिया गया कि हम अपना आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक जीवन सुधार सकें। क्या sc st obc को हक नहीं है बराबरी से जीने का, नौकरियां करने का तथा शिक्षा ग्रहण करने का। आज अगर sc st obc इतना आगे बढ़ पाया है, तरक्की कर पाया है तो आरक्षण के बदौलत और आरक्षण ऐसे ही खैरात में नहीं मिला है उसके लिए कितनी लड़ाइयां लड़ी गईं है । खून के आंसू बहाए गए हैं । तीनों गोलमेज सम्मेलन में कॉंग्रेस और ब्रिटिश कंपनी के साथ बहस और वैचारिक मतभेद लड़ाइयां हुयी हैं। sc st obc के मसीहा Dr.Br.ambedkar खुद आपबीती बताते हैं। किताबों के माध्यम से लोगों को अपने साथ हुए जातिगत भेदभाव की शुरूआती दौर से लेकर संविधान बनाते समय तक उन्होंने जातिगत भेदभाव को झेला है। उनकी एक किताब है No peon no water में साफ तौर पर लिखा है कि जिस दिन चपरासी नहीं आता उस दिन एक बूंद पानी के लिए तरसता। नल को हांथ लगाने नहीं दिया जाता था और आज भी यह बहुत से गाँव और शहरों में हो रही है। यही सब देखते हुए संविधान निर्माता Dr.Br.ambedkar ने sc st obc को उनको सम्मान से जीने का ये हथियार दिए ताकि ये भी लोग सम्मान से जी सकें। Dr.Br.ambedkar ने तो किसी से बदला नहीं लिया और नाहीं उनके अंदर बदले की भावना थी। आज मंदिर के शिलान्यास हो या संसद भवन का उद्घाटन इनमें देश के सर्वोच्च नागरिक राष्ट्रपति को नहीं बुलाना ये जातिवाद का बढ़ावा नहीं है तो क्या है। और आरक्षण का विरोध करने पहले चले आते हैं। यह कडवा है मगर सत्य है और सत्य को स्वीकारना जरूरी है तभी जाकर यह देश जातिवाद और आरक्षण मुक्त होगा अन्यथा सदियों तक यही चलेगा और भारत आगे बढ़ने की बजाय खाई में जा गिरेगा।
धन्यवाद - विशाल कुमार धुसिया