पकडौवा - थोपी गयी दुल्हन - 10 Kishanlal Sharma द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

पकडौवा - थोपी गयी दुल्हन - 10

"तो क्या तुम सोच रहे थे।मेरी टांग सचमुच टूट गयी"।
"जब तुम्हे कुछ हुआ ही नही तो यह बहाना करने की क्या जरूरत थी।"
"बहाना नही करती तो तुम्हारी गोद मे कैसे आती?"
"मक्कार लड़की,"अनुपम ने छाया की चोटी पकड ली,"अब बहाना करोगी?"
"उई माँ"छाया चीखी,"मेरी चोटी छोड़ो।""
"पहले बताओ अब ऐसी हरकत करोगी।"
"नही।"
अनुपम ने छाया की चोटी छोड़ दी और वापस चला गया।
पहले रामदीन खाना बनाता था।पर धीरे धीरे छाया ने रसोई का काम सम्हाल लिया था।शुरू में जब छाया ने ऐसा किया तब अनुपम ने उसके हाथ का बनाया खाना नही खाया था।लेकिन अब वह उसके हाथ का बना खाने लगा था।धीरे धीरे छाया ने उसके सारे काम अपने हाथ मे ले लिए थे।
अनुपम का व्यहार भी पहले से बदला था।पहले वह हर समय गुस्से में रहता या उसे फटकारता रहता।उससे ढंग से बात भी नही करता था।अनुपम जब उससे अच्छा
बरताव करता तब छाया को लगता वह उसके बेहद करीब पहुंच गई है।अनुपम जब उसे दुत्कारता फटकारता तब ऐसा लगता उसके और अनुपम के बीच उतनी ही दूरी है जितनी धरती और आसमान के बीच है।जिस तरह धरती और आकाश नही मिल सकते।ऐसे ही वह और अनुपम नही मिल सकते।वह चाहे जितना प्रयास कर ले वह अनुपम की नही हो सकती।
जब वह अनुपम की हो नही सकती।अनुपम उसे अपनी पत्नी स्वीकार नही करेगा।तब अनुपम के पास उसके साथ रहने से क्या फायदा?वह कभी कभी सोचती।वह अनुपम के पास से चली जाए।पर जाए तो जाए कहा?
उसके मा बाप तो तभी मर गए थे जब वह छोटी थी।उसे भाई भाबी ने पाला था।बड़ी और जवान होने पर भाई ने उसकी शादी के लिए प्रयास किये पर दहेज की भारी भरकम मांग होने के कारण वह उसके हाथ पीले नही कर पाया तब उसके एक दोस्त के कहने पर उसने पकडौवा गेंग का सहारा लिया था।अगर भाई को जरा भी उससे लगाव होता तो वह ऐसा नही करता।
जब भाई ने उससे छुटकारा पा ही लिया था।फिर उसके पास जाने से क्या फायदा।छाया को कोई नाते रिश्तेदार भी ऐसा नही था।जिसका उससे लगाव रहा हो।अगर ऐसा होता तो वह उसके पास चली जाती।ले देकर अब दुनिया मे अनुपम ही था।चाहे जैसे भी उसे उसके पल्ले बांध दिया गया था।अनुपम उसे बिल्कुल नही चाहता था पर उसके पास रहने के अलावा कोई रास्ता नही था।
अनुपम के जीवन मे छाया से पहले कोई और आ चुकी थी और वह थी रानी।
रानी उसके साथ ही ट्रेनिंग में थीरानी ईसाई थी।।वह उससे प्यार करने लगा था।वह उसे अपनी बनाना चाहता था।पर उसकी माँ रूढ़िवादी और पुराने विचारों की औरत थी।जब उसने मा से इस बारे में बात की तो माँ साफ शब्दों में बोली थी,"तेरी शादी में दूसरे धर्म की लड़की से हरगिज नही करूंगी।"और माँ की बात सुनकर वह चुप रह गया था।
अब मा नही रही थी।मा के न रहने पर उसने सोचा था।अब वह रानी को प्रपोज करेगा।पर वह कहता उससे पहले छाया को उसके पल्ले जबरदस्ती बांध दिया गया था।
और वह चाहता था।रानी से प्यार का इजहार करने से पहले छाया से पीछा छुड़ाए।वह अभी तक इसमें कामयाब हो पाता इससे पहले ही एक दिन रानी का फोन आया,"मैं शाम को आ रही हूँ।'
रानी की पोस्टिंग देहरादून में थी