पकडौवा - थोपी गयी दुल्हन - 4 Kishanlal Sharma द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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पकडौवा - थोपी गयी दुल्हन - 4

शादी कराने वाले युवती की उसके घर छोड़ गए थे।वह युवती अब उसके कमरे में थी।
युवती का कद मंझला और रंग गोरा था।वह सुंदर होने के साथ शिक्षित भी थी।अगर यही शादी अगर उस युवती के साथ अनुपम की रजामंदी से होती तो वह आज उस युवती के साथ सुहाग रात मना रहा होता।युवती इस तरह खाट पर न बैठकर फूलों की सेज पर बैठी होती।और वह उसके रूप यौवन को निहारते हुए उसकी तारीफ कर रहा होता।लेकिन यह शादी अनुपम की रजामंदी से नही हुई थी।इसलिए एक कमरे में एक छत के नीचे होते हुए भी। वे अलग अलग बिस्तर पर थे।
शादी जबरदस्ती कर जरूर गयी थी लेकिन अनुपम इस शादी को मानने के लिए हरगिज तैयार नही था।वह खाट पर लेटा हुआ युवती से पिंड छुड़ाने के बारे में सोच रहा था।।
और समय सरकता रहा।रात ढलती रही।रात को एक क्षण के लिए भी वह सोया नही था।उसने सामने के खाट पर लेटी युवती पर नजर डाली।लेटे लेटे वह गहरी नींद में सो गई थी।उसे गहरी नींद में देखकर अनुपम को बेहद खुशी हुई।इससे बढ़िया मौका युवती से पीछा छुड़ाने का उसे नही मिल सकता था।उसने एक मिनट की देर नही लगाई और दबे कदमो से घर से बाहर निकल आया।
बाहर घुप्प अंधेरा था।हाथ को हाथ भी सुजाई नही दे रहा था।गांव से पहली बस सुबह पांच बजे गुजरती थी।अभी बस आने में पूरे दो घण्टे शेष थे।अनुपम ने आगे बढ़ते हुए सोचा।अगर वह गांव के बाहर के बस स्टॉप पर बस के ििनतजार में खड़ा रहा तो नींद खुलने पर वह युवती उसे ढूंढती हुई आ सकती है।अभी समय काफी था इसलिए अनुपम ने पीछे के गांव नगला के बस स्टॉप से बस पकड़ने का फैसला किया।ताकि अगर युवती नींद खुलने पर उसे खोजती हुई बस स्टॉप पर आए तो उसे न पाकर वापस लौट जाए।
अनुपम अंधेरे में सड़क के सहारे नगला की तरफ चल पड़ा।वह सोचता ही जा रहा था।अपने साथ हुए हादसे से वह बेहद छुब्ध था।और वह अपने बारे में सोचता हुआ बस स्टॉप पर पहुंवः गया।सुबह पहली बस का ििनतजार करने वाला वह एक मात्र यात्री था।वैसे ही बिहार कानून व्यवस्था के लिहाज से बदनाम था।पर वह अब निडर था।इससे बुरा उसके साथ क्या हो सकता था।
बस बिल्कुल नियत समय पर आ गयी थी।बस में चढ़ने वाला वह एक मात्र व्यक्ति था।बस में सीट पर बैठते हुए वह बहुत खुश था।उसने सोचा भी नही था।इतनी आसानी से उस युवती से उसे छुटकारा मिल जाएगा।उसके बस में चढ़ते ही बस चल पड़ी।बस को नगला से उसके गांव के बस स्टॉप पर आने में पंद्रह मिनट लगते थे।उसके गांव का स्टॉप आने पर बस में से एक यात्री उतरा था।वह उसे नही जानता था।बस में कोई चढ़ा नही था।उसने सोचा या तो युवती जगी नही है।या स्टॉप पर उसे न देखकर वापस लौट गई होगी।अनुपम अपने विचारों में खोया था।तभी बस झटके के साथ रुकी थी।
"क्या हुआ?"कंडक्टर अपनी सीट पर बैठे बैठे ही बोला,"बस क्यो रोक दी?"
"सवारी है।'
सवारी सुनते ही कनेक्टर ने हाथ आगे करके दरवाजा खोला था।बस रुकते ही सवारी बस में आ गयी।अनुपम की उस सवारी पर नजर पड़ते ही वह चोंका था।
जिस युवती से वह पीछा छुड़ाना चाहता था।
वो बस में आ गयी थी