खामोश है तो कहते है उदासी इतनी अच्छी नही। Anand Tripathi द्वारा मनोविज्ञान में हिंदी पीडीएफ

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खामोश है तो कहते है उदासी इतनी अच्छी नही।

मेरे अंतरमन के उद्गार का शांत हो जाना भी तो कोई खामोशी ही है। किसी को भूख लगी हो और सहसा उसको कोई अप्रिय या अग्नि वेग जैसी खबर मिले तो वह पल भी खामोशी में परिवर्तित हो जायेगा। किसी अबला स्त्री का प्रतिपल शोषण भी तो खामोशी का परिचय है। सघन वन में सभी वृक्ष तैयार हो। परंतु पत्तो का न हिलना भी तो जंगल और ज़मीन की खामोशी को दर्शाता है। जो लब्जो से न होकर आंखो से बयां हो जाए वह भी तो खामोशी है। खामोशी बहुत सुंदर और सजग स्वप्न की तरह है। अगर वह किसी नकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न न करता हो। खामोशी का शाब्दिक भाव मय अर्थ है की चित की चंचलता का स्थिर हो जाना। मन का स्वयं में उतरना। आज मैं बहुत उदास तो भी लोग पूछते है और बहुत प्रसन्न होने का कारण भी लोग पूछते है। परंतु मुझे यह एक समान ही तो प्रतीत होते है। इनमें अंतर क्या है? उदासीन होने का पर्याय ही तो खामोश है। फिर कहते है खामोश बैठे तो कहते है उदासी अच्छी नहीं है। खामोश आपको सतर्क करता है। और उदास आपको चिंता की ओर अग्रसर करता है। एक दिन बहुत शांत बीत चुका हो तो वह दिन आलस भरा थोड़ी है आलस्य तो आपमे और हममें है। जिसका निष्णाद निकालना अत्यंत असंभव है।
एक बार नही मैने कई बार अनुभव किया है। की मैं कभी छत पर और कभी अन्य जगह बैठकर अपनी एक कल्पना की दुनिया का अनुभव कर रहा होता था। और अगले क्षण कोई आकर मुझे जगा देता जबकि मैं पहले से ही जागृत हूं। और सम्मुख होकर वह व्यक्ति मुझसे कहता है क्या बात है आजकल आप बहुत अच्छे से व्यवहार नहीं करते अपितु आप तो उदास ही रहते हैं सदा। यह कैसी उदासी है ?
जीवन में व्यक्ति को खामोश होकर इस तंत्र का अनुभव करना चाहिए। ताकि उसे पता चले की यह संसार केवल धर्म में काम में रोग में ही नही अपितु हिमालय की तलहटी का भी अनुभव भी कराने में सक्षम है। यह रचना किसी की कल्पना या कहानी नही है। अपितु इस शीर्षक का सार है। उदास होकर भी नित नृत्य में रहना ही खामोशी है। खामोश होना एक पल का किरदार है और उदास होने को तो ये सारा संसार है।
शब्दो की तुलना में मौन अधिक भाव भरा है। इसलिए मौन संत के सुविधा अनुसार बना है।
उदास मन आपको खामोशी की ओर ले जाता है। और खामोशी आपको आपके मनस्थिति को दर्शाती है। यही इसका पर्याय है। जीवन तो सदैव खामोश ही होता है परंतु व्यक्ति इतना खुद उलझाता है की फिर इसकी खामोशी उदासी में और उदासी चिंता में और चिंता चिता में परिवर्तित हो जाती है। यह कटु है परंतु यह भी सत्य है। खामोश रहो परंतु होश में नहीं तो बिखर जाओगे और तुम तक उस बिखरने की खबर भी नहीं होगी। स्वभाव में निश्चलता और मन पर नियंत्रण ही आपको बिलियन और मिलियन बनाने में सहायक रहेगा। अन्यथा एक दिन सदा सर्वदा आपको आपकी उदासी के साथ अलविदा कहना होगा।

धन्यवाद और आभार।