कामवाली बाई - भाग(११) Saroj Verma द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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कामवाली बाई - भाग(११)

सुहाना की मौत पर गीता बहुत रोई,सुहाना से उसे बहुत लगाव था,वो उसकी हमउम्र थी इसलिए जब भी उसे कुछ भी पूछना होता था तो वो उससे पूछ लेती थी,वो उसे कम से कम सात सालों से जानती थी,पहले कावेरी सुहाना के घर काम किया करती थी इसलिए वो गीता को साथ में ले आती थी,कावेरी कभी भी गीता को घर पर अकेली नहीं छोड़ा करती थी उसे अपने पति पर भरोसा नहीं था,सुहाना अपने पुराने कपड़े और खिलौने गीता को दे दिया करती थी,सुहाना से ही गीता ने थोड़ा बहुत पढ़ना लिखना सीखा था,सुहाना ही गीता को मँहगे वाले सैनेटरी पैड भी दे दिया करती थी,दोनों के बीच कुछ भी छुपा हुआ नहीं था,जब सुहाना को हमीद से प्यार हुआ था तो उसने ये बात सबसे पहले गीता को ही बताई थी और आज वही सुहाना गीता को अकेली छोड़कर जा चुकी थी.....
जब सुहाना का पार्थिव शरीर अन्तिम संस्कार के लिए चला गया तो गीता भी वहाँ से उठकर चली आई,भला वो वहाँ अब बैठकर क्या करती,जिसके साथ उसका नाता था तो वो तो अब इस दुनिया से जा चुकी थी,वो रोती हुई सड़क पर बेसुध सी चली जा रही थी तभी उसे हीरामनी ने टोकते हुए कहा....
अरी!गीता!कहाँ भागी चली जा रही है?
हीरामनी की आवाज़ सुनकर गीता रूकी और अपने आँसू पोछते हुए बोली....
हाँ!चाची!क्या है?
कुछ सुना तूने?हीरामनी ने पूछा।।
क्या?काकी!गीता ने पूछा।।
अरे!तू जिस सेठानी के यहाँ काम करती थी ,उसकी जवान बेटी मर गई,हीरामनी बोली।।
हाँ!जानती हूँ,वहीं से तो आ रही हूँ,गीता बोली।।
तो तुझे पता चला कि वो कैसें मरी?हीरामनी ने पूछा।।
नहीं!गीता बोली।।
अरे!उन्हीं पापियों ने मिलकर मार डाला अपनी बेटी को,हीरामनी बोली।।
लेकिन क्यों?गीता ने पूछा।।
सुना है कि किसी छोरे के साथ चक्कर था लड़की का,हीरामनी बोली।।
तो कोई इस बात पर अपनी बेटी को मार डालता है,गीता रोते हुए बोली।
अरे!वो छोरा मुसलमान था, घरवालों को ना भाया इसलिए तो मार दिया छोरी को जहर देकर,इसलिए तो आननफानन में तुरन्त जलाने ले गए कि कहीं ये बात पुलिस तक ना पहुँच जाएं,हीरामनी बोली।।
लेकिन चाची तुम्हें ये सब कैसे पता चला?गीता ने पूछा।।
तुझे पता है ना !कि मैं उनके बगल वाले घर में ही काम करती हूँ,हीरामनी बोली।।
ऐसा कोई बड़ा भारी जुल्म तो ना किया था सुहाना ने कि उसे उनलोगों ने जहर देकर मार दिया,गीता बोली।।
वो पुलिस के पास जाने वाली थी,हीरामनी बोली।।
वो किसलिए,गीता ने पूछा।।
तब हीरामनी बोली....
एक रोज़ सुहाना के मामा और भाई ने उस छोरे हमीद को काँलेज के पीछे सुनसान जगह पर शाम को बुलाया,बोले कुछ बात करनी हैं,वो बेचारा भोला भाला हमीद दोनों की बातों में आ गया,उसे इन लोगों ने इतना मारा....इतना मारा....कि अधमरा कर दिया और रेलवें ट्रैक पर छोड़कर ट्रेन आने का इन्तज़ार करने लगें,ट्रेन आई और हमीद को कुचलते हुए निकल गई,इस बात का किसी को भी पता नहीं चला,हमीद के घरवाले हमीद को रातभर ढ़ूढ़ते रहे लेकिन हमीद की कोई खबर ना मिली,
लोगों ने जब हमीद की लाश ट्रैक पर देखी तो पुलिस को इत्तिला किया,पुलिस हमीद की पहचान नहीं कर पाई क्योंकि उसका चेहरा बुरी तरह से कुचल चुका था इसलिए उसकी पहचान नहीं हो पा रही थी,पुलिस भी परेशान थी,क्योंकि सुहाना के भाई और मामा ने हमीद की जेब से उसका बटुआ वगैरह निकाल लिया था,लाश की हालत बहुत ही खराब हो चुकी थी,पोस्टमार्टम हुआ तो सुहाना के बाप ने उन सबके मुँह में बहुत सा रूपया ठूस दिया और केस वहीं दब गया,
और इधर जब सुहाना ने सबको बातें करते सुना तो वो सब सुनकर उसके होश उड़ गए फिर वो चुप ना रह सकी उसने अपने घरवालों को धमकी दी कि वो पुलिस के पास और हमीद के घरवालों के पास जाकर सबकुछ बताएंगी और फिर उस रात सुहाना को घरवालों ने घर में हाथ पैर और मुँह पर पट्टी बाँधकर एक कोने में डाल दिया,फिर उसे जह़र का इन्जेक्शन दे दिया,रातभर जह़र अपना काम करता रहा और सुबह होते होते सुहाना मर गई और लोगों से ये कह दिया कि रात ना जाने क्या हुआ लड़की को उल्टियाँ हुई ,दस्त हुए जब तक हम डाक्टर के पास ले जाते उससे पहले ही सुहाना ने दम तोड़ दिया,इसलिए तो आननफानन में अन्तिम संस्कार के लिए ले गए,उनके बगल वाली सेठानी ने सब बताया क्योंकि वो तो सुहाना की ताई है उसे सब मालूम है,
इतना सबकुछ हो एक हफ्ते में,गीता बोली।।
तू क्या एक हफ्ते से काम पर नहीं आई?हीरामनी ने पूछा।।
नहीं!माँ बहुत बीमार थी,उसकी देखभाल के मारे किसी के यहाँ काम पर नहीं जा सकी,भाभी हमसे दूर रहती है और फिर माँ नहीं चाहती कि भाभी हमारी बस्ती में आएं,बस्ती के लोंग ठीक नहीं हैं इसलिए मुझे ही रूकना पड़ा घर पर,भइया ने तो अपने घर बुलाया था माँ को लेकिन माँ ही नहीं गई,गीता बोली।।
ठीक है तो तू अब घर जा,मैं भी जाती हूँ,छोरी के बारें में सुनकर तो मुझे भी कुछ अच्छा नहीं लगा,ना जाने छोरियाँ पड़ती ही क्यों हैं इस प्यार व्यार के चक्कर में और इतना कहकर हीरामनी अपने रास्ते चली गई....
जब ये सब गीता ने सुना तो उसे सुहाना के घरवालों से घिन हो गई और वो घर आकर कावेरी की गोद में अपना सिर रखकर फूट फूटकर रोई...
कावेरी ने उसे समझाते हुए कहा....
बेटा!ये दुनिया ऐसी ही है,यहाँ इन्सान जानवर से नीचे गिर चुका है,अपने स्वार्थ के लिए वो कोई भी रास्ता अपना लेता है,अपनी खोखली इज्जत के लिए अपनी बेटी की बलि देना ऐसे लोगों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है,तू ये समझ उस बेचारी सुहाना को इन पिशाचों से मुक्ति मिल गई,ईश्वर अब उसे ऐसी जगह जन्म दें जहाँ उसका मोल हो,उसे समझा जाएं.....
उस रात गीता बहुत ज्यादा दुखी थी ,वो सारी रात आँसू बहाती रही,उसे दुख था कि वो सुहाना के आखिरी समय उससे बात भी ना कर पाई और यही सोचते सोचते गीता कब सो गई उसे पता ही नहीं चला.....
लेकिन अब उसने फैसला कर लिया था कि वो सुहाना के घर का काम छोड़कर कहीं और काम करेगी और उसने ऐसा ही किया,उसे एक घर मिल भी गया...
वो घर था एक प्रिन्सिपल का,जो वोमेन्स काँलेज की प्रिन्सिपल थी और विधवा थीं,उनका नाम अर्जिता गुप्ता था,उनका एक बेटा भी था जिसका नाम सनातन था,अर्जिता ने अपने जीवन में बहुत दुःख झेले थे,बहुत संघर्ष किया था,जब वें काँलेज में पढ़ रही थीं तो उन्होनें अपने साथ पढ़ने वाले सहपाठी से घरवालों के खिलाफ जाकर प्रेमविवाह किया था,जिससे उनके मायके और ससुराल दोनों ओर के परिवारों ने उन्हें और उनके पति को छोड़ दिया.....
जब वें माँ बनीं तो पता चला कि उनका बेटा सनातन मानसिक विकलांग है,लेकिन वो इतना भी मानसिक विकलांग नही था,चीजों को समझता था लेकिन और बच्चों की तरह ज्यादा स्मार्ट नहीं था,सनातन दो साल का ही हुआ था कि अर्जिता गुप्ता के पति एक सड़क दुर्घटना में चल बसे,अब अर्जिता के ऊपर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा,जैसे तैसे अर्जिता ने घर पर ट्यूशन्स पढ़ाकर अपनी आगें की पढ़ाई पूरी की,साथ साथ उन्होंने सनातन को भी सम्भाला,अपनी मेहनत के बलबूते पर उन्होंने वो मकाम हासिल किया जो वो करना चाहती थी लेकिन पति के बिना उनकी हर खुशी अधूरी थी,
कई लोगों ने उनसे शादी की इच्छा व्यक्त की लेकिन उन्होंने ये कहकर इनकार कर दिया कि वो अब केवल अपनी सारी जिन्दगी अपने बेटे के लिए जीना चाहती हैं,अगर उनकी जिन्दगी में पति का सुख होता तो उनके पति की मृत्यु ही क्यों होती,इतने संघर्षों के बाद अब धीरे धीरे उनकी हिम्मत जवाब देने लगी थी इसलिए वें अब सनातन को नहीं सम्भाल पातीं थीँ,सनातन अब पच्चीस साल का हो चुका था लेकिन अभी भी उसकी हरकतेँ चौदह साल के बच्चे की तरह ही थी,उसे खेलने के लिए कोई ना कोई चाहिए होता था,इसलिए उसकी देखभाल के लिए अर्जिता ने एक विधवा नौकरानी को रख लिया था,जिसका नाम गंगा था,उसकी उम्र यही कोई बीस-बाइस साल होगी,उसके विधवा हो जाने पर उसके ससुराल वालों ने भी अपने घर से निकाल दिया था,माँ बाप ने भी आसरा ना दिया लेकिन अर्जिता ने उसे अपने घर में सिर छुपाने की जगह दे दी,
अब जब गंगा हर वक्त सनातन के साथ रहने लगी तो सनातन को तो जैसे गंगा की आदत पड़ गई,अर्जिता भी ये देखकर खुश होती,क्योंकि उसे भी अब सनातन की जिम्मेदारियों से छुटकारा मिल गया था,गंगा सनातन को खिलाती पिलाती और उसके साथ खेलती,अर्जिता अब घर की जिम्मेदारियों से बिल्कुल मुक्त होना चाहती थी वो काम करते करते थक चुकी थी,वो अब आराम करना चाहती थी इसलिए उसने खाना पकाने के लिए गीता को रख लिया था,गीता भी उस घर में काम करके बहुत खुश थी,क्योंकि अर्जिता बिल्कुल भी कुड़कुड़ करने वाली महिला नहीं थीं,वो गीता से कहती रोज नए नए नए ब्यंजन बना खुद भी खा और मुझे भी खिला,गीता रोजाना कुछ नया बनाकर उन्हें खिलाती,जिन्दगी ऐसे ही चल रही थी.......
तभी एक इतवार को जब गीता रसोईघर में कुछ पकाकर रही थी तो गंगा चक्कर खाकर गिर पड़ी,गीता ने रसोईघर की खिड़की से देखा तो गंगा जमीन पर पड़ी थी,गीता रसोई का काम छोड़कर बाहर आई और अर्जिता को आवाज लगाई....
मेमसाब!देखिए ना गंगा को क्या हो गया?बेहोश होकर गिर पड़ी है....
अर्जिता अपने कमरें से भागकर आई और उसने फौरन ही गीता से पानी लाने को कहा,गीता भागकर पानी लाई और अर्जिता ने कुछ बूँदें गंगा के चेहरे पर छिड़की,गंगा को होश आ गया,लेकिन अर्जिता ने सोचा डाक्टर को बुला ही लेती हूँ,टेलीफोन करके अर्जिता ने डाक्टर को बुलाया,डाक्टर आई और उसने गंगा की जाँच करने के बाद कहा कि वो तो माँ बनने वाली है.....
ये सुनकर अर्जिता के तो जैसें होश ही उड़ गए,गंगा विधवा थी और इतने महीनों से उसके घर में ही रह रही थीं,घर में पुरूष के नाम पर दो ही पुरूष थे ,एक बूढ़ा माली हरिया और उसका ड्राइवर चमन,जो कि रात को उसके घर रुकते ही नहीं है,हरिया माली का ये बच्चा हो नहीं सकता क्योंकि वो ऐसी हरकत नहीं करेगा,रह गया चमन तो उसके तो बीवी बच्चे हैं और वो कई सालों से मेरे घर पर ड्राइवर है,उसके बारें में कभी कुछ भी उल्टा सीधा सुनने में नहीं आया तो क्या गंगा का बाहर कहीं किसी पुरूष के साथ चक्कर है,ये तो गंगा ही बता सकती है कि इस बच्चे का बाप कौन है?और इसी उधेड़बुन में अर्जिता का पूरा इतवार निकल गया,
मन तो गीता का भी खराब था,वो दोपहर में घर गई थी और उसने अपनी माँ कावेरी से गंगा की बात बताई तो कावेरी भी असमंजस में पड़कर बोली...
हो सकता है गंगा का बाहर किसी पुरूष के साथ सम्बन्ध हो।।
लेकिन माँ !वो कभी भी बाहर निकलती ही नहीं,गीता बोली।।
तो फिर भगवान जाने या फिर गंगा जाने,कावेरी बोली।।
हाँ!माँ!लेकिन मेमसाब बहुत परेशान थी,गीता बोली।।
वो तो होगीं हीं,अब शायद ही वो अपने घर में गंगा को रखें,कावेरी बोली।।
हाँ!उनको देखकर लग रहा था कि वें अब गंगा को घर से निकाल देगीं,गीता बोली।।
रहने दे तू मत पड़ किसी के पचड़े में ,कावेरी बोली।।
ठीक है माँ!गीता बोली।।
और दोनों के बीच ऐसे ही बातें चलतीं रहीं...
शाम होने को थी,अब अर्जिता ने मन बना लिया था कि वो गंगा से खुलकर पूछेगी कि आखिर ये बच्चा किसका है,गीता भी रसोईघर में रात का खाना बना रही थी,मन तो उसका भी खराब था,गंगा की इस हरकत पर,अर्जिता ने गंगा और गीता को अपने कमरें में बुलाया और गंगा से पूछा....
अब बताओ कि ये बच्चा किसका है?
मैं नहीं बता सकती मेमसाब!गंगा बोली।।
देखने से तो तुम बड़ी भोली लगती हो,लेकिन ऐसा काम करोगी ,ये ना सोचा था मैनें,अर्जिता बोली।।
आप कुछ भी कह लें लेकिन मैं आपको उसका नाम नहीं बताऊँगी,गंगा बोली।।
तो फिर निकल मेरे घर से,अर्जिता बोली।।
और गंगा कुछ ना बोली बस चुपचाप बिना कोई सामान लिए घर से निकल गई...

क्रमशः.....
सरोज वर्मा....