करोड़ों-करोड़ों बिजलियां - 11 S Bhagyam Sharma द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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करोड़ों-करोड़ों बिजलियां - 11

अध्याय 11

वैगई, आदित्य और अर्चना के साथ वाणी नर्सिंग होम में पहुंची, चीफ डॉक्टर आई.सी.यू. के अंदर थे।

"सिस्टर…………..अभी इलम चेरियन की हालत कैसी है ?"

"सुबह से चार-पांच बार खून की उल्टी हो गई। तुरंत खून देकर देखा। शरीर ने उसे नहीं स्वीकारा। पल्स रेट भी ठीक नहीं। ब्लड प्रेशर भी स्थिर नहीं है।

फिर से आई. सी. यू. में जाने की नौबत आ गई। चीफ डॉक्टर थोड़ी देर में बाहर आने वाले हैं पूछ लीजिएगा।"

तीनों लोग आई.सी.यू. के बाहर नारंगी रंग की पॉलीमर कुर्सियों में उदास चेहरा लिए बैठे हुए थे। आदित्य अपने माथे को रगड़ कर गुस्से से गुर्राया।

"गलती कर दी वैगई ! तमिलनाडु में नंबर वन अस्पताल है अपना हंसा अस्पताल। उस अस्पताल की आप असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर हो। आप जो भी काम करें, उसमेंसमझदारी होती है मैं देख रहाहूं................ऐसे में आपको इलंम चेरियन को ट्रीटमेंट के लिए अपने अस्पताल में ही लेकर आना था आपको क्यों नहीं सूझा?"

"उन्होंने कह दिया तो वह वेद वाक्य हो गया क्या ? सॉरी मिस वैगई आई कुड नाइट कंट्रोल माई फीलिंग्स__आपके मामले में मैं कुछ ज्यादा ही इंटरैस्ट ले रहा हूं ऐसा आपको नहीं सोचना चाहिए।"

वैगई के जवाब देने से पहले उसका सेल फोन बज उठा। उसने कान पर लगाया। दूसरी तरफ से उसकी बहन यमुना बात कर रही थी।

"अक्का----कांग्रेचुलेशन"

"कांग्रेचुलेशन---किसलिए ?"

"तुम्हें अवार्ड मिला है।"

"अवार्ड?"

"हां अक्का----लड़कियों के लिए महिला उन्नति अवार्ड है सन टीवी में अभी-अभी बताया। हम चैनल बदल रहे थे तो उसी समय आपकी फोटो आई और आपके बारे में बताया और ये अवार्ड आपको मिला है 'मन के अंदर वर्षा 'काउंसलिंग के द्वारा हजारों लोगों को आत्महत्या करने से बचाया और उनके जीवन में एक नया उत्साह उत्पन्न कर आगे बढ़ने को प्रेरित किया इसीलिए यह अवार्ड मिला। सिर्फ अवार्ड ही नहीं अक्का 10 लाख रुपए भी इनाम मिलेगा---"

"-----"

"अपनी गली वाले सारे लोग बहुत खुश हो रहे हैं !"

"----"

"क्या बात है अक्का मैं तो बातें करती जा रही हूं तुम्हारे पास से कोई खुशी का सिग्नल भी नहीं आया।"

"घर आने के बाद बात करेंगे----"धीमी आवाज में कह कर, सेल फोन को वैगई ने बंद कर दिया। उसके चेहरे को देख रहे आदित्य ने पूछा।

"क्या हुआ वैगई---फोन पर कौन था ? कुछ अवार्ड के बारे में बोल रही थी-----किसको अवार्ड?"

इस मुश्किल की घड़ी में यह बात करना चाहिये या नहीं सोचते हुए फिर कुछ क्षण बाद वैगई ने अपने उदास चेहरे के साथ बता ही दिया।

"करेक्ट !"आदित्य बोला।

अर्चना ने भावनाओं के अतिरेक में आकर वैगई को जोर से गले लगाया। आदित्य को देखते हुए बोली।

"वैगई को यह अवार्ड दिलवाने के लिए ईलम चेरियन ने अपनी पत्रिका 'मैट्टिओचै' की तरफ से आखिर के समय में भी प्रयत्न किये ,उन्हीं के प्रयत्नों के कारण ही यह एवार्ड मिला है सर ।"

"इज इट ?"आदित्य के आश्चर्य दिखाते समय ही आई. सी. यू. का सफेद पेंट किया हुआ दरवाजा धीरे से खुला। 2 सहायक डॉक्टर के साथचीफ डॉक्टर बाहर आए। वैगई डॉक्टर को देखकर उनकी तरफ दौड़ी।

"डॉक्टर-- वे अब कैसे हैं ?"

"स---सॉरी मां--"

"डॉ डॉ---डॉक्टर-"

"सीवियर खून की उल्टी हुई, हम उन्हें बचा नहीं पाए। उनके प्राण गए 5 मिनट हो गये।"

वैगई की निगाहें एकदम से जम गईं।

वैगई की निगाहें जम गई। इस बात पर डायरी खत्म हुई। डायरी को पढ़ रही टीवी सीरियल तैयार करने वाली रेणुका देवी ने अपने सामने बैठे सीरियल डायरेक्टर मुल्ले वासन को देखा।

"आपको यह डायरी कहां मिली क्या बताया था ?"

"पुरानी पुस्तकों की दुकान में जाकर लक्ष्मीअम्मा के पुराने नॉवेल देख रहा था। पुस्तकों के बीच में यह डायरी मिली। पलट कर देखा 2 साल पहले की डायरी थी। डायरी के पहले पन्ने पर लिखे हुए वाक्य ने मन को छू लिया, तो घर लाकर उसे पढ़ कर देखा। डायरी में लिखी बातों ने मुझे बहुत ही इंप्रेस किया, तो मैंने सोचा इस डायरी को आप भी पढ़ कर देखें इसीलिए लेकर आया।"

रेणुका देवी डायरी के प्रथम पृष्ठ पर आई। हरे रंग के स्केच पेन से लिखे वाक्य पर उसकी निगाहें टिकी।

'उसका जीवन एक अंधेरा आकाश। उसमें करोड़ों-करोड़ों बिजलियां। अल्प आयु में बिजलियों से ज्यादा एक मिट्टी के दिए का प्रकाश ही निरंतर है उसने सोचा। उसकी सोच झूठी ! क्यों--- ? विधि को भी भगवान को समझा कर रखना चाहिए।'

"वेरी इंट्रेस्टिंग----इस डायरी में लिखी सच्ची बातों को रखकर एक 500 एपिसोड का मेगा सीरियल बना सकते हैं।"

"बना सकते हैं मैडम--- ! पर उसके पहले हमें वैगई से मिलना पड़ेगा---वैगई के किसी नजदीकी ने इस डायरी को लिखा है। 2 साल पहले की लिखी डायरी ही है पुरानी पुस्तकों को रद्दी में डालते समय यह भी आ गयी होगी। डायरी के बारे में वैगई से कुछ भी नहीं बताना है।"

"कब जाएं ?"

"अभी निकल सकते हैं मैडम।"

"ठीक है उससे क्या बातें करेंगे अभी ?"

"समाज की सेवा करने वाली एक लड़की के बारे में सीरियल बना रहे हैं। आप अपने अनुभव बताएं, तो हमें भी कुछ मदद मिलेगी ऐसा बोलेंगे। वैगई देखने में अच्छी नाक नक्शे वाली हो और उसका फेस फोटोजेनिक हो तो उसे सीरियल में रोल करने के लिए कह सकते हैं।"

"चलो।"

रेणुका देवी उठी।

अगले 1 घंटे में वे हंसा अस्पताल के स्वागत कक्ष में रेणुका और मुल्ले वासन दोनों थे।डी शेप वाली मेज के पीछे, बॉबकट वाली रिसेप्शनिस्ट से पूछा।

"मिस वैगई को मिल सकते हैं ?"

"वैगई ?"

"यस ।"

"डॉक्टर या स्टाफ ?"

"स्टाफ।"

"कौन सी सेक्शन में ?"

"अकाउंट सेक्शन में।"

"सॉरी ऐसा कोई इस सेक्शन में नहीं।"

मुल्ले वासन और रेणुका आश्चर्य से एक दूसरे को देखने लगे।

"एक डायरी में लिखा था उसे सच मानकर आना गलत रहा ?"

रेणुका देवी ने हिचकिचाते हुए रिसेप्शनिस्ट को देखा।

"अकाउंट सेक्शन में अर्चना नाम की कोई काम कर रही है क्या ?"

"सॉरी इस नाम के भी कोई नहीं है।"

रिसेप्शनिस्ट के बोलते समय वहां से गुजर रहे एक डॉक्टर ने तुरंत खड़े होकर, मुड़ कर देखा। फिर पास आकर पूछा "क्या नाम बताया अर्चना?"

"हां "

"उस लड़की को अपने काम से इस्तीफा दिये हुए डेढ़ साल से ज्यादा हो गया होगा ? ये नई रिसेप्शनिस्ट है इन्हें आए 2 महीना भी नहीं हुआ है। इसलिए इन्हें अर्चना के बारे में पता नहीं। इसे गलत मत समझो---!"

मुल्ले वासन ने पूछा "डॉक्टर उस अकाउंट सेक्शन में वैगई नाम की लड़की?"

"हां वह भी थी उसने 2 साल पहले ही नौकरी को रिजाइन कर दिया।"

"अब वे कहां रहती हैं क्या पता है डॉक्टर ?"

"सॉरी पता नहीं"।

"उनके घर का पता मिलेगा क्या ?"

"आप कौन हैं ?"

"हम टी.वी. के आदमी हैं । समाज सेवा को मध्य में रखकर एक टी.वी. सीरियल बनाने वाले हैं। उसके लिए वैगई से बात करनी है।"

"1 मिनट---"बोलकर डॉक्टर वहां के इंटर काम का उपयोग कर अस्पताल के किसी कोने में पर्सनल ऑफिसर से बात की।

"मिस्टर श्रीकांत---2 साल पहले, अपने अस्पताल में अकाउंट सेक्शन में काम करने वाली वैगई के घर का पता पुराने स्टाफ की फाइल देखकर बता सकते हैं ?"

"सॉरी डॉक्टर अभी वैगई पुराने पते पर नहीं है नया पता मालूम नहीं।"

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