भानगढ़ - 3 Anil Sainger द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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भानगढ़ - 3

सुबह से निकली धूप दोपहर तक अपने पूरे शबाब पर थी | अचानक हुए गर्म मौसम को देख यकीन नहीं हो पा रहा था कि अभी पिछले हफ्ते तक आधी बाँह के स्वेटर कि जरूरत पड़ रही थी | मौसम विभाग का जरूर कहना था कि अगले दो-तीन दिन मौसम सुहावना रहेगा | बारिश भी हो सकती है लेकिन सुबह से आसमान बिलकुल साफ़ था और बादलों का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान तक नहीं था |

अमन सुबह ही भानगढ़ के लिए निकल जाता है | वह रास्ते भर ये सोचता रहा कि जैसा उसे सपने में दिखा था वह असल में क्यों नहीं हुआ | सपना हमेशा सपना ही बन कर क्यों रह जाता है | लगभग सारे दोस्तों कि कोई न कोई गर्ल फ्रेंड है | एक मेरी ही नहीं है | किस्मत इतनी खराब है कि भूतनी तक का सपना सच नहीं होता | वह रास्ते भर अपने आप को और अपनी किस्मत को कोसता रहा | भानगढ़ पहुँचते-पहुँचते दोपहर के तीन बज जाते हैं | अमन का भूख से बुरा हाल था| वह कमरे में पहुँचते ही इण्टरकॉम उठा खाने का आर्डर कर बिस्तर पर लेट जाता है | लेटते ही उसकी आँख लग जाती है | वह अभी सोया ही था कि कमरे की बेल बज उठती है | वह उठ कर दरवाजा खोलता है | सामने होटल कर्मचारी को खाना लिए देख अमन खुश हो जाता है | वह कर्मचारी खाना रख जैसे ही जाने लगता है | अमन अपनी जेब से पचास का नोट निकाल कर्मचारी को थमाते हुए बोला “तुम्हारा नाम क्या है” ?

वह कर्मचारी हँसते हुए बोला “साहिब, कमल है” |

“अच्छा कमल, ये बताओ कि तुम यहाँ कब से काम कर रहे हो” |

“साब, मैं यहाँ पिछले तीन साल से काम कर रहा हूँ” |

अमन कुर्सी पर बैठते हुए बोला “इस समय ज्यादात्तर कमरे बंद हैं | ये खाली हैं कि.....” | कमल बीच में ही बात काटते हुए बोला “साहिब, अक्टूबर से अप्रैल तक तो यहाँ मुश्किल से ही कमरा खाली मिलता है | इस समय सिर्फ आपके साथ वाले दो कमरे खाली हैं | बाकि सब में लोग ठहरे हुए हैं” |

अमन मुस्कुराते हुए बोला “अच्छा जी | इसका मतलब मेरी तरह बहुत लोग किला देखने आते हैं” | “जी साहिब”, कह कर वह कर्मचारी दरवाजा बंद कर चला जाता है |

अमन लंच कर एक बार फिर सो जाता है | कमरे में लगी बेल की आवाज सुन अमन की नींद टूटती है | वह अलसाई आँखों से हाथ में बंधी घड़ी देखता है | रात के नौ बज रहे थे | ‘अबे यार, मैं इतनी देर सो गया | पता ही नहीं लगा | कमल रात के खाने के लिए जगाने आया होगा’, बुदबुदा कर वह दरवाजा खोलने के लिए चल देता है |

वह अंगड़ाई लेते हुए दरवाजा खोल कर बोला “हाँ, कमल क्या हुआ” | लेकिन जब वह कमल की जगह एक बेहद सुन्दर लड़की को सफ़ेद टॉप और नीली जीन्स पहने देखता है तो उसकी आँखें खुली की खुली रह जाती हैं |

उसे लगा जैसे सपने में आने वाली भूतनी आज सफेद साड़ी की जगह टॉप पहन कर आई है | उसकी शक्ल सपने में आने वाली भूतनी से बिलकुल मेल खा रही थी | यह सोच आते ही उसका पूरा शरीर काँप उठता है | वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही वह कमसिन लड़की हँसते हुए बोली “क्या हुआ अमन जी | आप तो ऐसे सकते में आ गये हैं जैसे आपने किसी भूत को देख लिया हो” |

अमन सकपकाते हुए बोला “आप.....” |

“अच्छा जी | मुझे इतनी जल्दी भूल गये | ऐसी उम्मीद न थी”, वह अदा से अपने बाल झटकते हुए बोली |

अमन डर से थरथराते हुए बोला “म....मैं...ने पहचाना नहीं” ?

वह लड़की हँसते हुए अमन के पास से निकल कमरे में घुसते हुए बोली “कमाल है, मुझे नहीं पहचाना ? अभी परसों ही तो मैं आपके सपने में आई थी”, कह कर वह एक बार फिर जोर से हँसती है | अमन हैरान-परेशान अभी भी दरवाजे पर खड़ा था | उसके हाव-भाव से लग रहा था जैसे वह कमरे से भागना चाहता हो | वह लड़की एक अदा से अमन को देख कुर्सी पर बैठते हुए बोली “अमन जी, घबराइये नहीं मैं समायरा हूँ | लगता है आपने ईशान का मेसेज नहीं पढ़ा और न ही मेरी फोटो देखी है” |

उसकी बात सुन अमन की जान में जान आती है | वह अपने माथे का पसीना पोंछ अंदर आते हुए बोला “आपने तो मेरी जान ही निकाल दी थी”, कह कर एक लम्बी साँस लेते हुए वह फिर बोला “यहाँ नेटवर्क बहुत कम आता है | लगता है टावर एक है और यूजर ज्यादा हैं | खैर, ईशान ने कब मेसज किया | आज सुबह तक तो नहीं किया था और आप कब आईं” ?

समायरा मुस्कुराते हुए बोली “एक साथ इतने प्रश्न ? खैर, हमारी कल बात हुई थी | मैं जब नॉएडा से निकली थी तब मैंने उसे बोला था कि भाई उसे मेसज तो कर दे | फोटो भेजने के लिए भी कहा था | यहाँ पहुँचते-पहुँचते मुझे शाम के सात बज गये थे | जनाब उस समय धुत्त सो रहे थे” |

अमन आश्वस्त हो समायरा के पास आकर बैठते हुए बोला “आपको कौन-सा कमरा मिला” | समायरा मुस्कुराते हुए बोली “आपके साथ वाला” |

अमन अपनी ख़ुशी छुपाते हुए बोला “अरे ! वाह | ये तो बहुत अच्छा है | आपसे बात करने का अच्छा मौका मिलेगा” |

समायरा उसकी बात सुनी अनसुनी कर कुर्सी से उठते हुए बोली “आप खाने का आर्डर करें | मैं जब तक तैयार हो कर आपको नीचे मिलती हूँ | जल्दी करियेगा | यहाँ से दस बजे के करीब निकलेंगे तभी घूमने का मौका अच्छा मिलेगा | ये राजस्थान है यहाँ रात को ठंड हो जाती है | इसलिए गर्म कपड़े पहन कर आना और हाँ टोर्च और रिकॉर्डिंग करने का सामान वगेरह साथ लेना मत भूलना” |

अमन मुस्कुराते हुए बोला “जी मैडम | वैसे आप कहाँ चल दीं | मैंने अभी खाना आर्डर नहीं किया है | अगर आप बुरा न माने तो आप भी यहीं इस नाचीज के साथ खाना खा लीजिये” | समायरा चलते हुए बोली “मैं खाना खा चुकी हूँ और मैंने अभी तो बोला कि मैं आपको दस बजे होटल के बाहर मिलती हूँ”, कह कर वह अमन को बिना देखे कमरे से बाहर निकल जाती है |

अमन खाना खाकर अपना बैग उठाते हुए घड़ी देखता है | दस बज चुके थे | वह जल्दी से कमरा बंद कर गैलरी से निकलते हुए देखता है कि सिर्फ उसके साथ के दो कमरों पर ही ताला लगा था | इसका मतलब बाकी सब में लोग ठहरे हुए हैं | लेकिन फिर भी चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है | यह सोचते हुए वह सीढ़ी की ओर चल देता है | उसे नीचे रिसेप्शन पर भी कोई दिखाई नहीं देता है | वह रिसेप्शन से बाहर निकल कर देखता है तो उसे होटल के गेट के पास सिक्यूरिटी गार्ड बैठा दिखता है | वह तेज क़दमों से उसके पास पहुँच बोला “क्या बात है भाई यहाँ चारों तरफ इतना सन्नाटा क्यों है | अभी तो सिर्फ दस ही बजे हैं” |

सिक्यूरिटी गार्ड अमन की बात सुन झूमते हुए खड़े हो सिर झुका कर बोला “साहिब, आप जरूर दिल्ली या मुंबई से आए हैं | साहिब ये राजस्थान है | यहाँ रात के नौ बजे दिल्ली के बारह बजे के बराबर होते हैं | वैसे भी ये होली वाला हफ्ता चल रहा है | इस हफ्ते में रूहानी ताकते बहुत बलशाली हो जाती हैं | इसीलिए सब रात का खाना खाकर जल्दी सो जाते हैं | लेकिन आप इस समय कहाँ जा रहे हैं” |

अमन गेट खोल बाहर निकलते हुए बोला “रूहानी ताकतों से मिलने जा रहा हूँ | खैर, ये बताओ कि मैडम को बाहर निकलते हुए देखा है कि नहीं” ?

सिक्यूरिटी गार्ड झूमते हुए बोला “नहीं साब यहाँ से कोई नहीं...” |

अमन बाहर देखता है तो उसे दूर समायरा खड़ी दिख जाती है | वह गार्ड की बात बीच में ही काटते हुए बोला “इतनी मत पीया करो | तुम्हारे पास से कोई निकल जाए तो भी तुम्हें पता नहीं लगता | तुम सिक्यूरिटी क्या खाक करोगे”, कह वह गार्ड की बात बिना सुने आगे बढ़ जाता है |

अमन तेजी से कदम बढ़ाते हुए समायरा की ओर चल देता है | कुछ दूर चल कर वह हांफने लगता है | झुक कर वह अपने घुटनों पर हाथ रख जोर-जोर से साँस लेने लगता है | अचानक उसकी नजर अपने पीछे पड़ती है | वह देख कर हैरान हो जाता है कि होटल से वह काफी आगे निकल आया है लेकिन उसके और समायरा की दूरी अभी भी कम नहीं हुई है |

वह वहीं सड़क पर पैर के बल बैठ जाता है | चाँद आसमान में पूरा खिला हुआ था इसलिए अँधेरी सड़क होने के बावजूद भी सब साफ़-साफ़ दिख रहा था | वह आसमान में देखते हुए बुदबुदाया ‘चाँद जिस हिसाब से दिख रहा है | उससे तो लगता है कि पूर्णिमा कल या परसों ही....’, वह अभी अपनी बात पूरी भी नही कर पाया था कि उसे समायरा की पास से आवाज सुनाई दी | वह बोल रही थी “हाँ, तुम सही सोच रहे हो | पूर्णिमा परसों थी” |

उसे अपने इतने करीब देख अमन एक बार फिर काँप उठता है | उसकी हालत देख समायरा मुस्कुराते हुए बोली “जनाब ये राजस्थान है | यहाँ जैसे दिन में खिली धूप में भ्रम हो जाता है कि दूर पानी है | वैसे ही रात को चाँद की रौशनी में ये भ्रम हो जाता है कि पास का आदमी दूर है” |

अमन हैरान होते हुए बोला “मैंने तो ऐसा कभी नहीं सुना” | समायरा जोर से हँसते हुए बोली “बहुत-सी बातें इन दो दिनों में तुम पहली बार सुनोगे | खैर, तेजी से कदम बढ़ाओ | हमें जल्दी पहुँच कर जल्दी वापिस आना है” | अमन तेजी से चलते हुए बोला “हाँ बात तो तुम सही कह रही हो | हमें कल दिन में भी तो यहाँ आना है” |

किले के पास पहुँच कर अमन ने देखा कि वहाँ कोई गार्ड नहीं खड़ा था और गेट भी हल्का-सा खुला हुआ था | समायरा बिना कुछ बोले सिकुड़ती हुई गेट से अंदर किले में घुस जाती है | अमन भी उसके पीछे-पीछे अंदर घुस जाता है | अंदर घुसते ही समायरा की चाल एक बार फिर तेज हो जाती है | अमन काफी कोशिश के बावजूद भी उसकी चाल से चाल मिला नहीं पा रहा था | उन दोनों की दूरी बढ़ती ही जा रही थी | कुछ ही देर में समायरा अमन की आँखों से ओझल हो जाती है |

अमन उखड़ती साँस पर काबू पाने के लिए अपनी चाल काफी धीमे कर लेता है | वह बार-बार अपनी आँखें मलते हुए समायरा को देखने की कोशिश करता है लेकिन उसे समायरा कहीं दिखाई नहीं देती है | समायरा जिस ओर गई थी वह धीमी चाल से उसी ओर बढ़ने लगता है | कुछ दूर चलने के बाद जैसे ही अमन को दूर खंडहर दिखते हैं | वह रुक कर बैग में से कैमरा और चुम्बकीय क्षेत्र को नापने का उपकरण निकाल कर समायरा को इधर-उधर देखते हुए आगे बढ़ने लगता है |

खंडहर के पास पहुँच उसे एक अजीब-सी बैचैनी महसूस होने लगती है | उसे महसूस होता है जैसे कोई उसके आस-पास चक्कर लगा रहा है लेकिन दिख नहीं रहा है | ऐसा महसूस होते ही वह जल्दी से चुम्बकीय तरंग नापने का यंत्र निकाल कर चालू करता है | आज पहली बार उसकी सुई में हलचल हो रही थी | जोकि यह दर्शा रही थी कि आसपास कुछ जरूर है | अचानक उसे दूर सफ़ेद दुपट्टा लहराते हुए दिखता है |

लहराते दुपट्टे को देख अमन की धड़कन एक बार तो रुक-सी जाती है | लेकिन जल्द ही वह अपने पर काबू पा कैमरा दोनों हाथों में ले धीमी चाल से आगे बढ़ने लगता है | वह जैसे-जैसे वह उस दिशा की ओर बढ़ रहा था | चुम्बकीय वेव बढ़ती जा रही थीं | यह देख उसके माथे पर पसीने की बूंदे उभर आई थीं | वह उस लहराते दुपट्टे से अब तीस-चालीस मीटर की दूरी पर ही था | वह मीटर गले में लटका कैमरा से फोटो लेने की सोच लेंस पर आँख लगा देखता है तो उसे सामने कुछ नहीं दिखता है | वह कैमरे से आँख से हटा कर देखता है | अब सचमुच वहाँ कोई लहराता दुपट्टा नहीं था |

अचानक उसकी नजर अपने दाई ओर पड़ती है तो वह एक बार फिर से काँप उठता है | वह लहराता दुपट्टा उसके बिलकुल साथ ही था | वह कुछ बोल पाता उससे पहले ही दुपट्टे के पीछे से जोर से हँसने की आवाज आती है | वह आवाज इतनी तेज थी कि उस सुनसान जगह में गूंज उठती है | अमन डर कर एक-दो कदम पीछे हो जाता है |

समायरा दुपट्टा हटाते हुए बोली “क्यों अमन जी निकल गई जान | तुम भूतनियों को देखना चाहते थे न | लो देख लो आज | मैं हूँ इस किले में रहने वाली भूतनी | मैं पिछले तीन सौ सालों से यहाँ रह रही हूँ” |

समायरा की आवाज कुछ बदली-बदली सी जरूर लग रही थी लेकिन फिर भी अमन के पास उस पर यकीन करने के इलावा कोई चारा नहीं था | वह हिम्मत जुटाते हुए बोला “अच्छा भूतनी जी आपको ये दुपट्टा कहाँ से मिला” |

समायरा हँसते हुए बोली “अरे यार, यहीं गिरा पड़ा था | मैंने सोचा चलो इस बहाने तुम्हारी हिम्मत का टेस्ट कर लेते हैं” | अमन जबरदस्ती थूक गटकते हुए बोला “लेकिन वेव तो बता रही हैं कि यहाँ कुछ है” | समायरा आगे बढ़ कर अमन के गले से वह उपकरण उतार कर चालू करते हुए बोली “कहाँ कुछ है देखो ये तो जीरो दिखा रहा है” | अमन हैरानी से देखते हुए बोला “लेकिन अभी तो...”, वह आगे कुछ बोल पाता इससे पहले ही समायरा उसे वह यंत्र थमा आगे की ओर बढ़ते हुए बोली “इन उपकरणों पर ज्यादा यकीन मत किया करो | तुम मेरे साथ आये हो तुम्हें यहाँ कुछ नहीं दिखेगा | जो भी होगा या दिखेगा वो कल दिखेगा” |

अमन कुछ बोल पाता कि कल क्यों आज क्यों नहीं | इससे पहले ही समायरा तेज कदम भरते हुए अमन से काफी दूर जा चुकी थी | अमन एक बार फिर उसे पकड़ने की कोशिश में तेज चाल से उसके पीछे-पीछे चल देता है | लेकिन समायरा की चाल धीरे-धीरे तेजी पकड़ती जा रही थी | कई बार अमन को लगा कि समायरा चलने की बजाय हवा में तैर रही है | लेकिन चाँद की रौशनी में कुछ भी यकीन से नहीं कहा जा सकता है | यही सोच वह आगे बढ़ता जा रहा था |

अमन ने कई बार समायरा को रुकने के लिए बोला लेकिन समायरा रुकने की बजाय हँसते हुए आगे ही आगे बढती जा रही थी | कुछ समय के बाद अमन तेज चाल की बजाय भागने लगा था लेकिन फिर भी वह समायरा के पास पहुँच नहीं पा रहा था | अचानक एक बार फिर समायरा उसकी आँखों से ओझल हो गई थी |

अमन पिछले दो घंटे में उसे ढूंढते-ढूंढते थक चुका था | अचानक उसकी नजर दूर किले के गेट पर पड़ती है | किले का गेट देख उसकी जान में जान आती है| समायरा गेट के पास खड़ी थी | वह अमन को इशारा कर गेट से बाहर निकल जाती है | अमन उसकी हरकत देख गुस्से से भर उठा था | वह धीमी चाल से गेट की ओर चल देता है |

किले से बाहर निकल कर होटल पहुँचने तक अमन को समायरा कहीं नहीं दिखती है | गार्ड धुत्त सो रहा था और गेट थोड़ा-सा खुला हुआ था | खुला गेट देख अमन समझ जाता है कि समायरा होटल पहुँच गई है | वह भी सिकुड़ते हुए गेट से निकल दबे पाँव निकल अपने कमरे की ओर चल देता है | वह अभी अपने कमरे के पास पहुँचा ही था कि समायरा अपने कमरे से बाहर निकल कर हँसते हुए बोली “जनाब तो बहुत धीरे-धीरे चलते हैं | देखो मैंने पहुँच कर कपड़े तक बदल लिए हैं और आप अब पहुँच रहे हैं” |

अमन को उसका व्यवहार कुछ ठीक नहीं लग रहा था | वह शांत भाव से बोला “कल बात करते हैं”, कह वह अपना कमरे का लॉक खोलने लगता है | समायरा हँसते हुए बोली “मैं अगर कल सुबह न मिली तो फिर आप किस से बात करेंगे” | अमन बिना कुछ बोले अंदर घुस दरवाजा बंद कर लेता है | अमन काफी थक चुका था | बिस्तर पर लेटते ही नींद उसे अपने आगोश में समा लेती है |