यासमीन - भाग 3 गायत्री शर्मा गुँजन द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

यासमीन - भाग 3

शबाना बेगम की हालत नाजुक जान पड़ रही थी कि नीमा ने हकीम को बुलाने को कहा तो यासमीन ने मना कर दिया !
अरे ये लड़की पागल हो गई है ये देखो इसकी अम्मी इसकी नजरो के सामने बेहोश पड़ी है और ये डॉक्टर को नहीं बुला रही। एक औरत ने कहा !
नीमा भी बोली ..." बेटी क्या हो गया ? तुम ऐसे क्यो बोल रही हो कि हकीम साहब को नहीं बुलाना !
यासमीन - ख़ाला जान ' कौन बेटी चाहेगी की उसकी अम्मी उसके सामने बेसुध सी पड़ी हो और वो जश्न मनाए । शायद कोई नहीं चाहता ।
आप जानती हैं हमारे घर मे 2 महीने से घर खर्च कैसे चल रहा है नहीं ना !
नीमा समझ गई और बोली तू फिक्र मत कर , जा जाकर मोहल्ले के गली नंबर 76 में हकीम जी रहते हैं उन्हें बुला ला । बोलना नीमा ख़ाला ने बुलाया है ।
यासमीन जाते जाते पीछे मुड़कर देखने लगी अचानक खयाल आया उसने पानी का गिलास उठाया और हल्के हाथों से अम्मी के चेहरे पर छींटे मारने लगी । यह प्रक्रिया औरतों ने भी आजमा लिया था पर कोई फायदा नहीं हुआ।
यासमीन को पता नहीं क्यो कुछ पॉजिटिव वाइब महसूस हुआ उसने उत्साह भरते हुए मिट्टी के तेल की डिबिया उठाई और उसमें कुछ तेल बचा था उसे हाथ मे लेकर अम्मी के तलवे और हाथों में मालिश करने लगी।
कुछ देर में बेगम शबाना को होश आया गया !
सारी औरतें हैरान थी यह कैसे किया यासमीन ने!
सचमुच इसके हाथों में तो जादू है !
अब हकीम साहब को बुलाना नहीं पड़ेगा ख़ाला ' यासमीन ने पूछा.!
नीमा - नहीं बेटी जब तू है तो फिक्र किस बात की ! मत जा !
औरतें बुदबुदाती हुई .." भला मिट्टी के तेल से भी होश आता है ? जाने कैसे किया इस लड़की ने मेरा तो दिमाग घूम गया।
इतनी छोटी सी उम्र और हमसे भी आगे ।
एक औरत ने कहा हां' और पढ़ने में भी होशियार है यासमीन !
दूसरी ने कहा..' बिचारी की किस्मत देखो कैसे रुठ गई है फिर भी लड़की में हौंसला है ।
शाम को किसी की चिट्ठी आती है नाम नहीं लिखा होता ! किसकी चिट्ठी है ...." शबाना ने बोला ! देख तो बेटी मैं चल नहीं सकती !
किन्तु शबाना बेगम की आवाज और शरीर का मूमेंट कुछ बेहतर था। पहले की अपेक्षा वह ठीक हो रही थी। ।
औरते अपने अपने घरों को चली जाती है , नीमा भी अपने घर चली गई।
यासमीन ने चिट्टी पढ़ी जिसमे लिखा था ........" आपके खाते में 1200 रुपये भेजा गया है " बेझिझक उनका उपयोग करना । और किसी चीज की कमी हो तो एक बार आंखे बंद करके 6 बार बोलना ...." जू जू जू जू जू जू
और आपके खाते में फिर से रुपये आ जाएंगे ।
चिट्ठी पलटा तो किसी का नाम नहीं था सिर्फ लिखा था जू जू जू जू जू जू ....!
अजीब सी चिट्ठी है ये ।किसने लिखा होगा और क्यों?
किसी ने मजाक तो नहीं किया !
गरीब हैं लेकिन लालची नहीं !
आखिर ये सब कौन कर सकता है इतनी मेहरबानी करनी थी तो नाम बताता ।
अम्मी ने आवाज लगाई ....बेटी किसकी चिट्ठी थी तूने पढ़कर सुनाया नहीं । कोई डरने की बात तो नहीं है ? मेरा दिल बैठा जा रहा है और इतने में यासमीन की नींद खुल जाती है ।
वह इधर उधर देखती है अम्मी सो रही होती हैं और यासमीन खुद पर हंसने लग जाती है कितना मजाकिया सपना था ये काश सच होता.... और 6 बार बोली जू जू जू जू जू जू ....!!
और मुस्कुराते हुए घर कर काम मे जुट गई ।
उसे मालूम था ख्वाब और हकीकत में अंतर! इसलिए वह मोहल्ले की सभी लड़कियों से बिल्कुल अलग थी ।

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Swarnim Pandey

Swarnim Pandey 3 महीना पहले

कैप्टन धरणीधर

कैप्टन धरणीधर मातृभारती सत्यापित 4 महीना पहले

भावनात्मक रूप व कर्तव्यबोध

वात्सल्य

वात्सल्य मातृभारती सत्यापित 4 महीना पहले