संस्कृतियो  का अनोखा मिलन - 6 Akshika Aggarwal द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

संस्कृतियो  का अनोखा मिलन - 6


माहौल में तनाव था। भूपेंद्र सिंह सब जानकर दुखी थे। सुलेखा के पिता राजा भीम चौहान को लग रहा था कि उन्हें यहां बुलाकर बेइज्ज़त किया गया है। वह गुस्से में भूपेंद्र सिंह को घूर रहे थे। वह बोले, " तुम्हें सब पता था फिर भी तुमने हमें धोखा दिया यह ठीक नहीं किया। याद रखना अब तुम रजवाड़ों में कहीं इज्ज़त नहीं पाओगे।"
जब वह चिल्ला रहे थे तब सुलेखा ऊपर से नीचे उतर कर आई। उसे देखकर राजा भीम चौहान बोले, "चलो बेटी अब यहाँ कोई सगाई नहीं होगी। तुम्हें नही पता कितना बड़ा धोखा हुआ हमारे साथ।"
सुलेखा बोली, "मुझे सब पता है पिता जी मैने खत में सब पढ़ लिया है।"
उसकी बात सुनकर सबको आश्चर्य हुआ। रोनक अचंभित होकर बोला "कौन सा खत?"
सुलेखा बोली "जब तुम नीचे आये तो मैं भी नीचे आ रही थी। तभी मेरे लहँगे का एक सिरा तुम्हारी कमरे मे पड़ी जो टेबल में लगी कील में अटक गया। जैसे ही मैं उसे निकाल ने के लिए झुकी तो मेरी नजर ऐमिली के इस खत पर पड़ी। मैंने उसे पढ़ लिया। वह तुमसे सच्चा प्यार करती है। मैं किसी और के प्यार को छीन कर खुश नहीं हो सकती। " इतना बोलकर उसने ख़त रोनक को पकड़ा दिया। सुलेखा अपने पिता को लेकर चली गयी। रोनक एमिली का खत पढ़ने लगा।
सब मेहमानों ने राजा भूपेंद्र सिंह की जग हँसाई की और चले गए। अब घर मे बस रोनक ऐमिली के माता पिता, ऐमिली के माता पिता और तीन नौकर ही मौजूद थे।
राजा इस बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नही कर पाए वो आग बबूला होकर" बोले यह जग हँसाई ये बेइज़्ज़ती मैं नही सह सकता हमारे वंश में किसी ने हमारे सिद्धान्तों की हमारी संस्कृति हमारी परम्परा की खिली इस तरह नही उड़वाई हमे शर्म आती है अपना बेटा कहते हुए हम तुम्हे राज्य से निकलते है, हम तुम्हें बेदखल करते है।" रोनक की माँ फूट फूट कर रोने लगी। वह बोली " ईश्वर के लिए ऐसा मत कीजिये , रोनक हमारा एक मात्र बेटा है, हमारा सहारा है हम इसके बिना नही जी पाएंगे, हमारे लिये इसकी खुशी ही सब कुछ है। ऐमिली भी बहुत अच्छी और साफ़ दिल की लड़की है बड़ी संवेदनशीलता और निर्स्वार्थ भाव से उसने हमारी सेवा की हैं। यह साँसे भी तो उसकी ही देन है। याद है ना आपको?" रोनक रोते रोते अपने पिता के चरणों में गिर गया। ऐमिली के पिता ज्यादा हिंदी तो नही समझ पाए पर रोनक की माँ के हाव भाव से इतना समझ जरूर गये थे कि रोनक की माँ का दिल ऐमिली को स्वीकार कर चुका है वह उसे अपनी बहू बनाने के लिए तयार है। वह भी बोले" The real meaning of love is sacrifice and dedication, it includes caste, religion, Richness, poverty, tradition, culture, color distinction does not matter anything, if it matters, then only two loving hearts and the love in it. Emily is deeply in love with Ronak. A lot has changed for him too. For us, the happiness of children matters only. We have accepted Ronak. you too accept Emily."
इन सारी बातों ने असर किया। राजा भूपेंद्र सिंह का दिल पसीजने लगा। पत्थर दिल मोम बन रहा था। उनकी आंखों से रूढ़ि वादी सोच की पट्टी हट रही थी। उन्होने रोनक को उठाया गले से लगाकर कहा, "मुझे समझ आ गया कि प्यार से बढ़कर कुछ नहीं है। एमिली ने हमारे लिए अपने प्यार का त्याग करना स्वीकार कर लिया। तुम उसे ढूंढ़कर ले आओ।"
रोनक ने कहा, "उसने खत में लिखा है कि वह अमेरिका चली गई है।"
भूपेंद्र सिंह बोले "तुम अमेरिका की पहली फ्लाइट की टिकेट बुक करो हम अपनी कुलवधू को लेने जा रहे है।" रोनक खुशी से फूल की तरह खिल गया। फिर क्या था श्याम ने गाड़ी निकाली और एयरपोर्ट पहुँच गए रोनक के लिए यह पल बहुत खास था वह अमेरिका पहुंचने का इंतजार नही कर पा रहा था। उसने ऐमिली को फ़ोन लगाया घंटी बजी पर ऐमिली ने फ़ोन नही उठाया उसने सोचा कोई बात नही वो एमिली को सरप्राइज देगा पर जब वह पल पल के इंतजार के बाद ऐमिली घर पहुंचा तो सबके पैरो तले जमीन निकल गयीं। ऐमिली के घर पर ताला लगा हुआ था । उसे लगा वह शायद बाहर गयी है उसने और बाकी सबने बहुत इंतज़ार किया ऐमिली को ऐमिली के दोस्तों को फ़ोन लगातार फ़ोन लगाया पर ऐमिली का कहीं पता नही लगा। रोनक ने इधर उधर जा कर ढूंढा चर्च में क्लब में ऐमिली के ऑफिस में वो कही भी ना मिली। हताष होकर रोनक और रोनक के घर वाले वापिस भारत आ गए रोनक टूट चुका था बिखर गया था उसे अपनी जिंदगी बेईमानी लगने लगी थी। सब लोग उसे संभाल ने की कोशिश करते पर वह नही सम्भल पाया। दिन ऐसे ही बीत रहे थे अब वो थोड़ा सँभलने लगा था। मां की हालत में सुधार अब वह वो पूजा पाठ कर बस रोनक की खुशी ही मांगती थी फिर रोनक को लगा की अब उसे मुम्बई वापस जा कर अपना काम सम्भालना चाहिए। वह अगले ही दिन मुम्बई पहुंच कर काम सम्भालने लगा। एक दिन रोनक काम की थकान मिटाने जूहु बीच पर बैठा ढलते हुआ सूरज को देकह रहा था उसकी नजर दूर लहरो से खेलती हुई एक लड़की पर पड़ी। उसे अपनी ऐमिली याद आ गई उसने पास जाकर देखा तो उसको अपनी आंखों पर विश्वास नही उसे लगा वह सपना देख रहा है। उसने अपने आप को चूंटी काटी तब उसे यकीन हुआ कि उसके सामने कोई और लड़की नही ऐमिली खड़ी है। वो खुशी से उछल पड़ा उसने ऐमिली को गले लगाया और उसे सारी बात बताई। उसने ऐमिली से पूछा कि वो अमेरिका क्यों नही गई। ऐमिली ने बताया कि जब वह अमेरिका के लिए निकली तो बहोत कोशिशो के बाद भी फ्लाइट में नही बैठ पाई रोनक का प्यार और यहां की संस्कृति ने उसे जाने नही दिया। वह छोड़ कर जा नहीं पाई। वह उसे उसके पिता से दूर नही करना चाहती थी। इसलिए हमेशा के लिए मुम्बई की हो गयी।
रौनक ने उसे सारी बात बताई। वह बोला, "मेरे और तुम्हारे माता पिता हमारी शादी के लिए तैयार हो गए थे। हम लोग तो तुम्हें लेने अमेरिका तक गए थे। पर तुम मिली नहीं। मैं तो निराश हो गया था। आज तुमको देखकर खुशी से पागल हूं।"
जूहु बीच एक बार फिर उसकी प्रेम कहानी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू हुआ। उसने फौरन अपने पिता को सारी बात बताई। उन्हें अपने घर वापिस आने की खबर दी।
फिर से माहेश्वरी मेंशन में जान आ गई। उन दोनो के आने की तैयारी जोर शोरो से हो हो रही थी जैसे ही वो जयपुर पहुंच के मेंशन में गाड़ी से उतरे की नटवर काका हर्ष और उल्लास से बोले,
"कुँवर सा आ गए हैं साथ मे ऐमिली बेटियां को भी लाये है।"
एमिली और रोनक की शादी धूम धाम से हो गई।

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