छल - Story of love and betrayal - 7 Sarvesh Saxena द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

छल - Story of love and betrayal - 7

पुलिस जबरदस्ती प्रेरित को श्मशान ले आती है, जहां स्वप्निल प्रेरित को देखकर उसकी और दौड़ता है लेकिन पुलिस उसे रोक लेती हैं, वो बहुत गुस्से में था, कई बार उसने कोशिश की प्रेरित के पास आने की, उसकी आंखों में बदले की आग भड़कती दिख रही थी पर वह प्रेरित के पास नहीं जा पाया और कुशल ने स्वप्निल को पकड़ लिया |
नीतेश के बाद कुशल ही था जो प्रेरित का सबसे वफादार इंप्लॉय था, और प्रेरित का अच्छा दोस्त भी ।

प्रेरणा के अंतिम संस्कार की रस्म शुरू हो गई थी तभी पास खड़े कुशल ने कहा,
" मैडम आपको बहुत प्यार करती थीं, क्यूँ किया आपने ऐसा" |

पंडित जी ने प्रेरित को चिता मे आग लगाने को कहा लेकिन प्रेरित ने साफ़ इन्कार कर दिया, उसने आखरी बार प्रेरणा का ढका हुआ चेहरा तक देखना नहीं चाहा और चुपचाप वहां बैठा खुश होता रहा फिर कुशल ने स्वप्निल से प्रेरणा की चिता को आग दिलवाई ।


प्रेरणा के अंतिम संस्कार के बाद प्रेरित बिल्कुल शांत पहले जैसा रहता था, ऐसा लगता कि नितेश, प्रेरणा और अपने चाचा को मारकर उसकी बदले की आग बुझ गई थी, सबूतों के और प्रेरित के खुद जुर्म कबूल करने के आधार पर उस पर तीन हत्याओं का केस चला जिसमें उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई|

जज साहब ने प्रेरित से पूछा, " आपको अपनी सफाई मे कुछ कहना है"?

प्रेरित ने जज को देखकर कहा, "थैंक्स जज साहब" |

अब लोग उसको देख कर डर रहे थे, जो लोग उसकी कल तक इज्जत करते, सर झुकाते, वो उसे तरह-तरह की गालियां देते, लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था इतना बड़ा आदमी अच्छा भला परिवार और बिजनस और न जाने क्या हो गया इस आदमी को |

अब प्रेरित जेल की सलाखों के पीछे था, उसे अपने किए पर कोई अफसोस नहीं था और ना ही कोई पछतावा | प्रेरित इतना बड़ा आदमी था कि उसे हर कोई जानता था इसलिए जेल के अंदर पुलिस और कैदी उससे ज्यादा दुर्व्यवहार नहीं करते | जेल के जिस कमरे में प्रेरित को रखा गया उसमें एक कैदी पहले से था|

उसके जाते ही वह उसे पहचान कर बोला,

"क्या साब, आप इधर? पूरा मुंबई में जगह कम पड़ गया जो आप इधर रहने को आया" |
ये सुनकर प्रेरित कुछ नहीं बोला |

"साब.. अपन भैरव सिंह, एक मामूली ड्राइवर, क्या हुआ साब कुछ तो बोलिए"?

प्रेरित ने कोई जवाब नहीं दिया |

तीन महीने तक प्रेरित जेल में ऐसे रहता रहा जैसे वो है ही नहीं, बिल्कुल शांत.. पर अब प्रेरित को धीरे-धीरे अपने किए पर पछतावा हो रहा था, उसे रोज अपने बीते दिनों की याद आती, प्रेरणा की याद तो उसके दिल से कभी जाती ही नही थी, और अब उसके दिल में उसके लिए नफरत भी खत्म हो चुकी थी, वो सोचता रहता की शायद उसने ही प्रेरणा को समय नहीं दिया इसलिए वो…...। उसे अपने चाचा रंजन की भी बहुत याद आती और वो मन ही मन सोचता , जो भी हो वो थे तो उसके पिता, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था यही सोच कर वह रातों रात जागता रहता था |


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Parash Dhulia

Parash Dhulia 4 महीना पहले

Indu Talati

Indu Talati 5 महीना पहले

Ina Shah

Ina Shah 6 महीना पहले

Rajesh Maheshwari

Rajesh Maheshwari मातृभारती सत्यापित 6 महीना पहले

Mamta Kanwar

Mamta Kanwar 6 महीना पहले