लड़खड़ाते कदम Rama Sharma Manavi द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

लड़खड़ाते कदम

  युवा कदम अक्सर लड़खड़ा जाते हैं, अगर सही समय पर उन्हें न सम्हाला जाय तो वे विनाश के कगार पर पहुंच जाते हैं।इस उम्र में वे कई बार प्यार और आकर्षण में फ़र्क नहीं समझ पाते।यह कथित प्यार उनकी आँखों को इस कदर अंधा कर देता है कि न तो वे यह समझ पाते हैं कि सामने वाला उन्हें सिर्फ़ इस्तेमाल कर रहा है और अगर मान भी लिया जाय कि दूसरा व्यक्ति भी गम्भीर है तो भी इस तरह के बेमेल रिश्तों का कोई भविष्य नहीं होता है।

   मयंक एक 23 वर्षीय अच्छी शक्ल-सूरत का युवक है, उसने अभी इंजीनियरिंग कम्प्लीट किया है।वह पढ़ने में सामान्य ही था,इसलिए अपने शहर के ही एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में उसने एडमिशन ले लिया था।जब वह चौथे वर्ष में था,तभी  कोरोना ने पूरे विश्व में आतंक का साम्राज्य फैला दिया था।फ़ाइनल ईयर ऑन लाईन ही कम्प्लीट हो गया।कोरोना आपदा के कारण नौकरियों की वैसे ही अत्यधिक कमी हो गई, पुराने लोगों में ही काफी लोग बेरोजगार हो गए तो नए उसपर भी सामान्य ग्रेजुएट्स के लिए जॉब मिलना कतई आसान नहीं था।अच्छे उच्च शिक्षित युवा जोमैटो,स्विगी या कुरियर ब्वॉय बन गए कि कम से कम अपना जेबखर्च तो निकाल सकें।

   मयंक ने ट्यूशन पढ़ाना प्रारम्भ कर दिया।7-8 बच्चे घर पर आकर पढ़ने लगे।इनमें से एक बच्चे के पड़ोस में एक परिवार रहता है, जिसमें पति,पत्नी एवं दो छोटे बच्चे हैं,10 वर्ष का बेटा एवं छः साल की बेटी।वे अपने बच्चों को अपने घर पर ही ट्यूशन दिलवाना चाहते थे।उन्होंने मयंक से घर पर पढ़ाने की प्रार्थना की किंतु पहले मयंक ने मना कर दिया, लेकिन काफी रिक्वेस्ट पर पढ़ाना स्वीकार कर लिया।

   बच्चों के पिता किसी सरकारी बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे, वे निकट के किसी छोटे कस्बे में फिलहाल पोस्टेड थे,प्रतिदिन आते-जाते थे।बच्चों की माँ कनिका एक सुंदर महिला थी,उसे जो भी देखता एक बार उसकी खूबसूरती की तारीफ मन ही मन अवश्य करता।वहीं पति शक्ल-सूरत से अत्यधिक साधारण व्यक्तित्व का था।हमारे समाज में सरकारी नौकरी की महत्ता इतनी अधिक है,उसी के कारण वह एक खूबसूरत पत्नी का हक़दार बन गया।

   मयंक शाम के तीन से चार के बीच में पढ़ाता था।एक माह में ही कनिका एवं बच्चे उससे खूब घुल-मिल गए।ट्यूशन के पश्चात कनिका बच्चों को खेलने भेज देती।कनिका मयंक के लिए रोज गर्म नाश्ता-चाय पेश करती,इस बीच वह मयंक से बड़ी अदा से अपने खुले बालों को झटकते हुए बातें करती रहती थी,होठों के एक कोने को दांतों से दबाकर उसके मुस्कराने पर मयंक की आँखे पलक झपकाना ही भूल जाती।कुछ समय बाद कनिका अक्सर  नाश्ते की प्लेट थमाते हुए अपनी नाज़ुक उंगलियों से मयंक की उंगलियों को दबाते हुए शरारत से मुस्कुरा देती।उसकी इस हरकत से मयंक के पूरे शरीर में मानो विद्युत तीव्र गति से प्रवाहित होने लगता।अब कनिका बेतकल्लुफी से मयंक के बिल्कुल करीब बैठती एवं बातें करते हुए कभी उसके कंधे पर सर टिका देती,कभी हाथों से बालों को सहला देती।

   एक युवा मन कबतक इस प्रत्यक्ष आमंत्रण को ठुकरा पाता, कबतक मोहिनी के आकर्षण से स्वयं को बचा पाता, शीघ्र ही मयंक उसके प्रेम सागर में आपादमस्तक डूब गया और अंततः एक दिन मर्यादा का बंधन भी टूट गया।जब आकर्षण में शरीर का भी समावेश हो जाता है तो वह नशे का रुख अख्तियार कर लेता है।मयंक ने अपने इस कथित इश्क़ का ज़िक्र अपने सबसे खास दोस्त अमन से किया।ऐसी बातें दोस्तों से राज नहीं रखी जा सकतीं।अमन ने मयंक को समझाने का बेतरह प्रयास किया कि अपने से 10-12 वर्ष बड़ी दो बच्चों की माँ से आशिकी सरासर बेवकूफी है,इसमें बर्बादी एवं बेइज्जती के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होने वाला।

   मयंक की दलील थी कि वह भी उससे बेइंतहा मुहब्बत करती है।उसका पति उसे शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है।अपने पति के साथ मजबूरी में बच्चों की खातिर रिश्ता निभा रही है, प्यार तो वह मुझसे ही करती है।

   अमन ने पूछा कि क्या वह अपने पति को तलाक देकर तुमसे विवाह करेगी?

   मयंक ने बड़े गर्व से कहा कि मैं उसकी एवं बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूँ।

   अमन ने सर धुनते हुए पूछा कि क्या उसने ऐसा कहा है या अपने आप सारी प्लानिंग कर ली।

   मयंक ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि मुझे उसके औऱ अपने प्यार पर पूर्ण विश्वास है।

   अमन समझ गया था कि मयंक कथित प्यार में पूर्णतया अंधा हो चुका है लेकिन वह अपने मित्र को इस तरह से बर्बादी के रास्ते पर जाता हुआ नहीं देख सकता था, इसलिए मयंक की बड़ी विवाहिता बहन अदिति से सारी बात बता दी।

   अदिति एक समझदार महिला थी,उसने समझ लिया था कि जोर-जबर्दस्ती से मयंक को नहीं रोका जा सकता है, इसलिए एक दिन अमन के साथ वह मयंक की अनुपस्थिति में कनिका से मिलने उसके घर गई।बिना लाग -लपेट के उसने अपना परिचय देते हुए कनिका से पूछा कि क्या तुम वाकई अपने बच्चों को छोड़कर मयंक से विवाह करने को तैयार हो?

   कनिका इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के लिए तैयार नहीं थी,वैसे भी वह इतनी बेवकूफ नहीं थी कि एक स्थापित सुख-सुविधा पूर्ण जीवन एक अस्थायी रोजगार वाले युवक के लिए त्याग देती।उसने अचकचाकर कहा कि मैं ऐसा नहीं कर सकती, वह तो मयंक ही मुझसे जबरन सम्बंध स्थापित करना चाहता था।

   अदिति ने सारी बातें रिकॉर्ड कर लिया,फिर कनिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह मयंक से दूरी बना ले,इसी में सबकी भलाई है, वरना उसके पति को सारी बात बता देगी।डरकर कनिका ने मयंक से रिश्ता तोड़ लिया।

   अदिति ने मयंक को रिकॉर्डिंग सुनाकर समझाया कि वह सिर्फ तुम्हारा इस्तेमाल कर रही थी।जो स्त्री अपने पति को धोखा दे सकती है,वह तुम्हारे साथ भला ईमानदार कैसे हो सकती है। मयंक दिल टूटने से कुछ समय तक सदमें में रहा।इसी मध्य मयंक को दूसरे शहर में जॉब मिल गया।धीरे-धीरे मयंक के लड़खड़ाते कदम सम्हल गए।

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santosh kumar

santosh kumar 5 महीना पहले

Rama Sharma Manavi

Rama Sharma Manavi मातृभारती सत्यापित 5 महीना पहले