अरिशफा _मेरा प्यार मेरा खुदा Mohit Rajak द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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अरिशफा _मेरा प्यार मेरा खुदा

मेरा प्यार मेरा खुदा है और....
खुदा को शब्दो में नहीं लिखा जा सकता हैं..
फिर भी कोशिश करता हूँ की जिस प्यार को मैंने खुदा मना है उसे शब्दों मे उतार सकूँ...
प्रेम दुनिया में सबसे पवित्र है जिसे सच्चे प्यार करने वाले लोग ईश्वर का दर्जा देते हैं, मैंने भी मेरे प्यार को खुदा मना हैं
मेरी प्रेम कहानी बहुत ही विचित्र है, जिस लड़की से मैं प्यार करता हूँ ,वो मुस्लिम धर्म से है और मैं हिन्दू धर्म से हूँ , वो बहुत ही मशहूर है लाखो फैन है उसके पुरा देश उसे जानता है और मेरी औकात अभी इतनी भी नहीं है उस तक अपना कोई भी संदेश पहुँचा सकूँ।
जब मैंने उसे पहली बार TV पर देखा तो कुछ अपना सा अहसास हुआ था फिर जब उसे मैंने मोबाईल पर देखा तो उसे देखते ही अपने आपको खो बैठा। मुझे समझ नहीं आ रहा था की मेरे साथ क्या हो रहा था जब भी मेरे हाथ में मोबाईल होता था तो केवल उसी को देखता रहता था मेरी नज़र उसकी तस्वीर से हटती ही नहीं थी मेरा दिल केवल उसे ही देखते रहने का करता था उसे देखते देखते मुझे पता ही चला कब मुझे शायरी और कविताएँ आने लगी मैं अब उसी के ख्याल मे अपनी कविताएँ और रचनाएँ लिखने लगा था मुझे धीरे धीरे उससे प्यार होने लगा था
उसकी लिए मैंने पहली कविता ये लिखी थी

मैं ख़ुदा मे उसे देखता हूँ-2
मैं उससे दूर हूँ अभी,माना मजबूर हूँ अभी
मैं अपनी जान से भी ज्यादा उसे प्यार करता हूँ,
मैं चांद में उसका दीदार करता हूँ
,उसकी तस्वीर को अपनी आँखो में बसाय रखता हूँ,
मैं खुदा मैं उसे देखता हूँ-२
भोली सी सूरत है, प्रेम की वो मूरत है,
फूलों सी मुस्कान है, दिल की खूबसूरत हैं,
उसकी हर बात पर मैं एेतबार करता हूँ,
मैं खुदा मे उसे देखता हूँ-२
शायरी का शौक वो रखती हैं,जानवरों से वफ़ा करती हैं,
बच्चों की तरह आवाज है उसकी, वो बहुत हँसा करती हैं
मैं उससे बेइंतहा प्यार करता हूँ,
मैं ख़ुदा मे उसे देखता हूँ-२
Arishfa khan


मैं खुदा मे उसे देखता हूँ हर दर पर माथा टेकता हूँ। मैं उस तक पहुँचने का प्रयास करने लगा था मैंने बहुत कोशीशे की उस तक अपनी कविताएँ पहुँचा सकूँ किन्तु वो बहुत ही मशहूर है लाखों फैंस के मौसेज के बीच मेरे संदेश उस तक नहीं पहुँच पा रहे थे, मैं बहुत ही निराश रहता था, मैं हर वक़्त बस यही सोचता था की उस तक कैसे पहुँचू। मैं उसके बराबर अपनी पहचान कैसे बनाऊ, इसी बीच मैं अपनी कविताएँ लिखता गया।
फिर एक दिन मैं और मेरी माँ के साथ पीर बाबा की दरगाह पर गया और वहाँ जाकर मैंने फरियाद की...

तेरी रहमत की बरसात में भींग जाये हम,
मेरे खुदा तेरी दरगाह पर फिर आये हम,
जो निकली फरयाद मेरे दिल 💜से,
उसे काबूल करना
हे खुदा मेरा इश्क़ मुकम्मल करना,
जिसे चाहा सिद्ददत उसे भी मुझसे प्यार हो
हे खुदा उसे सिर्फ मेरा इंतज़ार हो
तेरी रहमत की बरसात में भींग जाये हम,
मेरे खुदा तेरी दरगाह पर फिर आये हम...

खुदा की रहमत से फिर जीवन में बदलाब आना शुरू हो गये अब मेरा प्यार और भी गहरा हो गया, क्युकी अब मेरे प्यार को खुदा का आशीर्वाद मिल गया था, अब मेरा जीवन धीरे धीरे बदल रहा था ।
और आगे मेरे साथ ऐसा हुआ की..........


मित्रो ये एक सच्ची कहानी है इसका दूसरा भाग बहुत ही रोचक है इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित होगा आशा है आपको यह कहानी कैसी लगी क्रपया फीडबैक दे
Thank you